शुक्रवार, 19 जून 2026

कांग्रेस के समय में सब डीऍम होता थे

राहुल गांधी के कार्यक्रम में एक लड़की ने कहा: "बहुत लेंदी  पेपर दिया जाता है। UPSC के लिए 15 लाख लोग परीक्षा देते हैं। 1,000 लोग चुने जाते हैं। — बाकी 14 लाख लोगों के लिए सरकार क्या कर रही है? उनके लिए प्लान-B क्या है?"

बहन कांग्रेस के जमाने में जो लोग IAS  में सेलेक्ट नहीं हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार डिप्टी कलेक्टर बना देती थी

 और जो लोग डिप्टी कलेक्टर में सेलेक्ट नहीं हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार नायब तहसीलदार बना देती थी 

जो लोग प्रोफेसर में सेलेक्ट नहीं हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार रीडर बना देती थी और जो रीडर नहीं सेलेक्ट हो पाए थे उन्हें कांग्रेस सरकार लेक्चर बना देती थी 🤣🤣🤣😂

वैसे यह बहन यह भी पूछ सकती थी
 20 लाख लोग लॉटरी का टिकट खरीदते हैं और सिर्फ़ एक जीतता है। 

बाकी 19,99,999 लोगों के लिए मोदी क्या कर रहे हैं?

यह इनका आईक्यू लेवल है 

बहन परीक्षा का सिद्धांत ही है कि यह टफ होना चाहिए कठिन होना चाहिए क्योंकि इसमें सर्वोत्तम का चुनाव होता है ना कि अच्छे का चुनाव होता है

वीडियो कमेन्ट में 👇👇

रविवार, 14 जून 2026

ब्रह्माकुमारी आश्रम

*ब्रह्मकुमारीज़ जैसे हाइब्रिड मतों से सावधान ब्रह्मकुमारीज़ के कारण हिंदुओं को होने वाले 16 नुकसान* 👇

1. बिंदी/तिलक नहीं लगाने को कहते हैं (सिर मुंडवाकर रहने जैसा).

2. केवल सफ़ेद साड़ियाँ पहनने को कहते हैं (विधवा की तरह).

3. मंदिरों का प्रसाद नहीं खाने को कहते हैं।

4. हिंदू देवी-देवताओं को साधारण इंसान बताने की सोच।

5. शादी नहीं करने को प्रेरित करते हैं।

6. शादी होने पर भी संतान न पैदा करने की शिक्षा।

7. अगर बच्चे हों तो उन्हें शादी न करके संस्था का सदस्य बनाने का दबाव।

8. शिवलिंग पर LED बल्ब लगाकर केवल बल्ब की पूजा करने जैसी विचित्र प्रथाएँ।

9. पति-पत्नी को भाई-बहन की तरह संबोधित करने को कहना; कुछ लोग राखी तक बाँधते हैं।

10. यह प्रचार करना कि श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश नहीं दिया।

11. मंदिरों में स्टॉल लगाकर “सबका भगवान एक ही है” कहना और हिंदुओं को अज्ञानी बताना।

12. चर्च और मस्जिद जाने वालों को ज्ञान न देने की बात, यह कहकर कि उनके पास पहले से ज्ञान है।

13. व्यास, वशिष्ठ जैसे ऋषियों को अज्ञानी कहना।

14. यीशु और मोहम्मद जैसे पैग़म्बरों को धर्मात्मा बताना।

15. इस्लाम की तरह “सृष्टि नहीं, सृष्टिकर्ता की पूजा करो” का प्रचार।

16. सबसे बढ़कर – बिना किसी प्रमाणिक ग्रंथ या शास्त्र के मनगढ़ंत व्याख्याएँ और उपदेश देना इनका एजेंडा है।

यही हैं → ब्रह्मकुमारीज़ नाम की हिंदू-विरोधी संस्था, जो हमारे हिंदू समाज में ज़हर घोलने का काम कर रही है।
सच्चाई कड़वी ही होती है।
फिर दोहरा रहा हूँ — हिंदुओं को निर्बल बनाकर पाखंडी मतों की मदद करने वाली कई व्यवस्थाओं में ये भी एक हैं।
साभार 

शुक्रवार, 12 जून 2026

मेरा भारत महान

कई पश्चिमी देश भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से ईर्ष्या क्यों करते हैं?

क्योंकि जो चीज़ अमेरिका या यूरोप में विलासिता मानी जाती है, वह भारत में बुनियादी, किफ़ायती और आसानी से उपलब्ध है।

1. सुबह 7 बजे तक आपके दरवाज़े पर रोज़ाना अख़बार — यह कोई महँगी विलासिता नहीं, बल्कि एक आम बात है।

2. सिर्फ़ ₹500/- महीने में 300 से ज़्यादा TV चैनल + कम क़ीमत वाले OTT — मनोरंजन के लिए जेब खाली करने की ज़रूरत नहीं।

3. पूरे देश में तेज़ रफ़्तार 5G इंटरनेट सिर्फ़ ~₹300/- महीने में — दुनिया का सबसे सस्ता डेटा, बड़े पैमाने पर उपलब्ध।

4. बड़े शहरों में विश्व-स्तरीय हवाई अड्डे — साफ़-सुथरे, आधुनिक और तेज़ी से विकसित होते हुए।

5. किराने का सामान और ज़रूरी चीज़ें 10-20 मिनट में आपके दरवाज़े पर — दुनिया में कहीं और ऐसी सुविधा नहीं।

6. बिना लंबी वेटिंग लिस्ट के डॉक्टर उपलब्ध — उसी दिन सलाह लें, अक्सर बिना अपॉइंटमेंट के भी।

7. घर पर ही सैंपल कलेक्शन और डायग्नोस्टिक टेस्ट, कम क़ीमत पर — स्वास्थ्य सेवाएँ सभी की पहुँच में।

8. कपड़े धोने/इस्त्री करने की सेवाएँ आपके दरवाज़े पर, जेब के अनुकूल दरों पर — विदेशों में यह विलासिता है, यहाँ एक आम बात।

9. किफ़ायती घरेलू मदद — नौकरानी, रसोइया, ड्राइवर और बच्चों की देखभाल के लिए सहायक — जो ज़िंदगी को आसान बनाते हैं।

10. हर सुबह 5 बजे ताज़ा दूध की डिलीवरी — सीधे आपके दरवाज़े पर।

11. रेस्टोरेंट में मुफ़्त पानी + हर जगह सस्ती बोतलबंद पानी — बुनियादी चीज़ों के लिए कोई शुल्क नहीं।

12. कहीं भी UPI से पेमेंट, यहाँ तक कि ₹5 के लिए भी — तुरंत, हर जगह मान्य, डिजिटल-फ़र्स्ट अर्थव्यवस्था।

13. मुक़दमेबाज़ी के डर वाला माहौल नहीं — रिश्तेदार छोटी-मोटी बातों पर एक-दूसरे पर मुक़दमा नहीं करते।

14. अगर आप भौतिक चीज़ों की अंधी दौड़ से दूर रहें, तो ज़िंदगी ज़्यादा शांत होती है — गला-काट प्रतिस्पर्धा के बजाय आपसी मेलजोल और अपनापन।

15. बच्चों के लिए किफ़ायती स्कूली शिक्षा और अंधाधुंध गोलीबारी (गन वायलेंस) का कोई डर नहीं।

16. मौसम आमतौर पर सुहावना रहता है; भूकंप, तूफ़ान या लू लगने का डर बहुत कम होता है।

17. ट्रेन, ऑटो/टैक्सी और अन्य परिवहन के साधन बहुत सस्ते हैं, साथ ही कनेक्टिविटी भी बेहतरीन है।

18. डाकघर की सेवाएँ भी किफ़ायती दरों पर उपलब्ध हैं।

19. मुंबई मेट्रो में 'डब्बावालों' की सटीक और भरोसेमंद सेवा।

20. पूरे साल कई रंग-बिरंगे त्योहार और धार्मिक उत्सव मनाए जाते हैं।

भारत शायद हर जगह पूरी तरह साफ़-सुथरा न हो — यह शायद हर तरह से 'परफ़ेक्ट' न हो — लेकिन यहाँ ज़िंदगी बिताना बेहद सुखद और शानदार है।

किफ़ायती, सुविधाजनक, आपस में जुड़ा हुआ और मानवीय!
भारत सिर्फ़ एक देश नहीं है — यह एक आरामदायक जीवनशैली है। आप आध्यात्मिक रूप से विकसित होते हैं।

देश का विशाल आकार और विविधता घूमने के लिए ढेरों जगहें प्रदान करती है।
यह हमारा अपना देश है — हमारी धरती।

(साभार)

गुरुवार, 11 जून 2026

लाल किला या लाल महल

#लाल_किले_का_सच...

अक्सर हमें यह पढाया जाता है कि दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ ने बनवाया था। लेकिन कहीं यह एक सफ़ेद झूठ तो नहीं। दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ के जन्म से सैकड़ों वर्ष पूर्व “महाराज अनंगपाल तोमर द्वितीय” द्वारा दिल्ली को बसाने के क्रम में ही बनाया गया था। इस क्रम में एक विशेष बात यह ज्ञात होती है कि महाराज अनंगपाल तोमर कोई और नहीं बल्कि महाभारत के अभिमन्यु के वंशज तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान के नाना जी थे।

लाल किले का असली नाम #लाल_कोट है, जिसे महाराज अनंगपाल द्वितीय द्वारा सन 1060 ईस्वी में दिल्ली शहर को बसाने के क्रम में ही बनवाया गया था जबकि शाहजहाँ का जन्म ही उसके सैकड़ों वर्ष बाद 1592 ईस्वी में हुआ है। दरअसल शाहजहाँ ने लाल किला को बनाया या बसाया नहीं अपितु इसे बुरी तरह से नष्ट करने की असफल कोशिश की थी ताकि, लालकिला स्वयं उसके द्वारा बनाया साबित हो सके। लेकिन सच सामने आ ही जाता है।

साक्ष-परीक्षा:

इसका सबसे बड़ा प्रमाण तो यही है कि तारीखे फिरोजशाही के पृष्ट संख्या 160 (ग्रन्थ 3) में लेखक लिखता है कि सन 1296 के अंत में जब अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना लेकर दिल्ली आया तो वो कुश्क- ए- लाल (लाल प्रासाद/महल) की ओर बढ़ा और वहां उसने आराम किया।

सिर्फ इतना ही नहीं अकबरनामा में इस बात के वर्णन हैं कि महाराज अनंगपाल ने ही एक भव्य और आलिशान दिल्ली का निर्माण करवाया था।

शाहजहाँ से 250 वर्ष पूर्व ही 1398 ईस्वी में एक अन्य जेहादी तैमूरलंग ने भी पुरानी दिल्ली का उल्लेख किया हुआ है (जो कि शाहजहाँ द्वारा बसाई बताई जाती है)।

यहाँ तक कि लाल किला के एक खास महल मे सुअर (वराह) के मुँह वाले चार नल अभी भी लगे हुए हैं। इस्लाम मे सुअर हराम है। इनका यहां क्या काम? वराह विष्णु अवतार का प्रतीक चिन्ह है सनातन के प्रमाण?

ऐसे किले के एक द्वार पर बाहर हाथी की मूर्ति अंकित है क्योंकि राजपूत राजा गजो (हाथियों) के प्रति अपने प्रेम के लिए विख्यात थे जबकि इस्लाम जीवित प्राणी के मूर्ति का विरोध करता है।

लाल किले का सच:

यही नहीं लाल किला के दीवाने खास मे केसर कुंड नाम से एक कुंड भी बना हुआ है। जिसके फर्श पर हिंदुओं के पूज्य कमल पुष्प अंकित है। साथ ही ध्यान देने योग्य बात यह है कि केसर कुंड एक हिंदू शब्दावली है। जो कि हमारे राजाओ द्वारा केसर जल से भरे स्नान कुंड के लिए प्राचीन काल से ही प्रयुक्त होती रही है।

उल्लेखनीय तथ्य ये है कि मुस्लिमों के प्रिय गुंबद या मीनार का इस महल में कोई अस्तित्व तक नही है।

लाल किला के दीवानेखास और दीवानेआम मे।

इतना ही नहीं दीवानेखास के ही निकट राजा की न्याय तुला अंकित है जो ब्राह्मणों द्वारा उपदेशित राजपूत राजाओ की न्याय तुला चित्र से प्रेरणा लेकर न्याय करना हमारे इतिहास मे प्रसिद्द है। दीवाने ख़ास और दीवाने आम की मंडप शैली पूरी तरह से 984 ईस्वी के अंबर के भीतरी महल (आमेर/पुराना जयपुर) से मिलती है जो कि राजपूताना शैली मे बना हुई है। आज भी लाल किला से कुछ ही गज की दूरी पर बने हुए देवालय हैं जिनमे से एक लाल जैन मंदिर और दूसरा गौरीशंकर मंदिर हैं और दोनो ही गैर मुस्लिम है जो कि शाहजहाँ से कई शताब्दी पहले राजपूत राजाओं के बनवाए हुए है।

शाहजहाँ या एक भी इस्लामी शिलालेख मे आखिर लाल किला का वर्णन क्यों नही मिलता है?

इतिहास में कहा गया, दिल्ली शाहजहाँ ने बसाई। किन्तु लालकिले के आसपास के घरों की निर्माण शैली राजपूताना में है।।ये कैसे सम्भव है कि शाहजहाँ ने सिर्फ लालकिला मुगल शैली में बनाया और बाकी नगर हिन्दू शैली में?

वास्तविकता ये है कि लाल किला और दिल्ली दोनो ही हिन्दू राजा अनंगपाल ने बनाया। 1060 ईसवी के आसपास।

“गर फ़िरदौस बरुरुए ज़मीं अस्त, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता, हमीं अस्ता”; अर्थात इस धरती पे अगर कहीं स्वर्ग है तो यही है, यही है, यही है। इस अनाम शिलालेख के आधार पर लाल किला को शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया करार दिया गया, जबकि पद्मावती का उल्लेख करते हुए शिलालेख को नकारकर पद्मावती को काल्पनिक बता दिया गया।

किसी अनाम शिलालेख के आधार पर कभी भी किसी को किसी भवन का निर्माणकर्ता नहीं बताया जा सकता और ना ही ऐसे शिलालेख किसी के निर्माणकर्ता होने का सबूत ही देते हैं।

लालकिले को एक हिन्दू प्रसाद साबित करने के लिए आज भी हजारों साक्ष्य मौजूद हैं। यहाँ तक कि लाल किला से सम्बंधित बहुत सारे साक्ष्य पृथ्वीराज रासो से ही मिलते है।

सरांस यही है कि लाल किले का निर्माण शाहजहाँ के द्वारा नहीं किया गया था बल्कि शाहजहाँ ने इस पूर्व महल में हेर फेर करके उसे अपना नाम देने कि कोशिश भर की थी। सत्य को अधिक दिनों तक छिपाया नही जा सकता, यह उक्ति यहाँ बखूबी लागु होती है।

स्रोत- प्रसिद्ध इतिहासकार पी. ऐन. ओक की किताब "इतिहास की भयंकर भूले से"...

#आर्यावर्त_का_अघोर_अतीत
#We_support_hindutava_unity

सुन्दर हाइकु

क्रोध

शर्मनाक कांग्रेस

एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया।

नेहरू ने श्रेय ले लिया,।
AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया।

इतिहास की किताबें लिखती हैं— “नेहरू ने AIIMS बनाया”।
यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है।

Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।
AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।

AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने
ज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया—
जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।

वह ज़मीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होता

AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है।
यह ज़मीन:

न सरकार ने खरीदी,,,,,

न अधिग्रहित की,,,,,

यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी—
जो उन्होंने दान में दी।

आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है।
कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।

वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था,,,,

आज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।
कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे।

तब अमृत कौर ने:

न्यूज़ीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई

अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाया

उपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था की

अगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की ज़रूरत ही क्यों पड़ती ?

वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रही

AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।

उन्होंने लड़ाई लड़ी:

अफ़सरशाही की सुस्ती से

मंत्रिमंडल की उदासीनता से

कांग्रेस की ढिलाई से

फाइलें चलीं क्योंकि उन्होंने ज़बरदस्ती चलवाईं।

नेहरू ने वास्तव में क्या किया ?

पहले से बने काम को मंज़ूरी दी

भाषण दिए

फीते काटे

इसे संस्थान-निर्माण नहीं कहते।
इसे ऑप्टिक्स कहते हैं।

कांग्रेस ने उन्हें क्यों भुला दिया ?

क्योंकि यह सच तीन मिथक तोड़ देता है:

कांग्रेस ने भारत बनाया

नेहरू ने संस्थान खड़े किए

सत्ता = योगदान

AIIMS इन सबका उलटा प्रमाण है।

एक शाही महिला ने
अपनी विरासत जनस्वास्थ्य के लिए कुर्बान कर दी।
कांग्रेस ने श्रेय हड़प लिया।

हकीकत

AIIMS राजकुमारी अमृत कौर की विरासत है।
कांग्रेस ने सिर्फ़ नामपट्टिका लगाई।

बलिदान किसी और का।
इश्तिहार कांग्रेस का.

निचले स्तर का भ्र्ष्टाचार

नाली के कीड़े कॉकरोच

कॉकरोच पार्टी में थोड़े बहुत लोग अच्छे भी है या फिर सब के सब मीठे और समलैंगिक ही भरे पड़े है ? मेरी मोदी सरकार से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि इन मानसिक बीमार लोगों का दिल्ली के किसी अच्छे हॉस्पिटल में भर्ती करवाये ये हमारे जैसे ही शस्त्रधारी लोग है बस रास्ता भटक गए है

ये किसी इल्यूजन (भ्रम ) में फंसे हुए है इन्हें बढ़िया से ट्रीटमेंट दिलवाए और किसी के घर का चिराग़ बुझने से बचाए यही राष्ट्र हित होगा अब देश को बचाने के लिए मीठे लोग आ रहे है तब देश तो क्या ही बचना है हमे उन लोगों को बचाना है जो इनके संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते है

एक कॉकरोच हाथ में डायरी लेकर कहा रहा था ये हमारा संविधान है जब पत्रकार ने खोलकर दिखाने के लिए कहा तो कुछ नोट बनाकर घूम रहा है मतलब ये अपना ही संविधान बनकर घूम रहे है और बाबा साहब के संविधान को कचरे में फेंकना चाहते है

एक कॉकरोच तो सीधे हाई कोर्ट से आया हुआ था जब पत्रकार ने कहा आप तो कानून के रक्षक है फिर आप संविधान बचाने कैसे आए हुए थे तब कॉकरोच ने कहा आगे की बात ये भाईसाहब बताएंगे पत्रकार ने कहा नहीं आप ही बताइए तो 

कहने लगा कि मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है बताओ अब ऐसे वकीलों बाला कोर्ट पहन कर फर्जी वकील बनकर जनता को गुमराह कर रहे है वकीलों को इस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करवानी चाहिएं इस तरह तो ये कॉकरोच वकीलों का नाम ही खराब कर के रख देंगे

एक कॉकरोच ने तो सीधे सीधे व्यपारियों से ही अपील कर डाली कि सरकार को टैक्स मत भरो सरकार अपने आप दबाव में आ जाएगी मतलब कॉकरोच पार्टी के नाम पर कुछ भी चल रहा है इनके पास कोई नया विजन नहीं है ये सब वही लोग है जो हर आंदोलन में अपना खर्चा पानी लेकर निकल जाते है महीने दो महीने इनका भी रोजगार चल निकलता है

अब वामपंथी भी आकर अपना समर्थन दे दिए है मतलब ये सब वही फूंकी हुई झालर के बल्व है बस नई पैकेजिंग में आई है इनके बारे है गोदी मीडिया मुर्दाबाद ले के रहेंगे आजादी  मोदी शाह इस्तीफा दें मतलब कुछ भी ? किसी बात में कोई लॉजिक तो होना चाहिए कि नहीं ?

मोदीजी जैसा कोई नहीँ

निर्वाचित प्रधानमंत्री.....
नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं बने थे...
नेहरू को अंग्रेजी सिस्टम से काम करने के लिए गांधी द्वारा नियुक्त किया गया था पहली बार....
अंग्रेजों की चमचागीरी करके प्रधानमंत्री बने रहे नेहरू...

मोदी की तुलना नेहरू से हो ही नहीं सकती.....
नेहरू का कद मोदी के सामने राष्ट्रभक्तों की नजरों में सदा बौना ही रहेगा....
लाख बुराई कर ले मोदी की विपक्षी पार्टियों के कुकुरमुत्ते... अपने आकाओं को खुश करने के लिए....

मगर उनकी आत्मा कभी भी मोदी का कद कम नहीं आंक सकेगी...

नेहरू ने अंग्रेजों द्वारा निर्मित सिस्टम से हिन्दुओ को काबू में रखते हुए भारत को मुसलमानों व ईसाइयों तथा देशविरोधी धड़े को सुरक्षित करने वाले कानून बनाने का काम जारी रखा....

मोदी ने देश के लिए स्वयं पूरा नवनिर्माण करवाया....
अंग्रेजी व्यवस्था व अंग्रेजी इमारतों की तुलना में हिंदू वास्तुशास्त्र अनुसार इमारतों का निर्माण किया....

मोदी को भारत की राष्ट्रभक्त जनता ने लगातार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना है 
रंडीबाजी व अय्यासी के कारण एड्स से मरे नेहरू को मोहनदास करमचंद गांधी ने सरदार पटेल की जगह नियुक्त किया था...
प्रथम प्रधानमंत्री सरदार पटेल को चुना था तत्कालीन हिन्दुओ ने...
नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री थे ही नहीं....

फिर भी नेहरू ने जितने दिन तक सत्ता चलाई उस अंग्रेजी मेहरबानी के रिकॉर्ड को भी हिंदुओ के संगठित वोटबैंक ने तोड़ दिया है 

अब मोदी सर्वाधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं.....
मोदी का रिकॉर्ड योगी तोड़ेंगे......
योगी रिकॉर्ड के साथ साथ भारत में बहुत कुछ और भी तोड़ेंगे ...

तैयार रहो चमचों छातीपीटन के लिए.......
क्योंकि हाथी चले बाजार.... कुत्ते भौंके हजार.....
🖋️...............
हिन्दूधर्मध्वजावाहक 
🙏🙏🚩🚩🚩🙏🙏

बुधवार, 10 जून 2026

हम भारतीय

🥰😂
चाहे कितना भी *बड़ा घर* हो।
अगर 
*कूलर* और *फ्रिज* के ऊपर सामान नही रखा 
तो आप *भारतीय* नही हो 
😜😝😆😜😁

*दिमाग* एक ऐसा *अंग* है,
जिसको *गरम* कर सकते हैं,
*ठंडा* भी कर सकते हैं,
*खा* भी *सकते* हैं,
*चाट* भी सकते हैं, और 
*दही* भी बना सकते हैं ! 
🤯😂🤣

*पापड़* एक ऐसी *चीज़* है,
जिसे जहाँ से तोड़ना चाहो
वो वहाँ से कभी नही टूटता ।

😂😂😂

*दीवार* पर *लिखा* होता है,
*दीवार* पर *लिखना* ' मना ' है।
😝😃🤩

हमेशा *Special* बनके रहो,
अगर *आम* बनोगे तो, 
*दुनिया अचार* बना देगी l
😃😝🤓

अगर *हरी सब्ज़ी और सलाद* खाने से कोई *पतला* होता.., 
तो *भैंस* कब की *हिरण* बनकर *फुदक* रही होती ।
🤣🤣😇🥳

हम *भारतीय आसानी* से 
किसी पर *भरोसा* नहीं करते,
*सोते* हुए व्यक्ति से *भी पूछ* लेते हैं 
*सो रहे हो क्या।* 
😂😂😂🤩

आने वाली *पीढ़ी माँ* के *आंचल* का *सुख नहीं* पायेगी..,
क्योंकि *जीन्स* पहनने वाली *माँ, आंचल* कहाँ से लाएगी। 

😂🤣😜

*पैसा* आयेगा, *चला* जायेगा !,
*खुशियां* आयेंगी, *चली* जायेंगी !
एक *मोटापा* ही सच्चा *दोस्त* है,
जो *आकर* जाता नहीं ।
😂😂🤣

शुक्रवार, 5 जून 2026

नालंदा विश्वविद्यालय

सोचा एक बार फिर याद दिला दूँ । आप सब भूल गए होंगे ।

डॉ मनमोहन सिंह ने नोबल पुरस्कार विजेता "डॉ अमर्त्यसेन" को असीमित अधिकारों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम चांसलर नियुक्त किया। उन्हें इतनी स्वायत्तता दी गयी कि उन्हें विश्विद्यालय के नाम पर बिना किसी स्वीकृति और जवाबदेही  के कितनी भी धनराशि अपने इच्छानुसार खर्च करने एवं नियुक्तियों आदि का अधिकार था । उनके द्वारा लिए गये निर्णयों एवं व्यय किये गये धन का कोई भी हिसाब-किताब सरकार को नहीं देना था ।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि छुपे रुस्तम मनमोहन सिंह और अमर्त्यसेन ने मिलकर किस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से भयंकर लूट मचाई ? वो भी तब जबकि अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे  ही 5 लाख रुपये का मासिक वेतन ले रहे थे जितनी कि संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, रक्षा सेनाओं के अध्यक्षों, कैबिनेट सचिव या किसी भी नौकरशाह को भी दिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है ।

इतना ही नहीं अमर्त्यसेन को अनेक भत्तों के साथ साथ असीमित विदेश यात्राओं और उस पर असीमित खर्च करने का भी अधिकार था ।

कहानी का अंत यहीं पर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने मनमोहनी कृपा से 2007 से 2014 की सात वर्षों की अवधि में  कुल 2730 करोड बतौर चांसलर नालंदा विश्वविद्यालय खर्च किये.... आपकी आंखें फटी रह गयी न ... विश्वास नहीं हो रहा न कि मनमोहन सिंह ईमानदारी के चोंगे में कितने बड़े छुपे रुस्तम थे ?

चूंकि यूपीए सरकार द्वारा संसद में पारित कानून के तहत अमर्त्यसेन के द्वारा किये गये खर्चों की न तो कोई जवाबदेही  थी और न ही कोई ऑडिट होना था और न ही कोई हिसाब उन्हें देना था इसलिए देश को कभी शायद पता ही न चले कि दो हज़ार सात सौ तीस करोड़ रुपये आखिर गये कहाँ ?

अभी कहानी खत्म नहीं हुई, पिक्चर अभी बाकी है -
अमर्त्यसेन सेन ने जो नियुक्तियां कीं उसपर भी कानूनन कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने किन किन की नियुक्तियां कीं ... आइये ये भी जान लेते हैं -

प्रथम चार नियुक्तियां जो उन्होंने कीं वो थे -
1. डॉ उपिंदर सिंह
2. अंजना शर्मा 
3. नवजोत लाहिरी
4. गोपा सब्बरवाल

..... कौन थे ये लोग
... ? ?   जानेंगे तो मनमोहन सिंह के चेहरे से नकाब उतर जायेगा ।

डॉ उपिंदर सिंह मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी पुत्री हैं और बाकी तीन उनकी करीबी दोस्त और सहयोगी ।
इन चार नियुक्तियों के तुरंत बाद अमर्त्यसेन ने जो अगली दो नियुक्तियां कीं वो गेस्ट फैकल्टी अर्थात अतिथि प्राध्यापक की थी और वो थे -
1. दामन सिंह
2. अमृत सिंह
.....गोया ये कौन थे ? 
पहला नाम डॉ मनमोहन सिंह की मझली पुत्री और दूसरा नाम उनकी सबसे छोटी पुत्री का है ।
 और सबसे अद्वितीय बात जो दामन सिंह और अमृत सिंह के बारे है वो ये कि ये दोनों "मेहमान प्राध्यापक" अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कभी भी नालंदा विश्वविद्यालय नहीं आयी ... पर बतौर प्राध्यापक ये अमेरिका में बैठे बैठे ही लगातार सात सालों तक भारी-भरकम वेतन लेती रहीं ।

उस दौर में नालंदा विश्वविद्यालय की संक्षिप्त विशेषता ये थी कि -
विश्विद्यालय का एक ही भवन था, इसके कुल 7 फैकल्टी मेम्बर और कुछ गेस्ट फैकल्टी मेम्बर (जो कभी नालंदा आये ही नहीं ) ही नियुक्त किये गये जो अमर्त्यसेन और मनमोहन सिंह के करीबी और रिश्तेदार थे । विश्विद्यालय में बमुश्किल 100 छात्र भी नहीं थे और न ही कोई वहां कोई बड़ा वैज्ञानिक शोध कार्य ही होता था जिसमे भारी भरकम उपकरण या केमिकल आदि का प्रयोग होता हो ।

फिर वो 2730 करोड़ रुपये गये कहाँ आखिर ?
मोदी जब सत्ता में आये और उन्हें जब इस कानूनी लूट की जानकारी हुई तो अमर्त्यसेन के साथ साथ मनमोहनी पुत्रियों को भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया ।

कहाँ गए वो राफेल राफेल चिल्लाने वाले... लौट आये बैंकॉक से ? कहाँ गयी गरीब किसान की पत्नी जिनके साथ अत्याचार हो रहा है ....अभी गरीब गुरबा के साथ सेल्फी में ही जुटी हैं क्या  ? कहाँ गये वो 49 मॉब लिंचिंग के स्वयम्भू चिंतक जिनके पीठ पर लदा पुरस्कारों का अहसान अभी उतरा नहीं है तो  आंखों में बेहयाई  अभी बाकी है ?
साभार 🙏

बुधवार, 3 जून 2026

कांग्रेस की नीच मानसिकता

कांग्रेस की नीच मानसिकता 
मोदीजी की गर्दन मरोड़ कर 
मार डालने की फोटो पर 
किसी कोंग्रेसी नें विरोध नहीँ किया. 
कोउ विपक्ष का नेता भी नहीँ बोला.
जनता देख रही है. शर्मनाक.

मंगलवार, 2 जून 2026

बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है

हमारे देश मैं किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी चल रही है.......?

कुछ दिन पहले हुए NEET पेपर लीक फिर CBSE पुनर्मूल्यांकन एक के बाद एक शिक्षा से जुड़ी समस्या बाहर आ रही है जिसके बाद केंद्र सरकार कड़े कदम उठाकर दोषियों पर कार्यवाही कर रही है लेकिन कार्यवाही के साथ साथ शिक्षा विभाग संभाले धर्मेंद्र प्रधान की भी जिम्मेदारी मानकर उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा देना उचित रहेगा,
लेकिन इस मामले मैं अब देश के प्रधानमंत्री खुद मॉनिटरिंग कर रहे है हाई लेवल मीटिंग की जा रही है क्यों कि यह बहुत बड़ा संवेदन शील मुद्दा है,
पर इसी मुद्दे को अपना हथियार बनाकर देश मैं कुछ लोग बड़ी साजिश की तैयारी कर रहे है ?
आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि दिल्ली का पूर्व मुख्यमंत्री ओर आम आदमी पार्टी का संस्थापक अरविंद केजरीवाल के द्वारा देश के युवाओं को नेपाल, बांग्लादेश की युवाओं की तरह सड़क पर उतरने और अराजकता फैलाने के लिए उकसावे जैसे शब्दों का उपयोग किया गया था,
ओर अरविंद केजरीवाल के बाद इसी आम आदमी पार्टी द्वारा पैदा किया गया कॉकरोच जनता पार्टी का फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी 6 जून को दिल्ली आकर युवाओ को इकट्ठा होने के लिए कहा है,
जिसके बाद 2 दिन से सोशल मीडिया पर चर्चित हुआ अभिनय शर्मा जिसने एक महिला पत्रकार को टारगेट करते हुए देश की सरकार को बदनाम करने की कोशिश की है और इसी के वीडियो अब कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल से शेयर की जा रही है,

यह सभी लोग मिलकर कुछ ना कुछ बड़ा करने की मंशा से अब इकठ्ठे होंगे फिर छात्रों को ढाल बनाकर अराजकता की कोशिश करेंगे जैसे किसान आंदोलन में किसानों को ढाल बनाकर देश विरोधी ताकतों ने लाल किले पर हिंसा फैलाई थी,

लेकिन हमारी देश की सुरक्षा एजेंसी, खुफिया एजेंसी देश की सरकार पुलिस सभी पूरी तरह मुस्तैद है जागृत है इन्होंने कुछ भी ऐसी कोशिश की तो उसका अंजाम क्या होगा यह सोच भी नहीं सकते.......!

"डर मत पाप कर " पुस्तक से

सोमवार, 1 जून 2026

सिर्फ बीजेपी

देश का भविष्य बीजेपी ही है

कंगना को एक  ने थप्पड़ मारा ,तुम सब  खूब खुश हुए थे ,
मोदी जी की गाड़ी पर जूता फेंका तो , तुम सब खूब खुश हुए थे ,
  मोदीजी की गाड़ी को पंजाब में पुल पर घेर लिया था तो तुम सब  खूब खुश हुए थे,
  अर्नब गोस्वामी को कुणाल कुकुर कामरा ने हवाई जहाज में प्रताड़ित किया तो , अर्नब गोस्वामी को घर से अपराधी की तरह घसीट कर पुलिस ले गई तो हँस रहे थे तुम सब , 
  कंगना का घर तोड़ा तो तुम सब खूब खुश हुए,
  ममता बनर्जी ने सीबीआई , ईडी, चुनाव आयोग ,मोदी को गालिया दी तो तुम सब खूब खुश हुए,
  ममता बनर्जी ने इडी,सीबीआई को रोका , टीएमसी के गुंडों ने जजों को बंधक बनाया तुम सब  खूब खुश हुए ,
  कैलाश विजय वर्गीय , रूपा गांगुली , दिलीप घोष , अमित शाह ,जेपी नड्डा पर पथराव हुए तो तुम सब खूब खुश हुए ,
  पालघर में साधु मारे गए तो तुम सब  खूब खुश हुए ,
  नवनीत राणा को जेल भेजा तो तुम सब खूब खुश हुए ,
  2021में बंगाल चुनाव के बाद हिंसा हुई ,भाजपा समर्थकों ,हिंदुओं पर अत्याचार किया तो तुम सब  खूब खुश हुए ,
   2026 बंगाल चुनाव में भाजपा प्रत्याशी  सुवेन्दु सरकार को टीएमसी के गुंडों ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा ,तो तुम सब खूब खुश हुए ,
   ममता बनर्जी , अभिषेक बनर्जी ने चुनावी भाषण में  सेंट्रल फोर्स को ,अमित शाह को ,हिंदुओं को ,भाजपा समर्थकों को धमकियां दी , तो तुम सब खूब खुश हुए ,
  योगी ,मायावती से लेकर उत्तरप्रदेश बिहार में सपाई राजद के गुंडों और आजम ,अंसारी ,अतीक,शहाबुद्दीन के गुर्गो ने गुंडई हिंसा की तब तुम सब खूब खुश हुए थे ,
   बंगाल में चुनावों में धमकी और कट मनी ,तोलाबाजी से तुम सब खूब खुश हुए थे ,
  लद्दाख में भाजपा कार्यालय जलाया गया तब खूब खुश हुए थे ,
   राम जी को , हिंदुत्व को , सनातन धर्म , राम मंदिर के विरोध में कोई भी या तुम सब बोलते थे तब बड़े खुश थे तुम सब , 
नरेंद्र मोदीजी  , अमित शाह , साध्वी प्रज्ञा , कर्नल पुरोहित पर फर्जी एफ आई मार मामले दर्ज किए तब बड़े खुश थे तुम सब ,

बंगलादेश ,नेपाल ,श्रीलंका में जेनजी,युवाओं के विद्रोह पर खुश होकर भारत के युवाओं को सड़क पर उतर कर काकरोच बनकर भाजपा के नेताओं पर आक्रमण हेतु उकसाने की रोज अपील करते समय तुम सब बहुत खुश थे -
     बहुत लंबी सूची है जब जब तुम सब खुश हुए थे  राहुल , अखिलेश ,केजरी ,ममता ,तेजस्वी ,उद्धव , लालू , राज , आदित्य , स्टालिन ,उदयनिधि , केरल के वामपंथी , अभिषेक बनर्जी ,महुआ , आरफ़ा ,कुणाल कामरा , राणा अयूब , रवीश ,ध्रुव राठी , मोहम्मद ज़ुबैर , कन्हैया कुमार ,सुप्रिया श्रीनेत ,सिब्बल , प्रशांत भूषण ,योगेंद्र यादव , संजय सिंह ,केजरीवाल और  चेले ,चमचे , चाटुकारों ,फर्जी सेक्युलरों और अलगाववादियों ,  देश द्रोहियों , जिहादियों के समर्थकों ,
      पर अब जब बंगाल की जनता सड़को पर उतर कर अपने पर किए हिंसा , अत्याचार , वसूली, दमन का बदला निकाल अपना गुस्सा जता रही और अंडे टमाटर फेंक रही , 
    बंगाल की जनता हवाई जहाज में  ,कोर्ट में  , तुम्हारे घरों के सामने तुम्हे चोर चोर ,पीसी चोर , भाईपों चोर कह रही , रैलीयो में ,शादियों में पार्टियों में चोर चोर के गीत पर नाच रही तो तुम्हे लोकतंत्र खतरे में दिख रहा !

कितने दोगले और भ्रष्ट लोग हो तुम लोग, हम सब समझते हैं। इसलिए हार रहे हो. अभी भी समय है, जाग जाओ, सिर्फ बीजेपी मोदीजी ही देश का भविष्य हैं यह समझ लो.