*मेनका गाँधी के नाम एक खुला प्रतिवाद पत्र*
*प्रसिद्ध जीव दया प्रेमी श्रीमति मेनका गांधी के द्वारा जैन मुनियों पर पिच्छि के प्रयोग हेतु विगत वर्षों में पंद्रह लाख मोर पक्षियों की हत्या के लगाए, भ्रामक एवम दुराग्रह युक्त झूठे आरोपों की, हम दिशा बोध एवम प्रबुद्ध जैन विचार मंच परिवार, कोलकाता, कठोर शब्दों में निंदा एवम प्रतिवाद करते है। दिगंबर जैन मुनि तो छोटे से छोटे जीवो को बचाने के लिए ही मयूर पिच्छी का उपयोग करते हैं, उन पर ऐसे निंदनीय बयान देने की हम घोर निंदा करते हैं। मेनका गाँधी अपना बयान वापस लें और अहिंसा प्रेमी समाज को आंदोलन करने पर मजबूर न करें*।
*मोर पक्षी भारत का राष्ट्रीय पक्षी है एवम उसे सरकार द्वारा कानूनी संरक्षण प्राप्त है l एक मोर साल में 150 से 200 पंख छोड़ता है जो हर पंख छः माह मे पुनः पूरा उग जाता है l मोर आसोज और कार्तिक माह मे स्वतः अपने पंखों का उत्सर्जन करते है और जैन मुनि की पिच्छि की लिए ऐसे पंखों से ही पिच्छिका का निर्माण किया जाता है l करीब दो हजार दिगंबर संतों की मोर पिच्छिका के लिए वर्ष में अधिकतम मात्र, दस लाख मोर पंखों की आवश्यकता रहती है और अधिकृत जानकारी के अनुसार भारत मे मोर ही एक मात्र ऐसा पक्षी है, जिसकी संख्या तीव्र गति से वृद्धि हुई है* l
*भारत में मोर की संख्या – पिछले 50 साल का ट्रेंड* -
*पूरे देश में मोर की राष्ट्रीय स्तर पर गिनती कभी नहीं हुई,किन्तु _State of India’s Birds 2020/2023_ और SACON की रिसर्च से ट्रेंड साफ है कि 1970-2000 के बीच संख्या स्थिर या हल्की गिरावट जरूर हुई परंतु 2000-2025 के बीच इनकी संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है । पिछले 25 साल में मोर *सबसे तेजी से बढ़ने वाले पक्षियों* में से एक है l *पिछले 20 साल में eBird डेटा के मुताबिक तमिलनाडु में 6 गुना बढ़े, पूरे देश में दोगुने हुए. केरल में हर जिले में अब दिखते हैं, जो पहले बहुत दुर्लभ थे l अकेले तमिलनाडु में 2024-2025 SACON सर्वे के अनुसार, 38 लाख से 61 लाख मोर है तथा कमोबेश हर 38 के 38 जिलों में मौजूद है* l
*पूरे भारत में 50% पक्षी प्रजातियां घट रही हैं, लेकिन मोर बढ़ रहे हैंl अकेले तमिलनाडु का 61 लाख सबसे नया वैज्ञानिक अनुमान है*!
*राजस्थान में 1975 - 2000 के दौरान*, *मोर आबादी मे जरूर थोड़ी गिरावट दर्ज हुई l 1991 तक राजस्थान में मोर सबसे ज्यादा पाए जाने वाले राज्यों में था, परंतु फिर वर्ष 2000-2025 से तेज़ बढ़ोतरी का दौर पुनः आया हुआ है* l
*आपने किस आधार पर जैन मुनियों पर मोर हत्या का आरोप लगाया है, या तो तथ्यों के साथ पुष्टि करें, नहीं तो जैन समाज से एवम जैन मुनियों से, सार्वजनिक मंच से सोशल मीडिया के माध्यम से, लिखित माफीनामा लिख कर खेद व्यक्त करें* l
*चिरंजी लाल बगड़ा (डॉ)*
(शाकाहार विशेषज्ञ, जीव दया प्रेमी)
संपादक दिशा बोध
*कोलकाता*
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