रविवार, 18 अक्टूबर 2020
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020
डाकघर -डाकबाबू -सर्वर डाउन
डाकबाबू - डाकघर - सर्वर डाउन
October 15, 2020 • सुनील जैन राना • जनहित
मोदीजी देश को डिजिटल बनाना चाह रहे और हमारे डाकबाबू और डाकघर का अधिकांश समय सर्वर ही डाउन रहता है। कुछ बहुत बड़े शहरों का तो पता नहीं लेकिन छोटे शहर -कस्बों -गाँवों के डाकघरों एवं डाक बाबुओ की कार्यप्रणाली देखकर उपभोक्ता का ही सर्वर डाउन हो जाता है। पैसे जमा कराओ ,निकालो ,पासबुक में एंट्री कराओ ,रजिस्टरी कराओ ,लेकिन कब कराओ जब नेट चलेगा ,अभी तो सर्वर डाउन है ?ऐसा जबाब अधिकांश उपभोक्ता को मिलता होगा।
मैं अपने साप्ताहिक समाचार पत्र पॉलिटिकल पेट्रोल का डाक पंजीयन रिनीवल कराने नगर के बड़े पोस्टऑफिस प्रवर डाक घर में गया। बताया गया की सितंबर के बाद ५० रूपये की फ़ीस लगेगी अतः डाक काउंटर से ५० रूपये के लेट फ़ीस टिकट ले आओ। मैं गया लाईन लगी हुई थी दो लड़कियां चाय की चुस्कियां ले रही थी और अधिकांश उपभोक्ता को बाद में आना अभी सर्वर डाउन है कहकर टरका रही थी। मेरा नंबर आया मैंने लेटफीस हेतु ५० रूपये के टिकट आदि देने को कहा तो जबाब मिला क्या दें ?फिर आपस में खुसर फुसर कर बोली अभी कम्प्यूटर खराब है तब ठीक होगा तब प्रिंट निकलेगा। फिर मैं अपने घर के पास के डाकघर गया उनसे ५० रूपये के लेटफीस हेतु टिकट आदि देने को कहा तो उन्हें भी यह समझ नहीं आया की क्या देना है ?ऐसे समझदार हैं हमारे डाकबाबू ?
अब बात करें डाक वितरण की तो यह हाल है की मेरा अपना समाचार पत्र मेरे पते पर दो साल में १०४ अंको में से मात्र १० अंक भी नहीं पहुंचे। दो साल से लिखित में की गई कई शिकायतों का कोई जबाब नहीं मिला।मेरे पास प्रतिदिन अनेक पत्र -पत्रिकाएं आती थी अब सिर्फ रजिस्टर्ड डाक आती है अन्य कुछ नहीं। ऐसी शिकायत अनेक लोगो की हैं। डाकिये से पूंछो तो वह दांत निकालकर कह देता है जितनी डाक मिलती है बाट देता हूँ।किसी की कोई जबाबदेही नहीं।
मोदीजी के डिजिटल इंडिया में यह हाल है डाकखानों का। * सुनील जैन राना *
रविवार, 11 अक्टूबर 2020
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020
बिना साबुन हाथ धोयें -स्वस्थ रहें
बिना साबुन हाथ धोयें -स्वस्थ रहें https://suniljainrana.blogspot.com/
October 6, 2020 • सुनील जैन राना • जनहित
जी हाँ ,बहुत उपयोगी और लाभकारी है बिना साबुन के हाथ धोने की क्रिया करना। सम्पूर्ण शरीर के जोड़ो की अकड़न -जकड़न दूर हो जाती है ऐसा करने से। हमारे शरीर की अधिकांश ग्रंथियां हमारे हाथों की हथेलियों से ताल्लुक रखती हैं। यदि हम प्रतिदिन प्रातः और जब भी समय मिले पांच मिनट हथेलियों की कसरत में लगा दें तो अनेक प्रकार के जोड़ो से संबंधित रोगो से छुटकारा मिल सकता है। मैं खुद ऐसा करता हूँ जिससे मेरे घुटनो के दर्द में आराम है।
कैसे करें ? जिस प्रकार हम शौच के बाद साबुन से हाथ धोते हैं ठीक उसी प्रकार प्रातः बिना साबुन लगाये हाथ धोने की क्रिया करें अर्थात दोनों हाथो को आपस में सीधे -उल्टे ,आगे पीछे ,ऊपर नीचे ,उँगलियों में उँगलियाँ डालकर खूब रगड़ें। हथेलियों के पर्वतों को आपस में ठोकें ,तालियां बजायें ,यानि की हथेलियों के प्रत्येक भाग को आपस में रगड़ें। ऐसा करने से आपको अपने शरीर के जोड़ो में आराम मह्सूस होगा।
दरअसल हमारी हथेलियों में अधिकांश शरीर की ग्रंथियां होती हैं ,ऐसे में उन्हें आपस में रगड़ने से कमजोर सुस्त नसें चलायमान हो जाती हैं। इसी प्रकार हमारी उँगलियों के पोरो से शरीर के अधिकांश अंग जुड़े होते हैं। इन पोरो को अलग -अलग दबाने से संबंधित अंग के रोग में आराम मिलता है। यदि किसी पोरे को दबाने से दर्द होता है तो इसका मतलब उससे संबंधित अंग में व्याधि है। पोरो को दबाना एक्यूप्रेशर की तरह काम करता है।
हम काफी समय खाली बैठे रहते हैं ,हमे खाली समय का सदुपयोग करना चाहिये। ऐसी बहुत सी कसरतें हैं जो हम खाली बैठे बैठे कर सकते हैं। अनुलोम -विलोम ,कपालभाति आदि से लेकर बिना साबुन हाथ धोने की क्रिया आदि से हम बिना खर्च अनेकों व्याधियों से मुक्ति पा सकते हैं। इसमें कोई हानि भी नहीं है। * सुनील जैन राना *
सोमवार, 5 अक्टूबर 2020
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