एक करोड़ का सोने -जवाहर का कलश जैन मंदिर से चोरी हो गया था. चोर भी मिल गया और कलश भी मिल गया.
लेकिन समझ में नहीं आता आखिरकार क्यों जैन मंदिरो में सोने - चांदी का इतना प्रयोग हो रहा है. आज के समय में जैन तिरथो को बचाना ही मुश्किल हो रहा है. सुरक्षा के उपाय बहुत कम हैँ.
हमारे मुनिगण भी नये -नये भव्य करोड़ो की लागत से मंदिर बनवा रहे हैं. कौन करेगा उनकी देखभाल? इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है.
जैन पॉपुलैशन कम होती जा रही है. नई पीढ़ी पढ़ लिखकर जॉब कर रही है. वह कभी कभाक जैन मंदिर भी चली जाये तो बड़ी बात है.ऐसे में प्रबुद्ध जैन समुदाय को गहरा चिंतन करना चाहिए.
मंदिर तो देशभर में बहुत हैं, अब जैन ओशधालय, स्कूल, कॉलेज बनवाने चाहिए. जो सबके काम आ सकें.
सुनील जैन राना, सहारनपुर
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