रविवार, 10 नवंबर 2019
शुक्रवार, 8 नवंबर 2019
प्याज की बढ़ती कीमतें -फायदा किसे ?
November 8, 2019 • सुनील जैन राना
देश के कई राज्यों में प्याज की बढ़ती कीमतों से आम जनता परेशान है। सरकार भी प्याज की कीमतों में कमी कराने को जागरूक है और अनेको उपायों में लगी है। सरकार द्वारा जहां एक ओर प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगा दी है वहीं दूसरी ओर प्याज का आयात करने को उचित कदम उठाये जा रहे हैं।
प्याज के मामले में चिंताजनक बात यह की ऐसा क्या हो जाता है कुछ ही महीनों में की जिस प्याज का कोई खरीदार नहीं होता अचानक उसके बेहताशा भाव क्यों बढ़ जाते हैं ? इन बढ़े भावो का फायदा किसे मिलता है ?क्यों किसान हर बार अपने को ठगा सा महसूस करता है ?
इन सब बातो का एक ही उत्तर नज़र में आता है वह है बिचौलिया। हर बार बिचौलिए ही सस्ते में वस्तु खरीदकर थोड़े दिन बाद उसकी किल्ल्त पैदाकर मनमाने दामों पर बेचते हैं। आज तक देश के सभी राज्यों में विभिन्न सरकारे इन बिचौलियों पर अंकुश लगाने में कामयाब नहीं हो पाई हैं। किसान को तो सदैव अपनी फसल का न्यूनतम दाम ही मिलता रहा है। हालांकि अब कुछ किसान भी धनवान हो गए हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार वस्तु को सस्ते दामों पर न बेचकर दाम बढ़ने पर ही बेचते हैं। लेकिन ऐसे किसानो की संख्या बहुत कम है। पिछले सालों में दालों के दामों में भी ऐसे ही बेहताशा बढ़ोतरी हुई थी जिस पर सरकार को खासी मस्सकत करनी पड़ी थी।
देश के किसानो को खुशहाल बनाने के लिये बिचौलियों पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है। इसके लिए सरकार और किसानों को साझा कार्यक्रम बनाना होगा तभी खाद्य पदार्थो की कीमतें एकरूप रह सकेंगी। *सुनील जैन राना *
प्याज के मामले में चिंताजनक बात यह की ऐसा क्या हो जाता है कुछ ही महीनों में की जिस प्याज का कोई खरीदार नहीं होता अचानक उसके बेहताशा भाव क्यों बढ़ जाते हैं ? इन बढ़े भावो का फायदा किसे मिलता है ?क्यों किसान हर बार अपने को ठगा सा महसूस करता है ?
इन सब बातो का एक ही उत्तर नज़र में आता है वह है बिचौलिया। हर बार बिचौलिए ही सस्ते में वस्तु खरीदकर थोड़े दिन बाद उसकी किल्ल्त पैदाकर मनमाने दामों पर बेचते हैं। आज तक देश के सभी राज्यों में विभिन्न सरकारे इन बिचौलियों पर अंकुश लगाने में कामयाब नहीं हो पाई हैं। किसान को तो सदैव अपनी फसल का न्यूनतम दाम ही मिलता रहा है। हालांकि अब कुछ किसान भी धनवान हो गए हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार वस्तु को सस्ते दामों पर न बेचकर दाम बढ़ने पर ही बेचते हैं। लेकिन ऐसे किसानो की संख्या बहुत कम है। पिछले सालों में दालों के दामों में भी ऐसे ही बेहताशा बढ़ोतरी हुई थी जिस पर सरकार को खासी मस्सकत करनी पड़ी थी।
देश के किसानो को खुशहाल बनाने के लिये बिचौलियों पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है। इसके लिए सरकार और किसानों को साझा कार्यक्रम बनाना होगा तभी खाद्य पदार्थो की कीमतें एकरूप रह सकेंगी। *सुनील जैन राना *
बुधवार, 6 नवंबर 2019
पराली नहीं होगी पराई http://suniljainrana.blogspot.com/
November 6, 2019 • सुनील जैन राना
किसान के खेतो में जलाई जा रही पराली जी का जंजाल बन गई है। हरियाणा -पंजाब के खेतो में जलाई जा रही पराली से देश की राजधानी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। दिल्ली और आसपास के इलाको में प्रदूषण का स्तर अधिकतम सीमा को भी पार कर गया है। सड़को पर सर्दी में पड़ने वाली धुंध से भी ज्यादा धुँआ -कोहरा सा छाया है। आम आदमी भी इस प्रदूषण से बहुत चिंतित है। बच्चे -जवान -बूढ़े सभी इस धुँए की चपेट में बीमार हो रहे हैं।
दरअसल वैसे तो पराली बिक जाती है लेकिन आधुनिकता की दौड़ में अब फसलों की कटाई मशीनों से होने लगी है। हाथ से कटाई में तो फसल पूरी जड़ से काटी जाती थी लेकिन मशीन से फसल की कटाई थोड़े ऊपर से होती है। हार्वेस्टर मशीन से कटाई करने पर फसल का कुछ भाग ऊपर रह जाता है। ऐसे में किसान उसे हाथ से न हटाकर अपने खेतो में आग लगा देते हैं जिसके कारण दूर दूर तक धुँआ फैल रहा है। किसान यह भी नहीं सोच रहे की खेत में पराली जलाने से धरती में लाभकारी कीट -केंचुए आदि भी जल कर मर रहे हैं। जिससे धरती में उपजाऊ पन कम हो रहा है और पाप के भागीदार भी बन रहे हैं।
हालांकि आज भी अधिकांश पराली काम में आ रही है या बिक रही है फिर भी यदि किसान और सरकार मिलकर तकनीकी आधार से कार्य करें तो दोनों को प्रालि से मुनाफा भी हो सकता है और प्रदूषण से मुक्ति भी मिल सकती है। पराली के टाईट बंडल बनाने के उपक्रम लगे जैसे रुई के बंडल बनते हैं। ऐसा होने से पराली कम जगह घेरेगी और बड़े प्लांटों में जलाने के काम आयेगी। कुछ जगह पराली से डिस्पोजल बर्तन बनने शुरू हो गए हैं जो प्लास्टिक का विकल्प बन सकते हैं। पिछले दिनों जमशेदपुर में पुराल की डंडी और कोयले से ईको फ्रेंडली टूथ ब्रश बनाने की बात भी मिडिया में आयी थी।
कहने का तातपर्य यह है की यदि किसान और सरकार मिलकर प्रालि के विभिन्न आयामों पर शोध करें तो अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। हो सकता है की आज दुःख देने वाली पराली कल खुशियां लेकर आये। * सुनील जैन राना *
दरअसल वैसे तो पराली बिक जाती है लेकिन आधुनिकता की दौड़ में अब फसलों की कटाई मशीनों से होने लगी है। हाथ से कटाई में तो फसल पूरी जड़ से काटी जाती थी लेकिन मशीन से फसल की कटाई थोड़े ऊपर से होती है। हार्वेस्टर मशीन से कटाई करने पर फसल का कुछ भाग ऊपर रह जाता है। ऐसे में किसान उसे हाथ से न हटाकर अपने खेतो में आग लगा देते हैं जिसके कारण दूर दूर तक धुँआ फैल रहा है। किसान यह भी नहीं सोच रहे की खेत में पराली जलाने से धरती में लाभकारी कीट -केंचुए आदि भी जल कर मर रहे हैं। जिससे धरती में उपजाऊ पन कम हो रहा है और पाप के भागीदार भी बन रहे हैं।
हालांकि आज भी अधिकांश पराली काम में आ रही है या बिक रही है फिर भी यदि किसान और सरकार मिलकर तकनीकी आधार से कार्य करें तो दोनों को प्रालि से मुनाफा भी हो सकता है और प्रदूषण से मुक्ति भी मिल सकती है। पराली के टाईट बंडल बनाने के उपक्रम लगे जैसे रुई के बंडल बनते हैं। ऐसा होने से पराली कम जगह घेरेगी और बड़े प्लांटों में जलाने के काम आयेगी। कुछ जगह पराली से डिस्पोजल बर्तन बनने शुरू हो गए हैं जो प्लास्टिक का विकल्प बन सकते हैं। पिछले दिनों जमशेदपुर में पुराल की डंडी और कोयले से ईको फ्रेंडली टूथ ब्रश बनाने की बात भी मिडिया में आयी थी।
कहने का तातपर्य यह है की यदि किसान और सरकार मिलकर प्रालि के विभिन्न आयामों पर शोध करें तो अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। हो सकता है की आज दुःख देने वाली पराली कल खुशियां लेकर आये। * सुनील जैन राना *
सोमवार, 4 नवंबर 2019
शुक्रवार, 1 नवंबर 2019
बिजली का बिल माननीयों को माफ़ ?
November 1, 2019 • सुनील जैन राना
मोदी सरकार में एक अहम कार्य यह हुआ है की अब पिछली सरकारों की तरह बिजली की कटौती में भरी कमी आयी है। देश भर में सबको बिजली मिले इस कार्य को बहुत संजीदगी से पूरा किया गया है।
उत्तर प्रदेश में जहां पहली सरकारों में बिजली की किल्ल्त रहती थी वहीं अब भरपूर बिजली मिल रही है। जहां एक और सरकार का उद्देश्य यह है की सबका घर रोशन हो वहीं दूसरी ओर बिजली चोरी पर भी बड़े पैमाने पर धरपकड़ की जा रही है। राज्य के सभी छोटे -बड़े शहरों ,गाँवों में बिजली चोरी के प्रति लोगो को जागरूक कर मुफ्त में बिजली कनेक्शन देने तक की योजनाएं कारगर रही हैं।
लेकिन जहां एक ओर आम बिजली उपभोक्ता को बिजली चोरी पर जुर्माना और कारागार की सज़ा तक सुनाई गई हैं वहीं दूसरी ओर नेता गण ,अधिकारी गण ,सरकारी महकमें ,अनेक माननीयों पर आज भी बिजली बिल के हज़ारो करोड़ बकाया होने के बाद भी उनका न तो बिजली कनेक्शन काटा गया न ही उनपर कोई जुर्माना लगाया गया। हाल ही में उत्तरप्रदेश बिजली विभाग ने बताया की लगभग १३ हज़ार करोड़ रूपये उपरोक्त उपभोक्ताओं पर बकाया हैं। अब सरकार ऐसे उपभोक्ताओं के लिये प्रीपेड मीटर लगाने की तयारी कर रही है। इसके लिए एक लाख मीटरों का ऑर्डर भी कर दिया गया है।
लेकन एक बात आम उपभोक्ता को समझ नहीं आ रही है की पहले घरों में १०० -१०० वाट के बल्ब लगे होते थे ,फिर cfl लगाये गए ,अब और ज्यादा बिजली बचत को LED बल्ब लगा दिए गए हैं लेकिन बिजली का बिल पहले से कम होने के बजाय ज्यादा क्यों आ रहा है। जितना बिल आ जाये बस उसका भुगतान करना पड़ रहा है। बिल ज्यादा आने के कारण कोई बताने वाला नहीं है। यह आम आदमी की समस्या है जिसका निराकरण बिजली विभाग को करना ही चाहिए।
सरकार ने बिजली की बचत को सड़कों पर हेलोजन की बजाय LED हेलोजन लगाने शुरू कर दिए हैं जिनसे बेहताशा बिजली की बचत हो रही है। लेकिन आज भी अनेको जगह पीली लाईट के हेलोजन भी लगाए जा रहे हैं जो गलत है। अनेको जगह भोर होते ही हेलोजन बंद नहीं हो पाते एवं शाम से पहले ही हेलोजन जला दिये जाते हैं। ऐसा होने से व्यर्थ में बिजली व्यय हो रहा है।
आम आदमी के मीटर की चैकिंग को आ रहे मीटर रीडर के हाथ में आज भी बहुत कुछ होता है। वे भले ही बिल मशीन से निकल कर देते हों लेकिन मशीन में डाटा तो वे ही भरते हैं। इस पर भी सरकार को सोचना चाहिए। यदि मीटर खराब हो जाए तो उसे बदलना सरकार का फर्ज है लेकिन सब खर्च उपभोक्ता से लिए जाते हैं यह भी ठीक नहीं है। *सुनील जैन राना *
उत्तर प्रदेश में जहां पहली सरकारों में बिजली की किल्ल्त रहती थी वहीं अब भरपूर बिजली मिल रही है। जहां एक और सरकार का उद्देश्य यह है की सबका घर रोशन हो वहीं दूसरी ओर बिजली चोरी पर भी बड़े पैमाने पर धरपकड़ की जा रही है। राज्य के सभी छोटे -बड़े शहरों ,गाँवों में बिजली चोरी के प्रति लोगो को जागरूक कर मुफ्त में बिजली कनेक्शन देने तक की योजनाएं कारगर रही हैं।
लेकिन जहां एक ओर आम बिजली उपभोक्ता को बिजली चोरी पर जुर्माना और कारागार की सज़ा तक सुनाई गई हैं वहीं दूसरी ओर नेता गण ,अधिकारी गण ,सरकारी महकमें ,अनेक माननीयों पर आज भी बिजली बिल के हज़ारो करोड़ बकाया होने के बाद भी उनका न तो बिजली कनेक्शन काटा गया न ही उनपर कोई जुर्माना लगाया गया। हाल ही में उत्तरप्रदेश बिजली विभाग ने बताया की लगभग १३ हज़ार करोड़ रूपये उपरोक्त उपभोक्ताओं पर बकाया हैं। अब सरकार ऐसे उपभोक्ताओं के लिये प्रीपेड मीटर लगाने की तयारी कर रही है। इसके लिए एक लाख मीटरों का ऑर्डर भी कर दिया गया है।
लेकन एक बात आम उपभोक्ता को समझ नहीं आ रही है की पहले घरों में १०० -१०० वाट के बल्ब लगे होते थे ,फिर cfl लगाये गए ,अब और ज्यादा बिजली बचत को LED बल्ब लगा दिए गए हैं लेकिन बिजली का बिल पहले से कम होने के बजाय ज्यादा क्यों आ रहा है। जितना बिल आ जाये बस उसका भुगतान करना पड़ रहा है। बिल ज्यादा आने के कारण कोई बताने वाला नहीं है। यह आम आदमी की समस्या है जिसका निराकरण बिजली विभाग को करना ही चाहिए।
सरकार ने बिजली की बचत को सड़कों पर हेलोजन की बजाय LED हेलोजन लगाने शुरू कर दिए हैं जिनसे बेहताशा बिजली की बचत हो रही है। लेकिन आज भी अनेको जगह पीली लाईट के हेलोजन भी लगाए जा रहे हैं जो गलत है। अनेको जगह भोर होते ही हेलोजन बंद नहीं हो पाते एवं शाम से पहले ही हेलोजन जला दिये जाते हैं। ऐसा होने से व्यर्थ में बिजली व्यय हो रहा है।
आम आदमी के मीटर की चैकिंग को आ रहे मीटर रीडर के हाथ में आज भी बहुत कुछ होता है। वे भले ही बिल मशीन से निकल कर देते हों लेकिन मशीन में डाटा तो वे ही भरते हैं। इस पर भी सरकार को सोचना चाहिए। यदि मीटर खराब हो जाए तो उसे बदलना सरकार का फर्ज है लेकिन सब खर्च उपभोक्ता से लिए जाते हैं यह भी ठीक नहीं है। *सुनील जैन राना *
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