रविवार, 26 जुलाई 2026
साज़िश ही साज़िश
.......वांगचुक ने बिना किसी तिलचट्टे को खबर किए अनशन तोड़ दिया.....पुलिस के लव लेटर अब दंगाइयों के घर पहुंचने शुरू हो गए....बेचारे वीडियो डाल डाल के माफ़ी मांग रहे हैं....तो कुल मिला के किरान्ति की असली शुरुआत अब हुई है....अब पता चलेगा कि पुलिस के लव लेटर का क्या मतलब होता है.....लेकिन.....
......क्या ये जो कुछ भी हुआ उसकी वजह Paper leak था...!!...वो तो पहले भी होते रहे हैं...........असल वजह कुछ और थी...जिसका नाम FCRA है....शुरू से समझते हैं....
......2004 मे जब कॉंग्रेस की सरकार बनी थी तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे....लेकिन सब जानते हैं कि वो सिर्फ एक मुखौटा थे...असली सरकार NAC ( National Advisory Committee) चला रही थी जिसकी मुखिया थी उनकी राजमाता....और इस NAC के पीछे अधिकांश NGO थे जो विदेशों से चंदा लेते थे...बेहिसाब चंदा........और देने वाले उनसे अपना मकसद पूरा कर रहे थे....भारत की तरक्की को रोकने का मकसद....भारत को तोड़ने का मकसद....सनातन को खत्म करने का मकसद....
.....2010 के बाद इन विदेशी दानदाताओं को ये समझ मे आ गया कि कॉंग्रेस के प्रति जनता मे बेहद नाराजगी है और वो सत्ता मे वापस नहीं आने वाली.....मोदी की लोकप्रियता चरम पर है....तब उन्होंने अपने ही कुछ मोहरों को आगे किया......आप याद कीजिए....हैंडसम सिसोदिया और नटवरलाल...NGO वाले हैं....कबीर और परिवर्तन इनके NGO हैं........और यही क्यूँ.....इनकी पूरी पार्टी ही NGO की पार्टी है..........तो मकसद ये था कि.......कॉंग्रेस से नाराज वोटर सीधा मोदी की तरफ ना चला जाए....उसमे से कुछ उसके मोहरों की तरफ shift हो जाए....ताकि मोदी अगर आए भी तो कमजोर सरकार के साथ....जैसे अटलजी आए थे..........लेकिन ऐसा हुआ नहीं.....देश की जनता ने एकतरफा फैसला सुनाया और इनके सारे किए धरे पर पानी फिर गया........यहां से इनके पतन की शुरुआत होती है...........जो 2020 मे FCRA के संशोधन तक पहुंचती है.....
* FCRA कानून इंदिरा गांधी की सरकार ने Emergency के दौरान बनाया था...विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए.
* 2020 मे सरकार ने इसमे संशोधन करके...NGO के प्रशासनिक खर्च...यानि उनका खुद का खर्च 50% से घटाकर 20% कर दिया.....सारी विदेशी फंडिंग अब दिल्ली के एक SBI ब्रांच मे ही आएंगी....आधार जरूरी किया.
* इस संशोधन के बाद लगभग 6000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए....2019-20 के दौरान भी लगभग 2000 NGO के लाइसेंस रद्द हुए.....और सरकार के सामने एक नई समस्या खड़ी हुई कि जिनके लाइसेंस रद्द हुए हैं...उनकी संपत्ति का क्या करें......ये जो पूरे देश में चर्च...सेंट जेवियर...सेंट मार्टिन जैसे स्कुल-कॉलेज खोल रखे हैं....उनका क्या किया जाए....!!....
* तो अब सरकार एक संशोधन लाना चाहती है कि यदि....यदि किसी NGO का लाइसेंस रद्द हो जाए....तो विदेशी फंड से बनी सारी संपत्ती सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के पास चली जाएंगी.
........सारा फसाद इसी बात का है....अब ना पैसा आ पाएगा और ना यहां जो empire बना रखा है वो बचेगा.........ये तो सड़क पर आ जाएंगे.......आ जाएंगे क्या....आ गए...... सबसे बड़ा नेता मोदी के घर के सामने जमीन पर लोट रहा है.....चमचे बीच चौराहे नाच रहे हैं.....पागलों जैसी हरकते कर रहे हैं.....क्या बोल रहे हैं.....उन्हें खुद नहीं पता....
इतिहास पूछेगा....
"....कितने आदमी थे...."
ज़वाब मिलेगा.....
"....सरदार सिर्फ 2.....और उन दोनों ने ही पूरे के पूरे विपक्ष को पागल बना के सड़क पर नचा दिया था..."
जय श्रीराम 🙏🚩
शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
मंगलवार, 21 जुलाई 2026
अराजकता फैलाने की साज़िश
आज दिल्ली मैं जो कुछ भी हुआ नेपाल की तर्ज पर देश की राजधानी मैं अराज कता फैलाने की साजिश हुई उसका पूरा रोडमैप इन चारों के इर्द गिर्द घूमता है,
क्यों कि जिस प्रोटेस्ट मैं रोज के 100 लोग भी नहीं आ रहे थे उस प्रोटेस्ट मैं एक दम से 10 हजार लोग कैसे इक्ट्ठा हो गए ये सोचने वाली बात है,
जिस प्रोटेस्ट का आधार सिर्फ सोनम वांगचुक था उसके हट ते ही ऐसा क्या हुआ जो लोग इनके प्रोटेस्ट मैं शामिल हो गए,
यह अब किसी से छुपा नहीं है कि यह कॉकरोच जनता पार्टी का अस्तित्व केजरीवाल के द्वारा खड़ा किया गया है,
उसी केजरीवाल से सहारा दिया,फंड दिया भीड़ की ताकत दी क्यों कि कुछ सालों पहले चाहे दिल्ली दं गा हो या फिर शाहीन बाग का आन्दोलन पूरी तरह से आम आदमी पार्टी से समर्थित था,
दूसरी तरफ है अखिलेश यादव जो शुरू से इस आंदोलन को समर्थन दे रहे है ओर उनकी धर्मपत्नी डिंपल यादव हो या उनकी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज यह हर दिन जंतर मंतर पर हाजिरी लगा रही थी उससे यही साबित होता है कि 2027 के चुनाव के लिए कॉकरोचों का सहारा ले रहे है,
फिर ये चंद्रशेखर रावण जो कि दलितों के नाम का सहारा लेके हिंदू के खिलाफ दलितों को खड़ा करने का काम करता है,जो खुद एक दलित वाल्मीकि समाज की बेटी की जिंदगी से खिलवाड़ कर चुका है,
फिर ये अभिजीत दीपके जो कि कुछ दिन पहले ही लाइम लाइट मैं आया है जिसे आज से 2 महीने पहले सिर्फ आम आदमी पार्टी के प्रचारक के रूप मैं जानते थे वो कैसे इस प्रोटेस्ट का लीड रोल निभाने लगा ये सोचने वाली बात है,
क्यों कि जिसे बोलने का तरीका नहीं मालूम जिसे थोड़ी सी गर्मी सहन नहीं हो सकती जिसे भूख सहन नहीं हो सकती वो अपने आप को GenZ बता कर मोदी हाय हाय कर रहा है,
कल तो जो अभिनेता,नेता , सेलिब्रिटी,अपना चेहरा चमका रहे थे वो आज लठ्ठ खाने के वक्त नजर नहीं आए यह सभी लोगों का आना एक पैड प्रमोशन था,
क्यों कि मैने एक पहले पोस्ट करी है जिसमे यह बताया गया है कि जितने भी यूट्यूबर्स, सेलिब्रिटी, आज सोशल मीडिया पर इस प्रोटेस्ट को समर्थन दे रहे है वो सिर्फ ओर सिर्फ पैड PR के चलते कर रहे है,
क्यों कि जिन्हें राजनीति का R भी समझ नहीं आता हो वो इतनी जल्दी कैसे राजनीति मैं ज्ञान देने लग गए,
सोमवार, 20 जुलाई 2026
रविवार, 19 जुलाई 2026
शनिवार, 18 जुलाई 2026
गुरुवार, 16 जुलाई 2026
बुधवार, 15 जुलाई 2026
इतिहास में दुर्दशा
इतिहास में दुर्दशा?
मैं बहुत सोचता हूं पर उत्तर नहीं मिलता...🤔🤔
आप भी इन प्रश्नों पर गौर करना कि...👇👇
१. जिस सम्राट के नाम के साथ संसार भर के इतिहासकार “महान” शब्द लगाते हैं...
२. जिस सम्राट का राज चिन्ह #अशोकचक्र भारत देश अपने झंडे में लगाता है...
३. जिस सम्राट का राज चिन्ह चारमुखी शेर को भारत देश राष्ट्रीय प्रतीक मानकर सरकार चलाती है और सत्यमेव जयते को अपनाया गया है...
४. जिस देश में सेना का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान सम्राट अशोक के नाम पर अशोक चक्र दिया जाता है...
५. जिस सम्राट से पहले या बाद में कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नहीं हुआ, जिसने अखंड भारत (आज का नेपाल, बांग्लादेश, पूरा भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान) जितने बड़े भूभाग पर एकछत्र राज किया हो...
६. जिस सम्राट के शासन काल को विश्व के बुद्धिजीवी और इतिहासकार भारतीय इतिहास का सबसे स्वर्णिम काल मानते हैं...
७. जिस सम्राट के शासन काल में भारत विश्व गुरु था, सोने की चिड़िया था, जनता खुशहाल और भेदभाव रहित थी...
८. जिस सम्राट के शासन काल जी टी रोड जैसे कई हाईवे रोड बने, पूरे रोड पर पेड़ लगाये गए, सराये बनायीं गईं इंसान तो इंसान जानवरों के लिए भी प्रथम बार हॉस्पिटल खोले गए, जानवरों को मारना बंद कर दिया गया...
ऐसे महान #सम्राटअशोक की जयंती उनके अपने देश भारत में क्यों नहीं मनायी जाती? न कि कोई छुट्टी घोषित कि गई है अफ़सोस जिन लोगों को ये जयंती मनानी चाहिए, वो लोग अपना इतिहास ही नहीं जानते और जो जानते हैं वो मानना नहीं चाहते...
1. जो जीता वही चंद्रगुप्त ना होकर जो जीता वही सिकन्दर “कैसे” हो गया…? (जबकि ये बात सभी जानते हैं कि सिकंदर की सेना ने #चन्द्रगुप्तमौर्य के प्रभाव को देखते हुये ही लड़ने से मना कर दिया था बहुत
ही बुरी तरह मनोबल टूट गया था जिस कारण , सिकंदर ने मित्रता के तौर पर अपने सेनापति सेल्युकश कि बेटी की शादी चन्द्रगुप्त से की थी)
2. #महाराणाप्रताप ”महान” ना होकर ... अकबर ”महान” कैसे हो गया…? (जबकि, अकबर अपने हरम में हजारों लड़कियों को रखैल के तौर पर रखता था यहाँ तक कि उसने अपनी बेटियो और बहनोँ की शादी तक पर प्रतिबँध लगा दिया था जबकि महाराणा प्रताप ने अकेले दम पर उस अकबर के लाखों की सेना को घुटनों पर ला दिया था)
3. #सवाईजयसिंह को “महान वास्तुप्रिय” राजा ना कहकर शाहजहाँ को यह उपाधि किस आधार मिली...? जबकि साक्ष्य बताते हैं कि #जयपुर के हवा महल से लेकर तेजोमहालय {ताजमहल} तक, महाराजा जय सिंह ने ही बनवाया था...!
4. जो स्थान महान मराठा #क्षत्रियवीरशिवाजी को मिलना चाहिये वो क्रूर और आतंकी औरंगजेब को क्यों और कैसे मिल गया...?
5. स्वामी विवेकानंद और आचार्य
चाणक्य की जगह… विदेशियों को हिंदुस्तान पर क्यों थोप दिया गया…?
6. तेजोमहालय- ताजमहल, लालकोट- लाल किला, फतेहपुर सीकरी का देव महल- बुलन्द दरवाजा एवं सुप्रसिद्ध गणितज्ञ वराह मिहिर की मिहिरावली(महरौली) स्थित वेधशाला- कुतुबमीनार, क्यों और कैसे हो गया...?
7. यहाँ तक कि राष्ट्रीय गान भी… संस्कृत के वन्दे मातरम की जगह गुलामी का प्रतीक जन-गण-मन हो गया है कैसे और क्यों हो गया...?
8. और तो और हमारे आराध्य भगवान् राम व कृष्ण तो इतिहास से कहाँ और कब गायब हो गये...? पता ही नहीं चला, आखिर कैसे...?
9. यहाँ तक कि हमारे आराध्य भगवान राम की जन्मभूमि पावन अयोध्या भी कब और कैसे विवादित बना दी गयी…? हमें पता तक नहीं चला…
कहने का मतलब ये है कि हमारे दुश्मन सिर्फ बाबर, गजनवी, तैमूरलंग ही नहीं हैं बल्कि आज के सफेदपोश तथाकथित सेक्यूलर भी हमारे उतने ही बड़े दुश्मन हैं।
#धर्मो_रक्षति_रक्षितः #viralpost
रविवार, 12 जुलाई 2026
शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
विपक्ष का हंगामा
मंदिर, मस्जिद में लूट तो हमेशा से ही हुई है. लेकिन इस बार बीजेपी की सरकार है तो विपक्ष नें इसे मुद्दा बना लिया है. जबकि जाँच जारी है.
मदरसों में चोरी, अजमेर शरीफ में चोरी समेत अनेक विडिओ जो मुस्लिम के ही होते हैं उन पर कांग्रेस समेत विपक्ष चुप रहता है.
कांग्रेस के राज के घोटाले जिनके कारण कांग्रेस को जनता नें ही सत्ता से बाहर कर दिया us पर विपक्ष चुप रहता है.
ठगबंधन वाले अनेक राज्यों में आपस में ही लड़ते हैं, वह सब ठीक है.
बीजेपी, आरएसएस पर इल्जाम लगाना आसान है. लेकिन क्या स्टेट बैंक भी चोर है जबकि उसके कर्मचारी भी लूट में शामिल बताएं जाते हैं. घर घर में ही परिवार के कुछ जन चोरी कर लेते हैं तो क्या परिवार चोर हो जाता है.
बीजेपी,, आरएसएस बहुत बड़े संगठन हैं. चोरी करने वाले को किसी संगठन से जोड़ना ठीक नहीँ होता. सब चोर जेल जाने चाहिए औऱ धन वापस आना चाहिए. यही संभव है. यही हो रहा है.
लेकिन कांग्रेस समेत विपक्ष जो राम मंदिर को कोसते थे, गालिया देते थे आज भगवा धारी बने घूम रहे हैं. ममता बैनर्जी जैसा हाल होना इन सबका. शर्म नहीँ आती इनको अपने पुराने वीडियो देख सुनकर.
चोर का कोई धर्म या पार्टी नहीँ होती. लेकिन भारतीय राजनीती के हारे हुए लंगूर गंदी उछल कूद से बाज़ नहीँ आते. जनता सब देख रही है. इन रंगरूटो को जो अब सनातन का राग अलाप रहे हैं, सब हारेंगे.
शनिवार, 4 जुलाई 2026
शुक्रवार, 3 जुलाई 2026
शाहीन बाग बन रहा
क्या जंतर मंतर को शाहीन बाग बनाया जा रहा है? जंतर मंतर पर आजकल जिन लोगों की जनसंख्या आप देखेंगे यह वही पूरी की पूरी टीम दिखाई दे रही हैं जो शाहीन बाग पर हुआ करती थी। बिरयानी से लेकर के रूहअफजा सारे के सारे भाई जान ही दे रहे हैं और धीरे-धीरे उनकी जनसंख्या इतनी बढ़ती जा रही है कि बाकी लोग युटयुबर्स के अलावा कोई और दिखाई ही नहीं दे रहा है।।
यहां तक की एक बुजुर्ग शायद NEET अभ्यर्थी रहे होंगे। नमाज पढ़ते दिखाई दिए । सोनम वांगचुक वृंदा करात और कम्युनिस्ट जहां पर हो वहां पर देशहित की तो कोई बात हुई नहीं सकती। क्योंकि इस , they never ever work for the welfare of our country.
#UPPolice
गुरुवार, 2 जुलाई 2026
मंगलवार, 30 जून 2026
शुक्रवार, 26 जून 2026
गुरुवार, 25 जून 2026
इमरजेंसी
भारत के इतिहास का वो काला दिन जब कांग्रेस के एक परिवार ने अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए लोकतंत्र की हत्या की
आपातकाल
भारत के इतिहास का वो काला दिन जब कांग्रेस के एक परिवार ने अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए लोकतंत्र की हत्या की
मुखर्जी और शास्त्री जी की मृत्यु?
भारत के पहले उधोगमंत्री श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कश्मीर जाने से रोकते हुए सुचेता कृपलानी जीक्षने कहा था - वहां न जाएं, पंडित जवाहरलाल नेहरू आपकी हत्या करवा देंगे❗
क्या सचमुच सुचेता जी सहीं थी❓❓
6 जुलाई 1901 को श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ और 23 जून 1953 को संदिग्ध परिस्थति में उनकी कश्मीर में मौत❗❗🔥
श्यामा प्रसाद मुखर्जी जब कश्मीर में जा रहे थे तो कांग्रेस अध्यक्ष रहे आचार्य जे. बी. कृपलानी जी की पत्नी व स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी जी ने उनसे कहा था,
"'पंडित जवाहरलाल नेहरू कश्मीर से उन्हें जीवित नहीं लौटने देंगे इस लिए बेहतर होगा कि वे वहां न जाएं❗''
इस पर मुखर्जी ने कहा था -
मेरी पंडित जवाहरलाल नेहरू से कोई व्यक्तिगत शत्रुता तो है नहीं, केवल नीतियों का मतभेद है❗
इस पर सुचेता कृपलानी जी ने कहा -
आप शायद पंडित जवाहरलाल नेहरू की मानसिकता को नहीं जानते, वह आपको अपना सबसे प्रबल प्रतिद्वंद्वी और जनता की नजरों में उभरता हुआ विकल्प मानते हैं इसलिए वे आपको खत्म करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं❗🔥
कश्मीर में हुई श्यामाप्रसाद मुखर्जी की संदिग्ध मौत ने सुचेता कृपलानी जी के अंदेशे को सही साबित कर दिया❗
तो क्या श्यामा प्रसाद मुकर्जी की मौत के पीछे पंडित जवाहरलाल नेहरू थे❓❓
मत भूलिए कि उस वक्त कश्मीर में पंडित जवाहरलाल नेहरू के मुंहलगे शेख अब्दुल्ला की सरकार थी जिन्हें खुश करने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर में धारा- 370 लगाकर उन्हें लगभग संप्रभु कश्मीर का शासक बनाया था❗
सुचेता कृपलानी जी और श्यामाप्रसाद मुखर्जी के इस बातचीत की चर्चा श्याम प्रसाद मुखर्जी के अनन्य सहयोगी और उनके साथ मिलकर जनसंघ का निर्माण करने वाले बलराज मधोक ने अपनी जीवनी में किया है❗🔥
दरअसल उन दिनों कश्मीर में जाने के लिए रक्षा मंत्रालय से परमिट लेना पड़ता था और श्यामाप्रसाद मुखर्जी का कहना था कि एक राष्ट्र में दो विधान नहीं चलेंगे, वह इस कानून को तोड़कर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग साबित करने पर तुले थे❗
माधेपुर में रावी नदी पर बने पुल को ज्यों ही श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने पार कर कश्मीर में पैर रखा, शेख अब्दुल्ला की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उस वक्त जम्मू-कश्मीर राज्य देश के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर था इसलिए उनकी गिरफ्तारी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती थी❗
अचानक 24 जून को अखबार में यह खबर आयी कि 23 की रात को श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत हो गयी है, श्यामाप्रसाद मुखर्जी को जेल से निकाल कर अस्पताल ले जाया गया था जहां उनकी मौत हुई❗
बलराम मधोक के अनुसार, ''अस्पताल में श्यामाप्रसाद मुखर्जी का उपचार करने वाली नर्स ने बताया था कि रात को 9 बजे डॉक्टर अलीजान ने श्यामाप्रसाद मुखर्जी को इंजेक्शन दिया था और उस नर्स के अनुसार डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने इसका विरोध किया और कहा कि उनकी तबियत पूरी तरह से ठीक है उन्हें किसी दवा या इंजेक्शन की जरूरत नहीं है लेकिन उस इंजेक्शन के लगने के एक घंटे के भीतर मुखर्जी की मौत हो गयी❗''
श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत के बाद उनकी मां ने इसकी जांच की मांग करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा और यही नहीं, सभी सांसदों ने इस मौत की जांच की संयुक्त मांग की थी, लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू
श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत की आखिरी तक जांच कराने के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने जांच नहीं ही कराया❗❗🔥
तो क्या सुचेता कृपलानी सही थीं ❓❓
👉🏿 कम से कम श्यामाप्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच न करवा कर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सुचेता कृपलानी के संदेह को पुख्ता आधार तो प्रदान की ही दिया था❗
आज श्यामाप्रसाद मुखर्जी के उस बलिदान के कारण ही -
कश्मीर में आप बिना परमिट जा रहे हैं❗
देश का सर्वोच्च न्यालय वहां के कानून में हस्तक्षेप कर सकता है❗
वहां भारतीय झंडा फहराया जा सकता है❗
प्रधानमंत्री को अब मुख्यमंत्री कहा जाता है❗
लेकिन श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान को राष्ट्र का पूरा सम्मान तभी मिलेगा जब कश्मीर से धारा- 370 को पूरी तरह से हटा कर कश्मीर का भारतीय संघ में पूर्ण विलय किया जाएगा❗
एक बात और धारा- 370 थोपने के वक्त पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यह व्यवस्था कर ली थी कि वह संविधान सभा में मौजूद न रहें ताकि सदस्यों के विरोध से वह बच जाएं, वह अमेरिका चले गए थे और गोपालस्वामी अय्यर ने जब इसे पेश किया तो समूची कांग्रेस पार्टी ने तब इसका विरोध किया था पर उनके विरोध को शांत करने की जिम्मेवारी उपप्रधानमंत्री होने के नाते सरदार पटेल पर आ गयी थी और सरदार वल्लभभाई पटेल इस धर्मसंकट में फंस गए कि यदि इस प्रस्ताव को वह पलट देते हैं तो अमेरिका में बैठे भारतीय प्रधानमंत्री के पद की गरिमा की बड़ी हानि होगी तब मन मारकर सरदार वल्लभभाई पटेल को इसके लिए कांग्रेस के सभी सदस्यों को सहमत करना पड़ा❗
ताज्जुब होता है कि उस समय सभी कांग्रेसियों ने इसे एक अलगाववादी धारा मानते हुए इसका विरेाध किया था और आज उसी कांकरोच कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्य इसके हटाए जाने की मांग को सांप्रदायिक करार देते है❗
बुधवार, 24 जून 2026
मंगलवार, 23 जून 2026
झूठा इल्जाम
*मेनका गाँधी के नाम एक खुला प्रतिवाद पत्र*
*प्रसिद्ध जीव दया प्रेमी श्रीमति मेनका गांधी के द्वारा जैन मुनियों पर पिच्छि के प्रयोग हेतु विगत वर्षों में पंद्रह लाख मोर पक्षियों की हत्या के लगाए, भ्रामक एवम दुराग्रह युक्त झूठे आरोपों की, हम दिशा बोध एवम प्रबुद्ध जैन विचार मंच परिवार, कोलकाता, कठोर शब्दों में निंदा एवम प्रतिवाद करते है। दिगंबर जैन मुनि तो छोटे से छोटे जीवो को बचाने के लिए ही मयूर पिच्छी का उपयोग करते हैं, उन पर ऐसे निंदनीय बयान देने की हम घोर निंदा करते हैं। मेनका गाँधी अपना बयान वापस लें और अहिंसा प्रेमी समाज को आंदोलन करने पर मजबूर न करें*।
*मोर पक्षी भारत का राष्ट्रीय पक्षी है एवम उसे सरकार द्वारा कानूनी संरक्षण प्राप्त है l एक मोर साल में 150 से 200 पंख छोड़ता है जो हर पंख छः माह मे पुनः पूरा उग जाता है l मोर आसोज और कार्तिक माह मे स्वतः अपने पंखों का उत्सर्जन करते है और जैन मुनि की पिच्छि की लिए ऐसे पंखों से ही पिच्छिका का निर्माण किया जाता है l करीब दो हजार दिगंबर संतों की मोर पिच्छिका के लिए वर्ष में अधिकतम मात्र, दस लाख मोर पंखों की आवश्यकता रहती है और अधिकृत जानकारी के अनुसार भारत मे मोर ही एक मात्र ऐसा पक्षी है, जिसकी संख्या तीव्र गति से वृद्धि हुई है* l
*भारत में मोर की संख्या – पिछले 50 साल का ट्रेंड* -
*पूरे देश में मोर की राष्ट्रीय स्तर पर गिनती कभी नहीं हुई,किन्तु _State of India’s Birds 2020/2023_ और SACON की रिसर्च से ट्रेंड साफ है कि 1970-2000 के बीच संख्या स्थिर या हल्की गिरावट जरूर हुई परंतु 2000-2025 के बीच इनकी संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है । पिछले 25 साल में मोर *सबसे तेजी से बढ़ने वाले पक्षियों* में से एक है l *पिछले 20 साल में eBird डेटा के मुताबिक तमिलनाडु में 6 गुना बढ़े, पूरे देश में दोगुने हुए. केरल में हर जिले में अब दिखते हैं, जो पहले बहुत दुर्लभ थे l अकेले तमिलनाडु में 2024-2025 SACON सर्वे के अनुसार, 38 लाख से 61 लाख मोर है तथा कमोबेश हर 38 के 38 जिलों में मौजूद है* l
*पूरे भारत में 50% पक्षी प्रजातियां घट रही हैं, लेकिन मोर बढ़ रहे हैंl अकेले तमिलनाडु का 61 लाख सबसे नया वैज्ञानिक अनुमान है*!
*राजस्थान में 1975 - 2000 के दौरान*, *मोर आबादी मे जरूर थोड़ी गिरावट दर्ज हुई l 1991 तक राजस्थान में मोर सबसे ज्यादा पाए जाने वाले राज्यों में था, परंतु फिर वर्ष 2000-2025 से तेज़ बढ़ोतरी का दौर पुनः आया हुआ है* l
*आपने किस आधार पर जैन मुनियों पर मोर हत्या का आरोप लगाया है, या तो तथ्यों के साथ पुष्टि करें, नहीं तो जैन समाज से एवम जैन मुनियों से, सार्वजनिक मंच से सोशल मीडिया के माध्यम से, लिखित माफीनामा लिख कर खेद व्यक्त करें* l
*चिरंजी लाल बगड़ा (डॉ)*
(शाकाहार विशेषज्ञ, जीव दया प्रेमी)
संपादक दिशा बोध
*कोलकाता*
#ManekaGandhi
#birdslover
#animalwelfareboardofindia
#AnimalRightsActivists
#pmonarendramodi
सोमवार, 22 जून 2026
रविवार, 21 जून 2026
शनिवार, 20 जून 2026
शुक्रवार, 19 जून 2026
कांग्रेस के समय में सब डीऍम होता थे
राहुल गांधी के कार्यक्रम में एक लड़की ने कहा: "बहुत लेंदी पेपर दिया जाता है। UPSC के लिए 15 लाख लोग परीक्षा देते हैं। 1,000 लोग चुने जाते हैं। — बाकी 14 लाख लोगों के लिए सरकार क्या कर रही है? उनके लिए प्लान-B क्या है?"
बहन कांग्रेस के जमाने में जो लोग IAS में सेलेक्ट नहीं हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार डिप्टी कलेक्टर बना देती थी
और जो लोग डिप्टी कलेक्टर में सेलेक्ट नहीं हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार नायब तहसीलदार बना देती थी
जो लोग प्रोफेसर में सेलेक्ट नहीं हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार रीडर बना देती थी और जो रीडर नहीं सेलेक्ट हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार लेक्चर बना देती थी 🤣🤣🤣😂
वैसे यह बहन यह भी पूछ सकती थी
20 लाख लोग लॉटरी का टिकट खरीदते हैं और सिर्फ़ एक जीतता है।
बाकी 19,99,999 लोगों के लिए मोदी क्या कर रहे हैं?
यह इनका आईक्यू लेवल है
बहन परीक्षा का सिद्धांत ही है कि यह टफ होना चाहिए कठिन होना चाहिए क्योंकि इसमें सर्वोत्तम का चुनाव होता है ना कि अच्छे का चुनाव होता है
वीडियो कमेन्ट में 👇👇
गुरुवार, 18 जून 2026
बुधवार, 17 जून 2026
रविवार, 14 जून 2026
ब्रह्माकुमारी आश्रम
*ब्रह्मकुमारीज़ जैसे हाइब्रिड मतों से सावधान ब्रह्मकुमारीज़ के कारण हिंदुओं को होने वाले 16 नुकसान* 👇
1. बिंदी/तिलक नहीं लगाने को कहते हैं (सिर मुंडवाकर रहने जैसा).
2. केवल सफ़ेद साड़ियाँ पहनने को कहते हैं (विधवा की तरह).
3. मंदिरों का प्रसाद नहीं खाने को कहते हैं।
4. हिंदू देवी-देवताओं को साधारण इंसान बताने की सोच।
5. शादी नहीं करने को प्रेरित करते हैं।
6. शादी होने पर भी संतान न पैदा करने की शिक्षा।
7. अगर बच्चे हों तो उन्हें शादी न करके संस्था का सदस्य बनाने का दबाव।
8. शिवलिंग पर LED बल्ब लगाकर केवल बल्ब की पूजा करने जैसी विचित्र प्रथाएँ।
9. पति-पत्नी को भाई-बहन की तरह संबोधित करने को कहना; कुछ लोग राखी तक बाँधते हैं।
10. यह प्रचार करना कि श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश नहीं दिया।
11. मंदिरों में स्टॉल लगाकर “सबका भगवान एक ही है” कहना और हिंदुओं को अज्ञानी बताना।
12. चर्च और मस्जिद जाने वालों को ज्ञान न देने की बात, यह कहकर कि उनके पास पहले से ज्ञान है।
13. व्यास, वशिष्ठ जैसे ऋषियों को अज्ञानी कहना।
14. यीशु और मोहम्मद जैसे पैग़म्बरों को धर्मात्मा बताना।
15. इस्लाम की तरह “सृष्टि नहीं, सृष्टिकर्ता की पूजा करो” का प्रचार।
16. सबसे बढ़कर – बिना किसी प्रमाणिक ग्रंथ या शास्त्र के मनगढ़ंत व्याख्याएँ और उपदेश देना इनका एजेंडा है।
यही हैं → ब्रह्मकुमारीज़ नाम की हिंदू-विरोधी संस्था, जो हमारे हिंदू समाज में ज़हर घोलने का काम कर रही है।
सच्चाई कड़वी ही होती है।
फिर दोहरा रहा हूँ — हिंदुओं को निर्बल बनाकर पाखंडी मतों की मदद करने वाली कई व्यवस्थाओं में ये भी एक हैं।
शनिवार, 13 जून 2026
शुक्रवार, 12 जून 2026
मेरा भारत महान
कई पश्चिमी देश भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से ईर्ष्या क्यों करते हैं?
क्योंकि जो चीज़ अमेरिका या यूरोप में विलासिता मानी जाती है, वह भारत में बुनियादी, किफ़ायती और आसानी से उपलब्ध है।
1. सुबह 7 बजे तक आपके दरवाज़े पर रोज़ाना अख़बार — यह कोई महँगी विलासिता नहीं, बल्कि एक आम बात है।
2. सिर्फ़ ₹500/- महीने में 300 से ज़्यादा TV चैनल + कम क़ीमत वाले OTT — मनोरंजन के लिए जेब खाली करने की ज़रूरत नहीं।
3. पूरे देश में तेज़ रफ़्तार 5G इंटरनेट सिर्फ़ ~₹300/- महीने में — दुनिया का सबसे सस्ता डेटा, बड़े पैमाने पर उपलब्ध।
4. बड़े शहरों में विश्व-स्तरीय हवाई अड्डे — साफ़-सुथरे, आधुनिक और तेज़ी से विकसित होते हुए।
5. किराने का सामान और ज़रूरी चीज़ें 10-20 मिनट में आपके दरवाज़े पर — दुनिया में कहीं और ऐसी सुविधा नहीं।
6. बिना लंबी वेटिंग लिस्ट के डॉक्टर उपलब्ध — उसी दिन सलाह लें, अक्सर बिना अपॉइंटमेंट के भी।
7. घर पर ही सैंपल कलेक्शन और डायग्नोस्टिक टेस्ट, कम क़ीमत पर — स्वास्थ्य सेवाएँ सभी की पहुँच में।
8. कपड़े धोने/इस्त्री करने की सेवाएँ आपके दरवाज़े पर, जेब के अनुकूल दरों पर — विदेशों में यह विलासिता है, यहाँ एक आम बात।
9. किफ़ायती घरेलू मदद — नौकरानी, रसोइया, ड्राइवर और बच्चों की देखभाल के लिए सहायक — जो ज़िंदगी को आसान बनाते हैं।
10. हर सुबह 5 बजे ताज़ा दूध की डिलीवरी — सीधे आपके दरवाज़े पर।
11. रेस्टोरेंट में मुफ़्त पानी + हर जगह सस्ती बोतलबंद पानी — बुनियादी चीज़ों के लिए कोई शुल्क नहीं।
12. कहीं भी UPI से पेमेंट, यहाँ तक कि ₹5 के लिए भी — तुरंत, हर जगह मान्य, डिजिटल-फ़र्स्ट अर्थव्यवस्था।
13. मुक़दमेबाज़ी के डर वाला माहौल नहीं — रिश्तेदार छोटी-मोटी बातों पर एक-दूसरे पर मुक़दमा नहीं करते।
14. अगर आप भौतिक चीज़ों की अंधी दौड़ से दूर रहें, तो ज़िंदगी ज़्यादा शांत होती है — गला-काट प्रतिस्पर्धा के बजाय आपसी मेलजोल और अपनापन।
15. बच्चों के लिए किफ़ायती स्कूली शिक्षा और अंधाधुंध गोलीबारी (गन वायलेंस) का कोई डर नहीं।
16. मौसम आमतौर पर सुहावना रहता है; भूकंप, तूफ़ान या लू लगने का डर बहुत कम होता है।
17. ट्रेन, ऑटो/टैक्सी और अन्य परिवहन के साधन बहुत सस्ते हैं, साथ ही कनेक्टिविटी भी बेहतरीन है।
18. डाकघर की सेवाएँ भी किफ़ायती दरों पर उपलब्ध हैं।
19. मुंबई मेट्रो में 'डब्बावालों' की सटीक और भरोसेमंद सेवा।
20. पूरे साल कई रंग-बिरंगे त्योहार और धार्मिक उत्सव मनाए जाते हैं।
भारत शायद हर जगह पूरी तरह साफ़-सुथरा न हो — यह शायद हर तरह से 'परफ़ेक्ट' न हो — लेकिन यहाँ ज़िंदगी बिताना बेहद सुखद और शानदार है।
किफ़ायती, सुविधाजनक, आपस में जुड़ा हुआ और मानवीय!
भारत सिर्फ़ एक देश नहीं है — यह एक आरामदायक जीवनशैली है। आप आध्यात्मिक रूप से विकसित होते हैं।
देश का विशाल आकार और विविधता घूमने के लिए ढेरों जगहें प्रदान करती है।
यह हमारा अपना देश है — हमारी धरती।
गुरुवार, 11 जून 2026
लाल किला या लाल महल
#लाल_किले_का_सच...
अक्सर हमें यह पढाया जाता है कि दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ ने बनवाया था। लेकिन कहीं यह एक सफ़ेद झूठ तो नहीं। दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ के जन्म से सैकड़ों वर्ष पूर्व “महाराज अनंगपाल तोमर द्वितीय” द्वारा दिल्ली को बसाने के क्रम में ही बनाया गया था। इस क्रम में एक विशेष बात यह ज्ञात होती है कि महाराज अनंगपाल तोमर कोई और नहीं बल्कि महाभारत के अभिमन्यु के वंशज तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान के नाना जी थे।
लाल किले का असली नाम #लाल_कोट है, जिसे महाराज अनंगपाल द्वितीय द्वारा सन 1060 ईस्वी में दिल्ली शहर को बसाने के क्रम में ही बनवाया गया था जबकि शाहजहाँ का जन्म ही उसके सैकड़ों वर्ष बाद 1592 ईस्वी में हुआ है। दरअसल शाहजहाँ ने लाल किला को बनाया या बसाया नहीं अपितु इसे बुरी तरह से नष्ट करने की असफल कोशिश की थी ताकि, लालकिला स्वयं उसके द्वारा बनाया साबित हो सके। लेकिन सच सामने आ ही जाता है।
साक्ष-परीक्षा:
इसका सबसे बड़ा प्रमाण तो यही है कि तारीखे फिरोजशाही के पृष्ट संख्या 160 (ग्रन्थ 3) में लेखक लिखता है कि सन 1296 के अंत में जब अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना लेकर दिल्ली आया तो वो कुश्क- ए- लाल (लाल प्रासाद/महल) की ओर बढ़ा और वहां उसने आराम किया।
सिर्फ इतना ही नहीं अकबरनामा में इस बात के वर्णन हैं कि महाराज अनंगपाल ने ही एक भव्य और आलिशान दिल्ली का निर्माण करवाया था।
शाहजहाँ से 250 वर्ष पूर्व ही 1398 ईस्वी में एक अन्य जेहादी तैमूरलंग ने भी पुरानी दिल्ली का उल्लेख किया हुआ है (जो कि शाहजहाँ द्वारा बसाई बताई जाती है)।
यहाँ तक कि लाल किला के एक खास महल मे सुअर (वराह) के मुँह वाले चार नल अभी भी लगे हुए हैं। इस्लाम मे सुअर हराम है। इनका यहां क्या काम? वराह विष्णु अवतार का प्रतीक चिन्ह है सनातन के प्रमाण?
ऐसे किले के एक द्वार पर बाहर हाथी की मूर्ति अंकित है क्योंकि राजपूत राजा गजो (हाथियों) के प्रति अपने प्रेम के लिए विख्यात थे जबकि इस्लाम जीवित प्राणी के मूर्ति का विरोध करता है।
लाल किले का सच:
यही नहीं लाल किला के दीवाने खास मे केसर कुंड नाम से एक कुंड भी बना हुआ है। जिसके फर्श पर हिंदुओं के पूज्य कमल पुष्प अंकित है। साथ ही ध्यान देने योग्य बात यह है कि केसर कुंड एक हिंदू शब्दावली है। जो कि हमारे राजाओ द्वारा केसर जल से भरे स्नान कुंड के लिए प्राचीन काल से ही प्रयुक्त होती रही है।
उल्लेखनीय तथ्य ये है कि मुस्लिमों के प्रिय गुंबद या मीनार का इस महल में कोई अस्तित्व तक नही है।
लाल किला के दीवानेखास और दीवानेआम मे।
इतना ही नहीं दीवानेखास के ही निकट राजा की न्याय तुला अंकित है जो ब्राह्मणों द्वारा उपदेशित राजपूत राजाओ की न्याय तुला चित्र से प्रेरणा लेकर न्याय करना हमारे इतिहास मे प्रसिद्द है। दीवाने ख़ास और दीवाने आम की मंडप शैली पूरी तरह से 984 ईस्वी के अंबर के भीतरी महल (आमेर/पुराना जयपुर) से मिलती है जो कि राजपूताना शैली मे बना हुई है। आज भी लाल किला से कुछ ही गज की दूरी पर बने हुए देवालय हैं जिनमे से एक लाल जैन मंदिर और दूसरा गौरीशंकर मंदिर हैं और दोनो ही गैर मुस्लिम है जो कि शाहजहाँ से कई शताब्दी पहले राजपूत राजाओं के बनवाए हुए है।
शाहजहाँ या एक भी इस्लामी शिलालेख मे आखिर लाल किला का वर्णन क्यों नही मिलता है?
इतिहास में कहा गया, दिल्ली शाहजहाँ ने बसाई। किन्तु लालकिले के आसपास के घरों की निर्माण शैली राजपूताना में है।।ये कैसे सम्भव है कि शाहजहाँ ने सिर्फ लालकिला मुगल शैली में बनाया और बाकी नगर हिन्दू शैली में?
वास्तविकता ये है कि लाल किला और दिल्ली दोनो ही हिन्दू राजा अनंगपाल ने बनाया। 1060 ईसवी के आसपास।
“गर फ़िरदौस बरुरुए ज़मीं अस्त, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता”; अर्थात इस धरती पे अगर कहीं स्वर्ग है तो यही है, यही है, यही है। इस अनाम शिलालेख के आधार पर लाल किला को शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया करार दिया गया, जबकि पद्मावती का उल्लेख करते हुए शिलालेख को नकारकर पद्मावती को काल्पनिक बता दिया गया।
किसी अनाम शिलालेख के आधार पर कभी भी किसी को किसी भवन का निर्माणकर्ता नहीं बताया जा सकता और ना ही ऐसे शिलालेख किसी के निर्माणकर्ता होने का सबूत ही देते हैं।
लालकिले को एक हिन्दू प्रसाद साबित करने के लिए आज भी हजारों साक्ष्य मौजूद हैं। यहाँ तक कि लाल किला से सम्बंधित बहुत सारे साक्ष्य पृथ्वीराज रासो से ही मिलते है।
सरांस यही है कि लाल किले का निर्माण शाहजहाँ के द्वारा नहीं किया गया था बल्कि शाहजहाँ ने इस पूर्व महल में हेर फेर करके उसे अपना नाम देने कि कोशिश भर की थी। सत्य को अधिक दिनों तक छिपाया नही जा सकता, यह उक्ति यहाँ बखूबी लागु होती है।
स्रोत- प्रसिद्ध इतिहासकार पी. ऐन. ओक की किताब "इतिहास की भयंकर भूले से"...
#आर्यावर्त_का_अघोर_अतीत
शर्मनाक कांग्रेस
एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया।
नेहरू ने श्रेय ले लिया,।
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया।
इतिहास की किताबें लिखती हैं— “नेहरू ने AIIMS बनाया”।
यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है।
Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।
AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।
AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने
ज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया—
जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।
वह ज़मीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होता
AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है।
यह ज़मीन:
न सरकार ने खरीदी,,,,,
न अधिग्रहित की,,,,,
यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी—
जो उन्होंने दान में दी।
आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है।
कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।
वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था,,,,
आज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।
कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे।
तब अमृत कौर ने:
न्यूज़ीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाया
उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था की
अगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की ज़रूरत ही क्यों पड़ती ?
वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रही
AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।
उन्होंने लड़ाई लड़ी:
अफ़सरशाही की सुस्ती से
मंत्रिमंडल की उदासीनता से
कांग्रेस की ढिलाई से
फाइलें चलीं क्योंकि उन्होंने ज़बरदस्ती चलवाईं।
नेहरू ने वास्तव में क्या किया ?
पहले से बने काम को मंज़ूरी दी
भाषण दिए
फीते काटे
इसे संस्थान-निर्माण नहीं कहते।
इसे ऑप्टिक्स कहते हैं।
कांग्रेस ने उन्हें क्यों भुला दिया ?
क्योंकि यह सच तीन मिथक तोड़ देता है:
कांग्रेस ने भारत बनाया
नेहरू ने संस्थान खड़े किए
सत्ता = योगदान
AIIMS इन सबका उलटा प्रमाण है।
एक शाही महिला ने
अपनी विरासत जनस्वास्थ्य के लिए कुर्बान कर दी।
कांग्रेस ने श्रेय हड़प लिया।
हकीकत
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने सिर्फ़ नामपट्टिका लगाई।
बलिदान किसी और का।
इश्तिहार कांग्रेस का.
नाली के कीड़े कॉकरोच
कॉकरोच पार्टी में थोड़े बहुत लोग अच्छे भी है या फिर सब के सब मीठे और समलैंगिक ही भरे पड़े है ? मेरी मोदी सरकार से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि इन मानसिक बीमार लोगों का दिल्ली के किसी अच्छे हॉस्पिटल में भर्ती करवाये ये हमारे जैसे ही शस्त्रधारी लोग है बस रास्ता भटक गए है
ये किसी इल्यूजन (भ्रम ) में फंसे हुए है इन्हें बढ़िया से ट्रीटमेंट दिलवाए और किसी के घर का चिराग़ बुझने से बचाए यही राष्ट्र हित होगा अब देश को बचाने के लिए मीठे लोग आ रहे है तब देश तो क्या ही बचना है हमे उन लोगों को बचाना है जो इनके संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते है
एक कॉकरोच हाथ में डायरी लेकर कहा रहा था ये हमारा संविधान है जब पत्रकार ने खोलकर दिखाने के लिए कहा तो कुछ नोट बनाकर घूम रहा है मतलब ये अपना ही संविधान बनकर घूम रहे है और बाबा साहब के संविधान को कचरे में फेंकना चाहते है
एक कॉकरोच तो सीधे हाई कोर्ट से आया हुआ था जब पत्रकार ने कहा आप तो कानून के रक्षक है फिर आप संविधान बचाने कैसे आए हुए थे तब कॉकरोच ने कहा आगे की बात ये भाईसाहब बताएंगे पत्रकार ने कहा नहीं आप ही बताइए तो
कहने लगा कि मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है बताओ अब ऐसे वकीलों बाला कोर्ट पहन कर फर्जी वकील बनकर जनता को गुमराह कर रहे है वकीलों को इस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करवानी चाहिएं इस तरह तो ये कॉकरोच वकीलों का नाम ही खराब कर के रख देंगे
एक कॉकरोच ने तो सीधे सीधे व्यपारियों से ही अपील कर डाली कि सरकार को टैक्स मत भरो सरकार अपने आप दबाव में आ जाएगी मतलब कॉकरोच पार्टी के नाम पर कुछ भी चल रहा है इनके पास कोई नया विजन नहीं है ये सब वही लोग है जो हर आंदोलन में अपना खर्चा पानी लेकर निकल जाते है महीने दो महीने इनका भी रोजगार चल निकलता है
मोदीजी जैसा कोई नहीँ
निर्वाचित प्रधानमंत्री.....
नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं बने थे...
नेहरू को अंग्रेजी सिस्टम से काम करने के लिए गांधी द्वारा नियुक्त किया गया था पहली बार....
अंग्रेजों की चमचागीरी करके प्रधानमंत्री बने रहे नेहरू...
मोदी की तुलना नेहरू से हो ही नहीं सकती.....
नेहरू का कद मोदी के सामने राष्ट्रभक्तों की नजरों में सदा बौना ही रहेगा....
लाख बुराई कर ले मोदी की विपक्षी पार्टियों के कुकुरमुत्ते... अपने आकाओं को खुश करने के लिए....
मगर उनकी आत्मा कभी भी मोदी का कद कम नहीं आंक सकेगी...
नेहरू ने अंग्रेजों द्वारा निर्मित सिस्टम से हिन्दुओ को काबू में रखते हुए भारत को मुसलमानों व ईसाइयों तथा देशविरोधी धड़े को सुरक्षित करने वाले कानून बनाने का काम जारी रखा....
मोदी ने देश के लिए स्वयं पूरा नवनिर्माण करवाया....
अंग्रेजी व्यवस्था व अंग्रेजी इमारतों की तुलना में हिंदू वास्तुशास्त्र अनुसार इमारतों का निर्माण किया....
मोदी को भारत की राष्ट्रभक्त जनता ने लगातार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना है
रंडीबाजी व अय्यासी के कारण एड्स से मरे नेहरू को मोहनदास करमचंद गांधी ने सरदार पटेल की जगह नियुक्त किया था...
प्रथम प्रधानमंत्री सरदार पटेल को चुना था तत्कालीन हिन्दुओ ने...
नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री थे ही नहीं....
फिर भी नेहरू ने जितने दिन तक सत्ता चलाई उस अंग्रेजी मेहरबानी के रिकॉर्ड को भी हिंदुओ के संगठित वोटबैंक ने तोड़ दिया है
अब मोदी सर्वाधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं.....
मोदी का रिकॉर्ड योगी तोड़ेंगे......
योगी रिकॉर्ड के साथ साथ भारत में बहुत कुछ और भी तोड़ेंगे ...
तैयार रहो चमचों छातीपीटन के लिए.......
क्योंकि हाथी चले बाजार.... कुत्ते भौंके हजार.....
🖋️...............
हिन्दूधर्मध्वजावाहक
बुधवार, 10 जून 2026
हम भारतीय
🥰😂
चाहे कितना भी *बड़ा घर* हो।
अगर
*कूलर* और *फ्रिज* के ऊपर सामान नही रखा
तो आप *भारतीय* नही हो
😜😝😆😜😁
*दिमाग* एक ऐसा *अंग* है,
जिसको *गरम* कर सकते हैं,
*ठंडा* भी कर सकते हैं,
*खा* भी *सकते* हैं,
*चाट* भी सकते हैं, और
*दही* भी बना सकते हैं !
🤯😂🤣
*पापड़* एक ऐसी *चीज़* है,
जिसे जहाँ से तोड़ना चाहो
वो वहाँ से कभी नही टूटता ।
😂😂😂
*दीवार* पर *लिखा* होता है,
*दीवार* पर *लिखना* ' मना ' है।
😝😃🤩
हमेशा *Special* बनके रहो,
अगर *आम* बनोगे तो,
*दुनिया अचार* बना देगी l
😃😝🤓
अगर *हरी सब्ज़ी और सलाद* खाने से कोई *पतला* होता..,
तो *भैंस* कब की *हिरण* बनकर *फुदक* रही होती ।
🤣🤣😇🥳
हम *भारतीय आसानी* से
किसी पर *भरोसा* नहीं करते,
*सोते* हुए व्यक्ति से *भी पूछ* लेते हैं
*सो रहे हो क्या।*
😂😂😂🤩
आने वाली *पीढ़ी माँ* के *आंचल* का *सुख नहीं* पायेगी..,
क्योंकि *जीन्स* पहनने वाली *माँ, आंचल* कहाँ से लाएगी।
😂🤣😜
*पैसा* आयेगा, *चला* जायेगा !,
*खुशियां* आयेंगी, *चली* जायेंगी !
एक *मोटापा* ही सच्चा *दोस्त* है,
जो *आकर* जाता नहीं ।
😂😂🤣
शुक्रवार, 5 जून 2026
नालंदा विश्वविद्यालय
सोचा एक बार फिर याद दिला दूँ । आप सब भूल गए होंगे ।
डॉ मनमोहन सिंह ने नोबल पुरस्कार विजेता "डॉ अमर्त्यसेन" को असीमित अधिकारों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम चांसलर नियुक्त किया। उन्हें इतनी स्वायत्तता दी गयी कि उन्हें विश्विद्यालय के नाम पर बिना किसी स्वीकृति और जवाबदेही के कितनी भी धनराशि अपने इच्छानुसार खर्च करने एवं नियुक्तियों आदि का अधिकार था । उनके द्वारा लिए गये निर्णयों एवं व्यय किये गये धन का कोई भी हिसाब-किताब सरकार को नहीं देना था ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि छुपे रुस्तम मनमोहन सिंह और अमर्त्यसेन ने मिलकर किस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से भयंकर लूट मचाई ? वो भी तब जबकि अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे ही 5 लाख रुपये का मासिक वेतन ले रहे थे जितनी कि संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, रक्षा सेनाओं के अध्यक्षों, कैबिनेट सचिव या किसी भी नौकरशाह को भी दिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है ।
इतना ही नहीं अमर्त्यसेन को अनेक भत्तों के साथ साथ असीमित विदेश यात्राओं और उस पर असीमित खर्च करने का भी अधिकार था ।
कहानी का अंत यहीं पर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने मनमोहनी कृपा से 2007 से 2014 की सात वर्षों की अवधि में कुल 2730 करोड बतौर चांसलर नालंदा विश्वविद्यालय खर्च किये.... आपकी आंखें फटी रह गयी न ... विश्वास नहीं हो रहा न कि मनमोहन सिंह ईमानदारी के चोंगे में कितने बड़े छुपे रुस्तम थे ?
चूंकि यूपीए सरकार द्वारा संसद में पारित कानून के तहत अमर्त्यसेन के द्वारा किये गये खर्चों की न तो कोई जवाबदेही थी और न ही कोई ऑडिट होना था और न ही कोई हिसाब उन्हें देना था इसलिए देश को कभी शायद पता ही न चले कि दो हज़ार सात सौ तीस करोड़ रुपये आखिर गये कहाँ ?
अभी कहानी खत्म नहीं हुई, पिक्चर अभी बाकी है -
अमर्त्यसेन सेन ने जो नियुक्तियां कीं उसपर भी कानूनन कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने किन किन की नियुक्तियां कीं ... आइये ये भी जान लेते हैं -
प्रथम चार नियुक्तियां जो उन्होंने कीं वो थे -
1. डॉ उपिंदर सिंह
2. अंजना शर्मा
3. नवजोत लाहिरी
4. गोपा सब्बरवाल
..... कौन थे ये लोग
... ? ? जानेंगे तो मनमोहन सिंह के चेहरे से नकाब उतर जायेगा ।
डॉ उपिंदर सिंह मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी पुत्री हैं और बाकी तीन उनकी करीबी दोस्त और सहयोगी ।
इन चार नियुक्तियों के तुरंत बाद अमर्त्यसेन ने जो अगली दो नियुक्तियां कीं वो गेस्ट फैकल्टी अर्थात अतिथि प्राध्यापक की थी और वो थे -
1. दामन सिंह
2. अमृत सिंह
.....गोया ये कौन थे ?
पहला नाम डॉ मनमोहन सिंह की मझली पुत्री और दूसरा नाम उनकी सबसे छोटी पुत्री का है ।
और सबसे अद्वितीय बात जो दामन सिंह और अमृत सिंह के बारे है वो ये कि ये दोनों "मेहमान प्राध्यापक" अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कभी भी नालंदा विश्वविद्यालय नहीं आयी ... पर बतौर प्राध्यापक ये अमेरिका में बैठे बैठे ही लगातार सात सालों तक भारी-भरकम वेतन लेती रहीं ।
उस दौर में नालंदा विश्वविद्यालय की संक्षिप्त विशेषता ये थी कि -
विश्विद्यालय का एक ही भवन था, इसके कुल 7 फैकल्टी मेम्बर और कुछ गेस्ट फैकल्टी मेम्बर (जो कभी नालंदा आये ही नहीं ) ही नियुक्त किये गये जो अमर्त्यसेन और मनमोहन सिंह के करीबी और रिश्तेदार थे । विश्विद्यालय में बमुश्किल 100 छात्र भी नहीं थे और न ही कोई वहां कोई बड़ा वैज्ञानिक शोध कार्य ही होता था जिसमे भारी भरकम उपकरण या केमिकल आदि का प्रयोग होता हो ।
फिर वो 2730 करोड़ रुपये गये कहाँ आखिर ?
मोदी जब सत्ता में आये और उन्हें जब इस कानूनी लूट की जानकारी हुई तो अमर्त्यसेन के साथ साथ मनमोहनी पुत्रियों को भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया ।
कहाँ गए वो राफेल राफेल चिल्लाने वाले... लौट आये बैंकॉक से ? कहाँ गयी गरीब किसान की पत्नी जिनके साथ अत्याचार हो रहा है ....अभी गरीब गुरबा के साथ सेल्फी में ही जुटी हैं क्या ? कहाँ गये वो 49 मॉब लिंचिंग के स्वयम्भू चिंतक जिनके पीठ पर लदा पुरस्कारों का अहसान अभी उतरा नहीं है तो आंखों में बेहयाई अभी बाकी है ?
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