शुक्रवार, 12 जून 2026

मेरा भारत महान

कई पश्चिमी देश भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से ईर्ष्या क्यों करते हैं?

क्योंकि जो चीज़ अमेरिका या यूरोप में विलासिता मानी जाती है, वह भारत में बुनियादी, किफ़ायती और आसानी से उपलब्ध है।

1. सुबह 7 बजे तक आपके दरवाज़े पर रोज़ाना अख़बार — यह कोई महँगी विलासिता नहीं, बल्कि एक आम बात है।

2. सिर्फ़ ₹500/- महीने में 300 से ज़्यादा TV चैनल + कम क़ीमत वाले OTT — मनोरंजन के लिए जेब खाली करने की ज़रूरत नहीं।

3. पूरे देश में तेज़ रफ़्तार 5G इंटरनेट सिर्फ़ ~₹300/- महीने में — दुनिया का सबसे सस्ता डेटा, बड़े पैमाने पर उपलब्ध।

4. बड़े शहरों में विश्व-स्तरीय हवाई अड्डे — साफ़-सुथरे, आधुनिक और तेज़ी से विकसित होते हुए।

5. किराने का सामान और ज़रूरी चीज़ें 10-20 मिनट में आपके दरवाज़े पर — दुनिया में कहीं और ऐसी सुविधा नहीं।

6. बिना लंबी वेटिंग लिस्ट के डॉक्टर उपलब्ध — उसी दिन सलाह लें, अक्सर बिना अपॉइंटमेंट के भी।

7. घर पर ही सैंपल कलेक्शन और डायग्नोस्टिक टेस्ट, कम क़ीमत पर — स्वास्थ्य सेवाएँ सभी की पहुँच में।

8. कपड़े धोने/इस्त्री करने की सेवाएँ आपके दरवाज़े पर, जेब के अनुकूल दरों पर — विदेशों में यह विलासिता है, यहाँ एक आम बात।

9. किफ़ायती घरेलू मदद — नौकरानी, रसोइया, ड्राइवर और बच्चों की देखभाल के लिए सहायक — जो ज़िंदगी को आसान बनाते हैं।

10. हर सुबह 5 बजे ताज़ा दूध की डिलीवरी — सीधे आपके दरवाज़े पर।

11. रेस्टोरेंट में मुफ़्त पानी + हर जगह सस्ती बोतलबंद पानी — बुनियादी चीज़ों के लिए कोई शुल्क नहीं।

12. कहीं भी UPI से पेमेंट, यहाँ तक कि ₹5 के लिए भी — तुरंत, हर जगह मान्य, डिजिटल-फ़र्स्ट अर्थव्यवस्था।

13. मुक़दमेबाज़ी के डर वाला माहौल नहीं — रिश्तेदार छोटी-मोटी बातों पर एक-दूसरे पर मुक़दमा नहीं करते।

14. अगर आप भौतिक चीज़ों की अंधी दौड़ से दूर रहें, तो ज़िंदगी ज़्यादा शांत होती है — गला-काट प्रतिस्पर्धा के बजाय आपसी मेलजोल और अपनापन।

15. बच्चों के लिए किफ़ायती स्कूली शिक्षा और अंधाधुंध गोलीबारी (गन वायलेंस) का कोई डर नहीं।

16. मौसम आमतौर पर सुहावना रहता है; भूकंप, तूफ़ान या लू लगने का डर बहुत कम होता है।

17. ट्रेन, ऑटो/टैक्सी और अन्य परिवहन के साधन बहुत सस्ते हैं, साथ ही कनेक्टिविटी भी बेहतरीन है।

18. डाकघर की सेवाएँ भी किफ़ायती दरों पर उपलब्ध हैं।

19. मुंबई मेट्रो में 'डब्बावालों' की सटीक और भरोसेमंद सेवा।

20. पूरे साल कई रंग-बिरंगे त्योहार और धार्मिक उत्सव मनाए जाते हैं।

भारत शायद हर जगह पूरी तरह साफ़-सुथरा न हो — यह शायद हर तरह से 'परफ़ेक्ट' न हो — लेकिन यहाँ ज़िंदगी बिताना बेहद सुखद और शानदार है।

किफ़ायती, सुविधाजनक, आपस में जुड़ा हुआ और मानवीय!
भारत सिर्फ़ एक देश नहीं है — यह एक आरामदायक जीवनशैली है। आप आध्यात्मिक रूप से विकसित होते हैं।

देश का विशाल आकार और विविधता घूमने के लिए ढेरों जगहें प्रदान करती है।
यह हमारा अपना देश है — हमारी धरती।

(साभार)

गुरुवार, 11 जून 2026

लाल किला या लाल महल

#लाल_किले_का_सच...

अक्सर हमें यह पढाया जाता है कि दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ ने बनवाया था। लेकिन कहीं यह एक सफ़ेद झूठ तो नहीं। दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ के जन्म से सैकड़ों वर्ष पूर्व “महाराज अनंगपाल तोमर द्वितीय” द्वारा दिल्ली को बसाने के क्रम में ही बनाया गया था। इस क्रम में एक विशेष बात यह ज्ञात होती है कि महाराज अनंगपाल तोमर कोई और नहीं बल्कि महाभारत के अभिमन्यु के वंशज तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान के नाना जी थे।

लाल किले का असली नाम #लाल_कोट है, जिसे महाराज अनंगपाल द्वितीय द्वारा सन 1060 ईस्वी में दिल्ली शहर को बसाने के क्रम में ही बनवाया गया था जबकि शाहजहाँ का जन्म ही उसके सैकड़ों वर्ष बाद 1592 ईस्वी में हुआ है। दरअसल शाहजहाँ ने लाल किला को बनाया या बसाया नहीं अपितु इसे बुरी तरह से नष्ट करने की असफल कोशिश की थी ताकि, लालकिला स्वयं उसके द्वारा बनाया साबित हो सके। लेकिन सच सामने आ ही जाता है।

साक्ष-परीक्षा:

इसका सबसे बड़ा प्रमाण तो यही है कि तारीखे फिरोजशाही के पृष्ट संख्या 160 (ग्रन्थ 3) में लेखक लिखता है कि सन 1296 के अंत में जब अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना लेकर दिल्ली आया तो वो कुश्क- ए- लाल (लाल प्रासाद/महल) की ओर बढ़ा और वहां उसने आराम किया।

सिर्फ इतना ही नहीं अकबरनामा में इस बात के वर्णन हैं कि महाराज अनंगपाल ने ही एक भव्य और आलिशान दिल्ली का निर्माण करवाया था।

शाहजहाँ से 250 वर्ष पूर्व ही 1398 ईस्वी में एक अन्य जेहादी तैमूरलंग ने भी पुरानी दिल्ली का उल्लेख किया हुआ है (जो कि शाहजहाँ द्वारा बसाई बताई जाती है)।

यहाँ तक कि लाल किला के एक खास महल मे सुअर (वराह) के मुँह वाले चार नल अभी भी लगे हुए हैं। इस्लाम मे सुअर हराम है। इनका यहां क्या काम? वराह विष्णु अवतार का प्रतीक चिन्ह है सनातन के प्रमाण?

ऐसे किले के एक द्वार पर बाहर हाथी की मूर्ति अंकित है क्योंकि राजपूत राजा गजो (हाथियों) के प्रति अपने प्रेम के लिए विख्यात थे जबकि इस्लाम जीवित प्राणी के मूर्ति का विरोध करता है।

लाल किले का सच:

यही नहीं लाल किला के दीवाने खास मे केसर कुंड नाम से एक कुंड भी बना हुआ है। जिसके फर्श पर हिंदुओं के पूज्य कमल पुष्प अंकित है। साथ ही ध्यान देने योग्य बात यह है कि केसर कुंड एक हिंदू शब्दावली है। जो कि हमारे राजाओ द्वारा केसर जल से भरे स्नान कुंड के लिए प्राचीन काल से ही प्रयुक्त होती रही है।

उल्लेखनीय तथ्य ये है कि मुस्लिमों के प्रिय गुंबद या मीनार का इस महल में कोई अस्तित्व तक नही है।

लाल किला के दीवानेखास और दीवानेआम मे।

इतना ही नहीं दीवानेखास के ही निकट राजा की न्याय तुला अंकित है जो ब्राह्मणों द्वारा उपदेशित राजपूत राजाओ की न्याय तुला चित्र से प्रेरणा लेकर न्याय करना हमारे इतिहास मे प्रसिद्द है। दीवाने ख़ास और दीवाने आम की मंडप शैली पूरी तरह से 984 ईस्वी के अंबर के भीतरी महल (आमेर/पुराना जयपुर) से मिलती है जो कि राजपूताना शैली मे बना हुई है। आज भी लाल किला से कुछ ही गज की दूरी पर बने हुए देवालय हैं जिनमे से एक लाल जैन मंदिर और दूसरा गौरीशंकर मंदिर हैं और दोनो ही गैर मुस्लिम है जो कि शाहजहाँ से कई शताब्दी पहले राजपूत राजाओं के बनवाए हुए है।

शाहजहाँ या एक भी इस्लामी शिलालेख मे आखिर लाल किला का वर्णन क्यों नही मिलता है?

इतिहास में कहा गया, दिल्ली शाहजहाँ ने बसाई। किन्तु लालकिले के आसपास के घरों की निर्माण शैली राजपूताना में है।।ये कैसे सम्भव है कि शाहजहाँ ने सिर्फ लालकिला मुगल शैली में बनाया और बाकी नगर हिन्दू शैली में?

वास्तविकता ये है कि लाल किला और दिल्ली दोनो ही हिन्दू राजा अनंगपाल ने बनाया। 1060 ईसवी के आसपास।

“गर फ़िरदौस बरुरुए ज़मीं अस्त, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता”; अर्थात इस धरती पे अगर कहीं स्वर्ग है तो यही है, यही है, यही है। इस अनाम शिलालेख के आधार पर लाल किला को शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया करार दिया गया, जबकि पद्मावती का उल्लेख करते हुए शिलालेख को नकारकर पद्मावती को काल्पनिक बता दिया गया।

किसी अनाम शिलालेख के आधार पर कभी भी किसी को किसी भवन का निर्माणकर्ता नहीं बताया जा सकता और ना ही ऐसे शिलालेख किसी के निर्माणकर्ता होने का सबूत ही देते हैं।

लालकिले को एक हिन्दू प्रसाद साबित करने के लिए आज भी हजारों साक्ष्य मौजूद हैं। यहाँ तक कि लाल किला से सम्बंधित बहुत सारे साक्ष्य पृथ्वीराज रासो से ही मिलते है।

सरांस यही है कि लाल किले का निर्माण शाहजहाँ के द्वारा नहीं किया गया था बल्कि शाहजहाँ ने इस पूर्व महल में हेर फेर करके उसे अपना नाम देने कि कोशिश भर की थी। सत्य को अधिक दिनों तक छिपाया नही जा सकता, यह उक्ति यहाँ बखूबी लागु होती है।

स्रोत- प्रसिद्ध इतिहासकार पी. ऐन. ओक की किताब "इतिहास की भयंकर भूले से"...

#आर्यावर्त_का_अघोर_अतीत
#We_support_hindutava_unity

सुन्दर हाइकु

क्रोध

शर्मनाक कांग्रेस

एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया।

नेहरू ने श्रेय ले लिया,।
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया।

इतिहास की किताबें लिखती हैं— “नेहरू ने AIIMS बनाया”।
यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है।

Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।
AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।

AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने
ज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया—
जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।

वह ज़मीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होता

AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है।
यह ज़मीन:

न सरकार ने खरीदी,,,,,

न अधिग्रहित की,,,,,

यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी—
जो उन्होंने दान में दी।

आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है।
कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।

वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था,,,,

आज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।
कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे।

तब अमृत कौर ने:

न्यूज़ीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई

अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाया

उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था की

अगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की ज़रूरत ही क्यों पड़ती ?

वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रही

AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।

उन्होंने लड़ाई लड़ी:

अफ़सरशाही की सुस्ती से

मंत्रिमंडल की उदासीनता से

कांग्रेस की ढिलाई से

फाइलें चलीं क्योंकि उन्होंने ज़बरदस्ती चलवाईं।

नेहरू ने वास्तव में क्या किया ?

पहले से बने काम को मंज़ूरी दी

भाषण दिए

फीते काटे

इसे संस्थान-निर्माण नहीं कहते।
इसे ऑप्टिक्स कहते हैं।

कांग्रेस ने उन्हें क्यों भुला दिया ?

क्योंकि यह सच तीन मिथक तोड़ देता है:

कांग्रेस ने भारत बनाया

नेहरू ने संस्थान खड़े किए

सत्ता = योगदान

AIIMS इन सबका उलटा प्रमाण है।

एक शाही महिला ने
अपनी विरासत जनस्वास्थ्य के लिए कुर्बान कर दी।
कांग्रेस ने श्रेय हड़प लिया।

हकीकत

AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने सिर्फ़ नामपट्टिका लगाई।

बलिदान किसी और का।
इश्तिहार कांग्रेस का.

निचले स्तर का भ्र्ष्टाचार

नाली के कीड़े कॉकरोच

कॉकरोच पार्टी में थोड़े बहुत लोग अच्छे भी है या फिर सब के सब मीठे और समलैंगिक ही भरे पड़े है ? मेरी मोदी सरकार से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि इन मानसिक बीमार लोगों का दिल्ली के किसी अच्छे हॉस्पिटल में भर्ती करवाये ये हमारे जैसे ही शस्त्रधारी लोग है बस रास्ता भटक गए है

ये किसी इल्यूजन (भ्रम ) में फंसे हुए है इन्हें बढ़िया से ट्रीटमेंट दिलवाए और किसी के घर का चिराग़ बुझने से बचाए यही राष्ट्र हित होगा अब देश को बचाने के लिए मीठे लोग आ रहे है तब देश तो क्या ही बचना है हमे उन लोगों को बचाना है जो इनके संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते है

एक कॉकरोच हाथ में डायरी लेकर कहा रहा था ये हमारा संविधान है जब पत्रकार ने खोलकर दिखाने के लिए कहा तो कुछ नोट बनाकर घूम रहा है मतलब ये अपना ही संविधान बनकर घूम रहे है और बाबा साहब के संविधान को कचरे में फेंकना चाहते है

एक कॉकरोच तो सीधे हाई कोर्ट से आया हुआ था जब पत्रकार ने कहा आप तो कानून के रक्षक है फिर आप संविधान बचाने कैसे आए हुए थे तब कॉकरोच ने कहा आगे की बात ये भाईसाहब बताएंगे पत्रकार ने कहा नहीं आप ही बताइए तो 

कहने लगा कि मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है बताओ अब ऐसे वकीलों बाला कोर्ट पहन कर फर्जी वकील बनकर जनता को गुमराह कर रहे है वकीलों को इस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करवानी चाहिएं इस तरह तो ये कॉकरोच वकीलों का नाम ही खराब कर के रख देंगे

एक कॉकरोच ने तो सीधे सीधे व्यपारियों से ही अपील कर डाली कि सरकार को टैक्स मत भरो सरकार अपने आप दबाव में आ जाएगी मतलब कॉकरोच पार्टी के नाम पर कुछ भी चल रहा है इनके पास कोई नया विजन नहीं है ये सब वही लोग है जो हर आंदोलन में अपना खर्चा पानी लेकर निकल जाते है महीने दो महीने इनका भी रोजगार चल निकलता है

अब वामपंथी भी आकर अपना समर्थन दे दिए है मतलब ये सब वही फूंकी हुई झालर के बल्व है बस नई पैकेजिंग में आई है इनके बारे है गोदी मीडिया मुर्दाबाद ले के रहेंगे आजादी  मोदी शाह इस्तीफा दें मतलब कुछ भी ? किसी बात में कोई लॉजिक तो होना चाहिए कि नहीं ?

मेरा भारत महान

कई पश्चिमी देश भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से ईर्ष्या क्यों करते हैं? क्योंकि जो चीज़ अमेरिका या यूरोप में विलासिता मानी जाती है, वह भारत म...