रविवार, 1 मार्च 2026

अगर - मगर न होता तो

कांग्रेसी नेता राजीव शुक्ला ने कहा था कि नरेंद्र मोदी ''अगर '' प्रधानमंत्री नहीं होते तो अमेरिका उन्हें अपने यहां कभी नहीं बुलाता....!!

माननीय शुक्ला जी और कांग्रेसियों अब मैं तुम्हे इस   "अगर"   की कहानी सुनाता हूँ...

1)  अगर राहुल गांधी, सोनिया का बेटा नहीं होता तो आज किसी 0ffice में चपरासी होता...!!😂😂

2) अगर सोनिया राजीव की पत्नी नहीं होती तो यूरोप के किसी बार की रिटायर्ड बार बाला होती...!!😂😂

3) अगर राजीव , इंदिरा गांधी का बेटा नहीं होता तो एक ''पायलट'' ही रह कर दिन गुजारता...!!😂😂

4) अगर इंदिरा गांधी , नेहरू की बेटी न होती , तो एक सामान्य गृहिणी बनी रहती...!!😂😂
 5) अगर गांधी - नेहरू ने जिन्ना के साथ मिलकर सत्ता के लालच में भारत की जनता से गद्दारी न की होती आज अखंड भारत एक होता....!!. 😂😂

6) “अगर " नेहरू बेइमानी करके सरदार वल्लभ भाई पटेल की जगह प्रधानमंत्री नहीं बनता तो आज चीन इतना प्रभावी नही होता , और न ही पाकिस्तान का जन्म होता , न ही ये कश्मीर समस्या होती...!!😂😂

   7) और "अगर " ये कांग्रेस ही नहीं होती , तो फिर ये नकली गांधी परिवार भी नहीं होता. पूरा देश इन गद्दारों और घोटालेबाजों के चंगुल में फंसकर भाई-भतीजा वाद और साम्प्रदायिक हिंसा में बर्बाद न हुआ होता. बल्कि भारत विश्व के समस्त देशों का सरताज  होता...!!😂😂

   "राजीव शुक्ला जी...." 
“अगर " नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं होते तो अमेरिका के प्रमुख की आंखों में आंखें मिला कर बात करने वाला भारत का और कोई प्रधानमंत्री नहीं होता...!! 😂😂

जय हिन्द__जय भारत 🙏🏼🙏🏼

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

जतीन्द्र नाथ मुखर्जी / बाघा जतिन

उस दिन अगर वो गद्दारी न हुई होती... तो 1915 में ही हम आज़ाद हो गए होते और 'राष्ट्रपिता' ये व्यक्ति होता 👇!"
खून खौल उठता है यह सोचकर कि जिस शेर ने अकेले दम पर रॉयल बंगाल टाइगर के जबड़े फाड़ दिए थे, उसे हम हिंदुस्तानियों ने ही अकेला छोड़ दिया। हम 1947 की आज़ादी की सालगिरह मनाते हैं, लेकिन उस 10 सितंबर 1915 की उस काली दोपहर को भूल गए, जब एक महानायक का सपना अपनों की ही मुखबिरी की भेंट चढ़ गया।
आज दिल बहुत भारी है यह सोचकर कि हमारे देश का इतिहास कितना अलग होता, अगर उस दिन अपनों ने ही पीठ में छुरा न घोंपा होता। हम 1947 की आजादी का जश्न मनाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक शख्स ऐसा भी था जिसने 1915 में ही भारत को आजाद कराने का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया था।
​मैं बात कर रहा हूँ जतीन्द्रनाथ मुखर्जी की, जिन्हें दुनिया 'बाघा जतिन' के नाम से जानती है।

​सोचिए, वो कैसा फौलादी इंसान रहा होगा जिसने बिना किसी बंदूक के, सिर्फ एक छोटी सी खुखरी से रॉयल बंगाल टाइगर को ढेर कर दिया था। लेकिन उनका असली मुकाबला उन 'सफेद भेड़ियों' से था जिन्होंने हमारी मां भारती को जकड़ रखा था। जतिन दा का एक ही मंत्र था "देश के लिए मरना सीखो, ताकि देश जी सके।"
​मुझे उनकी वो बातें आज भी झकझोर देती हैं
​साहस का वो मंजर जब अंग्रेजों ने गाड़ी की छत पर बैठकर भारतीय महिलाओं का अपमान किया, तो जतिन दा अकेले उन पर टूट पड़े और तब तक मारा जब तक कि अंग्रेज पैरों में नहीं गिर गए। उस दौर में, जहाँ लोग अंग्रेजों के साये से डरते थे, जतिन दा उन्हें बीच सड़क पर पीट दिया करते थे।
​विवेकानंद का वो प्रभाव जो स्वामी जी ने उन्हें सिखाया था कि लोहे की मांसपेशियों में ही वज्र जैसा संकल्प रहता है। और जतिन दा ने उसे जी कर दिखाया।
​गद्दारी की वो चोट जब उन्होंने जर्मनी से हथियार मंगाकर पूरे देश में एक साथ बगावत की योजना बनाई थी। चेक जासूस रॉस हेडविक ने खुद लिखा था कि अगर वह प्लान कामयाब हो जाता, तो आज राष्ट्रपिता बाघा जतिन होते। पर अफ़सोस, एक गद्दार की मुखबिरी ने हमें 32 साल और गुलामी की आग में झोंक दिया।
​10 सितंबर 1915 को जब उन्होंने अस्पताल में आखिरी सांस ली, तो उनका शरीर गोलियों से छलनी था, लेकिन चेहरे पर हार का गम नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति समर्पण की चमक थी।आज समय है यह पूछने का कि क्या हमारी देशभक्ति सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी के स्टेटस तक सीमित है? बाघा जतिन और उनके साथियों ने जब बूढ़ी बालम की तट पर आखिरी गोलियां झेली थीं, तो उनके सामने कोई निजी स्वार्थ नहीं था। उन्हें पता था कि वह शाम उनकी आखिरी शाम है, फिर भी उन्होंने समर्पण के बजाय संघर्ष को चुना।
इतिहास गवाह है कि हम दुश्मनों से कभी नहीं हारे, हम तब-तब हारे जब घर के ही किसी भेदी ने दरवाज़ा खोल दिया। आज बाघा जतिन को सच्ची श्रद्धांजलि यह नहीं होगी कि हम उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाएं, बल्कि यह होगी कि:
हम अपने इतिहास के उन विस्मृत नायकों (Forgotten Heroes) को पहचानें।
राष्ट्रहित को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर रखें, ताकि फिर कभी कोई 'मुखबिरी' किसी क्रांतिकारी के सपने को न कुचल सके।
अपनी आने वाली पीढ़ियों को बताएं कि आज़ादी केवल अहिंसा के चरखे से नहीं, बल्कि जतिन दा जैसे शेरों के लहू से भी सींची गई है।
याद रखिये, जो राष्ट्र अपने बलिदानियों को भूल जाता है, उसका भूगोल बदल जाता है। जतिन दा का शरीर उस दिन गोलियों से छलनी हुआ था, लेकिन उनकी रूह आज भी हर उस हिंदुस्तानी में ज़िंदा है जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का हौसला रखता है।
उठो! और अपने अंदर के उस 'बाघा' को जगाओ, जो देश के लिए मरने से पहले, देश के लिए जीना जानता हो।"
​आज जब हम आजादी की खुली हवा में सांस लेते हैं, तो एक पल के लिए रुक कर सोचिएगा जरूर... क्या हम उन बलिदानों के लायक बन पाए हैं? जतिन दा जैसे नायक इतिहास की किताबों के किसी कोने में खो गए हैं, लेकिन हमारे दिलों में उनकी मशाल जलती रहनी चाहिए।
​बाघा जतिन जैसे महान क्रांतिकारी के चरणों में मेरा कोटि-कोटि नमन।

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह

दोस्तों ज्ञानी जैल सिंह भारत के पूर्व राष्ट्रपति थे और उन्हें 
Z ±security मिली थी और अब उन्होंने दिल्ली में घोषणा कर दी की कल मैं चंडीगढ़ पहुंचने पर बोफोर्स धोटाले के सारे राज खोलने वाला हूं,,,,,,

 तो हुआ ये की दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर सामने से एक ट्रक आया और दनदनाता हुआ ज्ञानी जैलसिंह की कार को कुचल हुए आगे निकल गया और उनका वहीं रामनाम सत्य हो गया,,,,,,
और उस दुर्घटना की कोई जांच नहीं हुई,,,,,

दोस्तों एक बार राजेश पायलट ने कांग्रेस नेत्री की सलाह को ना मानते हुए एक घोषणा कर दी की कल मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद हेतु नामांकन भरूँगा,,,,,

बस फिर क्या था, सामने से एक बस आई और उनकी कार को लपेटती हुई चली गई और उनका वही रामनाम सत्य हो गया,,,,,

श्रीमन्त माधवराव शिन्दे (सिंधिया) को तो आप लोग जानते ही होंगे लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय वा कर्मठ नेता थे और वो लोकसभा के लिए लगातार 9वीं बार चुने गए थे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता भी थे,,,,,,

कांग्रेस राजमाता ने उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष को कहा की मैं प्रचार करने आ रही हूँ लेकिन प्रदेश अध्यक्ष निर्भीक था उसने कहा आप मत आइए बल्कि माधवराव जी को भेज दीजिए,,,,,

यहां वो ही वोट दिलवा सकते हैं बस फिर क्या था माधवराव जी को आदेश आया की आप अपने निजी विमान से ना जाकर इस दूसरे विमान से जाएंगे,,,,,,,

उस समय एक चश्मदीद किसान ने भी बयान दिया था विमान में पहले बम विस्फोट हुआ उसके बाद आग लगी और विमान में सवार आठों लोगों का रामनाम सत्य हो गया,,,,,,,

लेकिन इसकी कोई जांच नही हुई और थोड़े समय के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी रामनाम सत्य हुए पाए गए,,,,,

और क्रमशः इसी तरह से 1965 की लड़ाई के विजेता प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी,,डॉ होमी जहांगीर भाभा के साथ करीब 2500 से भी ज्यादा इसरो और डीआरडीओ के वैज्ञानिक और टॉप इंजीनियरों का भी बहुत ही संदेहपूर्ण स्थिति में रामनाम सत्य हो गया,,,,,जिसकी भी कोई जांच तक नही की गई,,,,

राजीव गांधी ने अपने जीवन काल मे टोटल 181 रैलिया की थीं और जिसमें से 180 रैलियों मे सोनिया गांधी भी उसके साथ थी बस उस 181वीं रैली मे वो राजीव गांधी के साथ नही थी,,,,
और उसी रैली मे उनका रामनाम सत्य हो गया,,,,,, 

 राजीव गांधी की हत्या के समय वहां मौजूद 14 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी मगर सबसे खास बात ये हुई की उन 14 मरने वालों मे एक भी कोंग्रेसी नेता नहीं था मतलब जो भी मरे वो आम लोग ही थे,,,, 

ऐसा कैसे हो सकता है की प्रधानमंत्री रैली कर रहा हो और पार्टी का अन्य कोई नेता वहां मौजूद ना हो,,,,,,,

राजीव गांधी के साथ बड़ा या छोटा कोई कांग्रेसी नेता नहीं मरा और ना ही सोनिया गांधी जो की हर सभा में राजीव गांधी जी के साथ रहतीं थीं और उस दिन होटल में सरदर्द के कारण रुक गईं थी 

अब ये संयोग हो सकता है लेकिन बात कुछ हजम नही होती,,,,,

और बाद में जब स्वयं प्रियंका गांधी ने अपने पिता राजीव के कातिल को कोर्ट में माफ करने की अपील कर दी थी,,,,
तब से बात और नही हजम हो रही,,,,,,

अब ये समझ लीजिए की जब से चमचों की राजमाता इस परिवार की बहू बनकर आई हैं तब से आज तक गांधी परिवार के एक भी सदस्य को प्राकृतिक मृत्यु का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है,,,,,

इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के ससुर कर्नल आनंद अपने ही फार्म हाउस के पास थोड़ी दूरी पर गोली लगने से मरे पाये गये थे,,

और संजय गांधी,,, बताओ हवाई जहाज से नीचे गिर गये और उनका रामनाम सत्य हो गया,,,,,,

अब इंदिरा गांधी का कैसे रामनाम सत्य हुआ वो तो सब जानते ही हैं,,,,

प्रियंका गांधी के ससुर राजेन्द्र वाड्रा दिल्ली के एक गेस्ट हाउस मे पाये गये उनका रामनाम सत्य हो गया था,,तथा ननद का जयपुर दिल्ली हाइवे में कार दुर्घटना में रामनाम सत्य हो गया और देवर मुरादाबाद के एक होटल में रामनाम सत्य हुआ पाया जाता है,,,,,

राजेश पायलट एक सड़क दुर्घटना में लपेट दिया जाता है और माधवराव सिंधिया जहाज दुर्घटना में लपेट दिए जाते है,,,,,,

अब इन सब बातों मे जो सबसे खास बात है वो ये है की जब संसद पर हमला होता है तो मां बेटे दोनो अनुपस्थित थे मतलब राहुल जी और सोनिया जी दोनो ने एक साथ छुट्टी मार दी और संसद मे नही गये,,,,,,,
अब मेरा कहने का मतलब ये कतई नही है की ये सब कांड किसी साजिश तहत हुए,,,, लेकिन बहुत गजब के संयोग बने थे,,,,,,

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राजीव गाँधी?

राजीव गांधी को भूल कर भी मत भूलिएगा

भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े थे राजीव गांधी।

आज कुछ किस्से मै आपको बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे कि राजीव गांधी जैसे लोग भी इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री बन गए!!!

राजीव गांधी के पास सिर्फ एक ही योग्यता थी कि वो फिरोज गांधी के बेटे थे... और उससे भी ज्यादा जरूरी... वो पंडित नेहरू के नाती थे।

राजीव गांधी पढ़ाई लिखाई में फिसड्डी थे। 5 Star Doon School से स्कूलिंग के बाद 1961 में उन्हें इंजियनीरिंग पढ़ने लन्दन के ट्रिनिटी कॉलेज कैब्रिज भेजा गया।

यहीं पर राजीव से एडवीज अंतोनियो अल्बिना माइनो जिन्हें आज हम सोनिया गांधी के नाम से जानते हैं के सम्पर्क में आये।

1965 तक वो Antonio Mayno के प्यार में डूबे रहे और निरंतर फेल होते रहे और पास नहीं हो सके जिसके बाद कॉलेज ने राजीव को निकाल दिया।

फिर राजीव ने 1966 में लन्दन स्थित इम्पीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, किन्तु वहां भी फेल हुए।

उसी वर्ष राजीव की मां इंदिरा प्रधानमंत्री बनी और राजीव भारत आ गए, 1966 में दिल्ली फ्लाइंग क्लब ज्वाइन किया और प्लेन उड़ाना सीखने लगे।

अब 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा ने जुगाड़ लगवा कर राजीव को सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया में कमर्शियल पायलट के तौर पर नौकरी में लगवा दिया।

1971 में भारत पाक युद्ध हुआ भारतीय सेना व् वायु सेना को लाजिस्टिक स्पोर्ट के लिए पायलट्स की आवश्यकता थी और एयर इंडिया के कमर्शियल पायलट्स को रसद एवं हथियार एयर ड्राप करने हेतु बुलाया गया।

सारे के सारे पायलट्स तुरन्त युद्ध क्षेत्र में सेवाएं देने को आ गये सिवाय एक के और वो राजीव गांधी थे जो डर के मारे सोनिया गांधी संग दिल्ली में इटली के दूतावास में जा छिपे थे।

1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव राजनीती में आये।

1984 में इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने दोपहर में गोली मार दी। राजीव गांधी ने मां की मृत्यु के शोक संताप में समय लगाने के बजाय उसी दिन शाम को भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर अपनी तशरीफ़ रख दी।

और कांग्रेसियों को सिखों का नरसंहार करने का आदेश दे डाला, कांग्रेसियों ने स्कूलों के रजिस्टरों और वोटर लिस्ट निकाल निकाल कर सिखों के घर खोजे और घरों में घुसकर हजारों सिखों को काटा। सिख महिलाओं से दुष्कर्म किया।

कई गर्भवती महिलाओं को जीवित ही जला दिया।

सिखों को और उनके बच्चो को, उनकी सम्पत्तियों को फूंकने हेतु कांग्रेस नेताओं के पेट्रोल पंपों से पेट्रोल सप्पलाई किया गया। सड़क चलते सिखों के गले में टायर डालकर जला दिया गया।

यहाँ तक कि तत्कालीन राष्ट्रपति जैल सिंह को भी नहीं बख्शा गया और जब वो गाड़ी में थे तो उनपर भी कांग्रेसियों ने हमला किया। गाड़ी के कांच तोड़ दिए गए।

दिल्ली में कांग्रेसियों का हिंसा का तांडव शुरू हुआ और शीघ्र ही ये देश के कोने कोने में फ़ैल गया।

और राजीव गांधी ने इंदिरा की मृत्यु का बदला देश भर में हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतरवाकर लिया।

और बाद में राजीव गांधी ने उसे “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” वाला ब्यान देकर उसे न्यायोचित ठहरा दिया।

खैर अगले चुनाव हुए और जनता ने राजीव द्वारा करवाये सिख नरसंहार को महत्व दिए बिना राजीव को इंदिरा की सहानुभूति के नाम पर 411 सीटें देकर असीम शक्ति दे दी..

और राजीव ने निरंकुश होकर उस बहुमत का दुरूपयोग किया,

1985 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानो को न्याय देकर मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक से बचने और गुजारे भत्ते का जो मार्ग खोला था उसपर आतातायी राजीव ने अपनी अक्ल पर पड़ा बड़ा वाला भीमकाय पत्थर दे मारा।

और अपुर्व बहुमत का प्रयोग कर मुस्लिम तुष्टिकरण का नया अध्याय लिखा और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटकर मुस्लिम महिलाओं को पुनः गुलाम बना दिया।

भोपाल गैस कांड हुआ हजारों निर्दोष लोगों के हत्यारे यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को राजीव ने अमेरिकी सरकार से सौदेबाजी कर सुरक्षित अमरीका भेज दिया।

राजीव में न वैश्विक कूटनीति की समझ थी, न सैन्य शक्ति के सदुपयोग की समझ थी। अतः अपने सीमित विवेक क्षमता से ग्रस्त राजीव गांधी ने श्रीलंका में LTTE से लड़ने भारतीय सेना जबर्दस्ती भेज दी। और इंडियन पीस कीपिंग फोर्सेस के 1400 सैनिक मरवाये और 3000 सैनिक घायल करवाये

हलांकि बाद में राजीव को थूककर चाटना पड़ा और सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा। राजीव को अपनी उस गलती के कारण ही श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई सैनिक द्वारा हमला किया गया था।

वो पहले व् एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्हें विदेशी धरती पर विदेशी सैनिक द्वारा अपमानित होना पडा!

1989 में बोफोर्स का घोटाला खुला जिसमे पता चला की राजीव गांधी ने सोनिया के “करीबी” जिसे सोनिया अपने संग इटली से दहेज़ में लायी थी और जो सोनिया राजीव के घर में ही रहता था उस ओटावियो कवात्रोची के द्वारा बोफोर्स सौदे में राजीव ने दलाली खायी थी।

1991 में Schweizer Illustrierte नामक स्विस मैगज़ीन ने काले धन वाले उन लोगों के नाम का खुलासा किया जिनका अवैध धन स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा था।

और उसमें राजीव गांधी का भी नाम था। मैगज़ीन ने खुलासा किया कि राजीव गांधी के 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक स्विट्ज़रलैंड के बैंक के एक अकाउंट में जमा हैं

1992 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया और द हिन्दू ने खबरें छापीं की राजीव गांधी को सोवियत ख़ुफ़िया एजेंसी KGB से निरंतर धन मिलता था। रूस ने इस खबर की पुष्टि भी की थी और सफाई में कहा था कि सोवियत विचारधारा के हितों की रक्षा हेतु ये पैसे दिए जाते रहे हैं।

1994 में येवगिनिया अल्बट्स और कैथरीन फिट्ज़पेट्रिक ने KGB प्रमुख विक्टोर चेब्रिकोव के हस्ताक्षर युक्त पत्र प्रस्तुत कर ये खुलासा किया कि राजीव के बाद राजीव के परिवार, सोनिया और राहुल को KGB की ओर से धन उपलब्ध करवाया जाता रहा और KGB गांधी परिवार से निरन्तर संपर्क में रहती थी।

अब यदि आप पूरा आकलन करें तो पाएंगे कि राजीव एक औसत से कम समझदार वो व्यक्ति थे जिसने

निर्दोष सिख मरवाये,

भोपाल गैस कांड में हजारों निर्दोषों के हत्यारे को भगाया।

मुस्लिमों महिलाओं का जीवन नर्क बनाया।

रक्षा सौदों में दलाली खायी।

KGB जैसी एजेंसी के वो खुद एजेंट थे और उससे पैसे लेते थे, कूटनीति की समझ नहीं थी।

और मूर्खतावश श्रीलंका में 1400 भारतीय सैनिकों की बलि चढ़वाई और देश का नाम कलंकित किया।# #viralreelsシ #foryouシpage #viralvideoシ #ViralStoryTime #foryoupageシ #foryouシ #reels #stories #story #storytime

बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

NPA 56लाख करोड़ था

आप कहाँ-कहाँ गड्ढे खोदकर गये हो जी ??
अब समझ में आ रही है नोट बंदी ???
कांग्रेस के अर्थशास्त्री PM मनमोहन सिंह जी ने बैंकों के एनपीए 37% बताये थे, जो वस्तुतः 82% थे !
कितना बड़ा झूठ ....
बैंकें डूबने की कगार पर थीं ...
कुल एनपीए था 56 लाख करोड़ रुपये ...
कल्पना कीजिये जब ये सच्चाई नव नियुक्त पीएम के सामने आयी होगी तो उन पर क्या बीती होगी, अगर बैंकें फेल हो जातीं तो देश किस हालत में होता ? ...
आर्थिक अराजकता सामाजिक अराजकता में बदल चुकी होती, देश भयंकर संकटों में घिर चुका होता ...
नया पीएम उसकी भेंट चढ़ गया होता और आंकड़ों की भूलभुलैया में यही विपक्ष अपने पाप को मोदी के सर मढ रहा होता ...

नोटबंदी ने इस दुष्चक्र से बाहर निकाल दिया ....
बैंकों के पास तत्काल ढ़ेर सारा कैश आ गया !
फिर बैंक डिफाल्टरो पर नकेल कसने का काम शुरू हुआ और हजारों, लाखों करोड़ की संपत्तियां जब्त हुई !

लोग मोदी से तमाम मुद्दों पर क्षुब्ध रहते हैं, उन्हें  अंदाजा ही नहीं है कि देश कितना खोखला कर दिया गया था । 
डिफेंस आतंरिक सुरक्षा विदेशनीति ,आर्थिक अव्यवस्था , सामाजिक विग्रह, आस्तीन के सांप इन सबसे एक साथ निपटना बहुत दुष्कर, विवेकपूर्ण और राजनैतिक इच्छाशक्ति का काम है !

हम मोदी शासन के कारण देशद्रोहियों की गहरी जड़ों को कुछ कुछ देख पा रहे हैं, मिडिया शिक्षा संस्थान, न्यायपालिका सब जगह आज भी विषधर बैठे हुए हैं ....
इन सबके बीच अपने को सुरक्षित रखते हुए देश को सुरक्षित करने का काम मोदी जी  कर रहे हैं ...
हमें पूरा विश्वास है कि मोदी हमारी आशाओं आकांक्षाओं को निश्चित ही पूरा करेंगे ...
ये दौर इन विषधरों के दांत तोड़ने का है !

मोदी को हमारे सार्थक समर्थन की आवश्यकता है,
धैर्य के साथ मोदी के साथ खड़े होने की आवश्यकता है,
अधैर्य से हम मोदी को ही नहीं खोएंगे, अपितु उन्ही दरिंदों के हाथों में देश और अपनी संतानों के भविष्य को सौंप देंगे
सत्ता की ताक में बैठे बहेलिये यही चाहते हैं और हमें गुमराह कर रहे हैं ! दुश्मन जो चाहता है अगर वैसा ही करेंगे, तो पराजय और दुर्भाग्य तो निश्चित है .....

अगर - मगर न होता तो

कांग्रेसी नेता राजीव शुक्ला ने कहा था कि नरेंद्र मोदी ''अगर '' प्रधानमंत्री नहीं होते तो अमेरिका उन्हें अपने यहां कभी नहीं ब...