सोमवार, 16 दिसंबर 2019
शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019
मंदी के बावजूद परोपकार
December 13, 2019 • सुनील जैन राना • परोपकार
देश की आर्थिक व्यवस्था भले ही पूर्ण ऊंचाई पर न हो लेकिन आज भी अनेको कम्पनियाँ अच्छा मुनाफा भी कमा रही हैं और मुनाफ़े का कुछ हिस्सा परोपकार में भी खर्च कर रही हैं। देश में सूचीबद्ध कंपनियों ने सी एस आर यानि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व में परोपकार और जनहित कार्यो में अपने मुनाफ़े में से लगभग दो प्रतिशत धन खर्च कर रही हैं।
सरकार द्वारा २०१५ के वित्त वर्ष से सूचीबद्ध कंपनियों को नियत धनराशि देशहित ,परोपकार और कल्याणकारी कार्यो में खर्च करना अनिवार्य कर दिया था। तब से अब तक प्रत्येक वित्त वर्ष में इस धनराशि में लगातार इजाफा हो रहा है। वित्त वर्ष २०१९ में इस मद में कंपनियों द्वारा लगभग ११८६७ करोड़ रूपये खर्च किये गए जो अभी तक एक वित्त वर्ष में खर्च किये जाने की सर्वाधिक धनराशि है।
सी एस आर के मद से किया जाने वाला खर्च शिक्षा ,स्वास्थ ,महिलाओं ,बुजुर्गो, दिव्यांगों के अलावा गरीबी ,भुखमरी ,कुपोषण आदि से निजात पाने जैसे कार्यो में किया जाता है। इसके अतिरिक्त स्वच्छ भारत ,स्वच्छ जल जैसी योजनाओ में भी भागेदारी की जा सकती है।
बहुत अच्छा और प्रेरक कार्य है यह। हमारे देश की संस्कृति भी ऐसी ही रही है। धनवानों ने सदैव निर्धनों की सहायता की है। पुराने समय से ही धर्मशालाएं बनवाना ,चैरिटेबल अस्पताल -भोजनालय आदि खुलवाना ,गोशालाएं बनवाना आदि अनेक परोपकार के कार्य किये जाते रहे हैं। सरकार सबके लिए सब कुछ नहीं कर सकती। हम सभी को गरीबों -अनाथो के सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। याद रखिये मारने वाले से बचाने वाला अच्छा होता है और दानवीर सबसे सर्वश्रेष्ठ होता है। *सुनील जैन राना *
गुरुवार, 12 दिसंबर 2019
नागरिकता संशोधन बिल -विरोध क्यों? http://suniljainrana.blogspot.com/
December 12, 2019 • सुनील जैन राना • राजनीति
नागरिकता संशोधन बिल दोनों सदनों में पास हो गया है। लेकिन हमेशा की तरह हर कार्य-नीति का विरोध करना ,उसमे बाधा डालना अधिकांश विपक्ष का काम हो गया है। समझ में नहीं आता की इस बिल से किस भारतीय को परेशानी हो सकती है ,अर्थात किसी को नहीं। यह बिल किसी भी तरह भारत में रहने वाले प्रत्येक भारतीय के हितों की रक्षा करता है सिर्फ उनको छोड़कर जो भारत में घुसपैठिये की तरह आये हैं।
इस बिल के द्वारा जहां एक ओर देश को विदेशी असामाजिक तत्वों से बचाने की कोशिश है वहीं दूसरी ओर भारत के पड़ोसी तीन मुस्लिम देश जहां गैर मुस्लिम के साथ अन्याय हो रहा हो-हुआ हो,उत्पीड़न से बचने को वे भारत में शरण लेना चाहते हो तो उन्हें शरण दी जा सकेगी। हंगामा इस बात पर किया जा रहा है की इसमें मुस्लिमों को क्यों नहीं शामिल किया गया ?इसमें सोचने की बात यह है की तीन मुस्लिम इस्लामिक देश ही यदि अपने मुस्लिम समाज का हित नहीं कर सकते तो भारत से अपेक्षाएं क्यों ?
भारत देश की बढ़ती जनसंख्या की जरूरत ही सरकार पूरी नहीं कर पाती ऐसे में बाहरी लोग जिन्हे उनकी सरकार ही नहीं रख रही भारत सरकार क्यों रखे ? बंगलादेश से आये रोहिंग्या ऐसे मुसलमान जिन्हे उनका देश ही बाहर निकाल रहा और कोई भी अन्य मुस्लिम देश उन्हें अपने यहां पनाह देने को तैयार नहीं ऐसे में भारत ने क्या ठेका ले रखा है ऐसे लोगो का ?
दरअसल यह सब हंगामा वोटो की राजनीति के तहत करवाया जा रहा है। दुर्भाग्य की बात है की जो दल विरोध में लगे हैं उन्हें मुसलमानों की चिंता नहीं है बल्कि उनके वोटो की चिंता है। पाकिस्तान के इमरान खान भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं। अब कोई उनसे पूछे उन्हें क्या परेशानी है ?मुस्लिम रोहिंग्यों को उन्होंने भी अपने यहां जगह देने से मना कर दिया है। इमरान खान कभी चीन में उत्पीड़ित मुसलमानों के लिए क्यों नहीं बोलते ?कश्मीर के मुसलमानों की चिंता करते हैं ,यह सब दिखावा है।
वास्तव में नागरिक संशोधन बिल भारत देश की सुरक्षा से जुड़ा ऐसा बिल है जिसे बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था। इस बिल से किसी भी भारतीय के हितों में सेंध नहीं लग रही बल्कि सुरक्षा मिल रही है। साथ ही तीन पड़ोसी मुस्लिम देश में गैर मुस्लिमों के साथ हो रहे अत्याचार -उत्पीड़न से पीड़ित जन यदि भारत आना चाहें तो आ सकते हैं। इसमें किसी भी भारतीय को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। * सुनील जैन राना *
इस बिल के द्वारा जहां एक ओर देश को विदेशी असामाजिक तत्वों से बचाने की कोशिश है वहीं दूसरी ओर भारत के पड़ोसी तीन मुस्लिम देश जहां गैर मुस्लिम के साथ अन्याय हो रहा हो-हुआ हो,उत्पीड़न से बचने को वे भारत में शरण लेना चाहते हो तो उन्हें शरण दी जा सकेगी। हंगामा इस बात पर किया जा रहा है की इसमें मुस्लिमों को क्यों नहीं शामिल किया गया ?इसमें सोचने की बात यह है की तीन मुस्लिम इस्लामिक देश ही यदि अपने मुस्लिम समाज का हित नहीं कर सकते तो भारत से अपेक्षाएं क्यों ?
भारत देश की बढ़ती जनसंख्या की जरूरत ही सरकार पूरी नहीं कर पाती ऐसे में बाहरी लोग जिन्हे उनकी सरकार ही नहीं रख रही भारत सरकार क्यों रखे ? बंगलादेश से आये रोहिंग्या ऐसे मुसलमान जिन्हे उनका देश ही बाहर निकाल रहा और कोई भी अन्य मुस्लिम देश उन्हें अपने यहां पनाह देने को तैयार नहीं ऐसे में भारत ने क्या ठेका ले रखा है ऐसे लोगो का ?
दरअसल यह सब हंगामा वोटो की राजनीति के तहत करवाया जा रहा है। दुर्भाग्य की बात है की जो दल विरोध में लगे हैं उन्हें मुसलमानों की चिंता नहीं है बल्कि उनके वोटो की चिंता है। पाकिस्तान के इमरान खान भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं। अब कोई उनसे पूछे उन्हें क्या परेशानी है ?मुस्लिम रोहिंग्यों को उन्होंने भी अपने यहां जगह देने से मना कर दिया है। इमरान खान कभी चीन में उत्पीड़ित मुसलमानों के लिए क्यों नहीं बोलते ?कश्मीर के मुसलमानों की चिंता करते हैं ,यह सब दिखावा है।
वास्तव में नागरिक संशोधन बिल भारत देश की सुरक्षा से जुड़ा ऐसा बिल है जिसे बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था। इस बिल से किसी भी भारतीय के हितों में सेंध नहीं लग रही बल्कि सुरक्षा मिल रही है। साथ ही तीन पड़ोसी मुस्लिम देश में गैर मुस्लिमों के साथ हो रहे अत्याचार -उत्पीड़न से पीड़ित जन यदि भारत आना चाहें तो आ सकते हैं। इसमें किसी भी भारतीय को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। * सुनील जैन राना *
बुधवार, 11 दिसंबर 2019
प्याज के आँसू http://suniljainrana.blogspot.com/
December 11, 2019 • सुनील जैन राना
प्याज के आँसू रो रही जनता और सरकार ,हल्ला बोल रहा विपक्ष। प्याज के बढ़ते दामों से सभी परेशान हैं। सोशल मिडिया पर तो प्याज छाया हुआ है। आज प्याज फलों और सब्जियों में विशिष्ट स्थान पा गया है। सोशल मिडिया पर अनेको वीडियो प्याज को लेकर बनाये गए हैं जिन्हे जनता भी बहुत पसंद कर रही है। किसी वीडियो में प्याज को बैंक लॉकर में रखते दिखाया जा रहा है तो किसी वीडियो में प्याजकी चोरी -लूट दिखाई जा रही है। कार्टूनिस्टों ने भी मौके का फायदा उठाकर प्याज पर अनेको कार्टून बना दिए हैं। घरों में शुभ अवसरो पर फल -मिठाई की जगह प्याज लाते लेजाते दिखाया जा रहा है। कहने का तातपर्य यह है की आज प्याज विशिष्ट बन गया है।
कई बार प्याज के कारण सरकारें बनती -बिगड़ती देखी हैं। आज कांग्रेस समेत कई विरोधी दल प्याज के बढ़ते दामों पर हल्ला मचा रहे हैं। जबकि सोशल मिडिया पर ही कांग्रेस की सरकार के समय १०० रूपये किलो तक महंगे हो गए प्याज पर कांग्रेस के कपिल सिब्बल एक पत्रकार को जबाब में बता रहे हैं की प्याज के दाम बढ़ गए हैं तो इसमें सरकार का क्या दोष ,सरकार थोड़े ही प्याज बेच रही है। प्याज महंगा है तो प्याज बेचने वाले दुकानदारों से पूछो। आज वही सिब्बल जी महंगे प्याज पर नाराज हैं।
प्याज की कीमतें इतनी बेहताशा बढ़ने के भी कई कारण बताएं जा रहे हैं। सोशल मिडिया पर एक वीडियो में महाराष्ट्र के पास सैंकड़ो ट्रक प्याज से भरे खड़े हैं जिन्हे बिना वजह रोक रखा है ऐसा दिखाया गया। लगता है की प्याज की इतनी किल्ल्त नहीं है जितनी बना दी गई। इसमें बिचौलियों का भी बहुत बड़ा हाथ हो सकता है। अब नई प्याज आणि शुरू हो गई है। विदेशो से आयात किया प्याज भी बाजार पहुंचने लगा है। जिससे लगता है की जल्दी ही प्याज फिर से २५ -३० रूपये किलो बिकने लगेगा। *सुनील जैन राना *
कई बार प्याज के कारण सरकारें बनती -बिगड़ती देखी हैं। आज कांग्रेस समेत कई विरोधी दल प्याज के बढ़ते दामों पर हल्ला मचा रहे हैं। जबकि सोशल मिडिया पर ही कांग्रेस की सरकार के समय १०० रूपये किलो तक महंगे हो गए प्याज पर कांग्रेस के कपिल सिब्बल एक पत्रकार को जबाब में बता रहे हैं की प्याज के दाम बढ़ गए हैं तो इसमें सरकार का क्या दोष ,सरकार थोड़े ही प्याज बेच रही है। प्याज महंगा है तो प्याज बेचने वाले दुकानदारों से पूछो। आज वही सिब्बल जी महंगे प्याज पर नाराज हैं।
प्याज की कीमतें इतनी बेहताशा बढ़ने के भी कई कारण बताएं जा रहे हैं। सोशल मिडिया पर एक वीडियो में महाराष्ट्र के पास सैंकड़ो ट्रक प्याज से भरे खड़े हैं जिन्हे बिना वजह रोक रखा है ऐसा दिखाया गया। लगता है की प्याज की इतनी किल्ल्त नहीं है जितनी बना दी गई। इसमें बिचौलियों का भी बहुत बड़ा हाथ हो सकता है। अब नई प्याज आणि शुरू हो गई है। विदेशो से आयात किया प्याज भी बाजार पहुंचने लगा है। जिससे लगता है की जल्दी ही प्याज फिर से २५ -३० रूपये किलो बिकने लगेगा। *सुनील जैन राना *
सोमवार, 9 दिसंबर 2019
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