बुधवार, 17 जून 2026
रविवार, 14 जून 2026
ब्रह्माकुमारी आश्रम
*ब्रह्मकुमारीज़ जैसे हाइब्रिड मतों से सावधान ब्रह्मकुमारीज़ के कारण हिंदुओं को होने वाले 16 नुकसान* 👇
1. बिंदी/तिलक नहीं लगाने को कहते हैं (सिर मुंडवाकर रहने जैसा).
2. केवल सफ़ेद साड़ियाँ पहनने को कहते हैं (विधवा की तरह).
3. मंदिरों का प्रसाद नहीं खाने को कहते हैं।
4. हिंदू देवी-देवताओं को साधारण इंसान बताने की सोच।
5. शादी नहीं करने को प्रेरित करते हैं।
6. शादी होने पर भी संतान न पैदा करने की शिक्षा।
7. अगर बच्चे हों तो उन्हें शादी न करके संस्था का सदस्य बनाने का दबाव।
8. शिवलिंग पर LED बल्ब लगाकर केवल बल्ब की पूजा करने जैसी विचित्र प्रथाएँ।
9. पति-पत्नी को भाई-बहन की तरह संबोधित करने को कहना; कुछ लोग राखी तक बाँधते हैं।
10. यह प्रचार करना कि श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश नहीं दिया।
11. मंदिरों में स्टॉल लगाकर “सबका भगवान एक ही है” कहना और हिंदुओं को अज्ञानी बताना।
12. चर्च और मस्जिद जाने वालों को ज्ञान न देने की बात, यह कहकर कि उनके पास पहले से ज्ञान है।
13. व्यास, वशिष्ठ जैसे ऋषियों को अज्ञानी कहना।
14. यीशु और मोहम्मद जैसे पैग़म्बरों को धर्मात्मा बताना।
15. इस्लाम की तरह “सृष्टि नहीं, सृष्टिकर्ता की पूजा करो” का प्रचार।
16. सबसे बढ़कर – बिना किसी प्रमाणिक ग्रंथ या शास्त्र के मनगढ़ंत व्याख्याएँ और उपदेश देना इनका एजेंडा है।
यही हैं → ब्रह्मकुमारीज़ नाम की हिंदू-विरोधी संस्था, जो हमारे हिंदू समाज में ज़हर घोलने का काम कर रही है।
सच्चाई कड़वी ही होती है।
फिर दोहरा रहा हूँ — हिंदुओं को निर्बल बनाकर पाखंडी मतों की मदद करने वाली कई व्यवस्थाओं में ये भी एक हैं।
शनिवार, 13 जून 2026
शुक्रवार, 12 जून 2026
मेरा भारत महान
कई पश्चिमी देश भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से ईर्ष्या क्यों करते हैं?
क्योंकि जो चीज़ अमेरिका या यूरोप में विलासिता मानी जाती है, वह भारत में बुनियादी, किफ़ायती और आसानी से उपलब्ध है।
1. सुबह 7 बजे तक आपके दरवाज़े पर रोज़ाना अख़बार — यह कोई महँगी विलासिता नहीं, बल्कि एक आम बात है।
2. सिर्फ़ ₹500/- महीने में 300 से ज़्यादा TV चैनल + कम क़ीमत वाले OTT — मनोरंजन के लिए जेब खाली करने की ज़रूरत नहीं।
3. पूरे देश में तेज़ रफ़्तार 5G इंटरनेट सिर्फ़ ~₹300/- महीने में — दुनिया का सबसे सस्ता डेटा, बड़े पैमाने पर उपलब्ध।
4. बड़े शहरों में विश्व-स्तरीय हवाई अड्डे — साफ़-सुथरे, आधुनिक और तेज़ी से विकसित होते हुए।
5. किराने का सामान और ज़रूरी चीज़ें 10-20 मिनट में आपके दरवाज़े पर — दुनिया में कहीं और ऐसी सुविधा नहीं।
6. बिना लंबी वेटिंग लिस्ट के डॉक्टर उपलब्ध — उसी दिन सलाह लें, अक्सर बिना अपॉइंटमेंट के भी।
7. घर पर ही सैंपल कलेक्शन और डायग्नोस्टिक टेस्ट, कम क़ीमत पर — स्वास्थ्य सेवाएँ सभी की पहुँच में।
8. कपड़े धोने/इस्त्री करने की सेवाएँ आपके दरवाज़े पर, जेब के अनुकूल दरों पर — विदेशों में यह विलासिता है, यहाँ एक आम बात।
9. किफ़ायती घरेलू मदद — नौकरानी, रसोइया, ड्राइवर और बच्चों की देखभाल के लिए सहायक — जो ज़िंदगी को आसान बनाते हैं।
10. हर सुबह 5 बजे ताज़ा दूध की डिलीवरी — सीधे आपके दरवाज़े पर।
11. रेस्टोरेंट में मुफ़्त पानी + हर जगह सस्ती बोतलबंद पानी — बुनियादी चीज़ों के लिए कोई शुल्क नहीं।
12. कहीं भी UPI से पेमेंट, यहाँ तक कि ₹5 के लिए भी — तुरंत, हर जगह मान्य, डिजिटल-फ़र्स्ट अर्थव्यवस्था।
13. मुक़दमेबाज़ी के डर वाला माहौल नहीं — रिश्तेदार छोटी-मोटी बातों पर एक-दूसरे पर मुक़दमा नहीं करते।
14. अगर आप भौतिक चीज़ों की अंधी दौड़ से दूर रहें, तो ज़िंदगी ज़्यादा शांत होती है — गला-काट प्रतिस्पर्धा के बजाय आपसी मेलजोल और अपनापन।
15. बच्चों के लिए किफ़ायती स्कूली शिक्षा और अंधाधुंध गोलीबारी (गन वायलेंस) का कोई डर नहीं।
16. मौसम आमतौर पर सुहावना रहता है; भूकंप, तूफ़ान या लू लगने का डर बहुत कम होता है।
17. ट्रेन, ऑटो/टैक्सी और अन्य परिवहन के साधन बहुत सस्ते हैं, साथ ही कनेक्टिविटी भी बेहतरीन है।
18. डाकघर की सेवाएँ भी किफ़ायती दरों पर उपलब्ध हैं।
19. मुंबई मेट्रो में 'डब्बावालों' की सटीक और भरोसेमंद सेवा।
20. पूरे साल कई रंग-बिरंगे त्योहार और धार्मिक उत्सव मनाए जाते हैं।
भारत शायद हर जगह पूरी तरह साफ़-सुथरा न हो — यह शायद हर तरह से 'परफ़ेक्ट' न हो — लेकिन यहाँ ज़िंदगी बिताना बेहद सुखद और शानदार है।
किफ़ायती, सुविधाजनक, आपस में जुड़ा हुआ और मानवीय!
भारत सिर्फ़ एक देश नहीं है — यह एक आरामदायक जीवनशैली है। आप आध्यात्मिक रूप से विकसित होते हैं।
देश का विशाल आकार और विविधता घूमने के लिए ढेरों जगहें प्रदान करती है।
यह हमारा अपना देश है — हमारी धरती।
गुरुवार, 11 जून 2026
लाल किला या लाल महल
#लाल_किले_का_सच...
अक्सर हमें यह पढाया जाता है कि दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ ने बनवाया था। लेकिन कहीं यह एक सफ़ेद झूठ तो नहीं। दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ के जन्म से सैकड़ों वर्ष पूर्व “महाराज अनंगपाल तोमर द्वितीय” द्वारा दिल्ली को बसाने के क्रम में ही बनाया गया था। इस क्रम में एक विशेष बात यह ज्ञात होती है कि महाराज अनंगपाल तोमर कोई और नहीं बल्कि महाभारत के अभिमन्यु के वंशज तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान के नाना जी थे।
लाल किले का असली नाम #लाल_कोट है, जिसे महाराज अनंगपाल द्वितीय द्वारा सन 1060 ईस्वी में दिल्ली शहर को बसाने के क्रम में ही बनवाया गया था जबकि शाहजहाँ का जन्म ही उसके सैकड़ों वर्ष बाद 1592 ईस्वी में हुआ है। दरअसल शाहजहाँ ने लाल किला को बनाया या बसाया नहीं अपितु इसे बुरी तरह से नष्ट करने की असफल कोशिश की थी ताकि, लालकिला स्वयं उसके द्वारा बनाया साबित हो सके। लेकिन सच सामने आ ही जाता है।
साक्ष-परीक्षा:
इसका सबसे बड़ा प्रमाण तो यही है कि तारीखे फिरोजशाही के पृष्ट संख्या 160 (ग्रन्थ 3) में लेखक लिखता है कि सन 1296 के अंत में जब अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना लेकर दिल्ली आया तो वो कुश्क- ए- लाल (लाल प्रासाद/महल) की ओर बढ़ा और वहां उसने आराम किया।
सिर्फ इतना ही नहीं अकबरनामा में इस बात के वर्णन हैं कि महाराज अनंगपाल ने ही एक भव्य और आलिशान दिल्ली का निर्माण करवाया था।
शाहजहाँ से 250 वर्ष पूर्व ही 1398 ईस्वी में एक अन्य जेहादी तैमूरलंग ने भी पुरानी दिल्ली का उल्लेख किया हुआ है (जो कि शाहजहाँ द्वारा बसाई बताई जाती है)।
यहाँ तक कि लाल किला के एक खास महल मे सुअर (वराह) के मुँह वाले चार नल अभी भी लगे हुए हैं। इस्लाम मे सुअर हराम है। इनका यहां क्या काम? वराह विष्णु अवतार का प्रतीक चिन्ह है सनातन के प्रमाण?
ऐसे किले के एक द्वार पर बाहर हाथी की मूर्ति अंकित है क्योंकि राजपूत राजा गजो (हाथियों) के प्रति अपने प्रेम के लिए विख्यात थे जबकि इस्लाम जीवित प्राणी के मूर्ति का विरोध करता है।
लाल किले का सच:
यही नहीं लाल किला के दीवाने खास मे केसर कुंड नाम से एक कुंड भी बना हुआ है। जिसके फर्श पर हिंदुओं के पूज्य कमल पुष्प अंकित है। साथ ही ध्यान देने योग्य बात यह है कि केसर कुंड एक हिंदू शब्दावली है। जो कि हमारे राजाओ द्वारा केसर जल से भरे स्नान कुंड के लिए प्राचीन काल से ही प्रयुक्त होती रही है।
उल्लेखनीय तथ्य ये है कि मुस्लिमों के प्रिय गुंबद या मीनार का इस महल में कोई अस्तित्व तक नही है।
लाल किला के दीवानेखास और दीवानेआम मे।
इतना ही नहीं दीवानेखास के ही निकट राजा की न्याय तुला अंकित है जो ब्राह्मणों द्वारा उपदेशित राजपूत राजाओ की न्याय तुला चित्र से प्रेरणा लेकर न्याय करना हमारे इतिहास मे प्रसिद्द है। दीवाने ख़ास और दीवाने आम की मंडप शैली पूरी तरह से 984 ईस्वी के अंबर के भीतरी महल (आमेर/पुराना जयपुर) से मिलती है जो कि राजपूताना शैली मे बना हुई है। आज भी लाल किला से कुछ ही गज की दूरी पर बने हुए देवालय हैं जिनमे से एक लाल जैन मंदिर और दूसरा गौरीशंकर मंदिर हैं और दोनो ही गैर मुस्लिम है जो कि शाहजहाँ से कई शताब्दी पहले राजपूत राजाओं के बनवाए हुए है।
शाहजहाँ या एक भी इस्लामी शिलालेख मे आखिर लाल किला का वर्णन क्यों नही मिलता है?
इतिहास में कहा गया, दिल्ली शाहजहाँ ने बसाई। किन्तु लालकिले के आसपास के घरों की निर्माण शैली राजपूताना में है।।ये कैसे सम्भव है कि शाहजहाँ ने सिर्फ लालकिला मुगल शैली में बनाया और बाकी नगर हिन्दू शैली में?
वास्तविकता ये है कि लाल किला और दिल्ली दोनो ही हिन्दू राजा अनंगपाल ने बनाया। 1060 ईसवी के आसपास।
“गर फ़िरदौस बरुरुए ज़मीं अस्त, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता”; अर्थात इस धरती पे अगर कहीं स्वर्ग है तो यही है, यही है, यही है। इस अनाम शिलालेख के आधार पर लाल किला को शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया करार दिया गया, जबकि पद्मावती का उल्लेख करते हुए शिलालेख को नकारकर पद्मावती को काल्पनिक बता दिया गया।
किसी अनाम शिलालेख के आधार पर कभी भी किसी को किसी भवन का निर्माणकर्ता नहीं बताया जा सकता और ना ही ऐसे शिलालेख किसी के निर्माणकर्ता होने का सबूत ही देते हैं।
लालकिले को एक हिन्दू प्रसाद साबित करने के लिए आज भी हजारों साक्ष्य मौजूद हैं। यहाँ तक कि लाल किला से सम्बंधित बहुत सारे साक्ष्य पृथ्वीराज रासो से ही मिलते है।
सरांस यही है कि लाल किले का निर्माण शाहजहाँ के द्वारा नहीं किया गया था बल्कि शाहजहाँ ने इस पूर्व महल में हेर फेर करके उसे अपना नाम देने कि कोशिश भर की थी। सत्य को अधिक दिनों तक छिपाया नही जा सकता, यह उक्ति यहाँ बखूबी लागु होती है।
स्रोत- प्रसिद्ध इतिहासकार पी. ऐन. ओक की किताब "इतिहास की भयंकर भूले से"...
#आर्यावर्त_का_अघोर_अतीत
शर्मनाक कांग्रेस
एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया।
नेहरू ने श्रेय ले लिया,।
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया।
इतिहास की किताबें लिखती हैं— “नेहरू ने AIIMS बनाया”।
यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है।
Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।
AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।
AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने
ज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया—
जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।
वह ज़मीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होता
AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है।
यह ज़मीन:
न सरकार ने खरीदी,,,,,
न अधिग्रहित की,,,,,
यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी—
जो उन्होंने दान में दी।
आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है।
कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।
वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था,,,,
आज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।
कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे।
तब अमृत कौर ने:
न्यूज़ीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाया
उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था की
अगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की ज़रूरत ही क्यों पड़ती ?
वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रही
AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।
उन्होंने लड़ाई लड़ी:
अफ़सरशाही की सुस्ती से
मंत्रिमंडल की उदासीनता से
कांग्रेस की ढिलाई से
फाइलें चलीं क्योंकि उन्होंने ज़बरदस्ती चलवाईं।
नेहरू ने वास्तव में क्या किया ?
पहले से बने काम को मंज़ूरी दी
भाषण दिए
फीते काटे
इसे संस्थान-निर्माण नहीं कहते।
इसे ऑप्टिक्स कहते हैं।
कांग्रेस ने उन्हें क्यों भुला दिया ?
क्योंकि यह सच तीन मिथक तोड़ देता है:
कांग्रेस ने भारत बनाया
नेहरू ने संस्थान खड़े किए
सत्ता = योगदान
AIIMS इन सबका उलटा प्रमाण है।
एक शाही महिला ने
अपनी विरासत जनस्वास्थ्य के लिए कुर्बान कर दी।
कांग्रेस ने श्रेय हड़प लिया।
हकीकत
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने सिर्फ़ नामपट्टिका लगाई।
बलिदान किसी और का।
इश्तिहार कांग्रेस का.
नाली के कीड़े कॉकरोच
कॉकरोच पार्टी में थोड़े बहुत लोग अच्छे भी है या फिर सब के सब मीठे और समलैंगिक ही भरे पड़े है ? मेरी मोदी सरकार से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि इन मानसिक बीमार लोगों का दिल्ली के किसी अच्छे हॉस्पिटल में भर्ती करवाये ये हमारे जैसे ही शस्त्रधारी लोग है बस रास्ता भटक गए है
ये किसी इल्यूजन (भ्रम ) में फंसे हुए है इन्हें बढ़िया से ट्रीटमेंट दिलवाए और किसी के घर का चिराग़ बुझने से बचाए यही राष्ट्र हित होगा अब देश को बचाने के लिए मीठे लोग आ रहे है तब देश तो क्या ही बचना है हमे उन लोगों को बचाना है जो इनके संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते है
एक कॉकरोच हाथ में डायरी लेकर कहा रहा था ये हमारा संविधान है जब पत्रकार ने खोलकर दिखाने के लिए कहा तो कुछ नोट बनाकर घूम रहा है मतलब ये अपना ही संविधान बनकर घूम रहे है और बाबा साहब के संविधान को कचरे में फेंकना चाहते है
एक कॉकरोच तो सीधे हाई कोर्ट से आया हुआ था जब पत्रकार ने कहा आप तो कानून के रक्षक है फिर आप संविधान बचाने कैसे आए हुए थे तब कॉकरोच ने कहा आगे की बात ये भाईसाहब बताएंगे पत्रकार ने कहा नहीं आप ही बताइए तो
कहने लगा कि मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है बताओ अब ऐसे वकीलों बाला कोर्ट पहन कर फर्जी वकील बनकर जनता को गुमराह कर रहे है वकीलों को इस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करवानी चाहिएं इस तरह तो ये कॉकरोच वकीलों का नाम ही खराब कर के रख देंगे
एक कॉकरोच ने तो सीधे सीधे व्यपारियों से ही अपील कर डाली कि सरकार को टैक्स मत भरो सरकार अपने आप दबाव में आ जाएगी मतलब कॉकरोच पार्टी के नाम पर कुछ भी चल रहा है इनके पास कोई नया विजन नहीं है ये सब वही लोग है जो हर आंदोलन में अपना खर्चा पानी लेकर निकल जाते है महीने दो महीने इनका भी रोजगार चल निकलता है
मोदीजी जैसा कोई नहीँ
निर्वाचित प्रधानमंत्री.....
नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं बने थे...
नेहरू को अंग्रेजी सिस्टम से काम करने के लिए गांधी द्वारा नियुक्त किया गया था पहली बार....
अंग्रेजों की चमचागीरी करके प्रधानमंत्री बने रहे नेहरू...
मोदी की तुलना नेहरू से हो ही नहीं सकती.....
नेहरू का कद मोदी के सामने राष्ट्रभक्तों की नजरों में सदा बौना ही रहेगा....
लाख बुराई कर ले मोदी की विपक्षी पार्टियों के कुकुरमुत्ते... अपने आकाओं को खुश करने के लिए....
मगर उनकी आत्मा कभी भी मोदी का कद कम नहीं आंक सकेगी...
नेहरू ने अंग्रेजों द्वारा निर्मित सिस्टम से हिन्दुओ को काबू में रखते हुए भारत को मुसलमानों व ईसाइयों तथा देशविरोधी धड़े को सुरक्षित करने वाले कानून बनाने का काम जारी रखा....
मोदी ने देश के लिए स्वयं पूरा नवनिर्माण करवाया....
अंग्रेजी व्यवस्था व अंग्रेजी इमारतों की तुलना में हिंदू वास्तुशास्त्र अनुसार इमारतों का निर्माण किया....
मोदी को भारत की राष्ट्रभक्त जनता ने लगातार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना है
रंडीबाजी व अय्यासी के कारण एड्स से मरे नेहरू को मोहनदास करमचंद गांधी ने सरदार पटेल की जगह नियुक्त किया था...
प्रथम प्रधानमंत्री सरदार पटेल को चुना था तत्कालीन हिन्दुओ ने...
नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री थे ही नहीं....
फिर भी नेहरू ने जितने दिन तक सत्ता चलाई उस अंग्रेजी मेहरबानी के रिकॉर्ड को भी हिंदुओ के संगठित वोटबैंक ने तोड़ दिया है
अब मोदी सर्वाधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं.....
मोदी का रिकॉर्ड योगी तोड़ेंगे......
योगी रिकॉर्ड के साथ साथ भारत में बहुत कुछ और भी तोड़ेंगे ...
तैयार रहो चमचों छातीपीटन के लिए.......
क्योंकि हाथी चले बाजार.... कुत्ते भौंके हजार.....
🖋️...............
हिन्दूधर्मध्वजावाहक
बुधवार, 10 जून 2026
हम भारतीय
🥰😂
चाहे कितना भी *बड़ा घर* हो।
अगर
*कूलर* और *फ्रिज* के ऊपर सामान नही रखा
तो आप *भारतीय* नही हो
😜😝😆😜😁
*दिमाग* एक ऐसा *अंग* है,
जिसको *गरम* कर सकते हैं,
*ठंडा* भी कर सकते हैं,
*खा* भी *सकते* हैं,
*चाट* भी सकते हैं, और
*दही* भी बना सकते हैं !
🤯😂🤣
*पापड़* एक ऐसी *चीज़* है,
जिसे जहाँ से तोड़ना चाहो
वो वहाँ से कभी नही टूटता ।
😂😂😂
*दीवार* पर *लिखा* होता है,
*दीवार* पर *लिखना* ' मना ' है।
😝😃🤩
हमेशा *Special* बनके रहो,
अगर *आम* बनोगे तो,
*दुनिया अचार* बना देगी l
😃😝🤓
अगर *हरी सब्ज़ी और सलाद* खाने से कोई *पतला* होता..,
तो *भैंस* कब की *हिरण* बनकर *फुदक* रही होती ।
🤣🤣😇🥳
हम *भारतीय आसानी* से
किसी पर *भरोसा* नहीं करते,
*सोते* हुए व्यक्ति से *भी पूछ* लेते हैं
*सो रहे हो क्या।*
😂😂😂🤩
आने वाली *पीढ़ी माँ* के *आंचल* का *सुख नहीं* पायेगी..,
क्योंकि *जीन्स* पहनने वाली *माँ, आंचल* कहाँ से लाएगी।
😂🤣😜
*पैसा* आयेगा, *चला* जायेगा !,
*खुशियां* आयेंगी, *चली* जायेंगी !
एक *मोटापा* ही सच्चा *दोस्त* है,
जो *आकर* जाता नहीं ।
😂😂🤣
शुक्रवार, 5 जून 2026
नालंदा विश्वविद्यालय
सोचा एक बार फिर याद दिला दूँ । आप सब भूल गए होंगे ।
डॉ मनमोहन सिंह ने नोबल पुरस्कार विजेता "डॉ अमर्त्यसेन" को असीमित अधिकारों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम चांसलर नियुक्त किया। उन्हें इतनी स्वायत्तता दी गयी कि उन्हें विश्विद्यालय के नाम पर बिना किसी स्वीकृति और जवाबदेही के कितनी भी धनराशि अपने इच्छानुसार खर्च करने एवं नियुक्तियों आदि का अधिकार था । उनके द्वारा लिए गये निर्णयों एवं व्यय किये गये धन का कोई भी हिसाब-किताब सरकार को नहीं देना था ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि छुपे रुस्तम मनमोहन सिंह और अमर्त्यसेन ने मिलकर किस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से भयंकर लूट मचाई ? वो भी तब जबकि अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे ही 5 लाख रुपये का मासिक वेतन ले रहे थे जितनी कि संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, रक्षा सेनाओं के अध्यक्षों, कैबिनेट सचिव या किसी भी नौकरशाह को भी दिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है ।
इतना ही नहीं अमर्त्यसेन को अनेक भत्तों के साथ साथ असीमित विदेश यात्राओं और उस पर असीमित खर्च करने का भी अधिकार था ।
कहानी का अंत यहीं पर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने मनमोहनी कृपा से 2007 से 2014 की सात वर्षों की अवधि में कुल 2730 करोड बतौर चांसलर नालंदा विश्वविद्यालय खर्च किये.... आपकी आंखें फटी रह गयी न ... विश्वास नहीं हो रहा न कि मनमोहन सिंह ईमानदारी के चोंगे में कितने बड़े छुपे रुस्तम थे ?
चूंकि यूपीए सरकार द्वारा संसद में पारित कानून के तहत अमर्त्यसेन के द्वारा किये गये खर्चों की न तो कोई जवाबदेही थी और न ही कोई ऑडिट होना था और न ही कोई हिसाब उन्हें देना था इसलिए देश को कभी शायद पता ही न चले कि दो हज़ार सात सौ तीस करोड़ रुपये आखिर गये कहाँ ?
अभी कहानी खत्म नहीं हुई, पिक्चर अभी बाकी है -
अमर्त्यसेन सेन ने जो नियुक्तियां कीं उसपर भी कानूनन कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने किन किन की नियुक्तियां कीं ... आइये ये भी जान लेते हैं -
प्रथम चार नियुक्तियां जो उन्होंने कीं वो थे -
1. डॉ उपिंदर सिंह
2. अंजना शर्मा
3. नवजोत लाहिरी
4. गोपा सब्बरवाल
..... कौन थे ये लोग
... ? ? जानेंगे तो मनमोहन सिंह के चेहरे से नकाब उतर जायेगा ।
डॉ उपिंदर सिंह मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी पुत्री हैं और बाकी तीन उनकी करीबी दोस्त और सहयोगी ।
इन चार नियुक्तियों के तुरंत बाद अमर्त्यसेन ने जो अगली दो नियुक्तियां कीं वो गेस्ट फैकल्टी अर्थात अतिथि प्राध्यापक की थी और वो थे -
1. दामन सिंह
2. अमृत सिंह
.....गोया ये कौन थे ?
पहला नाम डॉ मनमोहन सिंह की मझली पुत्री और दूसरा नाम उनकी सबसे छोटी पुत्री का है ।
और सबसे अद्वितीय बात जो दामन सिंह और अमृत सिंह के बारे है वो ये कि ये दोनों "मेहमान प्राध्यापक" अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कभी भी नालंदा विश्वविद्यालय नहीं आयी ... पर बतौर प्राध्यापक ये अमेरिका में बैठे बैठे ही लगातार सात सालों तक भारी-भरकम वेतन लेती रहीं ।
उस दौर में नालंदा विश्वविद्यालय की संक्षिप्त विशेषता ये थी कि -
विश्विद्यालय का एक ही भवन था, इसके कुल 7 फैकल्टी मेम्बर और कुछ गेस्ट फैकल्टी मेम्बर (जो कभी नालंदा आये ही नहीं ) ही नियुक्त किये गये जो अमर्त्यसेन और मनमोहन सिंह के करीबी और रिश्तेदार थे । विश्विद्यालय में बमुश्किल 100 छात्र भी नहीं थे और न ही कोई वहां कोई बड़ा वैज्ञानिक शोध कार्य ही होता था जिसमे भारी भरकम उपकरण या केमिकल आदि का प्रयोग होता हो ।
फिर वो 2730 करोड़ रुपये गये कहाँ आखिर ?
मोदी जब सत्ता में आये और उन्हें जब इस कानूनी लूट की जानकारी हुई तो अमर्त्यसेन के साथ साथ मनमोहनी पुत्रियों को भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया ।
कहाँ गए वो राफेल राफेल चिल्लाने वाले... लौट आये बैंकॉक से ? कहाँ गयी गरीब किसान की पत्नी जिनके साथ अत्याचार हो रहा है ....अभी गरीब गुरबा के साथ सेल्फी में ही जुटी हैं क्या ? कहाँ गये वो 49 मॉब लिंचिंग के स्वयम्भू चिंतक जिनके पीठ पर लदा पुरस्कारों का अहसान अभी उतरा नहीं है तो आंखों में बेहयाई अभी बाकी है ?
बुधवार, 3 जून 2026
कांग्रेस की नीच मानसिकता
कांग्रेस की नीच मानसिकता
मोदीजी की गर्दन मरोड़ कर
मार डालने की फोटो पर
किसी कोंग्रेसी नें विरोध नहीँ किया.
कोउ विपक्ष का नेता भी नहीँ बोला.
मंगलवार, 2 जून 2026
बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है
हमारे देश मैं किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी चल रही है.......?
कुछ दिन पहले हुए NEET पेपर लीक फिर CBSE पुनर्मूल्यांकन एक के बाद एक शिक्षा से जुड़ी समस्या बाहर आ रही है जिसके बाद केंद्र सरकार कड़े कदम उठाकर दोषियों पर कार्यवाही कर रही है लेकिन कार्यवाही के साथ साथ शिक्षा विभाग संभाले धर्मेंद्र प्रधान की भी जिम्मेदारी मानकर उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा देना उचित रहेगा,
लेकिन इस मामले मैं अब देश के प्रधानमंत्री खुद मॉनिटरिंग कर रहे है हाई लेवल मीटिंग की जा रही है क्यों कि यह बहुत बड़ा संवेदन शील मुद्दा है,
पर इसी मुद्दे को अपना हथियार बनाकर देश मैं कुछ लोग बड़ी साजिश की तैयारी कर रहे है ?
आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि दिल्ली का पूर्व मुख्यमंत्री ओर आम आदमी पार्टी का संस्थापक अरविंद केजरीवाल के द्वारा देश के युवाओं को नेपाल, बांग्लादेश की युवाओं की तरह सड़क पर उतरने और अराजकता फैलाने के लिए उकसावे जैसे शब्दों का उपयोग किया गया था,
ओर अरविंद केजरीवाल के बाद इसी आम आदमी पार्टी द्वारा पैदा किया गया कॉकरोच जनता पार्टी का फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी 6 जून को दिल्ली आकर युवाओ को इकट्ठा होने के लिए कहा है,
जिसके बाद 2 दिन से सोशल मीडिया पर चर्चित हुआ अभिनय शर्मा जिसने एक महिला पत्रकार को टारगेट करते हुए देश की सरकार को बदनाम करने की कोशिश की है और इसी के वीडियो अब कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल से शेयर की जा रही है,
यह सभी लोग मिलकर कुछ ना कुछ बड़ा करने की मंशा से अब इकठ्ठे होंगे फिर छात्रों को ढाल बनाकर अराजकता की कोशिश करेंगे जैसे किसान आंदोलन में किसानों को ढाल बनाकर देश विरोधी ताकतों ने लाल किले पर हिंसा फैलाई थी,
लेकिन हमारी देश की सुरक्षा एजेंसी, खुफिया एजेंसी देश की सरकार पुलिस सभी पूरी तरह मुस्तैद है जागृत है इन्होंने कुछ भी ऐसी कोशिश की तो उसका अंजाम क्या होगा यह सोच भी नहीं सकते.......!
सोमवार, 1 जून 2026
देश का भविष्य बीजेपी ही है
कंगना को एक ने थप्पड़ मारा ,तुम सब खूब खुश हुए थे ,
मोदी जी की गाड़ी पर जूता फेंका तो , तुम सब खूब खुश हुए थे ,
मोदीजी की गाड़ी को पंजाब में पुल पर घेर लिया था तो तुम सब खूब खुश हुए थे,
अर्नब गोस्वामी को कुणाल कुकुर कामरा ने हवाई जहाज में प्रताड़ित किया तो , अर्नब गोस्वामी को घर से अपराधी की तरह घसीट कर पुलिस ले गई तो हँस रहे थे तुम सब ,
कंगना का घर तोड़ा तो तुम सब खूब खुश हुए,
ममता बनर्जी ने सीबीआई , ईडी, चुनाव आयोग ,मोदी को गालिया दी तो तुम सब खूब खुश हुए,
ममता बनर्जी ने इडी,सीबीआई को रोका , टीएमसी के गुंडों ने जजों को बंधक बनाया तुम सब खूब खुश हुए ,
कैलाश विजय वर्गीय , रूपा गांगुली , दिलीप घोष , अमित शाह ,जेपी नड्डा पर पथराव हुए तो तुम सब खूब खुश हुए ,
पालघर में साधु मारे गए तो तुम सब खूब खुश हुए ,
नवनीत राणा को जेल भेजा तो तुम सब खूब खुश हुए ,
2021में बंगाल चुनाव के बाद हिंसा हुई ,भाजपा समर्थकों ,हिंदुओं पर अत्याचार किया तो तुम सब खूब खुश हुए ,
2026 बंगाल चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुवेन्दु सरकार को टीएमसी के गुंडों ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा ,तो तुम सब खूब खुश हुए ,
ममता बनर्जी , अभिषेक बनर्जी ने चुनावी भाषण में सेंट्रल फोर्स को ,अमित शाह को ,हिंदुओं को ,भाजपा समर्थकों को धमकियां दी , तो तुम सब खूब खुश हुए ,
योगी ,मायावती से लेकर उत्तरप्रदेश बिहार में सपाई राजद के गुंडों और आजम ,अंसारी ,अतीक,शहाबुद्दीन के गुर्गो ने गुंडई हिंसा की तब तुम सब खूब खुश हुए थे ,
बंगाल में चुनावों में धमकी और कट मनी ,तोलाबाजी से तुम सब खूब खुश हुए थे ,
लद्दाख में भाजपा कार्यालय जलाया गया तब खूब खुश हुए थे ,
राम जी को , हिंदुत्व को , सनातन धर्म , राम मंदिर के विरोध में कोई भी या तुम सब बोलते थे तब बड़े खुश थे तुम सब ,
नरेंद्र मोदीजी , अमित शाह , साध्वी प्रज्ञा , कर्नल पुरोहित पर फर्जी एफ आई मार मामले दर्ज किए तब बड़े खुश थे तुम सब ,
बंगलादेश ,नेपाल ,श्रीलंका में जेनजी,युवाओं के विद्रोह पर खुश होकर भारत के युवाओं को सड़क पर उतर कर काकरोच बनकर भाजपा के नेताओं पर आक्रमण हेतु उकसाने की रोज अपील करते समय तुम सब बहुत खुश थे -
बहुत लंबी सूची है जब जब तुम सब खुश हुए थे राहुल , अखिलेश ,केजरी ,ममता ,तेजस्वी ,उद्धव , लालू , राज , आदित्य , स्टालिन ,उदयनिधि , केरल के वामपंथी , अभिषेक बनर्जी ,महुआ , आरफ़ा ,कुणाल कामरा , राणा अयूब , रवीश ,ध्रुव राठी , मोहम्मद ज़ुबैर , कन्हैया कुमार ,सुप्रिया श्रीनेत ,सिब्बल , प्रशांत भूषण ,योगेंद्र यादव , संजय सिंह ,केजरीवाल और चेले ,चमचे , चाटुकारों ,फर्जी सेक्युलरों और अलगाववादियों , देश द्रोहियों , जिहादियों के समर्थकों ,
पर अब जब बंगाल की जनता सड़को पर उतर कर अपने पर किए हिंसा , अत्याचार , वसूली, दमन का बदला निकाल अपना गुस्सा जता रही और अंडे टमाटर फेंक रही ,
बंगाल की जनता हवाई जहाज में ,कोर्ट में , तुम्हारे घरों के सामने तुम्हे चोर चोर ,पीसी चोर , भाईपों चोर कह रही , रैलीयो में ,शादियों में पार्टियों में चोर चोर के गीत पर नाच रही तो तुम्हे लोकतंत्र खतरे में दिख रहा !
कितने दोगले और भ्रष्ट लोग हो तुम लोग, हम सब समझते हैं। इसलिए हार रहे हो. अभी भी समय है, जाग जाओ, सिर्फ बीजेपी मोदीजी ही देश का भविष्य हैं यह समझ लो.
रविवार, 31 मई 2026
जैसी करनी वैसी भरनी
बोया पेड़ बबुल का तो आम कहा से होय।
पंद्रह साल कि सत्ता के खनक में जो बीज आप ने बोया हैं अभिषेक बनर्जी साहब वहीं आप काट रहे हैं,
जनता का खुन इतना चुसा कि जनता अपनी पंद्रह साल कि दबाई हुई आक्रोश को अब आप के हि ऊपर उतार रही हैं,
कि हुई गुनाहो का हिसाब देने तो एक न एक दिन जनता कि अदालत में आना हि था
सत्ता कि खनक हमेशा नहीं रहती ये आप ने सोच हि नहीं पाया, अगर सोच लेते तो इतनी क्रूरता से सत्ता नहीं चला पाते,
शनिवार, 30 मई 2026
जल है तो कल है
💧 *पानी की एक्सपायरी डेट क्या है?* 🤔
अक्सर हम पानी की 'एक्सपायरी डेट' अपनी सुविधा और सोच के हिसाब से तय कर लेते हैं, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। जरा इस विरोधाभास पर विचार कीजिए:
- 🚰 *शहरों में:* जहाँ नल का पानी रोज आता है, वहाँ कल का पानी 'बासी' मानकर बहा दिया जाता है। *(एक्सपायरी डेट: 1 दिन)*
- ⏳ *जहाँ पानी दो या आठ दिन में आता है:* वहाँ वही पानी दो या आठ दिनों तक बिल्कुल ताजा और पीने योग्य रहता है।
- 🍾 *शादी-समारोहों में:* जैसे ही हाथ में बिसलरी की नई बोतल आती है, पुरानी आधी भरी बोतल को तुरंत 'बेकार' समझकर फेंक दिया जाता है।
🏜️ दूसरी तरफ की सच्चाई...
- 🌵 *रेगिस्तान में:* यात्रा करते समय पानी की एक-एक बूंद तब तक अमृत और ताजी रहती है, जब तक कि अगला जलस्रोत न मिल जाए।
- 🌧️ *प्रकृति में:* बांधों और तालाबों का पानी अगले मानसून तक (और सूखे की स्थिति में 2-3 साल तक) पूरी तरह उपयोगी रहता है।
- 🕳️ *बोरवेल में:* 50 से 500 फीट नीचे से जो पानी हम निकालते हैं, वह जमीन के अंदर सैकड़ों-हजारों साल पुराना होता है, फिर भी वह सेहत के लिए सबसे सुरक्षित और शुद्ध होता है।
💡 *निष्कर्ष (सोचने वाली बात)*
> कुल मिलाकर, पानी की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। पानी की एक्सपायरी केवल हमारी *सोच और उसकी उपलब्धता* के आधार पर तय होती है। जब पानी आसानी से मिलता है, तो हम उसे बासी कह देते हैं; जब किल्लत होती है, तो वही पानी अनमोल हो जाता है।
>
अतः पानी का उपयोग *विवेकशीलता, जिम्मेदारी और संयम* से करें। अन्यथा, पानी खत्म होने से पहले हमारी यह लापरवाह सोच ही हमें प्यासा मार डालेगी।
🙏 *एक विनम्र अनुरोध:*
यह केवल एक मैसेज नहीं, बल्कि आने वाले कल को बचाने की एक पुकार है। कृपया इसे पढ़कर डिलीट न करें, बल्कि अपने सभी प्रियजनों, रिश्तेदारों और ग्रुप्स में शेयर करके जागरूकता फैलाएं।
💧 *जल ही जीवन है...*
🌱 *जल है तो कल है!*
*👍 स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और पानी बचाएं 👍*
शुक्रवार, 29 मई 2026
मोदीजी हैं तो मुमकिन है
बी जे पी से जलने वालो आखे खोल कर पड लेना(कृपया पूरा लेख अवश्य पढ़ें)
■ • मोदी ने महँगाई बढ़ा रखी है,
■ • व्यापार में दिक़्क़त है,
■• GST रिटर्न भरने दिक़्क़त है,
■• पेट्रोल महँगा कर रखा है,
■• आरक्षण खत्म नहीं किया
■• राम मंदिर नहीं बनवाया
■• 15 लाख नहीं दिया
■• अच्छे दिन नहीं आए
■● नोटबन्दी की वजह से जनता मरी
■• फलाना , ढेकाना इत्यादि
इसलिए अब हम मोदी की दूकान बंद कराएँगे, इस चुनाव में वोट नहीं देंगे, आदि आदि।
बंधुओं
रही मोदी की दूकान बंद कराने की बात, तो आपको बता दें कि मोदी की उम्र अब 74 वर्ष है और उनके पीछे ना परिवार है और बीवी-बच्चे।
उन्होंने ज़िंदगी में जो पाना था वो पा लिया है।
अब अगर आप वोट नहीं भी देंगे और वो हार भी जाएँगे, तब भी वो “पूर्व प्रधानमंत्री” कहलाएँगे,
👍 आजीवन दिल्ली में घर, गाड़ी, पेंशन, 👍 एसपीजी सुरक्षा, कार्यालय मिलता रहेगा।
👍 दस-पंद्रह साल जीकर चले जाएँगे।
लेकिन सवाल ये उठता है कि आप क्या करेंगे?
जब कांग्रेस+लालू+मुलायम+मायावती+ममता+केजरीवाल मिलकर
★• इस देश का इस्लामीकरण और ईसाईकरण करेगी,!!
★• रोहिंग्याओं को बसाएगी,!!
★• अंधी लूट करेगी,
★• कोयला घोटाले होंगे,
★• भगवा आतंकवाद जैसे नए नए शब्द बनेंगे और
★• आतंकवादी सरकारी मेहमान बनेंगे!!
★• हिंदुओं का खतना करवाएगी
★• मुसलमानो को आरक्षण देगी !
★ लव जिहाद को बढ़ावा देगी ।
★• महंगाई आसमान छुएगी
★• पप्पू देश लूट कर इटली घूमने जायेगा
★• सैनिक रोज मारे जाएंगे
★• पाकिस्तान , चीन सर पर बैठ जाएगा
मोदी पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग़ है क्या??
मोदी तो संतोष के साथ मरेंगे कि मैंने एक कोशिश तो की अपना देश बचाने की,
लेकिन आप लोग तो हर दिन मरेंगे, और अंतिम साँस कैसे लेंगे?
●अपने बच्चों के लिए कैसा भारत छोड़ कर मरेंगे???
●ज़रा विचार कीजिए और तब निर्णय लीजिए।
और
मोदी जी की इमानदारी पर शक करनेवाले....
👍 🔥 11 साल में मोदी सरकार ने क्या किया इस देश के लिए , जानना चाहोगे ?
■ 1 लाख करोड़ रू पेट्रोल में कमाया ....
उसमें 46 हज़ार करोड़ ईरान को देकर भारत का कर्जा उतरवा लिया....
■ बाकी बचे 54 हजार करोड़ में राफेल फाइटर जेट खरीद कर सेना को मजबूती दी
■ बताओ एक रूपया भी दामाद के लिए नहीं रखा.... बेटी बेटा तो है नहीं तो दामाद कहा होंगे ,
■ अमेरिका जाकर अपने पूरे खानदान का इलाज भी नहीं करवाया .....
■ स्विसबैंक में खाता बनवाया नहीं , नाच गाने सुनने कहीं जाते नहीं ,
■ दिग्विजय , अहमद , गुलाम नबी , जैसा चापलूस रखे नहीं........
■ पप्पू जैसी अय्याशी कभी की नही ...
■ १ रुपया का आज तक घोटाला किया नही ...और बन गए हैं प्रधानमंत्री ...
लेकिन ये सब आपको बताने से क्या फायदा , आपकी समझ मे नही आने वाला
आप तो मुफ्तखोरी की लत से ग्रस्त बीमारी से जूझ रहे हो । आपकी नजर में तो
■ सरकार आपके बैंक खातों में 15 लाख रु खैरात रूपी जमा करा दे तो मोदी सरकार बहुत अच्छी है ।
■ सरकार सभी कर्जदारों का ऋण माफ करा दे तो सरकार बहुत अच्छी है
■ सरकार सभी को सरकारी नौकरी दिला दी तो बहुत अच्छी है
■ सरकार मुफ्त भोजन , मुफ्त यात्राएं , मुफ्त शिक्षा , मुफ्त आवास दिलाती रहे तो बहुत अच्छी है
■ सरकार घर के सभी सदस्यों को पेंसन देती रहे कोई काम करने को न कहे , कोई अपने सरकारी काम काज पर न जाये घर बैठे सैलरी आती रहे , जी भर के घूसखोरी करती रहे , भरस्टाचार पर कोई अंकुश न हो ,!!
ऐसी सरकार बहुत अच्छी है
हमे तो आज भी अपनी सरकार पर भरोसा है और गर्व है अपने प्रधानमंत्री पर जिनके अथक प्रयास से भारत को विश्व में श्रेष्ठ तीसरी जीडीपी दिलाई ।
ऐसे
👌 ईमानदार , कर्मठ और देश के मान सम्मान को बढ़ाने वाले नेता को प्रधानमंत्री बने रहने के लिए मेरा तन मन और धन (महंगा डीजल पेट्रोल व् इनकम टैक्स दे कर) पूरा समर्थन है ।
नमो नमो 🇮🇳 जय श्री राम 🚩
गुरुवार, 28 मई 2026
मंगलवार, 26 मई 2026
कांग्रेस का जिमखाना
देश बचाने की बात करने वाला राहुल गांधी आज एक शराब खाने को बचाने के लिए अपनी पार्टी मैं पाले हुए वकीलों को काम पर लगा दिया है,
वो भी किस लिए ताकि जनता के टैक्स के पैसे से अपना शौक मौज पूरा कर सके कितनी विचित्र बात है ना,
जिस जगह के साल भर की सदस्यता 7 लाख रुपये हो लेकिन वो देश की सरकार को मात्र एक हजार महिला दे रहे हो तो समझ जाना चाहिए देश की जनता के पैसे के कितने मजे लिए होंगे 2014 के पहले वाली सरकारों ने,
इस जगह के लिए कांग्रेस इतनी उतावली इसलिए हो रही है कि जो राहुल गांधी जो काम करने बैंकाक, मलेशिया,नेपाल जाते थे तो वो फ्री टाइम में इसी Gym खाना चले जाते होंगे,
रविवार, 24 मई 2026
नेहरू की बुधनी?
चमचे मेलोडी पर उछल कूद रहे है....
मेलोनी और बुधनी, दोनों नामों में आख़िर में एक जैसी ध्वनि आती है.
दोनों का एक साथ ज़िक्र इसलिए क्योंकि जिस तरह आज पीएम मोदी का नाम इटली की पीएम मेलोनी से जोड़ा जा रहा है.
उसी तरह 1959 में बुधनी का नाम कभी (पंडित.?) नेहरू से जोड़ा गया था.
मेलोनी ऐसे पद पर हैं कि उनको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. लेकिन बुधनी की कहानी बहुत दर्दनाक है.
नेहरू जी को दामोदर घाटी निगम योजना का शायद उदघाटन करना था. पंडित नेहरू के स्वागत के लिए निगम ने धनबाद की संथाल आदिवासी महिला बुधनी मंजियायिन को चुना.
उसने नेहरूजी को माला पहनाई, और आदत से ठरकी नेहरू ने भी बुधनी के गले में माला डाल दी.
आमतौर पर नेता ऐसा करते हैं लेकिन पुरुषों के साथ नेहरू तो नेहरू ठहरे ....ठरकी बादशाह
उसके बाद नेहरू जी ने बुधनी से ही उद्घाटन करवाया👇 फोटो में देखिए.
जब बुधनी वापस गाँव पहुँची तो मुखिया ने बुला भेजा, कहा तुम दोनों ने एक दूसरे के गले में माला डाल दी हैं, आज से तुम लोग पति पत्नी हो. और अब इस गाँव में नहीं रहोगी.
परिवार ने भी उसका बहिष्कार कर दिया. इतना ही नहीं दामोदर घाटी निगम ने भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया. लोग उसे नेहरू की आदिवासी पत्नी तक कहने लगे.
वो धनबाद छोड़कर कहीं और चली गई, कोई कहता है किसी मजदूर से शादी कर ली.
लेकिन नेहरूजी ने कोई एक्शन नहीं लिया और ना ही दुखियारी की मदद की.
आज उन्हीं के लोग एक और महिला का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं, क्योंकि पीएम ने उसे नाम से मिलती जुलते नाम वाली टॉफ़ी मेलोडी भेंट कर दी..
ओर भाई उन्होंने ठरकी नेहरू की तरह बदनामी नहीं दी
शनिवार, 23 मई 2026
सोमवार, 18 मई 2026
शनिवार, 16 मई 2026
प्राचीन जैन धर्म
👑 दक्षिण भारत का आध्यात्मिक सूर्य: आचार्य भद्रबाहु, जिन्होंने बदल दिया जैन धर्म का इतिहास! 🚩✨
जब भी हम दक्षिण भारत के विशाल जैन मंदिरों और पवित्र तीर्थों को देखते हैं, तो दिल गर्व से भर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर भारत (मगध) से निकलकर जैन धर्म दक्षिण के हृदय तक कैसे पहुँचा?
आज "देव दर्शन" में बात उस महान युगपुरुष की, जिन्होंने धर्म और उसके पवित्र ज्ञान की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया— आचार्य भद्रबाहु! 👇
12 साल का अकाल और एक महान फैसला ⛈️🛡️
आचार्य भद्रबाहु जैन धर्म के अंतिम ‘श्रुतकेवली’ थे। अपने दिव्य ज्ञान से उन्होंने भविष्यवाणी की कि मगध साम्राज्य में 12 साल का भयंकर अकाल पड़ने वाला है।
ऐसे समय में साधुओं के लिए ‘कठोर नियमों का पालन करना लगभग असंभव हो जाता।
इसीलिए, धर्म और पवित्र आचरण की रक्षा हेतु उन्होंने 12,000 मुनियों के विशाल संघ के साथ दक्षिण भारत की ओर विहार करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। 🚩
और शायद यही वह क्षण था, जिसने जैन धर्म के इतिहास की दिशा बदल दी।
यह विशाल संघ मगध से निकलकर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला (चंद्रगिरि पहाड़ी) पहुँचा। आचार्य भद्रबाहु ने इस पवित्र भूमि को अपनी साधना का केंद्र बनाया और यहीं से दक्षिण भारत में जैन धर्म की सबसे मजबूत नींव रखी गई।
🌟 आचार्य भद्रबाहु के इस प्रस्थान से जैन धर्म को क्या लाभ हुआ? 📈
🛕 दक्षिण में ‘स्वर्णिम युग’ की शुरुआत
इसी विहार के बाद कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में जैन धर्म तेज़ी से फैला।
📚 ज्ञान और परंपरा की रक्षा
यदि आचार्य भद्रबाहु दक्षिण नहीं आते, तो अकाल के कारण प्राचीन जैन आगम, शास्त्र और कठोर आचार-परंपराएँ नष्ट हो सकती थीं।
✍️ साहित्य और मंदिरों की महान विरासत
तमिल और कन्नड़ भाषाओं का प्राचीन एवं श्रेष्ठ साहित्य जैन आचार्यों और मुनियों द्वारा रचा गया। दक्षिण भारत के विशाल जैन मंदिर उसी मजबूत नींव का परिणाम हैं।
धर्म किसी भूमि का मोहताज नहीं होता…
वह ज्ञान, त्याग और तपस्या से जीवित रहता है।
शुक्रवार, 15 मई 2026
सोमवार, 11 मई 2026
देश विरोधी ताकतें
🙄😔ममता बनर्जी, कांग्रेस, सोरोस, डीपस्टेट, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के बीच जैसे किसी समझौते के अनुसार, 2026 के चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल को अलग किया जाना था और ममता बनर्जी को 'ग्रेट बांग्लादेश' की प्रधानमंत्री बनना था।
कलकत्ता के पास दो महत्वपूर्ण अमेरिकी जासूस पकड़े गए। इसलिए मोदी, शाह, डोवाल, आरएसएस, भाजपा, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय आदि ने पश्चिम बंगाल में दिन-रात काम किया और पश्चिम बंगाल को बचाया।
🙄😔तो, अमेरिका ने कुछ ऐसा किया जो दुनिया में किसी और ने नहीं किया। यानी, ट्रंप ने दुखी मन से मोदीजी को बधाई दी। दरअसल, दुनिया का कोई भी देश किसी राज्य में चुनाव जीतने मात्र से उस देश के प्रधानमंत्री को 'बधाई' नहीं देता।🙄😔
आपने भी देखा होगा 2 दिन पहले बांग्लादेश जमाते इस्लामी के प्रमुख ने कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के मुसलमानो को इकट्ठा करके पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करने का आंदोलन करें बांग्लादेश के 27 करोड़ मुसलमान ममता बनर्जी को बांग्लादेश को भारत से अलग करने में पूरी मदद करेंगे
रविवार, 10 मई 2026
इंद्रा की नाकामी
1973 में पर्सनल लॉ बोर्ड बना इंदिरा गांधी की सरकार में,,
बाकी आप देख लो,,,,,
✍️ ध्यान से पढ़ें...
नीचे दिए गए वह योद्धा है जो 1971 में युद्ध बंदी के दौरान पाकिस्तान के जेलों में बंद थे वह आज तक नहीं आए
पढ़िए ये नाम..⤵️
विंग कमांडर हरसरण सिंह डंडोस
स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर जैन
स्क्वाड्रन लीडर जे एम मिस्त्री
स्क्वाड्रन लीडर जे डी कुमार
स्क्वाड्रन लीडर देव प्रशाद चटर्जी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुधीर गोस्वामी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी वी तांबे
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट नागास्वामी शंकर
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट राम एम आडवाणी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट मनोहर पुरोहित
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट तन्मय सिंह डंडोस
फ्लाइट लेफ्टिनेंट बाबुल गुहा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुरेश चंद्र संदल
फ्लाइट लेफ्टिनेंट हरविंदर सिंह
फ्लाइट लेफ्टिनेंट एल एम सासून
फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पी एस नंदा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अशोक धवळे
फ्लाइट लेफ्टिंनेंट श्रीकांत महाजन
फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुरदेव सिंह राय
फ्लाइट लेफ्टिनेंट रमेश कदम
फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रदीप वी आप्टे
फ्लाइंग ऑफिसर कृष्ण मलकानी
फ्लाइंग ऑफिसर के पी मुरलीधरन
फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी
फ्लाइंग ऑफिसर तेजिंदर सेठी
यह भारतीय वायुसेना के वे योद्धा थे, जो 1971 की जंग में पाकिस्तान में युद्ध बंदी बने, और कभी वापस नहीं आए।
कांग्रेस सरकार ने कभी इनकी खोज नहीं की!
इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से समझौते में 93 हज़ार पाकिस्तानी युद्धबंदी छोड़ दिए, पर अपने सैनिक वापस मांगने याद नहीं रहे!
देश के लोगों से इनकी खबर छुपा ली, न समाचारपत्रों ने फोटो छापे!
मरने के लिए, पाकिस्तानी जेलों में छोड़ दिया, और हमारे यह सैनिक गुमनाम मृ#त्यु म#र गए!
यही सच रहा है इन सत्ता लोलुप नेहरू, इंदिरा का!
यह पोस्ट नेहरू-गांधी परिवार के चाटुकारों के लिए पीड़ादायक होगी, लेकिन देश के आम नागरिक की आँखे अवश्य खुल जाएंगी! इस ऐतिहासिक तथ्य की जांच कराए वर्तमान सरकार दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा
--
इसी तरह की इतिहास से जुड़ी पोस्ट पढ़ने के लिए हमें फॉलो जरूर करें। धन्यवाद,,,,
मुस्लिम लीग
प्रिय मित्रों
आज जो कांग्रेस ओर गांधी परिवार के सदस्य असुद्दीन ओवैसी को भाजपा की B टीम कहते है कृपया वो अपनी दादी का इतिहास भी बताए.....?
क्या आप जानते हैं कि इंदिरा गांधी भारत की एकमात्र ऐसी प्रधानमंत्री थी जो ओवैसी की पार्टी ए आई एम आई एम यानी ऑल इंडिया मजलिस ए मुत्ताहिदा मुस्लिमीन के दफ्तर में गई थी,
इतना ही नहीं उन्होंने उस वक्त ओवैसी के पिता और सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ खाना भी खाया था,
👉🏿 आंध्र प्रदेश में जब फिल्म अभिनेता एन टी रामा राव का उदय हुआ और उन्होंने आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को बिल्कुल खत्म कर दिया तब इंदिरा गांधी को लगा कि एन टी रामा राव के विजय रथ को रोकने के लिए उन्हें सलाहुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहिए और फिर इंदिरा गांधी ने आंध्र प्रदेश के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ओवैसी के पिता सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन किया,
👉🏿 इंदिरा गांधी उस वक्त प्रधानमंत्री पद पर थी उसके बावजूद उन्होंने एक देश विरोधी पार्टी के मुख्यालय गई वहां पार्टी प्रमुख सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ खाना खाया और ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन किया,
👉🏿 इस गठबंधन से कांग्रेस को तो कोई फायदा नहीं हुआ लेकिन सलाहुद्दीन ओवैसी की पार्टी ए आई एम आई एम को बंपर फायदा हुआ उसे आंध्र प्रदेश विधानसभा में पहली बार 4 सीटें मिली और एक सांसद भी बन गया इस तरह से कांग्रेस ने अपने कुकर्मों और अपने निजी स्वार्थ की वजह से एक मरी हुई पार्टी को जिंदा कर दिया,
शनिवार, 9 मई 2026
बुधवार, 29 अप्रैल 2026
हमले नहीँ होते थे - राहुल
जब कांग्रेस सत्ता में थी तब राहुल गांधी कहते थे की आतं की हमलो को रोक पाना संभव नहीं है आपको आतंकी हमलो की आदत डालनी होगी
यह देखिए जब राहुल गांधी सत्ता में थे तब समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट ,मालेगांव ब्लास्ट, मोडासा ब्लास्ट ,अहमदाबाद सूरत जयपुर बनारस गोरखपुर लखनऊ सीरियल ब्लास्ट उसके अलावा तीन ट्रेनों में सीरियल ब्लास्ट पांच हिंदू मंदिरों में सीरियल ब्लास्ट जिसमें संकट मोचन मंदिर प्रमुख है
उसके बाद सबसे भीषण आतं की हम ला यानी 26/ 11 का मुंबई हमला यानी कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में करीब 20000 से ज्यादा लोगों की आतं की हमले में जा न गई
उस वक्त राहुल गांधी प्रेस कांफ्रेंस करके कहा की आतं की हमलों को रोक पाना असंभव है कोई भी सरकार आतंकी हमलो को नहीं रोक सकती
और आज कांग्रेसी कु त्ते कह रहे हैं कि काश आज राहुल गांधी प्रधानमंत्री होते
और अगर किसी कांग्रेसी के पास कोई तस्वीर या वीडियो है जिसमें राहुल गांधी मुंबई हमले के पीड़ितों से मिले हो या घटनास्थल पर गए हो तो वह दिखा सकता है
जी हां आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राहुल गांधी मुंबई हमले के ठीक अगले दिन इटली चले गए थे और वहां से वह लंदन चले गए थे और 15 दिन के बाद वापस आए थे
आज बेशर्म कांग्रेसी कैसी बात करते हैं इन बेहया नीचे को शर्म भी नहीं आती
सोमवार, 27 अप्रैल 2026
नेहरू की जहालत
बात उस समय की है जिस समय महाराजा हरिसिंह 1937 के दरमियान ही जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र स्थापित करना चाहते थे, लेकिन शेख अब्दुल्ला इसके विरोध में थे क्योंकि शेख अब्दुल्ला महाराजा हरिसिंह के प्रधानमंत्री थे और कश्मीर का नियम यह था कि जो प्रधानमंत्री होगा वही अगला राजा बनेगा।
लेकिन महाराजा हरि सिंह प्रधानमंत्री के कुकृत्य से भलीभांति परिचित थे। इसलिए कश्मीर के लोगों की भलाई के लिए वह 1937 में ही वहां लोकतंत्र स्थापित करना चाहते थे।
लेकिन शेख अब्दुल्ला ने बगावत कर दी और सिपाहियों को भड़काना शुरू कर दिया। लेकिन राजा हरि सिंह ने समय रहते हुए उस विद्रोह को कुचल डाला और शेख अब्दुल्ला को देशद्रोह के केस में जेल के अंदर डाल दिया।
शेख अब्दुल्ला और जवाहरलाल नेहरू की दोस्ती प्रसिद्ध थी, जवाहरलाल नेहरू शेख अब्दुल्ला का केस लड़ने के लिए कश्मीर पहुंच जाते हैं, वह बिना इजाजत के राजा हरिसिंह द्वारा चलाई जा रही कैबिनेट में प्रवेश कर जाते हैं, महाराजा हरि सिंह के पूछे जाने पर नेहरु ने बताया कि मैं भारत का भावी प्रधानमंत्री हूं। राजा हरिसिंह ने कहा चाहे आप कोई भी है, बगैर इजाजत के यहां नहीं आ सकते, अच्छा रहेगा आप यहां से निकल जाएं।
नेहरु ने जब राजा हरि सिंह के बातों को नहीं माना तो राजा हरिसिंह ने गुस्सा में आकर नेहरु को भरे दरबार में जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और कहा यह तुम्हारी कांग्रेस नहीं है या तुम्हारा ब्रिटिश राज नहीं है जो तुम चाहोगे वही होगा। तुम होने वाले प्रधानमंत्री हो सकते हो लेकिन मैं वर्तमान राजा हूं और उसी समय अपने सैनिकों को कहकर कश्मीर की सीमा से बाहर फेंकवा दिया।
कहते हैं फिर नेहरू ने दिल्ली में आकर शपथ ली कि वह 1 दिन शेख अब्दुल्ला को कश्मीर के सर्वोच्च पद पर बैठा कर ही रहेगा। इसीलिए बताते हैं कि कश्मीर को छोड़कर अन्य सभी रियासतों का जिम्मा सरदार पटेल को दिया गया और एकमात्र कश्मीर का जिम्मा भारत में मिलाने के लिए जवाहरलाल नेहरु ने लिया था।
गुरुवार, 23 अप्रैल 2026
वोट के लिए सबकुछ करेगा
बीजेपी की वित मंत्री निर्मला सीतारमण प्याज लहसुन तक
नहीं खाती , और उन्होंने ये बात संसद में खड़ी होकर कहा था कि मैं ऐसे परिवार से आती हूं जहां लहसुन प्याज नहीं खाया जाता है
दूसरी तरफ जब तेजस्वी यादव बिहार चुनाव प्रचार के दौरान मछली खाते है तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कहते है कि मच्छी दिखा दिखाकर खाई जा रही है इससे जनता की भावनाएं आहता होती है जबकि बिहार में सबसे ज्यादा खाया जाना वाला नॉनवेज है
अब बंगाल चुनाव में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर मनोज तिवारी वोट मांगते हुए प्रचार करते हुए मच्छी भात और मटन बिरयानी खा रहे है और बकायदा वीडियो बना बनाकर सोशल मीडिया पर डाली जा रही है और देश का मीडिया उनको कवर भी कर रहा है
बात खाने पीने, पहनावे , भाषा, की है ही नहीं , बात है दोगलेपन की जो ये लोग कर रहे है और जमकर कर रहे है
जब चुनाव नॉर्थ में हो तो ये लोग भगवा पहनकर , माथे में तिलक लगाकर साधु संत बन जाते हैं
और जब चुनाव साउथ ईस्टर्न में हो तो ये लोग मच्छी मटन खाकर वोट मांगते है और मछलियां बटाने तक का वादा करते है
इन्होंने देश में खाने पीने , पहनावे , भाषा , को लेकर खूब नफरत बोई है और तो और जिन राज्यों में इनकी सरकार नहीं आई उन राज्यों को ये लोग देशहितेशी नहीं मानते है
भारत बीफ निर्यात में नंबर वन बन चुका है और आप गूगल करके देखिए बीफ कंपनिया सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश बीजेपी शासित राज्य में है
अब आप कहोगे कि बीफ में गाय तो नहीं आती ? भैंस ,बकरी , खगड़ा , झोटे, ऊंट , तो आते होंगे , क्या वो जीवो में नहीं आते है ? क्या उनमें जान नहीं है ? क्या उनके प्रति आपमें कोई दया भावना नहीं है गाय से ज्यादा तो हमारा देश भैंस का दूध घी लस्सी दही खाता पीता है
जीव तो जीव है
लेकिन इन लोगों की भावनाएं केवल और केवल वोट लेने के लिए आहट होती है बाकी इनको ना तो मछली भैंस बकरे से कोई हमदर्दी और ना ही इनके धर्म आड़े आता है
देश के 20 राज्यों से अधिक की 70% जनता नॉनवेज पर डिपेंड है बंगाल तो 99% मांसाहारी है नागालैंड में तो ऐसा कोई जीव ही नहीं होगा जिसको खाया ना जाता हो
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मंगलवार, 21 अप्रैल 2026
हिंसा - बलात्कार और नेहरू
विभाजन के बाद 1947 में पाकिस्तान में हिंदुओं की ह'त्याओं, लड़कियों से बला'त्कार का नंगा नाच हो रहा था। लाहौर से हर ट्रैन में ला"शें और उन पर मंडराते कुत्ते, गिद्ध दिखाई दे रहे थे तब लेहरू ने रेडियो पर शरणार्थी शिविरों में रह रहे हिंदुओं से धैर्य और शांति बनाये रखने की अपील की।
दूसरे दिन वो शिविरों में इंदिरा के साथ गए। वहां नेहरू तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश में एक 80 वर्षीय वृद्ध ने इंदिरा को स्पर्श कर दिया। नेहरू ने तुरंत ही उसे तमाचा जड़ दिया। वो वृद्ध लाहौर का प्रसिद्ध व्यापारी था जिस पर वक़्त की मार पड़ रही थी।
तमाचा खा कर वो जोर से हंसा और बोला, "इंदिरा मेरी पोती समान है क्योंकि आप खुद मेरे बेटे की उम्र के हैं। मेरा हाथ लग जाने भर से आप क्रोधित हो गए और मेरी 3 जवान पोतियों को मु@सलमान मेरे सामने उठा ले गए फिर भी आप कहते हैं सब भुला दूं।" नेहरू ये सुनकर वहां से इंदिरा को साथ लेकर निकल गए।
सोमवार, 20 अप्रैल 2026
DRDO की जादुई तकनीक
भारतीय रेलवे का यह बायो-टॉयलेट मिशन स्वच्छता की दिशा में एक भयंकर और जादुई क्रांति है! जिसे लोग केवल एक नया 'डिब्बा' समझते हैं, वह असल में पटरियों को जंग से बचाने और पर्यावरण को शुद्ध रखने वाली DRDO की फौलादी तकनीक है।
1. अवायवीय बैक्टीरिया (Anaerobic Bacteria) का जादू
इन टैंकों के अंदर DRDO द्वारा विकसित विशेष बैक्टीरिया छोड़े जाते हैं, जो अंटार्कटिका जैसे भयंकर ठंडे इलाकों से लाए गए थे।
• बिना ऑक्सीजन के काम: ये बैक्टीरिया बिना ऑक्सीजन के जीवित रहते हैं और मल को जादुई रफ़्तार से खाना शुरू कर देते हैं।
• पूर्ण निपटान: ये बैक्टीरिया मल को तब तक तोड़ते हैं जब तक कि वह केवल पानी और गैस (मीथेन) में न बदल जाए।
2. तीन चरणों वाला फौलादी फ़िल्ट्रेशन
बायो-डाइजेस्टर टैंक को अंदर से कई हिस्सों में बांटा गया है ताकि सफाई जादुई रूप से सटीक हो:
• पहला चरण: मल को बैक्टीरिया द्वारा लिक्विड में बदलना।
• दूसरा चरण: क्लोरिनेशन के ज़रिए हानिकारक कीटाणुओं का भयंकर खात्मा।
• तीसरा चरण: अंत में जो पानी बाहर निकलता है, वह पूरी तरह रंगहीन और गंधहीन होता है, जिससे पटरियों पर जंग लगने का खतरा शून्य हो जाता है।
3. पटरियों की फौलादी उम्र और बचत
रेलवे पटरियों में जंग लगना केवल सफाई का मुद्दा नहीं था, बल्कि यह एक भयंकर आर्थिक नुकसान भी था।
• अरबों की बचत: पटरियों के गलने के कारण उन्हें बार-बार बदलना पड़ता था। बायो-टॉयलेट तकनीक ने पटरियों की उम्र को जादुई तरीके से बढ़ा दिया है, जिससे रेलवे के करोड़ों रुपये बच रहे हैं।
• स्टेशन की स्वच्छता: पहले ट्रेनों के रुकने पर स्टेशनों पर जो भयंकर बदबू आती थी, वह अब इस फौलादी तकनीक की वजह से इतिहास बन चुकी है।
4. बायो-टॉयलेट की 'जादुई' विशेषताएँ
• रखरखाव में आसान: इन बैक्टीरिया को बार-बार डालने की ज़रूरत नहीं होती, ये खुद को जादुई रूप से रीजेनरेट करते रहते हैं।
रविवार, 19 अप्रैल 2026
गुरुवार, 16 अप्रैल 2026
नेहरू जी को भारत रत्न क्यों?
13 जुलाई 1955 को जब पण्डित नेहरू जी यूरोप और सोवियत रूस के दौरे से वापस आए तब उनके वैचारिक विरोधी तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी सभी प्रोटोकॉल तोड़कर दिल्ली एयरपोर्ट उनका स्वागत करने पहुंचे।
राजेन्द्र प्रसाद जी ने राष्ट्रपति भवन में भोज का आयोजन किया सभी महान हस्तियों की उपस्थिति में राजेंद्र प्रसाद जी ने पण्डित नेहरू जी को लेकर कहा - "यह हमारे समय के शांति के सबसे बड़े वास्तुकार हैं।" और मैंने पण्डित नेहरू जी को भारत रत्न देने का फैसला किया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि पण्डित नेहरू के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत मजबूत रूप से खड़ा हुआ है।
उन्होंने आगे कहा यह कदम मैंने अपने स्वविवेक से लिया है,अपने प्रधानमंत्री की अनुशंसा के बगैर इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह निर्णय अवैधानिक है लेकिन मैं यह जानता हूँ कि मेरे इस फैसले का स्वागत होगा।
7 सितंबर 1955 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नेहरू के भारत रत्न सम्मान समारोह में तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव एवी पाई ने सम्मान पाने वाली विभूतियों के नाम पुकारे, लेकिन नेहरू का प्रशस्ति-पत्र नहीं पढ़ा गया था। किदवई के अनुसार प्रशस्तियों की आधिकारिक पुस्तिका में प्रधानमंत्री का महज नाम दर्ज है। इसमें उनके द्वारा की गई सेवाओं का वहां कोई जिक्र नहीं है। सामान्य रूप से यह उल्लेख परम्परागत रूप से उस पुस्तिका में किया जाता है। उस समय के लोगों का कहना था कि देश और समाज के लिए नेहरू के अप्रतिम योगदान का चंद पैराग्राफ में जिक्र करना कठिन होगा, इसलिए उसे छोड़ दिया गया।
ऐसी शख्शियत जिसके विरोधी भी उन्हें सम्मान करते थे क्योंकि पण्डित नेहरू अपने विरोधियों को भी समान आदर करते थे आलोचकों को भी उतना ही स्थान मिला पण्डित नेहरू जी के दौर में जितना प्रसंशकों को।
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
इथेनोल की साज़िश
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गाड़ी को आपने अपनी खून-पसीने की कमाई से खरीदा, वह अचानक 'कबाड़' (Scrap) कैसे घोषित की जा सकती है?
जबकि जापान और अमेरिका जैसे विकसित देशों में 40 साल पुरानी गाड़ियाँ भी फिट होने पर सड़कों पर दौड़ती हैं, तो भारत में ही यह 'जबरन कबाड़' नीति क्यों?
आज हम उन 'डॉट्स' को कनेक्ट करेंगे जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया आपसे छिपा रहा है।
1. E20 पेट्रोल: आपके इंजन के लिए 'धीमा जहर' 🧪
1 अप्रैल 2026 से देशभर में E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) अनिवार्य हो रहा है।
2023 से पहले के इंजन शुद्ध पेट्रोल के लिए बने थे। एथेनॉल एक अल्कोहल है जो आपके पुराने इंजन की रबर सील और पाइपों को गला देता है और अंदर जंग (Corrosion) पैदा करता है।
यह आपके वाहन के खिलाफ एक 'साइलेंट सॉफ्टवेयर अपडेट' जैसा है। जब ईंधन ही आपके इंजन को चोक कर देगा, तो आप मजबूरन अपनी गाड़ी कबाड़ में देंगे।
2. दिल्ली की नई EV नीति: निजी स्वामित्व का अंत? 🚫
दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 के मसौदे के अनुसार:
1 अप्रैल 2027 से तिपहिया और 1 अप्रैल 2028 से पेट्रोल टू-व्हीलर का नया रजिस्ट्रेशन बंद हो सकता है।
नवीनीकरण (Renewal) की संभावना लगभग खत्म की जा रही है।
क्या यह जनता की भलाई के लिए है या ऑटोमोबाइल कंपनियों की तिजोरियां भरने के लिए?
3. 'एजेंडा 2030' और भारत: एक बड़ी लैबोरेटरी 🌍
वैश्विक संस्थाओं (WEF/UN) का नारा है— "2030 तक आपके पास कुछ नहीं होगा और आप खुश रहेंगे।"
भारत को इस 'ग्रेट रीसेट' का टेस्टिंग ग्राउंड बनाया जा रहा है।
पुराने मैकेनिकल वाहनों को ट्रैक करना मुश्किल है। लेकिन नई 'स्मार्ट' और 'इलेक्ट्रिक' गाड़ियाँ पूरी तरह इंटरनेट से जुड़ी हैं।
सरकार एक बटन दबाकर आपकी गाड़ी को कहीं भी 'डिसेबल' कर सकती है। यह 'ग्रीन एनर्जी' के नाम पर आपकी 'आर्थिक आजादी' पर ताला है।
4. 'यूज एंड थ्रो' का नया मॉडल ♻️
वर्तमान की EV तकनीक 'यूज एंड थ्रो' है। बैटरी का खर्च गाड़ी की आधी कीमत के बराबर है और रीसेल वैल्यू शून्य।
पहले हमारा कल्चर 'रिपेयर' (मरम्मत) का था, जो हमें आत्मनिर्भर बनाता था।
अब हमें 'रिप्लेस' (बदलाव) के चक्रव्यूह में फंसाया जा रहा है ताकि हम जीवन भर किश्तें (EMI) भरते रहें और कभी भी पूरी तरह किसी संपत्ति के मालिक न बन सकें।
5. क्यों चुप हैं जिम्मेदार? 🤐
सड़क परिवहन मंत्री एथेनॉल का प्रचार करते हैं, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय पुराने वाहन मालिकों को होने वाले नुकसान पर चुप है।
क्या यह कॉर्पोरेट घरानों और वैश्विक एजेंडे के बीच की एक गुप्त सांठगांठ है?
📢 जागरूक बनें, केवल दर्शक नहीं!
यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, यह आपकी संपत्ति के अधिकार (Property Rights) पर हमला है।
अगर आपकी 15 साल पुरानी गाड़ी फिट है और धुआं नहीं दे रही, तो उसे छीनने का हक किसी को नहीं होना चाहिए।
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं— क्या आप इस 'जबरन कबाड़ नीति' और 'ईंधन के खेल' को समझ पा रहे हैं?
सोमवार, 13 अप्रैल 2026
भारत की रक्षा तकनीक
यह वाकई में भारत की रक्षा तकनीक (Defense Tech) में एक क्रांतिकारी कदम है। डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित यह हाई पावर माइक्रोवेव (HPM) तकनीक 'एंटी-ड्रोन' सिस्टम के क्षेत्र में गेम-चेंजर मानी जा रही है।
यहाँ इस तकनीक की कुछ खास बातें हैं:
सॉफ्ट किल क्षमता: यह तकनीक किसी मिसाइल या गोली का इस्तेमाल करने के बजाय विद्युत चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) का उपयोग करती है। यह ड्रोन के अंदर के इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्किट को एक झटके में ठप कर देती है।
एक साथ कई निशाने: जैसा कि आपने बताया, यह सिस्टम एक ही पल्स या शॉट में 49 ड्रोनों के झुंड (Swarm) को निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है।
कम लागत: पारंपरिक हथियारों के मुकाबले इसमें प्रति शॉट खर्चा बहुत कम आता है।
रहस्यमय मौतें?
1968 का वो खतरनाक फोटो सामने आया…
ISRO के अंदर इटली की महिला को भारत का सबसे गुप्त उपग्रह प्रोजेक्ट दिखा रहे थे विक्रम साराभाई!
अप्रैल 1968… अहमदाबाद का ISRO सेंटर।
वैज्ञानिक विक्रम साराभाई एक विदेशी महिला को अत्यंत संवेदनशील सैटेलाइट प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी दे रहे हैं।
ये कोई साधारण महिला नहीं…
इटली की एंटोनियो एडवीज अल्बिना मायनो –
जिसने महज दो महीने पहले फरवरी 1968 में भारत के प्रधानमंत्री के बेटे राजीव गांधी से शादी कर ली थी।
नागरिकता बदली?
नहीं बदली!
फिर भी विदेशी नागरिक को ISRO जैसे टॉप-सीक्रेट रिसर्च सेंटर में घुसने की इजाजत?
नियमों का सीधा उल्लंघन!इटली की ये 8वीं पास महिला अचानक सैटेलाइट और अंतरिक्ष विज्ञान की दीवानी हो गई…
हैरान करने वाली बात!
रुकिए… अब शुरू होता है असली सनसनीखेज राज!
जैसे ही ये इटालियन महिला गांधी परिवार में घुसी, परिवार के बाकी 4 सदस्य थे –
इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी और मेनका गांधी।
फिर एक-एक करके शुरू हुईं रहस्यमय मौतों की बाढ़…
इंदिरा गांधी – अपने ही घर में अपने बॉडीगार्ड्स द्वारा गोली मार दी गई।
संजय गांधी – प्लेन क्रैश में मारे गए।
राजीव गांधी – बम ब्लास्ट में टुकड़े-टुकड़े हो गए।
और राजीव के सबसे करीबी दोस्त?
राजेश पायलट – कार दुर्घटना में मारे गए।
माधवराव सिंधिया – प्लेन क्रैश में मारे गए।
संजय गांधी के ससुर लेफ्टिनेंट कर्नल टी.एस. आनंद –
दिल्ली के फार्महाउस के पास मृत पाए गए।
विक्रम साराभाई – दिसंबर 1971 में केरल के कोवलम रिजॉर्ट के कमरे में रहस्यमय ढंग से मृत पाए गए।
बिना पोस्टमार्टम के बस हार्ट अटैक बता दिया गया!
मेनका गांधी – परिवार, सत्ता और दिल्ली की राजनीति से बाहर फेंक दी गईं।
प्रियंका गांधी की सास-ससुर की साइड:
राजेंद्र वाड्रा – गेस्ट हाउस में मृत पाए गए।
ननद – जयपुर-दिल्ली हाईवे पर कार दुर्घटना में मारी गई।
देवर – मुरादाबाद के होटल में मृत पाए गए।
सारे “संयोग”… एक-एक करके सब खत्म!
आस-पास कोई नहीं बचा… सब मारे गए,
दुर्घटना में मरे, गोली खाकर मरे, बम से उड़ गए…
बस एक इटालियन महिला बची रही – एंटोनियो एडवीज अल्बिना मायनो उर्फ सोनिया गांधी!
ये संयोग हैं… या साजिश का सबसे बड़ा राज?
अब खुद सोचिए… इतने सारे “संयोग” एक इटालियन महिला के आने के बाद क्यों?
सनसनीखेज सच… जो छुपाया नहीं जा सकता!
साभार
रविवार, 12 अप्रैल 2026
वीर सावरकर / नेहरू
पहली तस्वीर स्वतंत्रवीर सावरकर की है, जिसे बीबीसी ने 1924 में खींचा था।
यह तस्वीर 14 वर्षों की अमानवीय और यातनापूर्ण "काला पानी" जेल से रिहाई के बाद ली गई थी।
तस्वीर में उनके हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां हैं।
अंडमान की सेलुलर जेल से रिहा होने के बाद, अंग्रेजों ने उन्हें अगले 13 वर्षों तक नजरबंद रखा।
देश के लाल
जब 11 जनवरी 1966 की रात ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत हुई 😢🇮🇳, तो पूरा देश सदमे में था।
लेकिन असली 'तमाशा' तो तब हुआ जब उनकी मौत के बाद उनकी संपत्ति का हिसाब लगाया गया।
लोग हैरान थे कि वह शख्स जो देश का 'प्रधान' था 👑, जो करोड़ों के बजट और फाइलों पर हस्ताक्षर करता था 📑✍️, उसने अपने पीछे क्या वसीयत छोड़ी है? 🤔
लेकिन जब अलमारियां और बैंक खाते देखे गए 🏦, तो सबकी आंखों में आंसू आ गए 😢:
कोई बंगला नहीं: दिल्ली की कोठियों में रहने वाले नेता के नाम अपनी एक इंच जमीन नहीं थी। 🏠❌
पुराना फटा कुर्ता: उनकी अलमारी में बस कुछ जोड़ी खादी के कुर्ते मिले 👕, जिनमें से कुछ तो फटे हुए थे जिन्हें उनकी पत्नी ललिता शास्त्री जी ने रफू (Stitch) किया था 🪡🧵।
बैंक बैलेंस 00.00: उनके खाते में इतने पैसे भी नहीं थे कि एक पुरानी कार की किश्त (EMI) चुकाई जा सके 💸❌।
हैरानी की बात जानते हैं? 😲 शास्त्री जी ने बच्चों के कहने पर एक 'फिएट कार' (Fiat Car) 🚗 लोन लेकर खरीदी थी। उनकी मृत्यु के बाद उस कार का 5,000 रुपये का कर्ज बाकी था 💔, जिसे बाद में उनकी पत्नी ने अपनी पेंशन के पैसों से तिल-तिल कर चुकाया।
जिस इंसान के एक इशारे पर पूरा देश "एक वक्त का उपवास" (Fast) रखने लगा था 🙏, उस इंसान ने अपने बच्चों के लिए विरासत में एक 'सिक्का' तक नहीं छोड़ा 🤲✨।
आज हम छोटी सी नौकरी पाकर या थोड़ा सा पैसा कमाकर घमंड में चूर हो जाते हैं 😔💭। लेकिन शास्त्री जी ने सिखाया कि "पद और प्रतिष्ठा से इंसान बड़ा नहीं होता, चरित्र से होता है।" 💡🪞
वो चाहते तो अरबों की संपत्ति बना सकते थे 💰, लेकिन उन्होंने 'ईमानदारी' को अपनी संपत्ति चुना 🤍✨। आज के दौर में जहाँ भ्रष्टाचार और दिखावा चरम पर है ⚠️, क्या हमें ऐसे नेताओं की याद नहीं आती? ❤️🇮🇳
इस 'नन्हे' कद वाले महान इंसान की सादगी को एक 'नमन' तो बनता है! 🙏🚩
इस पोस्ट को इतना शेयर करो कि आज के 'दिखावे' वाले समाज को अपनी असलियत का आईना दिखे 📲🔥।
क्या आपको लगता है कि आज के दौर में ऐसा नेता मिलना मुमकिन है? 🤔💭
हाँ (Yes) 👍 / नहीं (No) 👎 कमेंट में अपनी राय दें।
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026
बुधवार, 8 अप्रैल 2026
खड़गे का नीच बयान
आंख खोलकर पढ़िये....!!
ईशा की पांचवी सदी में शाही राजा खिंगल ने अफगानिस्तान के गर्देज स्थान पर महाविनायक की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी।
समय के साथ सभ्यता के ऊपर धूल चढ़ती गई और महाविनायक की प्रतिमा मिट्टी में कहीं दब गई।
युगों बाद खुदाई में जब वह प्रतिमा मिली तो उसे काबुल में "दरगाह पीर रतन नाथ" के पास स्थापित किया गया। दरगाह पीर रतन नाथ की कहानी किसी दूसरे दिन सुनाएंगे।
आज कहानी महाविनायक की।
दो वर्ष पूर्व बिहार का एक युवक अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास में नौकरी करने पहुँचा।
स्वयं को यायावर कहने वाले उस युवक को अफगानिस्तान के प्राचीन महाविनायक के सम्बंध में पता था, सो वे महाविनायक के चिन्ह खोजने निकले।
पर अफगानिस्तान में सनातन के चिन्ह जितने ही सुलभ हैं, उन्हें खोज लेना उतना ही दुर्लभ।
कई दिनों नहीं कई महीनों के बाद उन्हें पीर रतन नाथ दरगाह का पता चला तो वे एक दिन पहुंचे तो एक ऐसा घर मिला जिसे भारत में मंदिर नहीं कह सकते। उस मंदिर में प्रतिमा स्थापित नहीं थी, बस रामायण महाभारत और गीता आदि पुस्तके रखी हुई थीं।
युवक ने सेवादार से जब महाविनायक की प्रतिमा के बारे में पूछा तो बुजुर्ग सेवादार आश्चर्य में डूब गया। क्या कोई दूर देश से मात्र एक प्रतिमा के लिए आया है? कौन है यह?
भावुक हो चुके सेवादार ने एक बन्द कमरे में रखी महाविनायक की प्रतिमा दिखाई...
युगों बाद किसी ने श्रद्धा से महाविनायक को देखा, युगों बाद महाविनायक की प्रतिमा ने अपने किसी श्रद्धालु को वात्सल्य की दृष्टि से देखा।
उस दिन युगों बाद किसी ने अभिशप्त महाविनायक के चरणों में प्रणाम किया, प्रतिमा पोंछी और बीस रुपये वाले माला से उनका श्रृंगार किया।
जानते हैं, ढाई हजार वर्ष पूर्व अफगानिस्तान के हर कण्ठ से वेदमन्त्र उच्चारित होते थे,
गलियों में यज्ञध्रुम की सुगन्ध पसरी रहती थी।
"वसुधैव कुटुंकम" की अवधारणा को जन्म देने वाली उस पूण्य भूमि पर सौ वर्ष पूर्व तक सनातन धर्म पूरी प्रतिष्ठा के साथ खड़ा था।
पर आज का सत्य यह है कि अफगानिस्तान से महाविनायक पर लेख लिख कर जब उस युवक ने भारत भेजा तो पत्रिका के सम्पादक ने भय के मारे लेख में उनका नाम तक नहीं जोड़ा, कि कहीं उन्हें अफगानिस्तान में इसका दण्ड न भोगना पड़े।
सभ्यताओं के चिन्ह कैसे मरते हैं देखें।
काबुल में एक अत्यंत प्राचीन तीर्थस्थल है 'आशा माई'।
पस्तो प्रभाव के कारण वहां के लोग उस स्थान को 'कोही आस्माई' कहते थे, मतलब आशामाई की पहाड़ी।
बीस वर्ष पूर्व सरकार ने उस पहाड़ी पर टेलीविजन का टावर लगा दिया, लोग धीरे धीरे उस स्थान को "कोही टेलीविजन" कहने लगे।
आशामाई का नाम मिट गया।
काबुल में ही एक सड़क थी, देवगनाना रोड।
देवगनाना संस्कृत के "देवगणानाम" का अपभ्रंस है।
अब उस सड़क का नाम है, दे-अफ़ग़ान रोड।
सभ्यता के चिन्ह ऐसे मरते हैं।
देश में लोकतंत्र का महापर्व चल रहा है। मत देना हमारा कर्तव्य भी है, और हमारी आवश्यकता भी। अपने घरों से निकलिए, और मत देते समय इतना अवश्य याद रखिए कि अब हमारे पास धरती का यही एक टुकड़ा है जहाँ हम अपनी परम्पराओं को निभा सकते हैं, महाविनायक की अर्चना कर सकते हैं।
ऐसा ना हो कि सौ पचास वर्षों बाद किसी दूसरे Lalit Kumar को इसी तरह दिल्ली, आगरा, मथुरा या कानपुर में अपने चिन्ह खोजने आना पड़े।
यकीन मानिए 200 वर्ष पहले काबुल के हिंदुओं ने भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि 200 वर्ष बाद हमारा कोई बच्चा जब काबुल आएगा तो उसे अपने पूर्वजों के चिन्ह इस दशा में मिलेंगे।
1946 ईस्वी तक सिंध के लोगों ने यह नहीं सोचा होगा कि पचास वर्ष बाद ही उनसे उनकी सम्पति, उनका धर्म, उनकी बेटियां, उनके बेटे सबकुछ छीन लिए जाएंगे।
हम सभ्यताओं के युद्ध में जी रहे हैं।
हमको छोड़कर हर सभ्यता हमारी परम्पराओं को अपराध और हराम बताती है, और मूर्ति तथा मूर्तिपूजकों की समाप्ति को ही अपना परम् उद्देश्य मानती है।
उनकी तलवार हमारी गर्दन पर है... यही है हमारा आज का सत्य।
मैं यह नहीं कह रहा कि आप फलाँ दल को वोट दीजिये।
मैं क्यों कहूँ?
मैं बस यह कह रहा हूँ कि मत देते समय ध्यान रखिये कि मत अपने देश के लिए देना है।
मत इसलिए देना है ताकि देश मे फिर कोई हत्यारा गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों को दीवाल में न चुनवा सके।
मत इसलिए देना है ताकि फिर किसी बिरसा मुंडा को अपनी संस्कृति के लिए प्राण न देना पड़े।
मत इसलिए देना है ताकि फिर किसी पद्मावती को अग्नि में न उतरना पड़े।
मत इसलिए देना है ताकि अयोध्या, मथुरा, काशी, कांची, पूरी, अवंतिका बनी रहे।
मत इसलिए देना है ताकि हजार वर्षों बाद भी जब हमारा कोई बेटा इस मिट्टी को सूँघे तो उसे इस मिट्टी में हमारी गन्ध मिल सके।
मत इसलिए देना है ताकि हमारा देश हमारा ही रहे।
अपना देश रहेगा तभी हम रहेंगे।
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