सोमवार, 21 नवंबर 2022

श्री सिद्ध चक्र विधान

*श्री सिद्धचक्र विधान और कविवर संतलाल जी : संक्षिप्त परिचय* 1️⃣ *जन्म एवं जन्म स्थान* *कविवर संतलालजी का जन्म सन् 1834 में नकुड(सहारनपुर,उ.प्र.) निवासी लाला शीलचंद जी के परिवार में हुआ।* 2️⃣ *देहपरिवर्तन समय* 🍁 *कविवर संतलाल जी का देहपरिवर्तन सन् 1886 में समाधिपूर्वक 52 वर्ष की आयु में हुआ ।* 3️⃣ *शिक्षा* 🍁 *आरंभिक शिक्षा नकुड (सहारनपुर) में की, बाद में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए रूड़की (उत्तराखंड) के थामसन कालेज में अध्ययन किया।स्वत: स्वाध्याय के बल से शास्त्र अभ्यास में विशेष दक्ष थे, वे अल्प आयु में ही जिनागम के मर्मज्ञ बन गये थे। जिनागम के गहन अध्ययन से वे अध्यात्मविद्या में विशेष पारंगत हो गये थे।* 4️⃣ *कर्तृत्व* 🍁 *उन्होंने अनेकों बार अन्य मतावलंबियों के साथ शास्त्रार्थ किया और जिनधर्म की सत्यता /महत्ता को उत्तर भारत में सब जगह प्रचारित किया। उनके सत्य संभाषण से सभी जगह जिनधर्म का प्रचार-प्रसार हुआ। उन्होंने जैन धर्मावलंबियों में प्रचलित अनेकों कुरीतियों को समाप्त किया।* *उस समय उत्तर भारत में प्राय: हिंदू रीति-रिवाज से विवाह आदि संस्कार किए जाते थे, उन्होंने जैन विधि-विधान से विवाह आदि संस्कार प्रारंभ किए और भी अनेकों गृहीत मिथ्यात्व पोषक कार्यों से समाज को मुक्त कराया।* *बचपन से असत्य भाषण न करने तथा शुभ कार्यों में ही रत रहने का संकल्प होने से इनका संतलाल नाम प्रचलित हो गया।* 5️⃣ *कृति* 🍁 *हिंदी (पद्यमय )भाषा में लिखा गया सिद्धचक्र विधान आपकी सर्वोत्कृष्ट रचना है।* *यह सभी विधानों का राजा है।यह अष्टान्हिका पर्व पर विशेष रूप से किया जाता है,पर इसे अन्य शुभ अवसर पर भी किया जा सकता है।अष्टान्हिका के आठ दिन,मैनासुंदरी-श्रीपाल कथा और विधान की आठ पूजाओं के संयोग जुड़ने से यह विधान विशेष रूप से अष्टान्हिका पर्व पर किया जाता है।* *संतलाल जी का नाम छहढाला के रचनाकार कविवर दौलतराम जी की तरह अमर हो गया। अद्भुत भेंट उन्होंने जैनसमाज को प्रदान की, जिसका उपकार जैनसमाज कभी भी सदियों तक विस्मृत नहीं कर सकता।* *उन्हें अमर बनाने वाली यह महान रचना है।* 🌷 *सिद्धचक्र विधान की विशेषताएँ* 🍁 *यह आपकी स्वतंत्र रचना है, जो कि किसी की नकल नहीं है।* *इसके पहले सिद्धचक्र विधान संस्कृत भाषा में भट्टारक शुभचंद और ललितकीर्ति ने लिखें थे। जिसमें पूजन के जलादि अष्टक छंद संस्कृत भाषा में है पर अर्घावली के मंत्र तो द्विगुणित रूप में है पर छंद किसी भी अर्घावली के साथ नहीं है।* *हर पूजा की अर्घावली में दूने-दूने अर्घों/गुणों का विकास देखने में आता है, जो अन्य किसी भी विधान में नहीं है। इसके पीछे यही अभिप्राय है कि प्रतिदिन भावों की विशुद्धि दूनी-दूनी बढ़ती जाए तभी उत्कृष्ट विशुद्धि लब्धि से जीव करणलब्धि का उद्यम कर सकेगा।* 🍁 एक विधान में अनेक विधानों का समावेश हुआ है। *प्रथम, द्वितीय और तृतीय पूजा में सिद्ध परमात्मा की विशेष आराधना के बाद चतुर्थ पूजा में गणधर वलय के 48 अर्घों के माध्यम से चौषठ ऋद्धि विधान समाहित है और सिद्धों का गुणगान है। पंचम पूजा में पापदहन विधान के माध्यम से पापाश्रव के 108 भेदों का दहन करने का उपाय बताया और छठवीं पूजा कर्मदहन विधान के रूप में प्रसिद्ध है। सातवीं पूजा पंचपरमेष्ठी विधान के रूप में विख्यात है और अंतिम पूजा सहस्रनाम विधान के रूप में है। सहज ही एक विधान में अनेक विधानों का लाभ भव्यजीवों का उपलब्ध होता है- जो इस विधान को सर्वोत्तम विधान सिद्ध करता है।* *अध्यात्म का दिशाबोध कराने वाला यह हिंदी का समयसार है।* *संतलाल जी अध्यात्म के विशेष ज्ञाता थे,इसी कारण विधान में अशुद्ध आत्मा को शुद्ध आत्मा बनाने का सरल उपाय भक्ति परक छंदों में निबद्ध किया है।* *संसारी से सिद्ध होने का संविधान जिनागम में क्या है?* *इसका सरलता से विधान/उपाय प्रथमपूजा की जयमाला से समझाया गया है।* *विधान की आठों जयमालायें सिद्ध परमात्मा के स्वरूप, महिमा और उसे प्राप्त करने का सुगम विधान बता रही हैं, जो मूलतः पठनीय है।* *प्रथम गुणस्थान से गुणस्थानातीत होने की सरल विधि क्या हो सकती है?* *यह यदि जानना/समझना हो तो विधान का पूजन के साथ-साथ स्वाध्याय भी कीजिए।* *इस कृति में भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम है।* *सिद्धभक्ति से आत्मशक्ति और आत्मशक्ति से मुक्ति का संविधान इसी कृति में उद्घाटित किया गया है।* *इस विधान की अद्भुत महिमा है। इसे श्रीपाल के कुष्ठ -रोग निवारण और मैनासुंदरी की भक्ति तक सीमित नहीं किया जा सकता है।यह विधान भवरोग के निवारण में पूर्णतः समर्थ है।* *अशरीरी होने का विधान है।* *वे छंदशास्त्र के मर्मज्ञ थे,* *इसमें लगभग 48 छंदों का प्रयोग किया गया है।* 🍁 *अन्यकृति* *इसके अलावा पद्यमय 'संतविलास' नाम से आपकी अन्यकृति भी उपलब्ध है। जो 2272 पद्यमय छंदों में निबद्ध है। जिसमें स्तुति,पद,भजन आदि गर्भित है।* 🍁 *आज संपूर्ण भारतवर्ष में हजारों सिद्धचक्र विधान अष्टान्ह्रिका पर्व हो रहे हैं, सिद्ध परमात्मा की आराधना तो हम सभी मनोयोग से करें ही ,पर जिन्होंने हमें सिद्ध परमात्मा से मिलने का संविधान बताया है, उन कविवर संतलाल जी को भी स्मरण करते रहें।* 🙏🙏 *सिद्धभगवान जयवंत रहे।* 🙏 *सिद्धचक्र विधान जयवंत रहे।* 🙏 *संतलाल कविवर जयवंत रहे।* 🙏 प्रस्तुति *डॉ अशोक जैन गोयल दिल्ली* 9810509141

किसानों के कर्तव्य

किसान अधिकार चाहते- कर्तव्य निभाते नहीं देश मे किसानों के लिये बहुत कुछ किया जा रहा है। मोदीजी सरकार में किसानों की आय बढ़ाने को अनेको कार्य हो रहे हैं। किसानों को उत्पाद का उचित मूल्य मिले, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी, समय-समय पर बैंक लोन में माफ़ी आदि अनेको तरीको से किसानों को मदद की जा रही है। दुर्भाग्यपूर्ण है की फिर भी कुछ किसान नेता अपनी नेतागिरी चमकाने को गैरजरूरी आंदोलन करते रहते हैं। विडम्बना यह है की इन किसानों को अपने अधिकारों का तो पता होता है लेकिन इनके कुछ कर्तव्य भी हैं यह भूल जाते हैं। ट्रैक्टर- ट्रॉली के पीछे लाल लाईट नही लगवाते जिससे सड़क पर रात्रि में पीछे आने वाले वाहनों को परेशानी होती है। ट्रॉली में बेहताशा गन्ना आदि भर कर चलते हैँ जिससे सड़क घिर जाती है। पीछे आने वाले वाहनों को रास्ता नहीं मिल पाता है। कई किसान समय पर बैंक लोन नहीं चुकाते। नेताओं के कहने पर बेबात आंदोलन पर उतारू हो जाते हैं। राकेश टिकैत जैसे किसान नेता किसानों को भड़काते हैं और कहते हैं की किसान आंदोलन करेगा तभी बचेगा। ऐसी निराधार बातें किसानों के हित में नहीं होती हैं। कुछ किसान मालदार हो गया है तो कुछ किसान गरीब है। जो गरीब है उसकी सहायता को सरकार मदद कर रही है। खेती के नए तरीके, नई-नई फसलों के बारे में जानकारी व सुविधाएं दी जा रही हैं। किसान देश के अन्न की पूर्ति करते हैं। सरकार को उनका ध्यान रखना ही चाहिये। लेकिन किसानों को भी अपने अधिकारों की तरह अपने कर्तव्यों का निर्वाह भी करना चाहिए। सुनील जैन राना

गुरुवार, 17 नवंबर 2022

सम्राट अशोक

*"सम्राट अशोक" की "जन्म- जयंती" हमारे देश में "नहीं मनाई जाती" ?? बहुत सोचने पर भी, "उत्तर" नहीं मिलता! आप भी, इन "प्रश्नों" पर, "विचार" करें! जिस -"सम्राट" के नाम के साथ, -"संसार" भर के, "इतिहासकार"- “महान” शब्द लगाते हैं जिस -"सम्राट" का राज चिन्ह "अशोक चक्र"-" भारतीय", "अपने ध्वज" में लगाते है l जिस -"सम्राट" का -"राज चिन्ह", "चारमुखी शेर" को, "भारतीय",- "राष्ट्रीय प्रतीक" मानकर,:- " सरकार" चलाते हैं l और "सत्यमेव जयते" को "अपनाया" है l जिस देश में - "सेना का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान", "सम्राट अशोक" के "नाम" पर, "अशोक चक्र" दिया जाता है l जिस -"सम्राट" से -"पहले या बाद" में :- "कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नहीं हुआ"...l जिसने : -"अखंड भारत" (आज का नेपाल, बांग्लादेश, पूरा भारत, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान) जितने, "बड़े भूभाग" पर:-"एक-छत्र राज" किया हो l सम्राट अशोक" के ही, समय में :- "२३ विश्वविद्यालयों" की "स्थापना" की गई l जिसमें :- तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला, कंधार, आदि "विश्वविद्यालय", "प्रमुख" थे l इन्हीं "विश्वविद्यालयों" में "विदेश" से "छात्र", "उच्च शिक्षा" पाने, :- "भारत आया करते थे" जिस -"सम्राट" के "शासन काल" को -"विश्व" के "बुद्धिजीवी" और "इतिहासकार", "भारतीय इतिहास" का सबसे -"स्वर्णिम काल" मानते हैं जिस -"सम्राट" के "शासन काल" में :- "भारत"- "विश्व गुरु" था l "सोने की चिड़िया" था l जनता -"खुशहाल" और "भेदभाव-रहित" थी l जिस सम्राट के शासन काल में, सबसे "प्रख्यात" "महामार्ग", :- "ग्रेड ट्रंक रोड" जैसे कई -"हाईवे" बने l २,००० किलोमीटर लंबी पूरी "सडक" पर, "दोनों ओर", "पेड़" लगाये गए l "सरायें" बनायीं गईं..l मानव तो मानव..,पशुओं के लिए भी, प्रथम बार "चिकित्सा घर" (हॉस्पिटल) खोले गए l "पशुओं को मारना बंद" करा दिया गया l ऐसे -"महान सम्राट अशोक", जिनकी -"जयंती" उनके -"अपने देश भारत" में :-"#क्यों नहीं मनायी जाती"#?? न ही, कोई -"छुट्टी" घोषित की गई है?* दुख: है, कि :-जिन नागरिकों को ये -"जयंती", "मनानी" चाहिए..? वो अपना -"इतिहास" ही, "भुला" बैठे हैं l और , जो :- "जानते" हैं ? "वो":- "ना जाने क्यों" ? "मनाना":- "नहीं चाहते" *पिताजी का नाम - बिन्दुसार गुप्त *माताजी का नाम - सुभद्राणी "जो जीता, वही:- "चंद्रगुप्त" ना होकर ...? "जो जीता", वही :-"सिकन्दर" कैसे हो गया जबकि - "ये बात" सभी जानते हैं, कि:- "सिकन्दर" की सेना ने -"चन्द्रगुप्त मौर्य" के "प्रभाव" को देखते हुए ही, :- "लड़ने से मना कर दिया" था!🧐🤔 बहुत ही ,"बुरी तरह" से "मनोबल टूट गया था"! और "वापस लौटना" पड़ा था । कृपया - अपने सभी समुहों में भेजने का कष्ट करें l और हम सब मिल कर, बाक़ी साथियों को भी,"जागरूक" करें! आइए मिल कर - इस "ऐतिहासिक भूल" को, "सही करने" का,:- "हर संभव प्रयास" करें .🙏