रविवार, 31 जुलाई 2022
देश मे बहुत कार्य हो रहा है
विचार करने वाली बात है कि क्या भारत में रूपयों के पेड़ लग गये है?
देश मे कहीं भी चले जाइए,किसी भी सड़क पर, सभी जगह
काम चल रहा है। पुरानी सड़क चौड़ी हो रही है, नई सड़क बन रही है, 2 Lane वाली 4 lane हो रही है।
नए Expressway बनाये जा रहे हैं।
शहरों में flyover बन रहे हैं ।
शायद ही कोई रेलवे स्टेशन ऐसा होगा जहां काम न लगा हो।
नई रेलवे लाइनें बिछ रही हैं।
जो single Track थे उनको Double और Electrify किया जा रहा है। देश मे 4 तो नए DFC बोले तो Dedicated Freight Corridor बोले तो वो नई रेल लाइन बनाई जा रही हैं जिन पर सिर्फ मालगाड़ियां दौड़ेंगी।
देश की जितनी भी Unmanned Railway Crossing बोले तो मानव रहित रेलवे फाटक थे उनके नीचे से अंडरपास बनाये जा रहे हैं।
सन 2024 तक पूरे देश मे हर घर में नल से पानी ( कम से कम 55 लीटर पानी , प्रतिव्यक्ति , प्रतिदिन )देने की जोरदार तैयारियां चल रही है।
कई गीगावाट सोलर पॉवर की तैयारी है। भविष्य में फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी के लिए हाइड्रोजन को एक डॉलर प्रति किलो से नीचे बेचने की तैयारी चल रही है ।
सेना को आधुनिक बनाने के लिए हर हफ्ते नई मिसाइल का परीक्षण , एक से बढ़कर एक आधुनिक हथियारों की खरीदारी और आगे उनको देश में ही बनाने का जुनून भी सर पर हावी है ।
नमामि गंगे में ही गंगा और उनकी सभी सहायक नदियों के किनारे बसे शहरों में बड़े बड़े गहरे सीवर पाइप लाइन बिछा के Sewage Treatment Plant बनाये जा रहे हैं। बनारस का Sewage Treatment Plant बनारस से 30 Km दूर 30 एकड़ जमीन पर बनाया जा रहा है।
पूरे बनारस शहर का Sewage वहां पाइप लाइन से जाएगा और ट्रीट हो के उस पानी को कृषि कार्यों में उपयोग होगा, ये सैकड़ों करोड़ का प्रोजेक्ट है और ऐसे ही Sewage Treatment Plants लगभग हर शहर कस्बे में बन रहे हैं।
भारत माला, सागर माला , चार धाम आल वेदर रोड , पूरे चीन बॉर्डर पर आल वेदर आरटीरोड्स , बिल्कुल नया दिल्ली - मुम्बई एक्सप्रेस वे जैसे वृहद प्रोजेक्ट्स पर कार्य चल रहा है।
Bullet Train प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
देश मे 100 से ज़्यादा Airports और हवाई पट्टी अपग्रेड की जा रही हैं।
देश मे 12 करोड़ शौचालय और 2 करोड़ मकान बन गए प्रधान मंत्री आवास योजना में, ये जो मैंने काम गिनाए ये देश मे समानांतर चल रहे कुल विकास / निर्माण कार्यों का 10% भी नही है।
गांव या शहर में देखिये, एक जेसीबी खाली नही है। सब किसी न किसी हाईवे निर्माण में लगी है।
अब मुझे यह समझ में नही आ रहा कि ये जो देश भर में इतना निर्माण कार्य चल रहा है इसे बना कौन रहा है ? ये सब काम कर कौन रहा है ?
अलादीन का चिराग और उसका जिन्न हाथ आ गया है क्या ?
विपक्ष और प्रेस्टीट्यूट मीडिया कहता है कि सरकार रोज़गार देने में विफल रही...
आखिर ये सब निर्माण कार्य करने वाले कामगार जापान से आये हैं या सिंगापुर से ?
सड़क पर काम मे लगी जेसीबी कौन चला रहा है ? अडानी या अम्बानी ?
रोज़गार कहते किसे हैं ?
क्या सिर्फ सरकारी नौकरी को ?
रोजगार का रोना रोने वालो बताओ आज खाली कौन है?
सोमवार, 25 जुलाई 2022
रविवार, 24 जुलाई 2022
चीन, पाकिस्तान, श्रीलंका
धोखेबाज़ चीन, पाकिस्तान एवं श्रीलंका
अहंकारवादी, विस्तारवादी,साम्राज्यवादी, धोखेबाज़ चीन पूरे विश्व मे अपने इन्ही कारणों से अपनी साख खोता जा रहा है। अपने धन और ताकत के सहारे विश्व के कई देशों को अपने मकड़जाल में उलझाकर उनको बर्बाद करने पर तुला रहता है। धन बल के कारण चीन कमजोर देशों को आर्थिक मदद के बहाने धन के एवज में उनके बंदरगाह एवं महत्वपूर्ण भूमियों को अपने कब्जे में लेकर वहाँ अपनी सैन्य शक्ति स्थापित कर धमकी देता रहता है। अनेक देश चीन के चंगुल में फसते जा रहे हैं।
चीन ऊपर से सहायता का दिखावा कर अंदर भितरघात में लगा रहता है। लेकिन अब उसकी यह नीति उसी पर भारी पड़ रही है। विश्व के कई देश उसके खिलाफ हो गए हैं। जिस प्रकार पाकिस्तान को आतंकी देश के रूप में देखा जाता है उसी प्रकार आज चीन को धोखेबाज़, मक्कार, विश्वासघाती देश के रूप में देखा जाने लगा है। जैसी करनी वैसी भरनी की कहावत चीन पर चरित्रार्थ हुई है। अप्रैल माह में चीन के हेनान प्रान्त में हुए बैंकिंग घोटाले ने चीन को सकते में डाल दिया है। चीन के एक बैंक से 6 अरब डॉलर गायब हो गए। जिसके बाद बैंक ने लोगो को उनका जमा पैसा देने से मना कर दिया। पैसा लेने वालों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि चीन को बैंक के बाहर बैटल टैंक लगा देने पड़े। भीड़ के हिंसक प्रदर्शन से चीन घबरा गया। यह एक बानगी उस धनवान चीन की है जो दूसरों पर अपने धन का भार डालकर मनमानी करता था।
पाकिस्तान की बात करें तो वहां भो बुरा हाल है। चीन के कर्ज में दबकर पाकिस्तान दिवालिया होने के कगार पर है। दुनिया का कोई भी देश पाकिस्तान को डॉलर देना नही चाहता है।यहां तक कि 56 मुस्लिम देश भी पाकिस्तान की मदद करने से इनकार कर दिए हैं। पाकिस्तान में महंगाई अपने चरम पर है। कभी नियाजी कभी नवाजी सत्ता पर धावा बोल सत्तासीन हो रहे हैं।लेकिन जनता का भला करने में नाकाम हो रहे हैं।
यही हाल श्रीलंका का हो गया है।श्रीलंका भी चीन की कूटनीति में फंसकर दिवालिया हो गया है। श्रीलंका की आर्थिक तबाही का मुख्य कारण चीन का कर्ज ही है। चीन ने श्रीलंका को अपने धन के मकड़जाल में उलझाकर उसे दिवालिया कर दिया है। श्रीलंका की आर्थिक स्तिथी पर संयुक्तराष्ट्र मानवाधिकार ने श्रीलंका की आर्थिक स्थिति के लिये चीन के कर्ज को जिम्मेदार माना है। चीन की इस चाल से अनेको देश तबाही की तरफ बढ़ रहे हैं।
भारत पर भी चीन की निगाहें अच्छी नहीं हैं। लेकिन मोदी सरकार ने भारत देश की सुरक्षा-सम्प्रभुता के लिये अनेक कदम उठाए हैं। भारत भले ही चीन से अकेले सामना करने में सक्षम नहीं हो लेकिन आज मोदीजी के नेत्तरव में कई बड़े देश चीन के खिलाफ भारत के साथ खड़े हैं।
सुनील जैन राना
शनिवार, 23 जुलाई 2022
मोदीजी जैसा कोई नहीं
मेरी पसंद के नेता मोदीजी।
*1. सबसे पहले तो यह नेता कभी भी फटे-पुराने कपड़ों, बिखरे बालों या गन्दी स्थिति में नहीं दिखेगा!*
*2. माननीय नरेंद्र मोदी की बॉडी लैंग्वेज बहुत प्रभावशाली लगती है। उसकी चाल मर्दानगी से भरी है।*
*3. वह भगवा वस्त्र में साधु की तरह दिखता है, सैनिक पोशाक में सैनिक जैसा दिखता है, साधारण रोजमर्रा के कपड़ों में एक दिव्य राजकुमार जैसा दिखता है।*
*4. देशभक्ति उनकी सांस है और अनुशासन उनका ब्लड ग्रुप है।*
*5. भले ही वह दुनिया के किसी भी महान शख्सियत के साथ खड़े हों, लेकिन उनकी प्रतिभा मुट्ठी भर लगती है। अन्य प्रतिभाएँ बौनी लगती हैं।*
*6. हमने अतीत में ऐसा कोई नेता नहीं देखा, जिसने चुनाव से पहले किये ग इतने असंभव वादों को पूरा किया हो।*
*7. देश के शीर्ष पर होने के बावजूद वह अपने परिवार पर बिल्कुल भी विशेष उपकार नहीं करते हैं। उसके भाई-बहन उसके आसपास कभी नहीं देखे जाते। बिल्कुल नहीं।*
क
*8. वह कभी एक भी छुट्टी नहीं लेता।*
*9. वह कभी बीमार नहीं होता।*
*10. वह जानता है कि कितना कहना है और कब चुप रहना है, लेकिन वह यह भी जानता है कि दूसरे व्यक्ति को कैसे चुप रहना है।*
*1 1। इस सारी व्यस्तता के बीच वह कोई वेदी नहीं है, उसका सेंस ऑफ ह्यूमर अद्भुत है।*
*12. उनका भाषण तेज और अद्वितीय है। अभिव्यक्ति के लिए भाषा का प्रवाह भी बहुत अच्छा है। वे एक कवि भी हैं।*
*13. वह अपने विरोधियों के धोखे या चुनौतियों से कभी नहीं डरता।*
*14. वह अपने विरोधियों या अभियुक्तों की बकवास का जवाब देने में अपना समय बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरी कूटनीति के साथ अपने कर्तव्य के प्रति वफादार रहता है।*
*15. न सिर्फ सही फैसला बल्कि उसकी सतर्कता और समर्पण की भी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।*
*16. उनका व्यक्तित्व हिंदू संस्कृति का एक पवित्र प्रतीक प्रतीत होता है।*
*17. उसकी आँखों में चरित्र की चमक इतनी शक्तिशाली है कि वह उसे सम्मोहित कर सकता है।*
*18. इस आदमी को कोई प्रलोभन नहीं है, कोई डर नहीं है। उसके लिए स्वार्थ मायने नहीं रखता*
*19. और आखिरी लेकिन कम से कम, 70 साल की उम्र में भी, यह आदमी दिन में 15 से 20 घंटे काम करता है, फिर भी हमने उसे कभी जम्हाई लेते नहीं देखा!*
*💟 सहानुभूति के झरने*
*यदि आप इस लेख के ऋणी हैं और आपको लगता है कि आपके प्रधान मंत्री अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभा रहे हैं, तो आप यह संदेश उन सभी को भेज सकते हैं जो माननीय नरेंद्र मोदी जी के शुभचिंतक हैं।*
बुधवार, 20 जुलाई 2022
मोदी विरोध क्यो?
*मोदी के अन्धविरोध की भी कोई सीमा नही है -*
*वैक्सीन मुफ्त चाहिये पर टेक्स ना बढे-
*रेलवे में हर सुविधा बढे पर किराया ना बढे -
*सेना सन्नद्ध व हथियार बद्ध हो पर पेट्रोल की कीमत ना बढे-
*किसानों की आय दुगनी हो पर कृषि सुधार कानून नहीं चाहिये -
*टेक्स एकीकृत हो पर जीएसटी गलत है जो कल के 31% से आज 5 से 28% ही है -
*नोटबन्दी गलत है चाहे चिदम्बरम द्वारा बेची गयी मशीन से पाकिस्तान सेम नम्बर के नकलीनोट छापकर भारत में आतंकवादियों को देकर फैला रहा हो -
*काम सारे आउट सोर्सिंग से हो या ठेके पर - पर नौकरी में भर्तियां बढे -
*लाभार्थी वर्ग में उनकी ही संख्या ज्यादा है पर आरोप यह कि मोदी उनका विरोधी है -
*मोदी आतंकी हमले रोके पर पलटवार व कानून सख्त किये बगैर - वर्ना हम आधी रात को कोर्ट खुलवाकर आतंकी की फांसी रुकवायेंगे-
*केन्द्र सरकार के 50 साल पुराने नियमों को नहीं मानेंगे पर राज्यों के साथ मोदी भेदभाव करते हैं -
*पप्पू को बदनाम किया मोदी ने - तो पोने पिच्छतीस, जवाब का सवाल व यह चील यहां उपर क्यों उड रही है, संसद में आंख मारना, मोदी के गले पडने का बचपना, राफेल सोदे पर चार चार आंकडे व बेवजह चौकीदार चोर का नारा यह मोदी ने लगवाया था पप्पू से -?
*आदमी अपने कर्मों से बदनाम होता है - व पप्पू कहलाता है -
*तुम असभ्य गाली दो या सुनियोजित दंगे करवाओ! वह चुप रहकर कानूनी कार्यवाही भी करे तो वह चुप क्यों रहता है -
*और बोले तो कहो बोलता है, चुप ही नहीं होता-
विपक्ष व अन्धविरोधियों की यह सब विरोधाभासी, रोज की दिन चर्या है -
*और अब ताजा मामला लेलो -
खाद्यपदार्थ पर जीएस टी -?
कल तक कहते थे माल व खुदरा में व्यवसायिक कम्पनियों के आने से छोटा व्यापारी बर्बाद हो रहा है -रोजगार समाप्त व गरीबी बड रही है -
ग्लोबल युग व कानूनन वह बिना बडी कमी के किसी को व्यापार करने से रोक तो नहीं सकता - यही कांग्रेस थी जो विरोध के बाद भी भारत को WTO से जोडकर की मानी -
पर आप लोकल दुकान-दार से सामान खरीदें वह सेहत हेतू भी ठीक है व आपका सामाजिक व्यवहार भी उस पडोसी दुकानदार से है, वह आपका अपना है सुख दुख का साथी है वही उधार भी दे देता है - वह पनपे तो ठीक ही है ना -
तो सरकार ने पैक्ड सामान पर जीएसटी लगा दिया पर खुले सामान पर नहीं लगाया,जो सामान कम्पनी का नहीं है वह व्यापारी खुद पिसवाता बिनवाता है -
इससे आप की जेब पर वजन भी नहीं बढेगा एव वह व्यापारी भी पनपेगा- जो पैक्ड सामान आप आन लाइन मंगवाते हो वह आप घर पर क्यों तैय्यार नहीं करते - उससे हर तरह का लाभ है या नहीं -?
तो आप में यह आदत पनपे विदेशी देशी कम्पनी का पैक्ड पुराना सामान आपको मंहगा पडने से आप ना खरीदें यह उसकी मन्शा है -
तो गलत क्या है - और यह तो शुरूआत है अगर आपका समर्थन मिला तो यह गति बढेगी हर वस्तु स्थानीय हो कम्पनी की पैक्ड नहीं इससे सबको लाभ होगा -
वर्ना अंकल चिप्स की 5/- की आलू चिप्स टशन व फैशन मे आप 20/- में जब खरीदते हो - पास के हलवाई से 300-400 रुपये कि की शुद्ध रबड़ी के बजाय नकली दूध से बनी पैक्ड रबडी 650/-किलो में लेते हो वह तो ठीक है ना -?
सरकार का इरादा इसमें वस्तु मंहगा करना नहीं है? -आपको स्थानीय खाद्यपदार्थ की तरफ मोडना है - जैसे अग्निपथ रोजगार का विकल्प नहीं है देश की आन्तरिक व बाहरी सुरक्षा का मजबूत उपाय है -
पर सत्ता के भूखों की सारंगी आप बजाओगे तो 800 साल की मुगलों की गुलामी जिस कमजोरी से आयी वो तथा जिस व्यापारिक रणनीति से अंग्रेज 200 साल राज कर गये - वह कमियां दूर ना हुयी तो -
क्या वापस "भारतीय नूर दो दीनार" के इतिहास में लौटने या नील की खेती की अनिवार्यता भुगतने की मानसिकता बना ली है -
छोटी चीजों से ही बडे परिवर्तन की शुरूआत होती है -
जब आप इन छोटे परिवर्तनों पर ही अपनी सुविधा छोडने पर हिचकते हो -तो बडे परिवर्तन जैसी रोज मांग करते हो? इजराइल जैसी व्यवस्था लाने- चीन व म्यांमार जैसे कदम उठाने को क्या खाक तैय्यार होंगें -
सोचना जरूर....
•सिर्फ ब्रांडेड आटे पर टैक्स लगा है...
•नहीं देना है टैक्स तो अपने यहां के "लोकल चक्की वाले" के यहां से आटा लो, सेहत भी बनी रहेगी...
•सरकार चाहती है कि दूध,दही,मख्खन ,घी ,आटा,बेसन , सूजी आदि ब्रांड में मत खरीदो...
•लोकल लोगों से लो, आज से 10 -15 साल पहले भी तो जैसे इन चीजों का कोई ब्रांड नहीं था...
•आलस और कामचोरी पर GST लग रहा है-
•घी , दही , मक्खन , छाछ तो घर पर भी बन सकती है...
आटा, बेसन व कुछ अन्य तो चक्की पर भी पीसा या पिसवाया ज़ा सकता है..
साभार.
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