रविवार, 18 मई 2025

पाकिस्तान की नियति

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ मंत्री बनने से पहले केजरीवाल की तरह कमीज पहनकर जनता के सामने बहुत सारे माइक लगे रहते थे मंच पर तब शाहबाज़ खूब आक्रोश में आकर कहते थे आवाम के लिए हम अपने कपड़े बेचकर उनके लिए रोटी की कमी नहीं होने देंगे। और आक्रोश में माइको को भी हाथ से नीचे गिरा देने का ड्रामा भी करते थे।

आज भी शाहबाज़ रोज नये सूट पहनकर दर्शन देते हैँ। आवाम आज भी महंगाई से तृस्ट है। ऊपर से भारत के हमले नें पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है, लेकिन इन नेताओं, मंत्रियों को कोई चिंता नहीं। ये आज भी अपने देश की आवाम को झूठ बोलकर बता रहें हैं की हमने भारत को नेस्तनाबूद कर दिया। 
झूठ की बुनियाद पर बना पाकिस्तान तब से लेकर अब तक सिर्फ भारत के विरुद्ध अपनी आवाम को भड़काने में लगा रहा। अपने देश की उनत्ति के बारे में कभी नहीं सोचा। देश की जनता की भलाई का धन नेतागण, मन्त्रीगण, और सेना के अधिकारी खाते रहें और मालामाल होते रहें। यही पाकिस्तान की नियति है।

शुक्रवार, 16 मई 2025

राहुल गाँधी उवाच

दलितों को समझना चाहिए की कौन उनका हितैषी है। राहुल गाँधी को खुद अपनी जात पता नहीं और जातीय जनगणना कराने की बात करते हैं। बिहार में ज़ब जातीय जनगणना हुई तब ये सरकार में भागीदार थे। अब कोई इनसे पूछें की बिहार में जातीय जनगणना से किसको फायदा हुआ तो ये जबाब नहीं दे पायेंगे। 
अम्बेडकर की फोटो लहराकर राहुल गाँधी क्या बताना चाह रहें हैँ। इनके साथ जुटी भीड़ भले ही दलितों की हो लेकिन उन्हें भी पता नहीं होगा की उनके भगवान अम्बेडकर को कांग्रेस नें कितना अपमानित किया था। यहां तक की चुनावों में भी जानबूझकर अम्बेडकर को हरवा दिया था। अब उसी कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी को तो बस हल्ला मचाने का कोई भी मुद्दा चाहिए। उससे क्या लाभ - हानि होगी इन्हें पता नहीं होता।

नेताओं के साथ जुटी भीड़, भीड़ ही होती है, उस भीड़ को पता नहीं होता की उन्हें क्यों इकट्ठा किया गया है। उनके क्या मुद्दे हैं? बस नेताबको देखा इकठे हो गये। अक्सर ऐसा ही होता है की या तो धन देकर भीड़ इकठ्ठा की जाती है या किसी बड़े नेता के नाम पर लोग इकठ्ठा होते हैं।
                   सुनील जैन राना

गुरुवार, 8 मई 2025

बदला हुआ पूरा

ऑपरेशन सिंदूर 
पहलगांव आतंकी हमले का बदला ऑपरेशन सिंदूर से ले लिया गया है। 25 मिनट में आतंकियों के 9 ठिकाने ध्वस्त  कर लगभग 100 आतंकियों को निपटा दिया गया है।
देश की जनता यही चाहती थी। महिलाओं का सुहाग उजाड़ने वालों को  महिलाओ नें ही सज़ा दी है। कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमान्दर व्योमिका सिँह के पराक्रम नें आतंकियों के छक्के छुड़ा दिए। मौत बाँटने वाला खुद की मौत न होने पर रोया। जैश ऐ मोहम्मद का सरगना मसूद अज़हर के खानदान के नौ लोग मारे जाने पर मसूद रोकर बोला मुझे भी मौत मिल जाती तो अच्छा था.।

भारतीय हमले के बाद पाकिस्तानी सेना नें अंधाधुंध कश्मीर के राजोरी, पुंछ, उड़ी आदि जगहों में गोलाबारी की जिसमें 54 लोग घायल हो गये, 4बच्चों सहित 12 नागरिक मारे गये।

मोदीजी के नेत्तरव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अजित डोभाल, जल, थल ,  नभ तीनो अंगों के पराक्रमी योद्धा सभी नें देश की आन - बान -शान को बचाये रखा।

रविवार, 4 मई 2025

डर डर कर मर

रात -दिन युद्ध का डर 
पाकिस्तान तो ऐसे ही डर -डर कर मर जायेगा। रात दिन युद्ध का डर, मोर्चा संभाले पाक सैनिक ऐसे ही पस्त हो जायेंगे। अब बम गिरा, अब बम गिरा के चक्कर में बदहवास से हो जायेंगे।

बिना युद्ध के ही मर रहा पाकिस्तान। चारों तरफ से अर्थव्यवस्था पर मार। आवाजाही बंद, आयात -निर्यात बंद, मेल - पार्षल बंद। बंदरगाहो पर पाकिस्तानी जहाज की एंट्री बंद। सिंधु जल समझौता कैंसिल, एयरो स्पेस बंद।

सिर्फ यही नहीं, इंस्टाग्राम की मालिकाना कम्पनी मेटा नें भारत के कहने पर अनेक सेलिब्रेटयो के अकॉउंट बंद कर दिए जो भारत विरोधी एजेंडा चलाते थे। इनमें से कुछ पाकिस्तान के कलाकार, नेतागण और क्रिकेटर हैं। बाबर आज़म, मोहमद रिज़वान, शहीद अफरीदी, इमाम उल हक़ जैसे नामी क्रिकेटर शामिल हैं।

पाकिस्तान का मिडिया जो भारतीय मुस्लिमो एवं विपक्षी नेताओं को यह समझता था की हमारा साथ देंगे लेकिन इन सभी नें पाकिस्तान को यह जता दिया है की हम भारत के साथ हैं। अब तो पाकिस्तान की हालत बिना युद्ध के ही पस्त होती दिखाई दे रही है।
           सुनील जैन राना

शुक्रवार, 2 मई 2025

पुरानी परम्पराएं

परंपरा कैसे जन्म लेती है..❓😄

एक कैम्प में नए कमांडर की पोस्टिंग हुई....
इंस्पेक्शन के दौरान उन्होंने देखा कि कैम्प एरिया के मैदान में दो सिपाही एक बैंच की पहरेदारी कर रहे हैं...😄

कमांडर ने सिपाहियों से पूछा कि वे इस बैंच की पहरेदारी क्यों कर रहे हैं ? 

सिपाही बोले:- हमें पता नहीं सर, लेकिन आपसे पहले वाले कमांडर साहब ने इस बैंच की पहरेदारी करने को कहा था... 😄
शायद ये इस कैम्प की परंपरा है क्योंकि...
शिफ्ट के हिसाब से चौबीसों घंटे इस बैंच की पहरेदारी की जाती है...😄

वर्तमान कमांडर ने पिछले कमांडर को फोन किया और उस विशेष बैंच की पहरेदारी की वजह पूछी..? 😎

पिछले कमांडर ने बताया:- मुझे नहीं पता, लेकिन मुझसे पिछले कमांडर उस बैंच की पहरेदारी करवाते थे...
अतः मैंने भी परंपरा को कायम रखा...😄

नए कमांडर बहुत हैरान हुए...😎
उन्होंने पिछले के और पिछले-पिछले 3 कमांडरों से बात की...😎
सबने उपरोक्त कमांडर जैसा ही जवाब दिया...😎
यूं ही पीछे के इतिहास में जाते नए कमांडर की बात फाइनली एक रिटायर्ड जनरल से हुई जिनकी उम्र 100 साल थी...😎 

नए कमांडर उनसे फोन पर बोले:-
आपको डिस्टर्ब करने के लिए क्षमा चाहता हूं सर...
मैं उस कैम्प का नया कमांडर हूं...
जिसके आप, 60 साल पहले कमांडर हुआ करते थे...😄
मैंने यहां दो सिपाहियों को एक बैंच की पहरेदारी करते देखा है...😄

क्या आप मुझे इस बैंच के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं..?ताकि मैं समझ सकूं कि, इसकी पहरेदारी क्यों आवश्यक है..? 😄

सामने वाला फोन पर आश्चर्यजनक स्वर में बोला:-

क्या ❓उस बैंच का "ऑइल पेंट" अभी तक नहीं सूखा..❓ 😀

समाज में कई रीति रिवाज अभी ऐसे ही बने हुए है। कभी अतीत में जाकर कारण पूछें।
😂😂💯😂😂

जातीय जनगणना

जातीय जनगणना किये जाने पर खुलेंगे कई राज। कांग्रेस नें अपने 60साल के  राज में क्यों नहीं करवाई जातीय जनगणना। अब ऐसे हल्ला मचा रहे हैं जैसे इसके बिना कोई पहाड़ टूट रहा होगा। 
बिहार में गठबंधन की सरकार में जातीय जनगणना कराई तो कहते हैं की यह ठीक नहीं हुई। दरअसल राहुल गाँधी को तो सिर्फ कोई मुद्दा चाहिए हल्ला मचाने को। उन्हें नहीं पता की इससे क्या फायदा या नुकसान होगा? 
राहुल गाँधी को इतने बड़े होगा जाने पर भी अधिकांश विभागों के बारे में नहीं पता। किसी एक मंत्रालय के बारे में वे दस मिनट भी बोल नहीं सकते। आज उनकी बातों का मज़ाक़ ही उड़ाया जाता है।