सोमवार, 23 जून 2025

इजराइल की कहानी

इजराइल कितना मजबूत है उसके हौसले कितने मजबूत है पढ़िए नेतन्याहु जैसा नेता मिलना किसी देश का सौभाग्य होता है, यहूदी काल के कपाल पर अदम्य जिजीविषा एवं शोर्य का हस्ताक्षर , बेंजामिन नेतन्याहू का भाषण का अंश इजरायल की पुकार ही नहीं यहूदियों का आत्मकथा का सार अंश भी है।भाषण का अंश...

75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास न कोई देश था, न कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65000 थें। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमलें होतें रहे, होते रहे। लेबनान, सीरिया, इराक़, जॉर्डन,मिश्र, लीबिया, सऊदी , अरब जैसे कई देशों ने हमारे उपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मा'रना चाहते थे, किंतु हम बच गए।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने हमें धरती दी, वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी।  हमने उसको भी अपने खून से सींचा।  हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सबकुछ था। हम कुछ नहीं भूलें। हम फिर उन से बच गए। हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए। हम अरब से बच गए। हम सद्दाम हुसैन से बच गए। हम गद्दाफी से बच गए। हम हमास से भी बचेंगे, हम हिज्बुल्लाह से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।

हमारे जेरुसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया लेकिन हम अपने जेरुसलम को कभी नहीं भूले वह हमारे हृदय में हैं,वह हमारे मस्तिष्क में हैं और जब तक हम रहेंगे जेरुसलम हमारी आत्मा में रहेगा। संसार यें याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिश्र, लेबनान, वेवीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गयें है। हम फिर भी बचे रहे।

हमें वे (इस्लाम) खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने हमारें रस्म रिवाज को कब्जाया। उन्होंने हमारें उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारें पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिया गया, सोलोमन, सुलेमान हो गया, डेविड, दाऊद बना दिया गया। मोजेज मूसा कर दिया गया। फिर एक दिन उन्होंने कहा - तुम्हारा पैगंबर ( मु'हम्मद) आ गया है। हमने इसे नहीं स्वीकार किया। करते भी कैसे? उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा स्वीकार करो़, कबूल लो। हमने नहीं कबूला। फिर हमें मा'रा गया। हमारे शहर को कब्जाया गया। हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम क़'त्ल हुए,भगा दिए गए।

मक्का के काबा में हम दो लाख थे, मा'र दिए गए। हमें दुश्मन बता कर क़'त्ल किया गया। फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। हम तीन लाख थे मा'र दिए गए इराक़ में हम दो लाख थे, तुर्की में चार लाख हमें मा'रा जाता रहा, मा'रा जाता रहा। वे हमें मा'र रहे हैं, मा'रते जा रहें हैं। हमारे शहर,धन, दौलत, घर,पशु,मान सम्मान सब कुछ कब्जाये़ जाते रहे, फिर भी हम बचे रहे। 1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया, फिर भी हम बचे रहे। 75 साल पहले वे हम पर थूकते थे, ज़लील करतें थे, मारते थे। हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे हैं।

आज हमारे पास एक अपना देश है। एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थ व्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक जैसी कई संस्थाएं हमने इस दौर में बनाई।आज हमारे चिकित्सक दवा बना रहे हैं, लेखक किताबें लिख रहें हैं। ये सबके लिए है,यह मानवता के कल्याण के लिए है।

हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला, हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है।हम किसी के दु'श्मन नहीं है, हमने किसी को खत्म करने की क़सम नहीं खाई है। हमें किसी को बर्बाद नहीं करना, हम साजिश भी नहीं करते, हम जीना चाहते हैं सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।

पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा,हम मिटे नहीं,हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे। हम 3000 सालों से यरुसलम में ही थे। आज़ हम अपने पहले देश इजरायल में है। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा। यरुसलम हमसे है और हम यरुसलम से है।
साभार 

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