सोमवार, 16 मार्च 2026

मोदीजी हैं तो मुमकिन है

......आज से 25-30 साल बाद...जब दुनिया का इतिहास लिखा जाएगा...उस समय के नेता जब  दुनिया मे कूटनीति का उदाहरण देंगे...तब ये बताया और पढाया जाएगा कि....

* जब Strait Of Hormuz के एक तरफ के देश...सऊदी अरब...कुवैत...UAE...बहरीन....दूसरी तरफ के देश...ईरान के साथ युद्ध लड़ रहे थे...और Strait Of Hormuz से कोई जहाज नहीं निकल पा रहा था....तब दुनिया मे एक नेता था....जो अपने देश के लिए...अरब...UAE और कुवैत से तेल और गैस खरीद रहा था....और ईरान उसके जहाज को Strait Of Hormuz से सुरक्षित निकाल रहा था.

* जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा था...तब दुनिया मे एक नेता ऐसा था...जो यूक्रेन से अपने देशवासियों को सुरक्षित निकाल रहा था...और रूस ने सिर्फ उसके लिए युद्ध रोक दिया था.

* जब रूस यूक्रेन युद्ध की वजह से अमेरिका और यूरोप ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए थे.....तब दुनिया मे एक ऐसा नेता था....जो रूस से तेल खरीद रहा था....और यूरोप को बेच रहा था...ताकि उनकी ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकें.

* जब फिलिस्तीन और इजराइल मे युद्ध चल रहा था....तब दुनिया मे एक ऐसा नेता था....जिसे फिलिस्तीन और इजराइल दोनों ने अपना सर्वोच्च सम्मान दिया.

* जब अमेरिका- यूरोप...और...रूस- चीन एक दूसरे के दुश्मन थे...तब दुनिया मे एक ऐसा नेता था...जो रूस से भी मजबूत दोस्ती रखता था...अमेरिका से भी मजबूत दोस्ती रखता था...और यूरोप और चीन से भी व्यापार कर रहा था.

* उस नेता का नाम नरेंद्र मोदी था....और वो भारत के प्रधानमंत्री थे.....जिन्होंने 20 साल (2014-2034) तक भारत की सेवा की...और उनके शासन में भारत दुनिया का सबसे चहेता देश था....जिससे सब दोस्ती करना चाहते थे.

नमो नमः 🙏🚩
Nation First 🇮🇳🚩

रविवार, 1 मार्च 2026

अगर - मगर न होता तो

कांग्रेसी नेता राजीव शुक्ला ने कहा था कि नरेंद्र मोदी ''अगर '' प्रधानमंत्री नहीं होते तो अमेरिका उन्हें अपने यहां कभी नहीं बुलाता....!!

माननीय शुक्ला जी और कांग्रेसियों अब मैं तुम्हे इस   "अगर"   की कहानी सुनाता हूँ...

1)  अगर राहुल गांधी, सोनिया का बेटा नहीं होता तो आज किसी 0ffice में चपरासी होता...!!😂😂

2) अगर सोनिया राजीव की पत्नी नहीं होती तो यूरोप के किसी बार की रिटायर्ड बार बाला होती...!!😂😂

3) अगर राजीव , इंदिरा गांधी का बेटा नहीं होता तो एक ''पायलट'' ही रह कर दिन गुजारता...!!😂😂

4) अगर इंदिरा गांधी , नेहरू की बेटी न होती , तो एक सामान्य गृहिणी बनी रहती...!!😂😂
 5) अगर गांधी - नेहरू ने जिन्ना के साथ मिलकर सत्ता के लालच में भारत की जनता से गद्दारी न की होती आज अखंड भारत एक होता....!!. 😂😂

6) “अगर " नेहरू बेइमानी करके सरदार वल्लभ भाई पटेल की जगह प्रधानमंत्री नहीं बनता तो आज चीन इतना प्रभावी नही होता , और न ही पाकिस्तान का जन्म होता , न ही ये कश्मीर समस्या होती...!!😂😂

   7) और "अगर " ये कांग्रेस ही नहीं होती , तो फिर ये नकली गांधी परिवार भी नहीं होता. पूरा देश इन गद्दारों और घोटालेबाजों के चंगुल में फंसकर भाई-भतीजा वाद और साम्प्रदायिक हिंसा में बर्बाद न हुआ होता. बल्कि भारत विश्व के समस्त देशों का सरताज  होता...!!😂😂

   "राजीव शुक्ला जी...." 
“अगर " नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं होते तो अमेरिका के प्रमुख की आंखों में आंखें मिला कर बात करने वाला भारत का और कोई प्रधानमंत्री नहीं होता...!! 😂😂

जय हिन्द__जय भारत 🙏🏼🙏🏼

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

जतीन्द्र नाथ मुखर्जी / बाघा जतिन

उस दिन अगर वो गद्दारी न हुई होती... तो 1915 में ही हम आज़ाद हो गए होते और 'राष्ट्रपिता' ये व्यक्ति होता 👇!"
खून खौल उठता है यह सोचकर कि जिस शेर ने अकेले दम पर रॉयल बंगाल टाइगर के जबड़े फाड़ दिए थे, उसे हम हिंदुस्तानियों ने ही अकेला छोड़ दिया। हम 1947 की आज़ादी की सालगिरह मनाते हैं, लेकिन उस 10 सितंबर 1915 की उस काली दोपहर को भूल गए, जब एक महानायक का सपना अपनों की ही मुखबिरी की भेंट चढ़ गया।
आज दिल बहुत भारी है यह सोचकर कि हमारे देश का इतिहास कितना अलग होता, अगर उस दिन अपनों ने ही पीठ में छुरा न घोंपा होता। हम 1947 की आजादी का जश्न मनाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक शख्स ऐसा भी था जिसने 1915 में ही भारत को आजाद कराने का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया था।
​मैं बात कर रहा हूँ जतीन्द्रनाथ मुखर्जी की, जिन्हें दुनिया 'बाघा जतिन' के नाम से जानती है।

​सोचिए, वो कैसा फौलादी इंसान रहा होगा जिसने बिना किसी बंदूक के, सिर्फ एक छोटी सी खुखरी से रॉयल बंगाल टाइगर को ढेर कर दिया था। लेकिन उनका असली मुकाबला उन 'सफेद भेड़ियों' से था जिन्होंने हमारी मां भारती को जकड़ रखा था। जतिन दा का एक ही मंत्र था "देश के लिए मरना सीखो, ताकि देश जी सके।"
​मुझे उनकी वो बातें आज भी झकझोर देती हैं
​साहस का वो मंजर जब अंग्रेजों ने गाड़ी की छत पर बैठकर भारतीय महिलाओं का अपमान किया, तो जतिन दा अकेले उन पर टूट पड़े और तब तक मारा जब तक कि अंग्रेज पैरों में नहीं गिर गए। उस दौर में, जहाँ लोग अंग्रेजों के साये से डरते थे, जतिन दा उन्हें बीच सड़क पर पीट दिया करते थे।
​विवेकानंद का वो प्रभाव जो स्वामी जी ने उन्हें सिखाया था कि लोहे की मांसपेशियों में ही वज्र जैसा संकल्प रहता है। और जतिन दा ने उसे जी कर दिखाया।
​गद्दारी की वो चोट जब उन्होंने जर्मनी से हथियार मंगाकर पूरे देश में एक साथ बगावत की योजना बनाई थी। चेक जासूस रॉस हेडविक ने खुद लिखा था कि अगर वह प्लान कामयाब हो जाता, तो आज राष्ट्रपिता बाघा जतिन होते। पर अफ़सोस, एक गद्दार की मुखबिरी ने हमें 32 साल और गुलामी की आग में झोंक दिया।
​10 सितंबर 1915 को जब उन्होंने अस्पताल में आखिरी सांस ली, तो उनका शरीर गोलियों से छलनी था, लेकिन चेहरे पर हार का गम नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति समर्पण की चमक थी।आज समय है यह पूछने का कि क्या हमारी देशभक्ति सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी के स्टेटस तक सीमित है? बाघा जतिन और उनके साथियों ने जब बूढ़ी बालम की तट पर आखिरी गोलियां झेली थीं, तो उनके सामने कोई निजी स्वार्थ नहीं था। उन्हें पता था कि वह शाम उनकी आखिरी शाम है, फिर भी उन्होंने समर्पण के बजाय संघर्ष को चुना।
इतिहास गवाह है कि हम दुश्मनों से कभी नहीं हारे, हम तब-तब हारे जब घर के ही किसी भेदी ने दरवाज़ा खोल दिया। आज बाघा जतिन को सच्ची श्रद्धांजलि यह नहीं होगी कि हम उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाएं, बल्कि यह होगी कि:
हम अपने इतिहास के उन विस्मृत नायकों (Forgotten Heroes) को पहचानें।
राष्ट्रहित को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर रखें, ताकि फिर कभी कोई 'मुखबिरी' किसी क्रांतिकारी के सपने को न कुचल सके।
अपनी आने वाली पीढ़ियों को बताएं कि आज़ादी केवल अहिंसा के चरखे से नहीं, बल्कि जतिन दा जैसे शेरों के लहू से भी सींची गई है।
याद रखिये, जो राष्ट्र अपने बलिदानियों को भूल जाता है, उसका भूगोल बदल जाता है। जतिन दा का शरीर उस दिन गोलियों से छलनी हुआ था, लेकिन उनकी रूह आज भी हर उस हिंदुस्तानी में ज़िंदा है जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का हौसला रखता है।
उठो! और अपने अंदर के उस 'बाघा' को जगाओ, जो देश के लिए मरने से पहले, देश के लिए जीना जानता हो।"
​आज जब हम आजादी की खुली हवा में सांस लेते हैं, तो एक पल के लिए रुक कर सोचिएगा जरूर... क्या हम उन बलिदानों के लायक बन पाए हैं? जतिन दा जैसे नायक इतिहास की किताबों के किसी कोने में खो गए हैं, लेकिन हमारे दिलों में उनकी मशाल जलती रहनी चाहिए।
​बाघा जतिन जैसे महान क्रांतिकारी के चरणों में मेरा कोटि-कोटि नमन।

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह

दोस्तों ज्ञानी जैल सिंह भारत के पूर्व राष्ट्रपति थे और उन्हें 
Z ±security मिली थी और अब उन्होंने दिल्ली में घोषणा कर दी की कल मैं चंडीगढ़ पहुंचने पर बोफोर्स धोटाले के सारे राज खोलने वाला हूं,,,,,,

 तो हुआ ये की दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर सामने से एक ट्रक आया और दनदनाता हुआ ज्ञानी जैलसिंह की कार को कुचल हुए आगे निकल गया और उनका वहीं रामनाम सत्य हो गया,,,,,,
और उस दुर्घटना की कोई जांच नहीं हुई,,,,,

दोस्तों एक बार राजेश पायलट ने कांग्रेस नेत्री की सलाह को ना मानते हुए एक घोषणा कर दी की कल मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद हेतु नामांकन भरूँगा,,,,,

बस फिर क्या था, सामने से एक बस आई और उनकी कार को लपेटती हुई चली गई और उनका वही रामनाम सत्य हो गया,,,,,

श्रीमन्त माधवराव शिन्दे (सिंधिया) को तो आप लोग जानते ही होंगे लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय वा कर्मठ नेता थे और वो लोकसभा के लिए लगातार 9वीं बार चुने गए थे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता भी थे,,,,,,

कांग्रेस राजमाता ने उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष को कहा की मैं प्रचार करने आ रही हूँ लेकिन प्रदेश अध्यक्ष निर्भीक था उसने कहा आप मत आइए बल्कि माधवराव जी को भेज दीजिए,,,,,

यहां वो ही वोट दिलवा सकते हैं बस फिर क्या था माधवराव जी को आदेश आया की आप अपने निजी विमान से ना जाकर इस दूसरे विमान से जाएंगे,,,,,,,

उस समय एक चश्मदीद किसान ने भी बयान दिया था विमान में पहले बम विस्फोट हुआ उसके बाद आग लगी और विमान में सवार आठों लोगों का रामनाम सत्य हो गया,,,,,,,

लेकिन इसकी कोई जांच नही हुई और थोड़े समय के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी रामनाम सत्य हुए पाए गए,,,,,

और क्रमशः इसी तरह से 1965 की लड़ाई के विजेता प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी,,डॉ होमी जहांगीर भाभा के साथ करीब 2500 से भी ज्यादा इसरो और डीआरडीओ के वैज्ञानिक और टॉप इंजीनियरों का भी बहुत ही संदेहपूर्ण स्थिति में रामनाम सत्य हो गया,,,,,जिसकी भी कोई जांच तक नही की गई,,,,

राजीव गांधी ने अपने जीवन काल मे टोटल 181 रैलिया की थीं और जिसमें से 180 रैलियों मे सोनिया गांधी भी उसके साथ थी बस उस 181वीं रैली मे वो राजीव गांधी के साथ नही थी,,,,
और उसी रैली मे उनका रामनाम सत्य हो गया,,,,,, 

 राजीव गांधी की हत्या के समय वहां मौजूद 14 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी मगर सबसे खास बात ये हुई की उन 14 मरने वालों मे एक भी कोंग्रेसी नेता नहीं था मतलब जो भी मरे वो आम लोग ही थे,,,, 

ऐसा कैसे हो सकता है की प्रधानमंत्री रैली कर रहा हो और पार्टी का अन्य कोई नेता वहां मौजूद ना हो,,,,,,,

राजीव गांधी के साथ बड़ा या छोटा कोई कांग्रेसी नेता नहीं मरा और ना ही सोनिया गांधी जो की हर सभा में राजीव गांधी जी के साथ रहतीं थीं और उस दिन होटल में सरदर्द के कारण रुक गईं थी 

अब ये संयोग हो सकता है लेकिन बात कुछ हजम नही होती,,,,,

और बाद में जब स्वयं प्रियंका गांधी ने अपने पिता राजीव के कातिल को कोर्ट में माफ करने की अपील कर दी थी,,,,
तब से बात और नही हजम हो रही,,,,,,

अब ये समझ लीजिए की जब से चमचों की राजमाता इस परिवार की बहू बनकर आई हैं तब से आज तक गांधी परिवार के एक भी सदस्य को प्राकृतिक मृत्यु का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है,,,,,

इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के ससुर कर्नल आनंद अपने ही फार्म हाउस के पास थोड़ी दूरी पर गोली लगने से मरे पाये गये थे,,

और संजय गांधी,,, बताओ हवाई जहाज से नीचे गिर गये और उनका रामनाम सत्य हो गया,,,,,,

अब इंदिरा गांधी का कैसे रामनाम सत्य हुआ वो तो सब जानते ही हैं,,,,

प्रियंका गांधी के ससुर राजेन्द्र वाड्रा दिल्ली के एक गेस्ट हाउस मे पाये गये उनका रामनाम सत्य हो गया था,,तथा ननद का जयपुर दिल्ली हाइवे में कार दुर्घटना में रामनाम सत्य हो गया और देवर मुरादाबाद के एक होटल में रामनाम सत्य हुआ पाया जाता है,,,,,

राजेश पायलट एक सड़क दुर्घटना में लपेट दिया जाता है और माधवराव सिंधिया जहाज दुर्घटना में लपेट दिए जाते है,,,,,,

अब इन सब बातों मे जो सबसे खास बात है वो ये है की जब संसद पर हमला होता है तो मां बेटे दोनो अनुपस्थित थे मतलब राहुल जी और सोनिया जी दोनो ने एक साथ छुट्टी मार दी और संसद मे नही गये,,,,,,,
अब मेरा कहने का मतलब ये कतई नही है की ये सब कांड किसी साजिश तहत हुए,,,, लेकिन बहुत गजब के संयोग बने थे,,,,,,

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मोदीजी हैं तो मुमकिन है

......आज से 25-30 साल बाद...जब दुनिया का इतिहास लिखा जाएगा...उस समय के नेता जब  दुनिया मे कूटनीति का उदाहरण देंगे...तब ये बताया और पढाया जाए...