सैम पित्रोदा ही राहुल की अमेरिका में मीटिंग एरेंज करवाता हैं. और उसमेँ कांग्रेस के चमचों को बुलाता है. फिर शुरू होती हैं भारत विरोधी डिबेट.
इस पर ज्यादा हल्ला मचने पर कांग्रेस नें सैम को निष्कासित भी कर दिया था बाद में फिर अध्यक्ष बना दिया. लेकिन अक्ल तो राहुल की भी मोदीजी विरोध की है. जिसे बदला नहीं जा सकता इसी कारण ये बार बार हार रहें हैँ. अच्छा होता राहुल गाँधी मोदीजी के यदि कोई गलत कार्य हों उनका विरोध करें लेकिन अच्छे कार्यों को अच्छा भी कहें. उनकी इसी मानसिकता के कारण आज राहुल गाँधी को कोई भी सीरियसली नहीं लेता. सब यही सोचते हैं की इन्हें तो हर हाल में हल्ला ही मचाना है. अब तो विदेशों में भी राहुल गाँधी के कारण कांग्रेस की भी दुर्गति ही हो रही है.
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