मंगलवार, 28 जून 2022
रविवार, 26 जून 2022
पीएम जी के सूचनार्थ
पीएम जी,इस अन्याय को बंद करो
नेताओं को सुविधा, माननीयों पर खर्च
भारतीय लोकतंत्र में बहुत सी बातें बहुत गलत हैं। जैसे,नेता दो सीट से चुनाव लड़ सकता है। वोटर दो जगह से वोट नहीं डाल सकता। दोनों सीटो से जीतने के बाद एक सीट छोड़े तो उस सीट से दूसरे नम्बर पर रहे प्रत्याशी को विजयी माना जाये।व्यर्थ है पुनः चुनाव करवाना। नेता जेल में रहते हुए चुनाव लड़ सकता है वोटर वोट नही डाल सकता। वोटर जेल गया तो सरकारी नॉकरी नहीं जबकि नेता मंत्री आदि कुछ भी बन सकता है। नेता बिना पढ़ा लिखा भी शिक्षा मंत्री बन सकता है जबकि वोटर को छोटी सी नॉकरी। के लिये भी मिनिमम शिक्षा चाहिये। नेता पर सैंकडों केस फिर भी गृहमन्त्री तक बन सकता है,वोटर तो जेल में ही सड़ेगा। इन सब बातों में संशोधन होना चाहिये।
माननीयों पर बेहताशा खर्च
भारत मे लगभग 4582 MLA, MLC हैं। जिनका वेतन लगभग 15 अरब से अधिक है। वेतन के अतिरिक्त इनके आवास, खाना, यात्रा,इलाज, विदेशी दौरे आदि पर लगभग 30अरब रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा इनकी सुरक्षा पर लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं। भूतपूर्व नेता,मंत्री,मुख्यमंत्री, राज्यपाल, पीएम,राष्ट्पति आदि पर लगभग 50 अरब रुपये खर्च होते हैं। Y Z श्रेणी सुरक्षा प्राप्त खर्च इसके अतिरिक्त है। इसके अलावा इन सब पर पेंशन खर्च सुनेंगे तो चोंक जाएंगे।
यह सब खर्च जनता के टैक्स के पैसों से किया जाता है। प्रधानमंत्री जी से निवेदन है इन सब खर्चो में कटौती होनी चाहिये। संसद जैसी कैंटीन जहां 29 रुपये में भरपेट भोजन मिलता है ऐसी कैंटीन देशभर में सब जगह खुलनी चाहिये। जिससे जनता भरपेट भोजन कर सके। ऐसा हो जाने से गरीबो को दिया जाने वाला सस्ता या मुफ्त राशन भी बन्द किया जा सकता है। जितना सस्ते भोजन पर खर्च होगा उतनी बचत मुफ्त या सस्ते राशन को न देने से हो सकती है। यह सिर्फ एक सम्पादकीय नही बल्कि एक आम आदमी के मन की बात है। धन्यवाद।
सुनील जैन राना
सम्पादक
पॉलिटिकल पेट्रोल
सहारनपुर-247001
सोमवार, 20 जून 2022
अग्निवीर का विरोध क्यो?
अग्निवीर?
भविष्य का भारत कैसा हो?
★ ऐसा भारत हो जिसका कलक्टर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका कप्तान भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका मजिस्ट्रेट भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका बैंककर्मचारी भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका डाक्टर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका इन्जीनियर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका लेखपाल भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका पंचायतकर्मी भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका अध्यापक भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका दारोगा भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत सिपाही भी अग्निवीर सैनिक हो ,
★ ऐसा भारत जिसका खुफियाकर्मी भीअग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका नेता भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका ग्राम प्रधान भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका ड्राईवर भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका व्यापारी भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका ठेकेदार भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका अधिवक्ता भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका न्यायधीश भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसका उद्योगपति भी अग्निवीर सैनिक हो,
★ ऐसा भारत जिसके हर कदम पर अग्निवीर सैनिक हों।
*_वह भारत इतना ताकतवर होगा जिसमे सैकड़ो अमेरिका व चाइना भी समा जाएंगे।_*
```न कही भ्रष्टाचारी होंगे
न कही देशद्रोही होंगे
न कहीं लुटेरे होंगे
न कहीं आतंकी होंगे।```
*_इतनी छोटी सी बात भी अगर समझ मे नहीं आती तो भगवान ही मालिक है।_*
रविवार, 19 जून 2022
अंग्रेजी त्यौहार क्यों?
*हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे...!*
*फिर हम वह अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं...?🤔*
*जरा इन पर विचार करें...🧐👇*
० यदि *मातृनवमी* थी,
तो Mother’s day क्यों लाया गया?
० यदि *कौमुदी महोत्सव* था,
तो Valentine day क्यों लाया गया?
० यदि *गुरुपूर्णिमा* थी,
तो Teacher’s day क्यों लाया गया?
० यदि *धन्वन्तरि जयन्ती* थी,
तो Doctor’s day क्यों लाया गया?
० यदि *विश्वकर्मा जयंती* थी,
तो Technology day क्यों लाया गया?
० यदि *सन्तान सप्तमी* थी,
तो Children’s day क्यों लाया गया?
० यदि *नवरात्रि* और *कन्या भोज* था,
तो Daughter’s day क्यों लाया गया?
० *रक्षाबंधन* है तो Sister’s day क्यों ?
० *भाईदूज* है तो Brother’s day क्यों ?
० *आंवला नवमी, तुलसी विवाह* मनाने वाले हिंदुओं को Environment day की क्या आवश्यकता ?
० केवल इतना ही नहीं, *नारद जयन्ती* ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है...
० *पितृपक्ष* ७ पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है...
० *नवरात्रि* को स्त्री के नवरूपों के दिवस के रूप में स्मरण कीजिये...
*सनातन पर्वों को अवश्य मनाईये...*
हमारी सनातन संस्कृति में मनाए जाने वाले विभिन्न पर्व और त्योहार मिशनरीयों के धर्मांतरण की राह में बाधक हैं। बस, इसीलिए हमारी धार्मिक परंपराओं से मिलते जुलते उत्सव कार्यक्रम मिशनरीयों द्वारा लाए जा रहे हैं।
ताकि आपको सनातन सभ्यता से तोड़कर धर्मांतरण की ओर प्रेरित किया जा सके...
अब पृथ्वी के सनातन भाव को स्वीकार करना ही होगा। यदि हम समय रहते नहीं चेते तो वे ही हमें वेद, शास्त्र, संस्कृत भी पढ़ाने आ जाएंगे!
इसका एक ही उपाय है कि, अपनी जड़ों की ओर लौटिए। अपने सनातन मूल की ओर लौटिए। व्रत, पर्व, त्यौहारों को मनाइए। अपनी संस्कृति और सभ्यता को जीवंत कीजिये। जीवन में भारतीय पंचांग अपनाना चाहिए, जिससे भारत अपने पर्वों, त्यौहारों से लेकर मौसम की भी
अनेक जानकारियां सहज रूप से जान व समझ लेता है।
शुक्रवार, 17 जून 2022
अग्निपथ का विरोध क्यो?
अग्निपथ-विरोधियों को विरोध का बहाना चाहिये
देश मे सरकार कितना भी अच्छा कार्य करले लेकिन विरोधियों को विरोध करना ही जैसे उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। अग्निपथ सेवा को ध्यान से समझा नहीं बस आ गए सड़को पर,मचा दिया हंगामा, फूँक दी ट्रेनें। अग्निपथ का विरोध करने वाले बेरोजगार नहीं हो सकते। अग्निपथ का विरोध राजनीति से प्रेरित है।
अग्निपथ क्या है? अठारह साल का युवक इस योजना में गया, 4 साल सेना में देश की सेवा की, उसके बाद इनमें से 25% को स्थायी रूप में नियुक्ति मिलेगी, बाकी को अतिवीर कौशल प्रमाणपत्र के आधार पर प्राइवेट कम्पनियां उनको अपने यहां जॉब में प्राथमिकता देंगी। सेना की कर्मठता और अनुशासन कब कारण अनेक पोस्ट पर उनको जॉब मिलने की अपार सम्भावना होगी। बारहवीं की पढ़ाई के बाद वैसे भी छात्रों को चार-पांच साल का कोई कोर्स करना ही पड़ता है उसके बाद भी जॉब की संभावनाएं बहुत कम होती हैं उस अपेक्षा से अग्निपथ सेवा बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
22 वर्ष की आयु में तो वैसे भी पढ़लिखकर नॉकरी की तलाश की जाती ही है। ऐसे में भी अग्निपथ सेवा में कोई खामी नहीं है। अग्निपथ के बाद नवयुवकों के लिये जॉब के अनेको विकल्प होंगे। व्यापार करने वालो के लिए सरकार कम ब्याज पर बैंक लोन उपलब्ध कराएगी। अग्निपथ का विरोध करने वाले टुकड़े गैंग जैसे वे ही लोग हैं जिनका एकमात्र कार्य हर समय सरकार की आलोचना करना ही है।
सुनील जैन राना
सहारनपुर
गुरुवार, 16 जून 2022
आज की राजनीति
ये कहानी आपको झकझोर देगी 2 मिनट में एक अच्छी सीख अवश्य पढ़ें....
एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!
हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??
यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !
भटकते-भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !
रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था।
वह जोर से चिल्लाने लगा।
हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते।
ये उल्लू चिल्ला रहा है।
हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ??
ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही।
पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था।
सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो।
हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद!
यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा
पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो।
हंस चौंका- उसने कहा, आपकी पत्नी ??
अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है,मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है!
उल्लू ने कहा- खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है।
दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग एकत्र हो गये।
कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी।
पंचलोग भी आ गये!
बोले- भाई किस बात का विवाद है ??
लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है!
लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे।
हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है।
इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना चाहिए!
फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों की जाँच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!
यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया।
उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली!
रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई - ऐ मित्र हंस, रुको!
हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ??
पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ?
उल्लू ने कहा- नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी!
लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है!
मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है।
यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ पर ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं!
शायद इतने साल की आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने उम्मीदवार की योग्यता व गुण आदि न देखते हुए, हमेशा , ये हमारी बिरादरी का है, ये हमारी पार्टी का है, ये हमारे एरिया का है, के आधार पर हमेशा अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है, देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!
"कहानी" अच्छी लगे तो आगे भी बढ़ा दें......तो.....मेहरबानी.....
आपकी । यही कहानी है हमारे पूरे भारत की।
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