सुनील जैन राना ब्लॉग स्पॉट
जियो और जीने दो एवं देशहित सर्व प्रथम।
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026
शनिवार, 31 जनवरी 2026
कठोर नियम बनें
BHU हों jNU या AMU
सभी में सब्सिडी से पढ़ाई रहे छात्र यदि एक बार से ज्यादा बार फेल होते हैं तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए. ऐसे छात्र ही बार बार फेल होकर राजनीती करने लगते हैं. मुफ्त पढ़ाई, मुफ्त कमरा लेकर वर्षो तक अड्डा जमाये रखते हैं. ऐसे छात्र ही कैम्पस में हंगामा मचाये रखते हैं. गुंडों को आमंत्रण देते हैं.
सरकार को नियमों में परिवर्तन कर कड़े नियम बनाने चाहिए.
बुधवार, 28 जनवरी 2026
कांग्रेस की चलबाज़ी
तब कांग्रेस का जगद्गुरु प्रेम और सम्मान कहां विलुप्त हो गया था...!!
कांग्रेसियों अपना कलंकित इतिहास देखो....!!
नवम्बर 2004 दिल्ली में मनमोहन सिंह की कठपुतली सरकार डोर सोनिया गांधी के साथ में तमिलनाडु में जयललिता की सरकार डोर सोनिया के हाथ में और सोनिया की डोर वेटिकन सिटी के साथ में और वेटिकन का लक्ष्य भारत का ईसाई करण करना और तमिलनाडु में ईसाई धर्म में धर्मांतरण के विरोधी कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी जितेन्द्र सरस्वती....!!
11 नवम्बर 2004 दीपावली का दिन हिन्दुओं का महत्वपूर्ण पर्व था त्रिकाल पूजा का अनुष्ठान चल रहा था रात्रि 11:35 पर तमिलनाडु की पुलिस शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती को अश्लील वीडियो देखने और हत्या का षड़यंत्र रचने के झूठे आरोप में अपमान जनक तरीके से गिरफ्तार करती है...!!
तब कांग्रेस का जगद्गुरु प्रेम एवम् सम्मान कहां विलुप्त हो गया था और वहीं जामा मस्जिद के इमाम के खिलाफ देश की कई अदालतों द्वारा गैर-जमानती वारंट के बावजूद उसे कभी हाथ नहीं लगाया गया....!!
यह है कांग्रेस की दोहरी चरित्र और ओछी मानसिकता ये सिर्फ संत के सम्मान का दिखावा कर रहे है और हिंदुओ को भड़का रहे हैं....!!
शनिवार, 24 जनवरी 2026
देश में जयचंद
ऐ हिन्दु सेकुलुरो तुमसे बेशर्म कोई जाति नही....!!
गजनवी के बारे मेँ पढकर ऐसा लगने लग गया कि ये कैसा धर्म है जो अपनी रक्षा स्वंय नही कर सकता, दोस्तो बुरा मत मानना हिन्दु धर्म कभी भी गलत का विरोध नही करता और न कभी किया भगवान और भाग्य के भरोसे बैठे रहते है, चंद वीर हिन्दु योद्धाओ को छोङकर किसी ने वीरता का कोई कार्य नही किया क्योकि दुसरो पर भरोसा करने वाला सदा रोया है...!!
आज जो हिन्दु सेकुलर है वो एक बार अफगानीस्तान जाये और अफगानिस्तान मेँ गजनी नामक स्थान पर जरुर जाये जहां हिन्दु औरतो की नीलाम हुंई थी, उस स्थान पर मुस्मानो ने एक स्तम्भ बना रखा है, जिस पर लिखा है दुख्तरे हिन्दोस्तान, नीलामे दो दीनार अर्थात इस जगह हिन्दुस्तानी औरते दो दो दीनार मेँ नीलामी हुंई अगर तब भी सेकुलरपन का कीङा नही नीकलता तो गजनवी का इतिहास पढ लेना जिसने हिन्दुओ को अपमानित करने के लिये सत्रह हमलो मेँ लगभग चार लाख हिन्दु औरते चंद सैनिको के बल पर पकङ कर गजनी ले गया, जो औरते अपने पतियो, भांईयो, पिता से बिलख बिलख कर अपनी रक्षा के लिए निवेदन कर रही थी लेकिन करोङो हिन्दुओ के बीच से मुठ्रठी भर मुस्लिम सैनिक भेङ बकरियो की तरह उठा कर ले गये, उनको बचाने न पति न भाई और न ही इस विशाल भारत के करोङो हिन्दु उनकी रक्षा के लिए आये नहीं....!!
महमुद गजनवी ने इन लङकियो औरतो को ले जाकर गजनवी के बाजार मे सामान की तरह बेँच डाला, विश्व के किसी वर्ग के साथ ऐसा अपमान नही हुआ जो हिन्दु वर्ग के साथ हुआ, अब इतिहास से सबक लेते हुए ये सोचना बंद कर दो कि जब अत्याचार बढेगा तब भगवान स्वंय उन्हे बचाने आयेँगे, क्योकि भगवान भी अव्यवहारिक अहिँसा का समर्थन करने वालो को नपुसंकता करार देते है क्योकि भगवान ने सभी अवतारो मेँ यही संदेश दिया है अपनी रक्षा स्वयं करो मैँ तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हे नेत्र दिए है गलत का विरोध करो मै सदैव तुम्हारे साथ खङा हूँ...!!
आज पुनः इतिहास हमारी परीक्षा ले रहा है और ये भी स्मरण रखो कि एक गाल पर कोई मारे तो दुसरा आगे करो ये कोई गीता या माहाभारत का उपदेश नही ये उन डरपोक कायरो का संदेश है जो खुद के हत्यारे भी है...!!
अब तो उठो जागो और अपने सनातन धर्म की रक्षा के लिये मैदान मे उतर कर सेवा रुपी आंदोलन शुरु करो, और अपने को या अपने अंदर कृष्ण और माहाराणा को जिँदा रखो न की अंहिषा के पुजांरियो को...!!
आमोद सिंह वत्स
सोमवार, 19 जनवरी 2026
नेहरू का जिन्ना प्रेम
मुंबई के बेहद पास मालाबार हिल जहां तमाम देशों के राजदूत आवास हैं, जहां मुख्यमंत्री निवास है, वहीं पर यह एक विशाल बंगला है जिसे कभी जिन्ना हाऊस कहा जाता था | यह बंगला मोहम्मद अली जिन्ना का मुंबई का निवास था!!
मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान चला गया, लेकिन जवाहरलाल नेहरू का जिन्ना प्रेम देखिए और आप इसे चाहे तो गूगल पर सर्च कर सकते हैं | जिन्ना के साथ अपने व्यक्तिगत प्रेम के कारण जवाहरलाल नेहरू ने इस बंगले को शत्रु संपत्ति घोषित नहीं किया ।
१९५५ में, एक कैबिनेट भाषण में जवाहरलाल नेहरूने सुझाव दिया कि इसे पाकिस्तान सरकार को दिया जाए, ताकि पाकिस्तान सरकार यहां मेरे प्रिय दोस्त जिन्ना की एक मेमोरियल बना सके।
लेकिन उनके ही कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल सकी। क्योंकि, उस समय सिर्फ दो मंत्रियों को छोड़कर पूरा मंत्रीमंडल इसके खिलाफ था | फिर नेहरू को लगा की कही बगावत न हो जाए इसलिए वह खामोश हो गए ।
मोहम्मद अली जिन्ना ने उस वक्त पाकिस्तान में भारत के राजदूत श्री. प्रकाश के जरिए मुंबई के अपने आलीशान बंगले को पाने के लिए कई चिट्ठियां जवाहरलाल नेहरू को लिखी |
हालांकि भारत के विदेश मंत्री और भारतीय उच्चायोग ने सुझाव दिया कि हवेली को १९५६ में पाकिस्तान को सौंप दिया जाए, लेकिन इस सुझाव पर विचार नहीं किया गया।
फिर इस बंगले का असली मालिक कौन है इस पर एक लंबा मुकदमा चला | इस मुकदमे में जिन्ना की बेटी देना वाडिया, पाकिस्तान सरकार और भारत सरकार तीनों शामिल थे | दीना वाडिया ने यह तर्क दिया की चूंकि, मोहम्मद अली जिन्ना खोजा मुस्लिम था इसलिए इस संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता और इस संपत्ति पर मेरा मालिकाना हक है क्योंकि मैं उसकी बेटी हूं | पाकिस्तान सरकार का यह तर्क था कि यह संपत्ति पाकिस्तान सरकार की है क्योंकि मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के नागरिक हैं |
उसके बाद मोदी सरकार आयी और मोदी सरकार ने एक शत्रु संपत्ति का विशेष एक्ट बनाकर इस बंगले का अधिग्रहण कर लिया और इसे विदेश मंत्रालय को सौंप दिया।
अब यह प्रॉपर्टी विदेश मंत्रालय की संपत्ति है ।
सोचिए भारत की सीमा के अंदर स्थित मोहम्मद अली जिन्ना के बंगले का अधिग्रहण भी मोदी सरकार ने किया किसी कांग्रेसी सरकार में यह हिम्मत नहीं थी कि जिन्ना के बंगले का अधिग्रहण कर सके ।
पोस्ट के लिए साभार
फोटो सोर्स: इंटरनेट
शुक्रवार, 16 जनवरी 2026
इतिहास का विनाश
भारत का पहला शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इतिहास को किस तरह भ्रष्ट किया और कैसे एक मुस्लिम परस्त इतिहास हमे परोसा गया, उसकी धज्जियां उड़ाने में सहयोग करे,,,,।।।
1) भारत का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू नही होता बल्कि सरयू तट से शुरू होता है जहाँ महर्षि मनु को अपने मनुष्य होने का ज्ञान हुआ और मानव सभ्यता विकसित हुई,,,,।
2) रामायण और महाभारत हिन्दुओ के धर्मग्रंथ हो सकते है मगर शैक्षिक रूप से ये भारत का इतिहास है, जिन्हें पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया,,,।
3) सिंध को अरबो ने जीता अवश्य था मगर बप्पा रावल ने उन्हें मार मार कर भगाया भी था, मगर सिर्फ अरबो की विजय पढ़ाई जाती है और बप्पा रावल को कहानी किस्सों के भरोसे छोड़ दिया जाता है,,।
4) व्यवस्था के अनुसार सम्राट पोरस ने सिकन्दर को रोका यह पढ़ाना आवश्यक नही था लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों को रोका ये बात याद से लिखी गयी,,,,।
5) बाबर से औरंगजेब तक हर बादशाह के लिये अलग अध्याय है जबकि मुगलो के इतिहास से हिंदुस्तान के वर्तमान को ज्यादा प्रभाव नही पड़ता।
6) मुगलो का 1707 तक का तो इतिहास बता दिया मगर बड़ी ही चतुराई से उसके बाद सीधे 1757 का प्लासी युद्ध लिखकर अंग्रेजो को ले आये। इतनी जल्दी क्या थी जनाब, जरा 1737 में पेशवा बाजीराव द्वारा मुगलो की धुलाई भी पढ़ा देते।
7) 1757 में मुगल सल्तनत का मराठा साम्राज्य में विलय हो गया था मगर जबरदस्ती उसका अंत 1857 मे पढ़ाया जाता है। 1757 से 1803 मुगल मराठा साम्राज्य के अधीन रहे और 1803 से 1857 अंग्रेजो के। 1757 के बाद कोई मुगल सल्तनत नही थी।
8) पानीपत में मराठो की हार हुई ठीक है मगर ये उनका अंतिम युद्ध नही था वे दोबारा खड़े हुए और अंग्रेजो को भी धो दिया, ये कब पढ़ाओगे? सिर्फ पानीपत पढ़ा दिया ताकि संदेश यह जाए कि हिन्दुओ ने हर युद्ध हारा है जबकि युद्ध के बाद महादजी सिंधिया ने अफगानों को जमकर कूटा था।
9) जितने कागज बलबन, फिरोजशाह तुगलक और बहलोल लोदी पर लिखने में बर्बाद किये उन कागजो पर महादजी सिंधिया, नाना फडणवीस और तुकोजी होल्कर का वर्णन होना चाहिए था।
10) भारत ब्रिटेन का गुलाम नही उपनिवेश था।
11) भारत 200 नही 129 वर्ष ब्रिटेन की कॉलोनी रहा, (1818 में मराठा साम्राज्य के पतन से 1947 में कांग्रेस शासन तक)।
12) आंग्ल मराठा युद्ध 1857 की क्रांति से भी बड़े थे इसलिए उनका विवरण पहले होना चाहिए मगर गायब है क्योकि बखान टीपू सुल्तान का करना था।
13) 1947 में 2 राष्ट्रों का उदय नही हुआ बल्कि एक ही का हुआ, हिंदुस्तान सदियों से उदित है और हमेशा रहेगा। ज्यादा सेक्युलर हो तो दूसरे आतंकी राष्ट्र की चिंता करो, नक्शे पर कुछ ही दिन का मेहमान है।
14) 1962 में भारत चीन से पराजित हुआ मगर 1967 में चीन को हराया भी, वो कौन पढ़ायेगा?
15) सामाजिक विज्ञान में एक पाठ आता है भारत और आतंकवाद, उसमे बड़े बड़े उदाहरण बताए जाते है मगर उनके पीछे का इस्लामिक कारण नही पढ़ाया जाता।
हमारी शिक्षा व्यवस्था बहुत ही रूढ़ हो चुकी है अतः आवश्यकता है ऐसे लोगो को जोड़ने की जो शिक्षा मंत्रालयों में कार्यरत हो, कार्यरत होने से ज्यादा वे भारतीय शिक्षा को लेकर सजग और तत्पर हो।
कृपया ऐसे व्यक्तियों तथा सभी मित्रों तक इस लेख को पहुचाने में हमारा सहयोग करे।
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