शुक्रवार, 31 जनवरी 2020


जीव दया पर डिबेट ,पेंटिग ,नाटिका ,फैंसी ड्रेस https://www.facebook.com/jeevrakshakendra
January 31, 2020 • सुनील जैन राना • परोपकार
पशु -पक्षी कल्याण पखवाड़े के कार्यक्रमों की शृंखला में आज संस्था से संचालित स्कूल लार्ड महावीर एकेडमी में जीव दया पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गए जिसमें नगर के अनेक स्कूलों के बच्चों ने भाग लिया।
लार्ड महावीर एकेडमी में प्रातः नगर के अनेक स्कूलों के बच्चों द्वारा जीव दया पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें बच्चों ने जीव दया के अतिरिक्त पर्यावरण बचाओ एवं पानी बचाओं का भी संदेश दिया साथ ही हम सभी को शाकाहार अपनाना चाहिए ऐसी भावनाएं व्यक्त की। पेंटिंग सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि टीशर्ट पर भी की गई। छोटे बच्चें विभिन्न पशु -पक्षियों की ड्रेस पहनें नजर आये। जीव दया पर कई नाटिका प्रस्तुत की गई जिसमें जीव दया -शाकाहार और पर्यावरण बचाने का संदेश दिया था। जीव दया पर डिबेट एवं कविताएं प्रस्तुत की गई। बच्चों को घायल -बीमार पशु -पक्षी को श्री दया सिंधू जीव रक्षा केंद्र लाने को प्रेरित किया गया। सभी विजयी छात्र -छात्राओं को प्रमाणपत्र एवं मोमेंटो दिए गए। * सुनील जैन राना * संयोजक

बुधवार, 29 जनवरी 2020

ऑटो मंदी -सड़को पर जाम
January 29, 2020 • सुनील जैन राना • जनहित
मोदी सरकार में मंदी की गिरफ़्त में तो सभी सेक्टर हैं क्योंकि लाखों फ़र्ज़ी कम्पनियाँ जो बैंको के लोन को डकार कर बैठी हैं उन्हें बंद कर दिया गया है। बैंको के लाखों करोड़ का यह लोन अब एनपीए कहलाने लगा है। पिछली सरकारों में लचर कानूनों का फायदा उठाकर खूब धन की लूट हुई। अब मोदी सरकार में बैंको द्वारा लोन देने के कड़े नियम -कानून बनाये गए हैं लेकिन एनपीए की बसूली न हो पाने के कारण अनेक जनहित के कार्य रुके हुए हैं जो मंदी दर्शा रहे हैं।
मज़े की बात यह है की एक तरफ़ देश में मंदी का माहौल बना हुआ है दूसरी तरफ़ कुछ बह चीज सस्ती नहीं है।मकान -दुकान से लेकर जमीन -जायदाद एवं वाहन आदि सभी में तेज़ी ही है। पिछले दिनों वाहन सेक्टर में मंदी का हल्ला मच रहा था लेकिन वाहनों के दामों में तो कोई कमी न हुई। अब तो मारुती कम्पनी ने अपने सभी वाहनों के दाम भी बढ़ा दिए हैं। फिर भी मनपसंद कार तुरंत नहीं मिल रही। ऐसे ही सभी कंपनियों की बात है की कुछ लेने जाओ मिलता नहीं। वाहनों के दाम लगातार बढ़ ही रहे हैं।
एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष सड़को पर एक करोड़ से ज्यादा दो पहियाँ एवं चार पहियाँ वाहन नए आ रहे हैं। ऐसे में सड़को पर जाम लगना बड़ी बात नहीं है। मोदी सरकार में पिछले पांच सालों में नितिन गडकरी जी के नेत्तृव में देश भर में सड़को का जाल बिछा दिया गया है। लेकिन गाँव -कस्बे -शहर -नगर आदि में लगातार वाहनों की बढ़ती संख्या जनजीवन के लिए ठीक नहीं है। कुछ देशों में सड़को पर नए वाहनों के लिए नियम बनाये गए हैं। जितने नए वाहन सड़को पर आये उतने ही पुराने वाहनों को निरस्त करना होगा। ऐसा करने से सड़को पर भीड़ नहीं होगी और पुराने खटारा वाहनों से भी मुक्ति मिलेगी। ऐसा ही कुछ नियम भारत में भी बनना चाहिए। तभी सड़को पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिल सकेगी। * सुनील जैन राना *

शनिवार, 25 जनवरी 2020

निःशुल्क पशु -पक्षी चिकित्सा शिविर
January 25, 2020 • सुनील जैन राना • परोपकार
पशु -पक्षी कल्याण पखवाड़े के कार्यक्रमों की शृंखला मेंश्री दिगंबर जैन बाल बोधनी सभा द्वारा संचालित श्री दया सिंधु जीव रक्षा केंद्र के तत्वाधान में निःशुल्क पशु -पक्षी चिकित्सा शिविर नुमाइश कैम्प में संस्था द्वारा बनवाये गए पशु प्याऊ के पास लगाया गया
संस्था के संयोजक सुनील जैन राना ने शिविर के बारे में जानकारी देते हुए बताया की शिविर में सड़क पर बोझा ढोने वाले पशु जिनमें खासकर घोड़े होते हैं उनका उपचार किया गया। संस्था के डॉक्टर एस के अरोड़ा एवं कम्पोडर विपिन सैनी द्वारा बोझा ढोने वाले घोड़ो का निरीक्षण कर उपचार किया एवं दवाई -मलहम आदि वितरित किया। ३६ घोड़ो का उपचार किया गया जिनमें कुछ ठंड लगने से पीड़ित थे तो कुछ की बेल्ट की जगह जख्म थे। सभी को दवाई -मलहम -बतीसा आदि वितरित कर पशु मालिकों को अपने प्यारे पशु की देखभाल करने ,उनपर ज्यादा बोझा न लादने ,समय पर खाना पानी देने एवं बीमार होने पर उनका इलाज कराने को प्रेरित किया।
इस अवसर पर डॉक्टर विजय गांधी ,संजय जैन ,सोमपाल ,दीपक आदि का भी सहयोग रहा।

बुधवार, 22 जनवरी 2020


दान बिना निर्धन दुखी -तृष्णा वश धनवान
January 22, 2020 • सुनील जैन राना • धर्म
धन कमाने के बाद दान देने की प्रवृति इंसान का स्वाभाविक गुण है। यूँ तो किसी भी देश की अधिकांश जनता कमाने और खाने तक ही सीमित रहती है। कुछ जनता ऐसी होती है जिसे रोजाना भरपेट भोजन भी नसीब नहीं होता जबकि कुछ लोग खाने कमाने की बातो से ऊपर होते हैं यानि उनके पास इतना धन होता है की उसे खर्च कैसे करें यह भी समस्या ही होती है।
बेहताशा गरीबी और बेहताशा अमीरी का बढ़ता ग्राफ दुनिया भर के अनेक देशों में अपने पाँव पसार रहा है। भारत में जहां एक ओर एक चौथाई जनता को रोज भरपेट भोजन न मिलता हो वहीं दूसरी ओर देश के ६३ अमीरों के पास देश के बजट से भी कई गुना ज्यादा सम्पत्ति है। देश के ९० करोड़ लोग जो मध्यम वर्ग से होते हैं बस किसी तरह अपना गुजारा करने लायक कमा लेते हैं ऐसा है भारत देश।
अब बात अमीर लोगो की करें तो धन कमाकर भगवान का शुक्रिया करने की भावना के चलते मंदिरो में जाकर दान देना अमीरों का स्वाभाविक सा गुण हो जाता है। अपने इष्ट के चरणों में धन -सोना -गहने -सम्पत्ति आदि का अर्पण करने में उसे अपार सुख मिलता है।
दान के भी कई प्रकार होते हैं जिनमे चार प्रकार के दान प्रसिद्द हैं। आहार दान ,औषधि दान ,ज्ञान दान और अभय दान।लेकिन आज के भौतिक युग में मंदिरजी में धन दान या सोना दान की अधिक महिमा दिखाई दे रही है। जो वास्तव में चार प्रकार के दान श्रेष्ठ होते थे उनकी तरफ ध्यान कम दिया जा रहा है। 
काश दानियों को यह समझ में आये की गरीबों के लिए भोजन -दवाई -शिक्षा उपलब्ध करने से उत्तम कोई दान नहीं होता। अभय दान यानि किसी का जीवन बचाना भी उत्तम दान होता है। आज तो मंदिरो में भगवान के लिए चढ़ावा चढ़ाया जा रहा है जैसे की भगवान को जरूरत हो। भगवान और मंदिरो को सोने से सजाया जा रहा है।करोड़ो -अरबों की लागत से नए -नए मंदिर बन रहे हैं। जबकि कुछ प्रसिद्द मंदिरो को छोड़कर पुराने मंदिरो की देखभाल भी ठीक से नहीं हो रही है।
समाचारों से पता चला की कुछ समय पहले तिरुपति जी के मंदिर के पुजारी की तीन बेटियों की शादी में उसने १२५ किलो सोना अपने दामादों को दिया। देशभर में ऐसे कुछ बड़े प्रसिद्द मंदिरो के पास अकूत धन है। क्या ही अच्छा हो की वह धन गरीबों के काम आये? चढ़ावे के धन से स्कूल -अस्पताल खुलवायें जाए। हालांकि कुछ मंदिर ट्रस्ट ऐसे सामाजिक कार्य करते हैं। बिना शुल्क भोजन भंडारा तो अनेक मंदिरो की भोजनशाला में चलाया जाता है।
धनवानों को दान देने की प्रवृति में थोड़ा बदलाव करना चाहिए। कुछ धन देश में भूखे पेट सोने वालो के भोजन पर खर्च करना चाहिए। ऐसे कुछ राज्य जहां गरीबी अधिक है वहां गरीब को रोटी मिले ऐसी व्यवस्था करवानी चाहिए। शायद भगवान भी यही चाहते हैं।  * सुनील जैन राना *