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गुरुवार, 25 जून 2026
इमरजेंसी
भारत के इतिहास का वो काला दिन जब कांग्रेस के एक परिवार ने अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए लोकतंत्र की हत्या की
आपातकाल
भारत के इतिहास का वो काला दिन जब कांग्रेस के एक परिवार ने अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए लोकतंत्र की हत्या की
मुखर्जी और शास्त्री जी की मृत्यु?
भारत के पहले उधोगमंत्री श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कश्मीर जाने से रोकते हुए सुचेता कृपलानी जीक्षने कहा था - वहां न जाएं, पंडित जवाहरलाल नेहरू आपकी हत्या करवा देंगे❗
क्या सचमुच सुचेता जी सहीं थी❓❓
6 जुलाई 1901 को श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ और 23 जून 1953 को संदिग्ध परिस्थति में उनकी कश्मीर में मौत❗❗🔥
श्यामा प्रसाद मुखर्जी जब कश्मीर में जा रहे थे तो कांग्रेस अध्यक्ष रहे आचार्य जे. बी. कृपलानी जी की पत्नी व स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी जी ने उनसे कहा था,
"'पंडित जवाहरलाल नेहरू कश्मीर से उन्हें जीवित नहीं लौटने देंगे इस लिए बेहतर होगा कि वे वहां न जाएं❗''
इस पर मुखर्जी ने कहा था -
मेरी पंडित जवाहरलाल नेहरू से कोई व्यक्तिगत शत्रुता तो है नहीं, केवल नीतियों का मतभेद है❗
इस पर सुचेता कृपलानी जी ने कहा -
आप शायद पंडित जवाहरलाल नेहरू की मानसिकता को नहीं जानते, वह आपको अपना सबसे प्रबल प्रतिद्वंद्वी और जनता की नजरों में उभरता हुआ विकल्प मानते हैं इसलिए वे आपको खत्म करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं❗🔥
कश्मीर में हुई श्यामाप्रसाद मुखर्जी की संदिग्ध मौत ने सुचेता कृपलानी जी के अंदेशे को सही साबित कर दिया❗
तो क्या श्यामा प्रसाद मुकर्जी की मौत के पीछे पंडित जवाहरलाल नेहरू थे❓❓
मत भूलिए कि उस वक्त कश्मीर में पंडित जवाहरलाल नेहरू के मुंहलगे शेख अब्दुल्ला की सरकार थी जिन्हें खुश करने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर में धारा- 370 लगाकर उन्हें लगभग संप्रभु कश्मीर का शासक बनाया था❗
सुचेता कृपलानी जी और श्यामाप्रसाद मुखर्जी के इस बातचीत की चर्चा श्याम प्रसाद मुखर्जी के अनन्य सहयोगी और उनके साथ मिलकर जनसंघ का निर्माण करने वाले बलराज मधोक ने अपनी जीवनी में किया है❗🔥
दरअसल उन दिनों कश्मीर में जाने के लिए रक्षा मंत्रालय से परमिट लेना पड़ता था और श्यामाप्रसाद मुखर्जी का कहना था कि एक राष्ट्र में दो विधान नहीं चलेंगे, वह इस कानून को तोड़कर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग साबित करने पर तुले थे❗
माधेपुर में रावी नदी पर बने पुल को ज्यों ही श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने पार कर कश्मीर में पैर रखा, शेख अब्दुल्ला की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उस वक्त जम्मू-कश्मीर राज्य देश के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर था इसलिए उनकी गिरफ्तारी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती थी❗
अचानक 24 जून को अखबार में यह खबर आयी कि 23 की रात को श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत हो गयी है, श्यामाप्रसाद मुखर्जी को जेल से निकाल कर अस्पताल ले जाया गया था जहां उनकी मौत हुई❗
बलराम मधोक के अनुसार, ''अस्पताल में श्यामाप्रसाद मुखर्जी का उपचार करने वाली नर्स ने बताया था कि रात को 9 बजे डॉक्टर अलीजान ने श्यामाप्रसाद मुखर्जी को इंजेक्शन दिया था और उस नर्स के अनुसार डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने इसका विरोध किया और कहा कि उनकी तबियत पूरी तरह से ठीक है उन्हें किसी दवा या इंजेक्शन की जरूरत नहीं है लेकिन उस इंजेक्शन के लगने के एक घंटे के भीतर मुखर्जी की मौत हो गयी❗''
श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत के बाद उनकी मां ने इसकी जांच की मांग करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा और यही नहीं, सभी सांसदों ने इस मौत की जांच की संयुक्त मांग की थी, लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू
श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत की आखिरी तक जांच कराने के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने जांच नहीं ही कराया❗❗🔥
तो क्या सुचेता कृपलानी सही थीं ❓❓
👉🏿 कम से कम श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच न करवा कर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सुचेता कृपलानी के संदेह को पुख्ता आधार तो प्रदान की ही दिया था❗
आज श्यामाप्रसाद मुखर्जी के उस बलिदान के कारण ही -
कश्मीर में आप बिना परमिट जा रहे हैं❗
देश का सर्वोच्च न्यालय वहां के कानून में हस्तक्षेप कर सकता है❗
वहां भारतीय झंडा फहराया जा सकता है❗
प्रधानमंत्री को अब मुख्यमंत्री कहा जाता है❗
लेकिन श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान को राष्ट्र का पूरा सम्मान तभी मिलेगा जब कश्मीर से धारा- 370 को पूरी तरह से हटा कर कश्मीर का भारतीय संघ में पूर्ण विलय किया जाएगा❗
एक बात और धारा- 370 थोपने के वक्त पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यह व्यवस्था कर ली थी कि वह संविधान सभा में मौजूद न रहें ताकि सदस्यों के विरोध से वह बच जाएं, वह अमेरिका चले गए थे और गोपालस्वामी अय्यर ने जब इसे पेश किया तो समूची कांग्रेस पार्टी ने तब इसका विरोध किया था पर उनके विरोध को शांत करने की जिम्मेवारी उपप्रधानमंत्री होने के नाते सरदार पटेल पर आ गयी थी और सरदार वल्लभभाई पटेल इस धर्मसंकट में फंस गए कि यदि इस प्रस्ताव को वह पलट देते हैं तो अमेरिका में बैठे भारतीय प्रधानमंत्री के पद की गरिमा की बड़ी हानि होगी तब मन मारकर सरदार वल्लभभाई पटेल को इसके लिए कांग्रेस के सभी सदस्यों को सहमत करना पड़ा❗
ताज्जुब होता है कि उस समय सभी कांग्रेसियों ने इसे एक अलगाववादी धारा मानते हुए इसका विरेाध किया था और आज उसी कांकरोच कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्य इसके हटाए जाने की मांग को सांप्रदायिक करार देते है❗
बुधवार, 24 जून 2026
मंगलवार, 23 जून 2026
झूठा इल्जाम
*मेनका गाँधी के नाम एक खुला प्रतिवाद पत्र*
*प्रसिद्ध जीव दया प्रेमी श्रीमति मेनका गांधी के द्वारा जैन मुनियों पर पिच्छि के प्रयोग हेतु विगत वर्षों में पंद्रह लाख मोर पक्षियों की हत्या के लगाए, भ्रामक एवम दुराग्रह युक्त झूठे आरोपों की, हम दिशा बोध एवम प्रबुद्ध जैन विचार मंच परिवार, कोलकाता, कठोर शब्दों में निंदा एवम प्रतिवाद करते है। दिगंबर जैन मुनि तो छोटे से छोटे जीवो को बचाने के लिए ही मयूर पिच्छी का उपयोग करते हैं, उन पर ऐसे निंदनीय बयान देने की हम घोर निंदा करते हैं। मेनका गाँधी अपना बयान वापस लें और अहिंसा प्रेमी समाज को आंदोलन करने पर मजबूर न करें*।
*मोर पक्षी भारत का राष्ट्रीय पक्षी है एवम उसे सरकार द्वारा कानूनी संरक्षण प्राप्त है l एक मोर साल में 150 से 200 पंख छोड़ता है जो हर पंख छः माह मे पुनः पूरा उग जाता है l मोर आसोज और कार्तिक माह मे स्वतः अपने पंखों का उत्सर्जन करते है और जैन मुनि की पिच्छि की लिए ऐसे पंखों से ही पिच्छिका का निर्माण किया जाता है l करीब दो हजार दिगंबर संतों की मोर पिच्छिका के लिए वर्ष में अधिकतम मात्र, दस लाख मोर पंखों की आवश्यकता रहती है और अधिकृत जानकारी के अनुसार भारत मे मोर ही एक मात्र ऐसा पक्षी है, जिसकी संख्या तीव्र गति से वृद्धि हुई है* l
*भारत में मोर की संख्या – पिछले 50 साल का ट्रेंड* -
*पूरे देश में मोर की राष्ट्रीय स्तर पर गिनती कभी नहीं हुई,किन्तु _State of India’s Birds 2020/2023_ और SACON की रिसर्च से ट्रेंड साफ है कि 1970-2000 के बीच संख्या स्थिर या हल्की गिरावट जरूर हुई परंतु 2000-2025 के बीच इनकी संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है । पिछले 25 साल में मोर *सबसे तेजी से बढ़ने वाले पक्षियों* में से एक है l *पिछले 20 साल में eBird डेटा के मुताबिक तमिलनाडु में 6 गुना बढ़े, पूरे देश में दोगुने हुए. केरल में हर जिले में अब दिखते हैं, जो पहले बहुत दुर्लभ थे l अकेले तमिलनाडु में 2024-2025 SACON सर्वे के अनुसार, 38 लाख से 61 लाख मोर है तथा कमोबेश हर 38 के 38 जिलों में मौजूद है* l
*पूरे भारत में 50% पक्षी प्रजातियां घट रही हैं, लेकिन मोर बढ़ रहे हैंl अकेले तमिलनाडु का 61 लाख सबसे नया वैज्ञानिक अनुमान है*!
*राजस्थान में 1975 - 2000 के दौरान*, *मोर आबादी मे जरूर थोड़ी गिरावट दर्ज हुई l 1991 तक राजस्थान में मोर सबसे ज्यादा पाए जाने वाले राज्यों में था, परंतु फिर वर्ष 2000-2025 से तेज़ बढ़ोतरी का दौर पुनः आया हुआ है* l
*आपने किस आधार पर जैन मुनियों पर मोर हत्या का आरोप लगाया है, या तो तथ्यों के साथ पुष्टि करें, नहीं तो जैन समाज से एवम जैन मुनियों से, सार्वजनिक मंच से सोशल मीडिया के माध्यम से, लिखित माफीनामा लिख कर खेद व्यक्त करें* l
*चिरंजी लाल बगड़ा (डॉ)*
(शाकाहार विशेषज्ञ, जीव दया प्रेमी)
संपादक दिशा बोध
*कोलकाता*
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सोमवार, 22 जून 2026
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