ऐ हिन्दु सेकुलुरो तुमसे बेशर्म कोई जाति नही....!!
गजनवी के बारे मेँ पढकर ऐसा लगने लग गया कि ये कैसा धर्म है जो अपनी रक्षा स्वंय नही कर सकता, दोस्तो बुरा मत मानना हिन्दु धर्म कभी भी गलत का विरोध नही करता और न कभी किया भगवान और भाग्य के भरोसे बैठे रहते है, चंद वीर हिन्दु योद्धाओ को छोङकर किसी ने वीरता का कोई कार्य नही किया क्योकि दुसरो पर भरोसा करने वाला सदा रोया है...!!
आज जो हिन्दु सेकुलर है वो एक बार अफगानीस्तान जाये और अफगानिस्तान मेँ गजनी नामक स्थान पर जरुर जाये जहां हिन्दु औरतो की नीलाम हुंई थी, उस स्थान पर मुस्मानो ने एक स्तम्भ बना रखा है, जिस पर लिखा है दुख्तरे हिन्दोस्तान, नीलामे दो दीनार अर्थात इस जगह हिन्दुस्तानी औरते दो दो दीनार मेँ नीलामी हुंई अगर तब भी सेकुलरपन का कीङा नही नीकलता तो गजनवी का इतिहास पढ लेना जिसने हिन्दुओ को अपमानित करने के लिये सत्रह हमलो मेँ लगभग चार लाख हिन्दु औरते चंद सैनिको के बल पर पकङ कर गजनी ले गया, जो औरते अपने पतियो, भांईयो, पिता से बिलख बिलख कर अपनी रक्षा के लिए निवेदन कर रही थी लेकिन करोङो हिन्दुओ के बीच से मुठ्रठी भर मुस्लिम सैनिक भेङ बकरियो की तरह उठा कर ले गये, उनको बचाने न पति न भाई और न ही इस विशाल भारत के करोङो हिन्दु उनकी रक्षा के लिए आये नहीं....!!
महमुद गजनवी ने इन लङकियो औरतो को ले जाकर गजनवी के बाजार मे सामान की तरह बेँच डाला, विश्व के किसी वर्ग के साथ ऐसा अपमान नही हुआ जो हिन्दु वर्ग के साथ हुआ, अब इतिहास से सबक लेते हुए ये सोचना बंद कर दो कि जब अत्याचार बढेगा तब भगवान स्वंय उन्हे बचाने आयेँगे, क्योकि भगवान भी अव्यवहारिक अहिँसा का समर्थन करने वालो को नपुसंकता करार देते है क्योकि भगवान ने सभी अवतारो मेँ यही संदेश दिया है अपनी रक्षा स्वयं करो मैँ तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हे नेत्र दिए है गलत का विरोध करो मै सदैव तुम्हारे साथ खङा हूँ...!!
आज पुनः इतिहास हमारी परीक्षा ले रहा है और ये भी स्मरण रखो कि एक गाल पर कोई मारे तो दुसरा आगे करो ये कोई गीता या माहाभारत का उपदेश नही ये उन डरपोक कायरो का संदेश है जो खुद के हत्यारे भी है...!!
अब तो उठो जागो और अपने सनातन धर्म की रक्षा के लिये मैदान मे उतर कर सेवा रुपी आंदोलन शुरु करो, और अपने को या अपने अंदर कृष्ण और माहाराणा को जिँदा रखो न की अंहिषा के पुजांरियो को...!!
आमोद सिंह वत्स
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