शुक्रवार, 29 नवंबर 2019



एनपीए और सब्सिडी देश के लिए घातक
November 29, 2019 • सुनील जैन राना • जनहित
बैंक अधिकारियों ,कॉरपोरेट्स एवं नेताओ की मिलीभगत से बांटा गया लोन एनपीए हो ही जाता है। पिछले दशक में यूपीए 2 में इस प्रकार के लोन बहुतायत में दिए गए। लाखों करोड़ की धनराशि के लोन आपसी मिलीभगत से बिना सुरक्षा गारंटी के दे दिए गए। मोदी सरकार में ऐसे लोन लेने वाली लगभग दो लाख फर्जी कंपनियों को बंद कर दिया। लेकिन मोदी सरकार के पिछले पांच सालों के कार्यकाल में भी बैंको का एनपीए कम होने के बजाय बढ़ा ही है। हालांकि बताया जाता है की लगभग ९ लाख करोड़ के एनपीए में से लगभग एक लाख करोड़ का एनपीए बसूला गया लेकिन अभी भी अधिकांश बैंको के एनपीए में कमी आती दिखाई नहीं दे रही है।
मोदी सरकार द्वारा जनता की सुविधा को दी जा रही सब्सिडी और लघु उद्योगों के लिए बैंको से सस्ती दरों पर दिलवाया जाने वाला लोन अब अर्थव्यवस्था पर भरी पड़ रहा है। मुद्रा योजना के तहत दिए जाने वाले लोन में लगभग ३.२१ लाख करोड़ का एनपीए हो गया है। जिस पर रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एस के जैन ने चिंता जताई है और बैंको को बैड लोन के बारे में आगाह करते हुए चेतावनी भी दी है। मुद्रा योजना में दिया जाने वाले लोन में बाद लोन की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है ,पिछले साल के मुकाबले बाद लोड की धनराशि दुगनी हो गई बताई जा रही है। लोन लेने वाले खातों में लगभग साढ़े तीन लाख खाते डिफ़ॉल्ट हो चुके हैं। ऐसे में जनहित में जारी की गई योजनाएं अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ती दिखाई दे रही हैं।
देश के सरकारी उपक्रम बेचे जा रहे हैं और गरीब जनता के हितार्थ सब्सिडियां बाटी जा रही हैं। हालांकि घाटे में चल रहे उपक्रम जो लगातार देश को फायदा पहुंचाने की बजाय नुक्सान पहुंचा रहे हैं उन्हें बेच देना या बंद कर देने में ही भलाई है। हाल ही में एयर इंडिया इसका ताज़ा उदाहरण है। देश के विकास को धन चाहिए होता है लेकिन एनपीए और सब्सिडी के कारण धन की कमी हो रही है। ऐसे में आम जनता की जरूरत बिजली -पानी -सड़क -शिक्षा और रोजगार सभी प्रभावित होंगे। किसानों का लोन माफ़ करने की परम्परा तो कांग्रेस के समय से ही हो गई थी। अब ऐसी मांग अन्य ग्रामीण जनता भी करने लगी है। लोन माफ़ करने -करवाने की प्रवृति देश के लिए घातक सिद्ध हो रही है। छोटे किसानों को लोन आसानी से मिलता नहीं बड़े किसान जो जमींदार जैसे होते हैं उनकी पैठ होती है। ऐसे बड़े किसान सरकार की सब्सिडी वाली योजनाओ का लाभ उठाते हैं और लोन भी माफ़ करवा लेते हैं। सरकार को इन सब बातों पर विचार करना चाहिए। कोई भी योजना आर्थिक रूप से गरीब और छोटे किसानो के हित को ध्यान में रखकर हो बनानी चाहिए।  * सुनील जैन राना *

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