भारत में भ्र्ष्टाचार के कारण बहुत से सेवा कार्यों में भी व्यवधान हों जाता है. 2014 के बाद ऊपरी स्तर पर यानि मन्त्रीमंडल स्तर पर कोंग्रेस के समय जैसी लूट - छोटाले - दलाली तो मोदी सरकार में नहीँ है लेकिन निचले स्तर पर सरकारी विभागों में सुविधा शुल्क बहुत ज्यादा बढ़ गया है.
आम आदमी, व्यापारी सभी को किसी न किसी सरकारी विभाग में काम पड़ता ही है. नियम - क़ानून इतने ज्यादा हैं जिनकी पूर्ति कुछ देकर ही होती है. मनरेगा की तरह स्कूलों में मिड डे मिल में भी बहुत गड़बड़ है. बच्चों को नियमानुसार कुछ नहीँ मिलता. हल्की सस्ती बस्तुए इस्तेमाल की जा रही हैं. न क्वालिटी है न ही कवंटिटी है. कोई देखने वाला नहीँ है. कभी कभाक किसी स्कूल का मौका मुआयना हों जाता है. बच्चों के स्वास्थ्य के लिए इसकी नियमित जाँच होनी चाहिए.
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