शनिवार, 30 अप्रैल 2022

लू लगने से मर्त्यु क्यो?

हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ? 👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है । 👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है । 👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है ) 👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है । 👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है । 👉 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं । 👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है । 👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है । 👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए । Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा । कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें । तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा । यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा । (ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है) । कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें । किसी भी अवस्था में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें । किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें । जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें । किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है । ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम करें । फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें । हीट वेव कोई मजाक नही है । एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है । शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है । अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें । इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित कर अपना और अपने जानकार लोगों का भला करें।

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022

आई ए एस इंटरवयू में अटपटे सवाल

आईएएस इंटरव्यू में अटपटे प्रश्न आईएएस बनने के लिये यूपीएससी की सिविल सेवा पास करनी पड़ती है। लिखित परीक्षा पास करने के बाद प्रत्यासी को इंटरव्यू देना होता है। इंटरव्यू कठिन होता है। इसमें कुछ भी, कैसे भी सवाल पूछे जा सकते हैं। देश- विदेश या किसी भी तरह के सवाल जो कई बार बहुत अटपटे होते है पूछे जाते हैं। ऐसे ही कुछ प्रश्न जो अटपटे से हैं पूछे जा रहे हैं। प्रश्न-आपके आगे गोल-गोल क्या लटक रहा है? उत्तर-लड़की ने कहा की गोल लॉकेट लटक रहा है। प्रश्न- तुमने सलवार के नीचे क्या पहना है? उत्तर- लड़की ने उत्तर दिया सर सलवार के नीचे सैंडल पहनी हुई है। प्रश्न- लड़की सारे कपड़े कब उतारती है? उत्तर- तार पर से सूख जाने के बाद। प्रश्न- औरत के पास ऐसी क्या चीज होती है जो वह अपने पति को नहीं दे सकती? उत्तर- लड़की ने जबाब दिया अपना सरनेम। प्रश्न- ऐसी कौन सी चीज है जो औरत दिखाती है मर्द छुपाता है? उत्तर- लड़की ने जबाब दिया पर्स। प्रश्न- ऐसी कौन सी चीज है जो लड़कियों की बड़ी और लड़कों की छोटी होती है? उत्तर- लड़की ने जबाब दिया सिर के बाल। प्रश्न- लड़की अपनी एक टांग कब उठाती है? उत्तर- लड़की ने जबाब दिया जीना चढ़ते समय एक बार मे एक टांग उठाई जाती है। प्रश्न- लड़के द्वारा क्या नद डालने पर लड़कियों भरपूर मज़ा लेती हैं? उत्तर- लड़की ने जबाब दिया मोबाईल में बड़ा टॉकटाइम। यह उन कुछ प्रश्नों की बानगी है जो खासकर लड़कियों से इंटरव्यू में पूछे जा रहे हैं। ऐसे अटपटे प्रश्नों को सुनकर एकबार को तो लड़की सहम ही जाती होगी। बहुत सोच समझ कर जबाब देना होता है ऐसे प्रश्नों का। गूगल और यूट्यूब पर ऐसे इंटरव्यू बहुतायत में देखे जा सकते हैं। लेकिन इसका दुरुपयोग होना शुरू हो गया है। यूट्यूब पर कुछ लोगो द्वारा ऐसे प्रश्नो को अश्लील तरीके से पेश करना शुरू कर दिया है जो बहुत ही गलत है। वीडियो में प्रश्नकर्ता खुद ही अश्लील प्रश्न कर उसका अश्लील ही जबाब देता है। बीच-बीच मे वीडियो को लाइक और शेयर करने को भी कहता रहता है। यह सब ठीक नही है। इस पर कार्यवाही होनी चाहिये। सुनील जैन राना

हल्की फुल्की बातें

कल सैलून वाले की दुकान पर एक स्लोगन पढा़... "हम दिल का बोझ तो नहीं पर सिर का बोझ जरूर हल्का कर सकते हैं।"🤣 लाइट की दुकान वाले ने बोर्ड के नीचे लिखवाया... "आपके दिमाग की बत्ती भले ही जले या ना जले,परंतु हमारा बल्ब ज़रूर जलेगा।"🤣 चाय के होटल वाले ने काउंटर पर लिखवाया... "मैं भले ही साधारण हूँ, पर चाय स्पेशल बनाता हूँ।"🤣 एक रेस्टोरेंट ने सबसे अलग स्लोगन लिखवाया... "यहाँ घऱ जैसा खाना नहीं मिलता, आप निश्चिंत होकर अंदर पधारें।"😀 इलेक्ट्रॉनिक दुकान पर स्लोगन पढ़ा तो मैं भाव विभोर हो गया... "अगर आपका कोई फैन नहीं है तो यहाँ से ले जाइए।"😂 गोलगप्पे के ठेले पर एक स्लोगन लिखा था... "गोलगप्पे खाने के लिए दिल बड़ा हो ना हो, मुँह बड़ा रखें, पूरा खोलें।"🤣 फल भंडार वाले ने तो स्लोगन लिखने की हद ही कर दी... "आप तो बस कर्म करिए, फल हम दे देंगे।"🤣 घड़ी वाले ने एक ग़ज़ब स्लोगन लिखा? "भागते हुए समय को बस में रखें, चाहे दीवार पर टांगें, चाहे हाथ पर बांधें।"🤣 ज्योतिषी ने बोर्ड पर स्लोगन लिखवाया..."आइए, मात्र 100 रुपए में, अपनी ज़िंदगी के आने वाले एपिसोड देखिए।"🤣 बालों के तेल की एक कंपनी ने हर प्रोडक्ट पर एक स्लोगन लिखा... "भगवान ही नहीं, हम भी बाल बाल बचाते हैं।"😂😀🤣 आप, जैसे अभी हल्का सा मुस्करा रहे हैं, या हँस रहें हैं, ऐसे ही खुश रहें।😁 हँसते रहे, हँसाते रहें। स्वस्थ रहें, मस्त रहें।

गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

बुजुर्गों को चाहिये अपनापन

🍂🍂🍂🪞🍂🍂🍂 *हमारी धरोहर* 🍂🍂🍂🪞🍂🍂🍂 *बुजुर्ग पिताजी जिद कर रहे थे कि, उनकी चारपाई बाहर बरामदे में डाल दी जाये।* *बेटा परेशान था।* *बहू बड़बड़ा रही थी..... कोई बुजुर्गों को अलग कमरा नही देता। हमने दूसरी मंजिल पर कमरा दिया.... AC TV FRIDGE सब सुविधाएं हैं, नौकरानी भी दे रखी है। पता नहीं, सत्तर की उम्र में सठिया गए हैं..?* *पिता कमजोर और बीमार हैं....* *जिद कर रहे हैं, तो उनकी चारपाई गैलरी में डलवा ही देता हूँ। निकित ने सोचा।... पिता की इच्छा की पू्री करना उसका स्वभाव था।* *अब पिता की एक चारपाई बरामदे में भी आ गई थी।* *हर समय चारपाई पर पडे रहने वाले पिता।* *अब टहलते टहलते गेट तक पहुंच जाते ।* *कुछ देर लान में टहलते लान में नाती - पोतों से खेलते, बातें करते,* *हंसते , बोलते और मुस्कुराते ।* *कभी-कभी बेटे से मनपसंद खाने की चीजें भी लाने की फरमाईश भी करते ।* *खुद खाते , बहू - बेटे और बच्चों को भी खिलाते ....* *धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य अच्छा होने लगा था।* *दादा ! मेरी बाल फेंको। गेट में प्रवेश करते हुए निकित ने अपने पाँच वर्षीय बेटे की आवाज सुनी,* *तो बेटा अपने बेटे को डांटने लगा...:* *अंशुल बाबा बुजुर्ग हैं, उन्हें ऐसे कामों के लिए मत बोला करो।* *पापा ! दादा रोज हमारी बॉल उठाकर फेंकते हैं....अंशुल भोलेपन से बोला।* *क्या... "निकित ने आश्चर्य से पिता की तरफ देखा ?* *पिता ! हां बेटा तुमने ऊपर वाले कमरे में सुविधाएं तो बहुत दी थीं।* *लेकिन अपनों का साथ नहीं था। तुम लोगों से बातें नहीं हो पाती थी।* *जब से गैलरी मे चारपाई पड़ी है, निकलते बैठते तुम लोगों से बातें हो जाती है।* *शाम को अंशुल -पाशी का साथ मिल जाता है।* *पिता कहे जा रहे थे और निकित सोच रहा था.....* *बुजुर्गों को शायद भौतिक सुख सुविधाऔं* *से ज्यादा अपनों के साथ की जरूरत होती है....।* *बुज़ुर्गों का सम्मान करें ।* *यह हमारी धरोहर है ...!* *यह वो पेड़ हैं, जो थोड़े कड़वे है, लेकिन इनके फल बहुत मीठे है, और इनकी छांव का कोई मुक़ाबला नहीं !* _*लेख को पढ़ने के उपरांत अन्य समूहों में साझा अवश्य करें...!!* *और अपने बुजुर्गों का खयाल हर हाल में जरूर रखे। हमारे बुजुर्गों को सुख सुविधा से ज्यादा अपनापन चाहिये। धन्यवाद।

आज का मुस्लिम ऐसा नही है

BBC (बीबीसी) ने पुरी दुनिया में 30 लाख हिंदुओं पर एक सर्वे कराया था:- *"हिंदुओं का सबसे प्रिय भजन कौन सा है?"* इस सर्वे से जो परिणाम निकल कर सामने आया: 30 लाख हिंदुओं ने जिन 10 भजनों का चयन किया उनमें से --- 6 'शकील बदायुनी' के लिखे हुए हैं ! और 4 'साहिर लुधियानवी' के लिखे हुए हैं ! उन 10 के 10 भजनों में संगीत हैं 'नौशाद साहब' का ! उन सभी 10 भजनों को आवाज़ दिया हैं 'रफी साहब' ने ! ये 10 भजन 'महबूब अली खान' की फिल्मों में हैं. और इन 10 भजनों पर अभिनय किया हैं 'यूसुफ खान' उर्फ दिलीप कुमार ने ! SOME OF THE TOP BHAJANS LISTED FOR THE SURVEY - ज़रा गौर फरमाइये - ************ *मन तडपत हरि-दर्शन को आज* गीतकार : शक़ील बदायुंनी गायक : मोहम्मद रफी संगीतकार : नौशाद फिल्म : बैजू बावरा (1952). *इंसाफ का मंदिर है, ये भगवान का घर है* गायक -मोहम्मद रफी संगीत : नौशाद गीतकार : शकील बदायुंनी फिल्म -अमर (1954). *हे रोम रोम में बसने वाले राम* गीतकार : साहिर लुधियानवी गायक : आशा भोसले, रफी फिल्म : नीलकमल (1968). *जय रघुनन्दन जय सियाराम* गायक: मोहम्मद रफ़ी गीतकार: शक़ील बदायुंनी फिल्म -घराना (1961). *आना है तो आ राह में* गीतकार - साहिर लुधियानवी संगीत - ओ पी नय्यर, खैयाम साहब गायक - मोहम्मद रफ़ी फिल्म - नया दौर (1957). *जान सके तो जान, तेरे मन में छुपे भगवान* गीतकार - जांनिसार अख्तर संगीत - ओ. पी. नय्यर गायक - मोहम्मद रफी फिल्म - उस्ताद (1957). यह जानकारी वर्तमान समय में बहुत जरुरी थी क्योंकि देश में साम्प्रदायिकता कि आग लगाकर भाईचारे को रौंदती धार्मिक उन्माद की हवा जो लोग आज चला रहे हैं उन्हें यह जानना चाहिए कि धर्मनिरपेक्षता की भावना भारतीयों के नस-नस में रची बसी है... लेकिन क्या विडम्बना है आज के भारत का मुस्लिम हरि नाम से परहेज करता है।

दया का भाव

एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद हजारों लाखों मछलियाँ किनारे पर रेत पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं ! इस भयानक स्थिति को देखकर पास में रहने वाले एक 6 वर्ष के बच्चे से रहा नहीं गया, और वह एक एक मछली उठा कर समुद्र में वापस फेकनें लगा ! यह देख कर उसकी माँ बोली, बेटा लाखों की संख्या में है , तू कितनों की जान बचाएगा ,यह सुनकर बच्चे ने अपनी गति और बढ़ा दी, माँ फिर बोली बेटा रहनें दे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! बच्चा जोर जोर से रोने लगा और एक मछली को समुद्र में फेकतें हुए जोर से बोला माँ *"इसको तो फ़र्क पड़ता है"* दूसरी मछली को उठाता और फिर बोलता माँ *"इसको तो फ़र्क पड़ता हैं"* ! माँ ने बच्चे को सीने से लगा लिया ! हो सके तो लोगों को हमेशा *होंसला और उम्मीद* देनें की कोशिश करो, न जानें कब आपकी वजह से किसी की जिन्दगी बदल जाए! क्योंकि आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता पर *"उसको तो फ़र्क पड़ता है"*..... इसलिए कोशिश कीजिए हर उस *व्यक्ति से बात करने की जो आपके संपर्क मै आये हो सकता है उसको एहसास भी ना हो की आप उसकी कितनी मदद कर पा रहे हो लेकिन जब उसको एहसास होगा उसकी लाइफ मैं बदलाव आएगा* *

बुधवार, 27 अप्रैल 2022

पर्यावरण बचाओ

क्या आपको पता है कि अगले 40-50 वर्षों बाद हमारी सारी खेती योग्य भूमि बंजर हो जाएंगी? रिसर्च कहता है कि खेती करने के लिए भूमि में मिनिमम 3% ऑर्गेनिक कंटेन्ट होने चाहिए...दुनिया के अलग अलग हिस्सों में यह 1 से लेकर 3% तक है...वहीं भारत में मात्र 0.5% बचा है। प्रति सेकंड विश्व में 1 एकड़ ज़मीन बंजर हो रही है..तो आप इससे गणना कर लीजिए कि हम कितनी तीव्र गति से विनाश की ओर बढ़ रहे हैं... पर्यावरण को हम मनुष्य जितनी हानि पहुंचा सकते थे पहुँचा चुके हैं.. अब प्रकृति हमें नुकसान पहुंचा रही है...आज से सौ वर्ष पहले किसी भी फल में जितने अधिकतम न्यूट्रिशन्स होते थे उसका 10% भी उनमें आज शेष नहीं बचा...आप संतरे को ले लीजिए उसमें पहले यदि 100% न्यूट्रिशन होते थे तो आज मात्र 10% बचा है..मतलब आप आज 100 संतरे खा लीजिये और आज से 100 वर्ष पहले का 1 संतरा बराबर था... दुनिया में जहाँ 52% खेती योग्य भूमि बंजर हो चुकी है तो भारत में यह आंकड़ा 60% है...ऊपर से जंगलों की अंधाधुंध कटाई, नदियों का क्षरण...भूमि से जितने ऑर्गेनिक कंटेंट समाप्त होते जाएंगे भूमि का जलस्तर उतना गिरता जाएगा...जब भूमि में नमी ही नहीं बचेगी तो हरियाली कहाँ से आएगी? स्थिति इतनी भयावह है...मुझे भी इसकी भनक नहीं थी...जग्गी वासुदेव की #SaveSoil मुहीम के बारे में आज डिटेल में पढ़ा तो मेरी आँखें फटी रह गईं... हम आज भी न चेते तो हमारी आने वाली पीढ़ी भूख से मरेगी...इसे टालने का एक मात्र उपाय है...संसाधनों का सीमित उपयोग, पेड़ लगाना, केमिकल और फ़र्टिलाइज़र को तिलांजलि देना...गाय, भैंस आदि पालिये, उनके गोबर, मूत्र और प्राकृतिक खाद का प्रयोग कीजिये...केंचुआ पालन कीजिये तो शायद स्थिति नियंत्रण में आये...लेकिन एक या दो लोगों के प्रयास से नहीं होगा...प्रत्येक व्यक्ति को इसका ध्यान रखना होगा, लोगों को जगाना होगा...अपने लिए न सही अपने बच्चों से तो सभी को प्यार होगा न...तो उन्हें शुद्ध भोजन और जल मिलता रहे ये हम नहीं सोचेंगे तो भला कौन सोचेगा...! साभार