बुधवार, 20 सितंबर 2017


अशर्फियाँ लुट रही -कोयलों पर मोहर लग रही
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देश में एक तरफ विकास का वातावरण बना हुआ है।

मोदीजी की नीतियाँ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी

सराही जा रही हैं। लेकिन दूसरी तरफ देश में विकास

की गति तेज़ होने की बजाय कम होती दिखाई दे रही

है। आँकड़े बता रहे हैं की उद्योगों की ग्रोथ रफ्तार में

कमी आयी है। पहले नोटबंदी और अब Gst के कारण

कामधंधे मंदे हो रहे हैं।

अब बात करें जनता की तो जनता को महंगाई से राहत

तो जरूर है लेकिन गैस और तेल जैसी जरूरत की चीजों

ने राहत में सेंध लगा दी है। सरकारी तौर पर देंखे तो ऐसा

लगता है जैसे सरकार अशर्फियाँ लुटाने में परहेज़ नहीं

कर रही और कोयलों पर मोहर लगाने से भी नहीं चूक

रही।

बड़े घरानों पर लाखों करोड़ का एनपीए है यानि बैंको का

धन /लोन है। उनसे सरकार बसूल नहीं रही या बसूल नहीं

पा रही। जबकि जनता की राहत के कुछ हज़ार करोड़

पर पाबंदी लगा रही। आम जनता के घर घर में काम आने

वाली गैस पर से कुछ हज़ार करोड़ बचाने को जनता को

परेशानी में डाल रही।

ऐसी अनेक बातें हैं जो लिखी जा सकती हैं। सरकार की

एयर इंडिया जो सदैव घाटे में ही रहती है शायद भ्र्ष्टाचार

के कारण उसे उबारने के लिए हज़ारो करोड़ दे देगी लेकिन

भ्र्ष्टाचार पर लगाम फिरभी नहीं लगी ?जबकि अन्य निजी

विमानन कम्पनियाँ हमेशा लाभ में ही रहती हैं। ऐसे ही

सरकारी बैंक जो कॉर्पोरेट्स से मिलीभगत कर बसूला ना

जाने वाला लोन बाँट देते हैं। सरकार इनपर कार्यवाही नहीं

करती जबकि एक आम आदमी का छोटा लोन ना चूका पाने

पर बैंक उसके साथ ज्यादती कर बैठता है।

कहने का तातपर्य यह है की देश में ऐसा माहौल हो रहा है

जिससे लगता है की अशर्फियाँ लुट रही और कोयलों पर

मोहर लग रही।


रविवार, 17 सितंबर 2017



मोदीजी का जन्मदिन
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आज मोदीजी का जन्मदिवस है। हम मोदीजी को

हार्दिक शुभ कामनायें प्रेषित करते हैं।

ह्रदय के उदगार यह हैं की मोदीजी स्वस्थ रहें ,

ऊर्जावान रहें ,१५ साल भारत के प्रधानमंत्री रहें।



दिल से चाहते हैं की माननीय विवेकानंद जी की यह

भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हो। जय जिनेन्द्र। 

शनिवार, 16 सितंबर 2017



जब हर वस्तु पर टैक्स तो फिर क्यों इन्कमटैक्स ?
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सरकार जीवन में काम आने वाली हर वस्तु पर टैक्स बसूल रही है।

आम आदमी गरीब हो या अमीर हो सब समान रूप से प्रत्येक खरीद

पर टैक्स देता है। फिर क्यों सरकार इन्कमटैक्स बसूलती है।

Gst आने से पहले यह कहा जा रहा था की बस अब सारे टैक्स खत्म

Gst लागू। लेकिन जनता और व्यापारी अब इसे धोखा ही मान रहे हैं।

कुछ वस्तुओं पर Gst नहीं लगाया गया , क्योंकि Gst लगाने से उनकी

कीमत बहुत कम हो जाती। ऐसी मुख्य रूप से दो वस्तुऍ हैं। पहली

वस्तु शराब एवं दूसरी वस्तू तेल यानि की पेट्रोल-डीजल है।

यह दोगली नीति अब जनता में गुस्से के रूप में उभर रही है। आम

आदमी या व्यापारी जो पहले नोटबंदी से परेशान था और अब Gst

से परेशान है वह सरकार की इस दोगली नीति से अपने आप को

ठगा सा महसूस कर रहा है।

दुनिया भर में तेल के दाम कम हो रहे हैं लेकिन ऐसा क्या हो रहा है

भारत में की तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। सरकार ने जब से तेल

कम्पनियों को तेल के दाम निर्धारित करने का अधिकार दिया है तब

से लगातार तेल के दाम बढ़ाये जा रहे हैं ,ऐसा क्यों हो रहा है इसका

जबाब देने वाला कोई नहीं है। अब यह मनमानी जनता में उबाल ले

रही है। सिर्फ सरकार विरोधी नहीं बल्कि मोदी भक्त भी इस मनमानी

के खिलाफ सड़को पर उतरने की सोच रहे हैं। अच्छा यही है की सरकार

समय रहते इस मनमानी पर रोक लगाए और तेल को भी Gst के दायरे

में लेकर जनता को राहत प्रदान करे।

शुक्रवार, 15 सितंबर 2017



पोलेथिन पर बैन
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देश के किसी ना किसी राज्य से पोलेथिन बैन

की खबरे आती रहती हैं। अभी हाल में महाराष्ट्र

में पोलेथिन पर पाबंदी लगाने के संकेत मिले हैं।


राज्य सरकारें बिना सोचे समझे अचानक ही ऐसे

निर्णय ले लेती हैं जिनपर पूर्ण रूप से अमल करना

मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन होता है।

आज के परिवेश में पोलेथिन हमारी जिंदगी में ऐसे

रच बस गई है जिससे लगता है की अब इसके बिना

गुजारा नहीं।

घर से थैला लेकर चलने की संस्कृति तो खत्म ही हो

गई है। अब तो दूध -फल -सब्जी से लेकर अन्य सभी

वस्तुएँ पोलेथिन में ही आती हैं। खाने पीने के उत्पाद

नमकीन -मसालें -बिस्कुट -दाल -चावल -घी आदि

सभी कुछ पोलेथिन में ही पैक होकर मिलता है।

सरकार को किसी भी चीज पर पाबंदी लगाने से पहले

उसके विकल्पों के बारे में जनता एवं व्यापारियों को

बताना चाहिए। पोलेथिन का विकल्प बताये सरकार।

तभी इसपर लगाई पाबंदी कामयाब होगी अन्यथा

अन्य राज्यों की तरह शुरू में हल्ला मचेगा ,कुछ की

धर  पकड़ होगी ,आंदोलन होंगे फिर धीरे धीरे सभी

पोलेथिन पर पाबंदी की बात भूल जायेंगे।