गुरुवार, 15 मार्च 2018



कर्म की बातें तो रोज होती हैं

अब कुछ दिन धर्म की बातें हो जायें
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आज इन्सान कुछ कारणों से परेशान रहता है।

सब कुछ होते हुए भी और ज्यादा की चाहत

के कारण ही वह जाने -अनजाने चार कषायों

और पाँच पापों में उलझा रहता है।

चार कषाये -क्रोध ,मान ,माया ,लोभ

पाँच पाप -हिंसा ,झूठ ,चोरी ,कुशील ,परिग्रह।

आज हम सबसे प्रथम पाप क्रोध के विषय में चर्चा करेंगे।

*जैन धर्म* पर मेरे द्वारा लिखित पुस्तक से कुछ अंश ***



क्रोध से हानि पर कल चर्चा करेंगे।  जय जिनेन्द्र।


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