शनिवार, 30 सितंबर 2017



बार बार क्यों मारते हो रावण को ?
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प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष फिर एक बार

रावण के पुतले का दहन कर दिया गया।

इस कार्य में जुड़े सभी लोगो ने एक दूसरे

को बधाई दी और अगले वर्ष फिर से कैसे

रावण को नए तरीके से बनायेंगे और कैसे

नये तरीके से उसका दहन करेंगे इस सोच

के साथ विदा ली।

हम दशकों से यही देखते आ रहे हैं। लेकिन

रावण है की मरता ही नहीं। एक साल पूरा

होने से पहले ही फिर से जीवित हो उठता है।

इस साल तो एक नई बात ही सुनने -देखने में

आ रही थी की इस बार भयंकर बरसात की

वज़ह से रावण जल कर नहीं बल्कि डूबकर

मरेगा। लेकिन होनी बलवान है। रावण मरेगा

तो जलकर ही इस बात की पुष्टि आज हो गई।

समझ में नहीं आता की हम लोग कब तक ऐसे

ही रावण के पुतले बनाते रहेंगे और जलाते रहेंगे।


हम कभी भी यह क्यों नहीं सोचते हैं की हम

रावण को जलाते क्यों हैं ?चलो आज सोच भी

लिया तो पता चला की हम रावण को उसकी

बुराइयों को खत्म करने की प्रेरणा के कारण

जलाते हैं। लेकिन यह नहीं सोचते की दशकों

से रावण जलाकर भी रावण रूपी बुराइयाँ क्यों

नहीं खत्म हो रही। बल्कि यों कहिये की रावण

ने तो सिर्फ सीताजी के अपहरण का अपराध

किया था लेकिन आज तो कन्या रूपी न जाने

कितनी सीताजी का अपहरण ही नहीं बल्कि

बलात्कार तक हो रहा है।

जब तक हम अपने अंदर के रावण की बुराइयों

को नहीं खत्म करेंगे तब तक समाज में ऐसे ही

अपराधों का बोलबाला रहेगा। कभी तो हमें इस

बदलाव की ओर बढ़ना ही पड़ेगा। तब ही रावण

रूपी बुराइयाँ खत्म हो सकेंगी। रावण के पुतले

को नहीं बल्कि हम सबको अपने अंदर के रावण

को जलाना चाहिए। वही सही रूप में विजयदशमी

कहलायेगी। 


पिता -पुत्र विवाद या संवाद
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उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी के मुखिया

मुलायमसिंह यादव और उन्हीं के पुत्र प्रदेश

के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मतभेद,

विवाद या अनोखे संवाद से सभी परिचित हैं।

समय बलवान होता है। एक समय था की सपा

के संस्थापक मुलायमसिंह की तूती बोलती थी।

लेकिन सत्ता की धमक में उन्हीं के पुत्र द्वारा

उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।


अब कुछ ऐसा ही बीजेपी के कद्दावर नेता एवं

पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा जी के Gst पर दिए

गए बयानों के बाद उन्ही के पुत्र जयंत सिन्हा जी

के पलटवार पर दिखाई दे रहा है। जहाँ एक ओर

बीजेपी के यशवंत सिन्हा जी बीजेपी सरकार के

आर्थिक नीतियों की धज्जियाँ उडानेमे लगे हैं वहीं

उनके पुत्र मंत्री अपने पिता का विरोध करते हुए

बीजेपी सरकार की नीतियों की सराहना में लगे

हैं।

इसीलिए कहते हैं की राजनीति में कोई किसी का

सगा या पराया नहीं होता। जैसा समय वैसी भाषा।


गुरुवार, 28 सितंबर 2017


देश में आर्थिक मोर्चे पर मन्दी
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देश भर में चर्चा चल रही है की मोदी सरकार

आर्थिक मोर्चे पर विफल रही है। पहले नोटबंदी

और अब Gst के कारण उद्योग धंधे मन्दी की

गिरफ़्त में हैं। रोजगार के मौके कम हो रहे हैं।

जरूरी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं।

उपरोक्त सभी बातें लगभग ठीक ही हैं। लेकिन

सोचने की बात यह है की इन सबके लिए क्या

मोदीजी ही जिम्मेवार हैं ,हम सब नहीं ?

मोदीजी ने नोटबंदी इस लिए करी की जिससे

कालाधन पकड़ा जाए। लेकिन क्या यह सच

नहीं है की लगभग हम सभी का पुराने नोटों

में निहित कालाधन बदला नहीं गया ? क्या

बैंक वालो के द्वारा पुराने नोटों से नए नोट बदले

नहीं गए ?क्या जो गरीब लोग नोट बदलवाने के

लिए लम्बी लम्बी लाइनों में लगे थे वह नोट उन्ही

के थे या दिहाड़ी पर लगे थे ?

अब ऐसे ही Gst की बात भी ऐसी ही है। कांग्रेस

Gst ला रही थी तब बीजेपी ने अड़ंगा लगाया। अब

यही Gst बीजेपी के गले की फाँस बन गई लेकिन

क्या यह सत्य नहीं की यदि कांग्रेस Gst लाती तो

पहले साल उसे भी ऐसी ही परेशानी उठानी ही

पड़ती ?

सरकार तेल के दाम शायद इसलिए कम नहीं कर

रही की पिछली सरकारों के घाटे की भरपाई अब

दाम कम न करके कर रही हो।गैस पर से सब्सिडी

का बोझ कम करने और गरीब तक गैस पहुँचे  इस

वजह से अमीर उपभोक्ता से गैस की सब्सिडी छोड़ने

की अपील की गई।

रोजगार के मौके कम हो रहे हैं। यह बात सही प्रतीत

हो रही है। लगता है सरकार इस पर जल्दी ही सचेत

होगी। सरकारी स्तर पर भी नौकरियों के बहुत मौके

हैं। लगता है जल्दी ही सरकार भर्तियां शुरू करेगी।


इन सब बातों के आलावा यदि हम सरकार को दूसरे

नजरिये से देखें तो पिछले तीन सालों के कामकाज

में मोदी सरकार पर कोई भ्र्ष्टाचार का आरोप नहीं

है। विदेशों में भारत की छवि निखर कर आयी है।

मोदीजी का डंका पुरे विश्व में बज रहा है। पाकिस्तान

और चीन को मुँह तोड़ जबाब दिया जा रहा है। जबकि

कांग्रेस की सरकार में चीन से दबकर रहा जाता था।

मोदीजी का सबसे बड़ा मंत्र *सबका साथ सबका विकास *

के अनुसार कार्य हो रहा है। हालांकि विरोधियों को यही

बात पच नहीं रही है और विरोधी मौकों की तलाश करते

रहते हैं की कब कोई भूल हो और हल्ला मचाये।

वर्तमान की कुछ परेशानियों को कुछ समय सहन करे

तो यह निश्चित ही लगता है की भारत आने वाले समय

में एक महा शक्ति बन ही जाएगा।

                          चिन्तक   -    -   -     सुनील जैन राना 


बुधवार, 27 सितंबर 2017

बिजली चोरी 

बिजली व्यवस्था में सुधार
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मोदी सरकार में देश भर की बिजली व्यवस्था काफी सुधरी है।

बड़े शहर -छोटे शहर -कस्बे -गाँव सभी जगह बिजली की आपूर्ति

पहले से बहुत ज्यादा बढ़ी है।

पहले छोटे शहर -कस्बे -गाँव में बिजली कटौती बहुत ज्यादा होती

थी ,लेकिन अब सभी जगह पहले से बहुत ज्यादा बिजली मिल रही

है। सरकार बिजली चोरी रोकने के बहुत प्रयास कर रही है। मोदीजी

ने कहा भी है की यदि बिजली चोरी बंद हो जाए तो सभी को २४ घण्टे

बिजली मिल जाए।

बिजली बचाने का एक मुख्य तरीका यह भी हो सकता है की देश भर

में सड़को पर लगे लाखों -करोड़ो हेलोज़न यदि LED लाईट में बदल

दिए जाए तो बेहताशा बिजली बच सकती है। हालांकि सरकार इस

दिशा में कार्य कर भी रही है। दूसरी बात की सड़को पर लगे हेलोज़न

अक्सर अँधेरे से काफी पहले और प्रातः उजाला होने के काफी बाद

तक जले रहते हैं। यदि प्रतिदिन दो घंटे भी लाखों हेलोज़न ज्यादा

जलते हैं तो हिसाब लगाकर देखो की रोजाना कितनी बिजली व्यर्थ

जलती है। यह सिर्फ सरकार का ही दायित्व नहीं है बल्कि हम सभी

को अपने इलाके में लगे हेलोज़न को समय पर जलाने और समय पर

बंद करने चाहियें।