शनिवार, 16 मई 2026

प्राचीन जैन धर्म

👑 दक्षिण भारत का आध्यात्मिक सूर्य: आचार्य भद्रबाहु, जिन्होंने बदल दिया जैन धर्म का इतिहास! 🚩✨

जब भी हम दक्षिण भारत के विशाल जैन मंदिरों और पवित्र तीर्थों को देखते हैं, तो दिल गर्व से भर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर भारत (मगध) से निकलकर जैन धर्म दक्षिण के हृदय तक कैसे पहुँचा?

आज "देव दर्शन" में बात उस महान युगपुरुष की, जिन्होंने धर्म और उसके पवित्र ज्ञान की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया— आचार्य भद्रबाहु! 👇

12 साल का अकाल और एक महान फैसला ⛈️🛡️

आचार्य भद्रबाहु जैन धर्म के अंतिम ‘श्रुतकेवली’ थे। अपने दिव्य ज्ञान से उन्होंने भविष्यवाणी की कि मगध साम्राज्य में 12 साल का भयंकर अकाल पड़ने वाला है।

ऐसे समय में साधुओं के लिए ‘कठोर नियमों का पालन करना लगभग असंभव हो जाता।

इसीलिए, धर्म और पवित्र आचरण की रक्षा हेतु उन्होंने 12,000 मुनियों के विशाल संघ के साथ दक्षिण भारत की ओर विहार करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। 🚩

और शायद यही वह क्षण था, जिसने जैन धर्म के इतिहास की दिशा बदल दी।

यह विशाल संघ मगध से निकलकर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला (चंद्रगिरि पहाड़ी) पहुँचा। आचार्य भद्रबाहु ने इस पवित्र भूमि को अपनी साधना का केंद्र बनाया और यहीं से दक्षिण भारत में जैन धर्म की सबसे मजबूत नींव रखी गई।

🌟 आचार्य भद्रबाहु के इस प्रस्थान से जैन धर्म को क्या लाभ हुआ? 📈

🛕 दक्षिण में ‘स्वर्णिम युग’ की शुरुआत

इसी विहार के बाद कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में जैन धर्म तेज़ी से फैला।

📚 ज्ञान और परंपरा की रक्षा
यदि आचार्य भद्रबाहु दक्षिण नहीं आते, तो अकाल के कारण प्राचीन जैन आगम, शास्त्र और कठोर आचार-परंपराएँ नष्ट हो सकती थीं।

✍️ साहित्य और मंदिरों की महान विरासत
तमिल और कन्नड़ भाषाओं का प्राचीन एवं श्रेष्ठ साहित्य जैन आचार्यों और मुनियों द्वारा रचा गया। दक्षिण भारत के विशाल जैन मंदिर उसी मजबूत नींव का परिणाम हैं।

धर्म किसी भूमि का मोहताज नहीं होता…
वह ज्ञान, त्याग और तपस्या से जीवित रहता है।

अपने धर्म के इस महान आचार्य पर गर्व करें, और इस पोस्ट को अभी अपने सभी दोस्तों में SHARE करके हमारा सच्चा इतिहास हर घर तक पहुँचाएँ! 🙏🚩

सोमवार, 11 मई 2026

देश विरोधी ताकतें

🙄😔ममता बनर्जी, कांग्रेस, सोरोस, डीपस्टेट, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के बीच जैसे किसी समझौते के अनुसार, 2026 के चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल को अलग किया जाना था और ममता बनर्जी को 'ग्रेट बांग्लादेश' की प्रधानमंत्री बनना था। 

कलकत्ता के पास दो महत्वपूर्ण अमेरिकी जासूस पकड़े गए। इसलिए मोदी, शाह, डोवाल, आरएसएस, भाजपा, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय आदि ने पश्चिम बंगाल में दिन-रात काम किया और पश्चिम बंगाल को बचाया।

🙄😔तो, अमेरिका ने कुछ ऐसा किया जो दुनिया में किसी और ने नहीं किया। यानी, ट्रंप ने दुखी मन से मोदीजी को बधाई दी। दरअसल, दुनिया का कोई भी देश किसी राज्य में चुनाव जीतने मात्र से उस देश के प्रधानमंत्री को 'बधाई' नहीं देता।🙄😔

आपने भी देखा होगा 2 दिन पहले बांग्लादेश जमाते इस्लामी के प्रमुख ने कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के मुसलमानो को इकट्ठा करके पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करने का आंदोलन करें बांग्लादेश के 27 करोड़ मुसलमान ममता बनर्जी को बांग्लादेश को भारत से अलग करने में पूरी मदद करेंगे
पोस्ट साभार 🙏🏻

रविवार, 10 मई 2026

इंद्रा की नाकामी

1973 में पर्सनल लॉ बोर्ड बना इंदिरा गांधी की सरकार में,,
 बाकी आप देख लो,,,,,
✍️ ध्यान से पढ़ें...

नीचे दिए गए वह योद्धा है जो 1971 में युद्ध बंदी के दौरान पाकिस्तान के जेलों में बंद थे वह आज तक नहीं आए

 पढ़िए ये नाम..⤵️
विंग कमांडर हरसरण सिंह डंडोस
स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर  जैन
स्क्वाड्रन लीडर जे एम मिस्त्री
स्क्वाड्रन लीडर जे डी कुमार
स्क्वाड्रन लीडर देव प्रशाद चटर्जी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुधीर गोस्वामी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी वी तांबे
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट नागास्वामी शंकर
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट राम एम आडवाणी 
फ्लाइट लेफ्टिनेंट  मनोहर पुरोहित
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट तन्मय सिंह डंडोस
फ्लाइट लेफ्टिनेंट बाबुल गुहा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट  सुरेश चंद्र संदल
फ्लाइट लेफ्टिनेंट  हरविंदर सिंह
फ्लाइट लेफ्टिनेंट एल एम सासून
फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पी एस नंदा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट  अशोक धवळे
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट श्रीकांत महाजन
फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुरदेव सिंह राय
फ्लाइट लेफ्टिनेंट रमेश कदम
फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रदीप वी आप्टे
फ्लाइंग ऑफिसर कृष्ण मलकानी
फ्लाइंग ऑफिसर के पी मुरलीधरन
फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी
फ्लाइंग ऑफिसर  तेजिंदर सेठी

यह भारतीय वायुसेना के वे योद्धा थे, जो 1971 की जंग में पाकिस्तान में युद्ध बंदी बने, और कभी वापस नहीं आए।
कांग्रेस सरकार ने कभी इनकी खोज नहीं की!
इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से समझौते में 93 हज़ार पाकिस्तानी युद्धबंदी छोड़ दिए, पर अपने सैनिक वापस मांगने याद नहीं रहे!
देश के लोगों से इनकी खबर छुपा ली, न समाचारपत्रों ने फोटो छापे!
मरने के लिए, पाकिस्तानी जेलों में  छोड़ दिया, और हमारे यह सैनिक गुमनाम मृ#त्यु म#र गए!
यही सच रहा है इन सत्ता लोलुप नेहरू, इंदिरा का!
यह पोस्ट नेहरू-गांधी परिवार के चाटुकारों के लिए पीड़ादायक होगी, लेकिन देश के आम नागरिक की आँखे अवश्य खुल जाएंगी!  इस ऐतिहासिक तथ्य की जांच कराए वर्तमान सरकार दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा 
--
इसी तरह की इतिहास से जुड़ी पोस्ट पढ़ने के लिए हमें फॉलो जरूर करें। धन्यवाद,,,,
#ContentCreation #novel #womenempowerement #travelindustry #SocialStatus

अनसुलझी पहेली

मुस्लिम लीग

प्रिय मित्रों
आज जो कांग्रेस ओर गांधी परिवार के सदस्य असुद्दीन ओवैसी को भाजपा की B टीम कहते है कृपया वो अपनी दादी का इतिहास भी बताए.....?

क्या आप जानते हैं कि इंदिरा गांधी भारत की एकमात्र ऐसी प्रधानमंत्री थी जो ओवैसी की पार्टी ए आई एम आई एम यानी ऑल इंडिया मजलिस ए मुत्ताहिदा मुस्लिमीन के दफ्तर में गई थी,

इतना ही नहीं उन्होंने उस वक्त ओवैसी के पिता और सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ खाना भी खाया था,

👉🏿 आंध्र प्रदेश में जब फिल्म अभिनेता एन टी रामा राव का उदय हुआ और उन्होंने आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को बिल्कुल खत्म कर दिया तब इंदिरा गांधी को लगा कि एन टी रामा राव के विजय रथ को रोकने के लिए उन्हें सलाहुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहिए और फिर इंदिरा गांधी ने आंध्र प्रदेश के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ओवैसी के पिता सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन किया,

👉🏿 इंदिरा गांधी उस वक्त प्रधानमंत्री पद पर थी उसके बावजूद उन्होंने एक देश विरोधी पार्टी के मुख्यालय गई वहां पार्टी प्रमुख सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ खाना खाया और ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन किया,

👉🏿 इस गठबंधन से कांग्रेस को तो कोई फायदा नहीं हुआ लेकिन सलाहुद्दीन ओवैसी की पार्टी ए आई एम आई एम को बंपर फायदा हुआ उसे आंध्र प्रदेश विधानसभा में पहली बार 4 सीटें मिली और एक सांसद भी बन गया इस तरह से कांग्रेस ने अपने कुकर्मों और अपने निजी स्वार्थ की वजह से एक मरी हुई पार्टी को जिंदा कर दिया,

पोस्ट सोर्स इंटरनेट

प्राचीन जैन धर्म

👑 दक्षिण भारत का आध्यात्मिक सूर्य: आचार्य भद्रबाहु, जिन्होंने बदल दिया जैन धर्म का इतिहास! 🚩✨ जब भी हम दक्षिण भारत के विशाल जैन मंदिरों और...