लगभग 1500 भारतीय~हिन्दू, वैज्ञानिकों की हत्या, अपहरण:
जिन बैज्ञानिकों की हत्याएं और अपहरण बाबर बंशी मियां नेहरू, नकली गांधीयों के शासनकाल में हुई, ऊनमें भी सबसे ज्यादा हत्या,अपहरण अब्दुल कलाम (ISRO), हामिद अंसारी ( उपराष्ट्रपति), और Antonia (के गुलाम मनमोहन) के समय हुई। ये बाबर बंशी नेहरू,नकली गांधी खानदान भारत,हिन्दुओं का सबसे बड़ा गद्दार है,हर भारतीय को इसे समझना चाहिए, इन्होंने CIA से लेकर ISI,तक को जानकारियां दी है सहयोग किया है। भारत में सैंकड़ों आतंकी घटनाओं में इस खानदान का हाथ रहा है,चाहे 26/11 हो या 1990 का कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार, या 1948 चित्त पावन ब्राह्मणों की हत्या, 1984 सिक्खों का या पुलवामा... या दूसरे सैंकड़ों आतंकी हमले
भारतीय वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतें और RAW के नेटवर्क को ध्वस्त करना ये साजिश हर भारतीय जानना चाहता है। यह बाबर बंशी मियां नेहरू, नकली गांधीयों का परिवार वैज्ञानिकों को मरवा देते या गायब थे यह एक बड़ा रहस्य है जो उजागर होना चाहिए क्यों वैज्ञानिक मारें गये , लापता हुवे, और आत्महत्या तक करने को मजबुर हुए इस रहस्य को उजागर करना चाहिए।
कांग्रेस के राज में 1500 जीतने वैज्ञानिकों की संदिग्ध हालात में मौतें , अपहरण, आत्म हत्याएं हुई, कुछ पाकिस्तान में brain 🧠 dead अवस्था में मिले, किसी की कोई जांच नहीं हुई सब ठंडे बस्ते में चली गई, ऐसा हि हुआ था हमारे दुसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी के साथ उनका रहस्यमय परिस्थितियों में मरना ( हत्या ) ऐक पहेली बनकर रह गया हे, आज भी कई रहस्यों पर पर्दा पडा हुआ हे जो शायद अब सबुतो के अभाव के कारण सुलझ नहीं पाएंगे।🥲
5वी फेल Antonia 13 जनवरी 1968 को भारत आई , जिसकी शादी 25 फरवरी 1968 को राजीव खान गांधी से हुई,जो एक एस्कॉर्ट सर्विस चलाती थी और खुद भी धंधेवाली थी #एंटोनियामाइनो जिसको भारत आते ही सैटेलाइट और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि हो गई। है न घोर आश्चर्य की बात ?
जिस धंधेवाली को Resister, Capacitor, IC and Diode का मुंह किधर है और G किधर होता है पता ही नहीं है वो अंतरिक्ष विज्ञान समझ रही है 😜उसकी आंखों में कुटिलता देखिए,(फोटो)सब समझ आ जाएगा....
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
अप्रैल, 1968: विक्रम साराभाई Antonia ~सोनिया खान गांधी को अहमदाबाद में प्रायोगिक उपग्रह संचार का अर्थ स्टेशन का कामकाज समझाते हुए।( चित्र संलग्न) अप्रैल 1968 में लिया गया यह चित्र ISRO के अहमदाबाद सेंटर का है। वैज्ञानिक विक्रम साराभाई सोनिया को भारत की उपग्रह परियोजना की जानकारी दे रहे हैं। जनवरी में भारत आई, दो महीने पहले ही फरवरी 1968 में सोनिया राजीव का विवाह उसने भारत की नागरिकता भी नहीं ली थी। और पहुंच गई अति महत्वपूर्ण संस्थान की जानकारी लेने के लिये ??? क्यूं???
संयोग है कि कुछ समय बाद ही विक्रम साराभाई केरल मे एक रिजॉर्ट के कमरे में रहस्यमय ढंग से मृत पाए गए। बिना पोस्टमार्टम के ही घोषणा कर दी गई थी कि मृत्यु हार्ट अटैक से हुई है।
कोई भी विदेशी भारत वर्ष का हितैषी नहीं हो सकता दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल काली है.. आज ये, उस इटालियन धंधेवाली Antonia का नाजायज पिल्ला पप्पू, पिंकी खान वाड्रा,रॉबर्ट वाड्रा सब देश को भांडने, फूट डालने, बिगाड़ने में लगे हैं।देश का सबसे बड़ा गद्दार बाबर बंशी मियां नेहरू,नकली गांधीयों का खानदान है।
जिस हामिद अंसारी को इस कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति बनाया उसके ईरान, ISI पाकिस्तान से सम्बन्ध सभी जानते हैं, पर जो हिंदू ये बोलते नहीं थकते कि मुस्लिम हो तो अब्दुल कलाम जैसा वे हिन्दू अलतकिया अब्दुल कलाम का अ और क भी नहीं जानते।
अब्दुल कलाम के समय ISRO से करीब 67 बैज्ञानिक गायब हुवे, जिसमें ना जाने कितने पाकिस्तान पहुंचाए गए पर 3 जो brain 🧠 dead अवस्था में पाकिस्तान में मिले वह मृत्यु तुल्य अवस्था थी, शायद 32 की लाशे मिली थी बाकी का आज तक कोई सुराग नहीं, शायद पाकिस्तान ही पहुंचाए गए थे।RTI से ये जानकारी आप ले सकते है। इसी अब्दुल कलाम ने नियम, कानून विपरीत मुल्लों के लिए राष्ट्रपति भवन के अंदर किया किया बनाए आप RTI से जानकारी ले सकते हैं।
इसी अब्दुल कलाम के समय ISRO में एक जॉब vacancy थी 66 लोगों के लिए, जिसमें 8800 एप्लीकेशन पड़ी थी, और उस अब्दुल कलाम ने सारी 66 जॉब छांट छांट कर मुल्लों को दी थी। बहुत बड़ा बवाल हुआ था पर कांग्रेस ने सब शांत कर छुपा दिया। साउथ इंडिया के लोग ये कांड अच्छी तरह जानते है और मुझे इसकी जानकारी साउथ इंडिया के ही लोगों ने दी थी ( 2012 में ) किसी भी मुल्ले पर बिस्वास करना एक महा पाप है, चाहे वो वैज्ञानिकों का हत्यारा अब्दुल कलाम हो या मूर्खो का चहेता फैज खान, या यूसुफ खान ( दिलीप कुमार) या मूर्खो का सड़क छाप सड़ खान सड़ ..
होमी जहांगीर भावा की हत्या में इसी बाबर बंशी मियां नेहरू खानदान की मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान का हाथ था तो बिक्रम साराभाई की हत्या में पूरी तरह Antonia का हाथ था
कितने षड्यंत्र किए इस बाबर बंशी मियां नेहरू खानदान ने कितनी हत्याएं,कितनी लूट, 2014 में अगर मोदी जी न आते तो किसी को कुछ पता भी ना चलता।
विक्रम साराभाई ,डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा आज होते तो भारत दुनिया का बाप होता।
She came to India only because as spy, by profession she was running an Escort service from a bar, was a prostitute , her partner n supplier of Girls/teens was a Islamabadi rich muslim, qualifications 5th standard fail but what an interesting she went to observe I S R O ! Soon after she came to Bharat ( married to Rajiv Khan Gandhi)
LATER ON Dr sarabhai was found dead
She stayed in india as spy ~of CIA,KgB , is also an agent for Pop ( convert apx 6,65,000 Hindus to Christianity)
After long years she took Indian citizen ship , sources of incomes Nil was NiL, but now a days she is 4th richest woman in the world
Whenever a politician visits such an esteemed organization, the scientists should not come forward to explain the project or workings, they are useless fellows and come to shine their report card only.
Antonio has damaged India like any thing and now his son is also doing the same
बहुत कुछ तो रहस्य है लेकिन किसी की हिम्मत क्यों नहीं है इस इटालियन को छूने की???इस spy इटालियन के रहस्य ~ जिस जिस ने जाने वे सब रहस्यमयी मौत को प्राप्त हुए है चाहे राजीव खान गांधी हो, या माधव राव सिंधिया,राजेश पायलट या रॉबर्ट वाड्रा का खानदान.....
गलती विक्रम साराभाई की नहीं थी उस समय भारत के लोगों की मानसिकता ही कुछ ऐसी थी कि बाबर बंशी मियां नेहरू, नकली गांधी परिवार को भारत का मालिक समझते थे और ये परिवार भारत को अपनी बापौती समझ कर लुटता,रहा हजारों नहीं लाखों हत्याएं, करोड़ो पाकिस्तानी, बांग्लादेशी मुल्लों को लाकर बसाया।
देश को खत्म करना ही कांग्रेस और इस मुल्ले नकली गांधी परिवार का शुरू से मकसद रहा है और आज भी एंटोनिया, पिंकिखान वाड्रा, राहुल खान गांधी देश भर मे झूठ बोल कर इसी प्लानिंग पर काम कर रहा है
मतलब ये पनौती जब से भारत आई,तब से महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान महानुभावों की जीवनलीला पर ग्रहण लगने लगा। संजय खान गांधी, इंदिरा खानगांधी , राजीव खान गांधी जैसे परिवारों के लोग मारे गए।
परन्तु जब से बागडोर संभाली तब से परिवार सुरक्षित और पुराने कांग्रेसी साइड। नटवर सिंह जी को कैसे धक्के मारकर बाहर किया। फिर भी पुराने कांग्रेसी इनके और परिवार का गुणगान करते नहीं थकते। परिवार को शहीद कहते हैं लेकिन कोई ये नहीं कहता कि हत्या हुई है। राजेश पायलट ,माधवराज सिंधिया , जगदीश पायलट रॉबर्ट वाड्रा का प्रायः पूरा खानदान , जैसे खास लोगों को क्या हुआ कोई नहीं बताता।
जब वैज्ञानिक तक नहीं छोड़ा तो औरों को क्या बखसेंगे।
अभी ग़ुलामी निकली नहीं न हिन्दू जागा है, बस पैसे दे दो कुछ भी करो , कॉग्रेस का मतलब ही "एक आतंकवादी गद्दारों का संगठन" है और इसके जो इंडी ठग बंधन है वो भी मेम्बर है इन्हें सबको जेल भेज दे या सालो को ऊपर हूरो से मिलवा दो । ये ही इन गद्दारों की बीमारी का सही इलाज है ।
भला हो वर्तमान सरकार का और सोशल मीडिया का जिसने भारत के सही इतिहास को सामने लाया, और इस परिवार की असलियत धीरे धीरे खुल कर सामने आ गई।
मोदी जी के शासन में वैज्ञानिक सुरक्षित हैं और नई नई खोजों में लगे हैं । भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है ♥️🚩🇮🇳
उसके बाद क्या हुआ हमारे साराभाई और कितने वैज्ञानिकों कि हत्या हुई ??
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह विक्रम साराभाई जिन्होंने रखी थी ISRO की नींव । भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अतंरिक्ष के क्षेत्र में ऊंचे शिखर पर है जिसका पूरा श्रेय ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह’ विक्रम साराभाई को जाता है।
साल 1975 में भारत ने एक रूसी कॉस्मोड्रोम से ‘आर्यभट्ट’ उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दुनिया को चकित कर डाला. यह विक्रम भाई की परियोजना की सफलता थी।
मई, 1966 में उन्होंने परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला। साल 1919 में 12 अगस्त को अहमदाबाद के स्वतंत्रता आन्दोलन को समर्पित एक प्रगतिशील विचारों वाले उद्योगपति परिवार में जन्मे थे तो वहीं पर देश की प्रसिद्ध शख्सियत सरोजिनी नायडू, अन्य से नाता रहा।
साल 1962 में उन्होंने शांतिस्वरूप भटनागर पदक प्राप्त किया, तो 1966 में पद्मभूषण. मरणोपरांत उन्हें 1972 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।साल 2019 में उनकी जन्म शताब्दी पर इसरो ने विक्रम साराभाई पत्रकारिता पुरस्कार भी शुरू करने की घोषणा की।
भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर (जिसको 20 सितंबर, 2019 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरना था) का नाम भी विक्रम रखा गया।
साराभाई की मौत एक रहस्य
आम दिनों की ही तरह 30 दिसंबर, 1971 का भी दिन था। लेकिन उस दिन को खास बना दिया एक घटना ने। और वह घटना थी देश के महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई का इस दुनिया से चले जाना। किसी को यकीन नहीं था कि भारत के स्पेस प्रोग्राम के पिता कहे जाने वाले विक्रम साराभाई हमें यूं छोड़कर चले जाएंगे। एक दिन पहले तो सबकुछ ठीक-ठाक था। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ बैठकें की थीं और अहम विषयों पर चर्चाएं भी हुई थीं। ऐसे कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे जिससे लगे कि उनकी तबीयत खराब है। लेकिन अगली सुबह केरल के तटीय शहर कोवलाम के एक होटल रूम में उनका शव मिला। उनकी इस अचानक मौत ने सबको झिंझोड़ कर रख दिया था।
नांबी नारायण की आत्मकथा और साजिश का शक
जासूसी के गलत मामले में फंसाए गए पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक नांबी नारायणन की मानें तो साराभाई अंतरराष्ट्रीय साजिश का शिकार हुए। इसरो के जासूसी मामले में फंसे और फिर बाद में बेदाग साबित हुए एस.नांबी नारायणन की 2017 में मलयाली भाषा में आत्मकथा आई थी जिसका नाम Ormakalude Bhramanapatham है। उस किताब से विक्रम साराभाई की मौत के रहस्य पर फिर से चर्चा गर्माया।
मौत पर यकीन नहीं
नांबी नारायणन ने साराभाई के साथ मिलकर उनके जूनियर के तौर पर इसरो में काम किया है और उनके काफी करीब रहे हैं। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है, 'उनकी मौत से कई सवाल उठे हैं। अगर उनकी मौत साजिश थी तो पूरी संभावना है कि उसके पीछे अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का हाथ हो। नहीं तो उनके जैसे वैज्ञानिक का इस तरह अचानक निधन कैसे हो सकता है?'
सेहत पर देते थे बहुत ध्यान
नांबी नारायणन ने अपनी आत्मकथा में एक पूरा चैप्टर साराभाई के निधन को समर्पित किया है। उन्होंने इसमें उनके निधन पर कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि साराभाई अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखते थे। नांबी लिखते हैं, 'एक आदमी जिसने जिंदगी में कभी सिगरेट को छुआ तक नहीं। फिर उनकी ऐसे मौत कैसे हो गई? यह जानते हुए भी कि मृतक एक महान वैज्ञानिक थे, उनका अंतिम संस्कार उनकी ऑटोप्सी कराए बगैर क्यों किया गया?'
उन्होंने कहा कि साराभाई के निधन को प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री होमी जहांगीर भाभा की मौत से जोड़कर देखा जाना चाहिए जिनका 1966 में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। CIA ~ सीआईए का हाथ?
उन्होंने पत्रकार ग्रेगरी डगलस की किताब Conversations with the Crow का हवाला दिया है जिसमें सीआईए अफसर रॉबर्ट क्रॉली ने भाभा की मौत के पीछे सीआईए के हाथ होने के संकेत दिए थे। किताब में क्रॉली के हवाले से लिखा है, '1965 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध में भारत की जीत से अमेरिका बेचैन हो गया। भारत को एक न्यूक्लियर ताकत के तौर पर उभरते हुए देखने से भी अमेरिका की चिंता बढ़ गई।'👇👇
इन कांग्रेसी कुत्तों ने सबसे अंत में नम्बी नारायण जी को शिकार बनाया था, परंतु उनका सौभाग्य था कि उनके जेल में रहते हुए सत्ता परिवर्तन हो गया, नयी सरकार ने दुबारा जांच बिठा दिया तो इसरो के महान वैज्ञानिक नम्बी नारायण जी निर्दोष पाए गए और सुप्रीम कोर्ट ने नारायणन जी से माफी मांगते हुए सम्मान बरी कर दिया तथा उनका जो बकाया धनराशि ब्याज सहित उनको प्रदान किया गया।
एक अभिनंदन समारोह में उन्होंने रूंधे गले से साक्षात्कार दिया था कि यदि सत्ता में मोदीजी नहीं आते तो मेरा जीवित जेल से निकलना असंभव था, जो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने मेरे उपर देशके प्रति गद्दारी का काला धब्बा थोप दिया था वो धब्बा भी मिटना मुश्किल था, मैं बहुत प्रसन्न हूं कि मुझे दूसरा जन्म मिल गया।......
डॉ होमी जेन्हागीर भाभा (1909-1966) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी थे जिन्हें अक्सर भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है ।
भाभा का जन्म मुंबई के एक धनी परिवार में हुआ था। 1927 में वे इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने गए। हालाँकि उन्होंने परिवार की इच्छा के अनुसार इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन भाभा जल्द ही भौतिकी की ओर आकर्षित हो गए। 1932 में भाभा ने लिखा , “मैं आपसे स्पष्ट रूप से कहता हूँ कि व्यवसाय या इंजीनियर के रूप में नौकरी मेरे लिए नहीं है। यह मेरे स्वभाव से बिल्कुल अलग है और मेरे मिजाज और विचारों के बिल्कुल विपरीत है। भौतिकी ही मेरा क्षेत्र है। मुझे पता है कि मैं इसमें महान कार्य करूँगा।” भाभा ने 1934 में परमाणु भौतिकी में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
द्वितीय विश्व युद्ध से पहले भाभा भारत लौट आए और भारतीय विज्ञान संस्थान में शामिल हो गए, जहाँ उन्होंने कॉस्मिक रे रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की। 1945 में, उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की, जहाँ भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए प्रारंभिक शोध कार्य शुरू हुआ। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद, भाभा ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखकर तर्क दिया कि "अगले कुछ दशकों में, परमाणु ऊर्जा देशों की अर्थव्यवस्था और उद्योग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और यदि भारत दुनिया के औद्योगिक रूप से उन्नत देशों से और भी पीछे नहीं रहना चाहता है, तो विज्ञान की इस शाखा को विकसित करना आवश्यक होगा।"
1954 में, भाभा ने ट्रॉम्बे में एक परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना की, जिसका नाम बाद में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) रखा गया। परमाणु ऊर्जा के प्रबल समर्थक भाभा ने 1955 में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का आयोजन किया। वे अपनी मृत्यु तक भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख रहे।
होमी भाभा की मृत्यु 24 जनवरी, 1966 को जिनेवा जाते समय एक विमान दुर्घटना में हो गई थी। इनकी मृत्यु का शक CIA और मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान गांधी पर किया जाता है। 11 जनवरी 1966 को ही मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान ने रूस में श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को मुस्लिम रसोइए से उनके खाने में जहर देकर उनकी हत्या करवाई थी, और 24 जनवरी को डॉ होमी जहांगीर भावा की भी हत्या में CIA और मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान का हाथ था।
Dr. Homi Jehangir Bhabha (1909–1966) was a pioneering Indian nuclear physicist and the "father of the Indian nuclear programme". He founded key research institutions, including the Tata Institute of Fundamental Research (TIFR) and the Atomic Energy Establishment, Trombay (AEET), now named the Bhabha Atomic Research Centre (BARC) in his honor. A Cambridge-educated visionary, he championed India's self-reliance in nuclear energy, initiating its three-stage nuclear power program.
बहुत बड़ी कीमत चुकायी है देश ने इस बाबर बंशी मियां नेहरू,नकली गाँधी परिवार की वजह से.🤔😷😡
इसके बाद भी हिंदुस्तान की जनता की आंखें नहीं खुल रही हैं विशेष कर सनातनी हिंदू असावधान भाइयों की।
राजीव खान गांधी,Antonia, राउल विंची कोढ़ उर्फ पप्पू, अमिताभ श्रीवास्तव बच्चन परिवार ने कैसे भारतीय सेना के संसाधनों INS Vikrant जैसे युद्ध पोत, , सेना की जहाजों का छुट्टियां , पिकनिक, व्यक्तिगत अय्याशी,एशो आराम, चुनाव तक में दुरुपयोग किया हर हिन्दू को हर भारतीय को सत्य समझना चाहिए
एक चुड़ैल Antonio Maino आज भी भारत के टुकड़े करने में षड्यंत्र कर रही है वह है एंटोनिया माइनो उसका नाजायज कपूत पप्पू खान गांडी,पिंकी खान वाड्रा, रॉबर्ट वाड्रा सब के सब लुटेरे, हत्यारे, ड्रामा बाज ,अय्याश नित नए प्रोपगेंडा भड़काना बवाल मचाना । हर हिन्दू को इस गद्दार नकली परिवार से सावधान रहना चाहिए, #कांग्रेस_मुक्तहो_अपनाभारत✊✊
मोदीजी का दृढ़ निश्चय है की
भारतीय सेना, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान को मजबूत बनाना,साथ ही देश में इंफ्रास्ट्रक्चर ~निर्माण, संसाधनों का उपयोग कर भारत को भारतीयों को आत्म निर्भर बनाए। जिसमें देश के हर सदस्य का सहयोग अपेक्षित है।
अपने देश अपने सनातन से प्यार करें।
Keep open your eyes 👀 Love you nation Bharat ⛳
#NationFirst ♥️🚩🇮🇳
।
Raveena Zen Raunak Jain