रविवार, 22 फ़रवरी 2026
बुधवार, 18 फ़रवरी 2026
NPA 56लाख करोड़ था
आप कहाँ-कहाँ गड्ढे खोदकर गये हो जी ??
अब समझ में आ रही है नोट बंदी ???
कांग्रेस के अर्थशास्त्री PM मनमोहन सिंह जी ने बैंकों के एनपीए 37% बताये थे, जो वस्तुतः 82% थे !
कितना बड़ा झूठ ....
बैंकें डूबने की कगार पर थीं ...
कुल एनपीए था 56 लाख करोड़ रुपये ...
कल्पना कीजिये जब ये सच्चाई नव नियुक्त पीएम के सामने आयी होगी तो उन पर क्या बीती होगी, अगर बैंकें फेल हो जातीं तो देश किस हालत में होता ? ...
आर्थिक अराजकता सामाजिक अराजकता में बदल चुकी होती, देश भयंकर संकटों में घिर चुका होता ...
नया पीएम उसकी भेंट चढ़ गया होता और आंकड़ों की भूलभुलैया में यही विपक्ष अपने पाप को मोदी के सर मढ रहा होता ...
नोटबंदी ने इस दुष्चक्र से बाहर निकाल दिया ....
बैंकों के पास तत्काल ढ़ेर सारा कैश आ गया !
फिर बैंक डिफाल्टरो पर नकेल कसने का काम शुरू हुआ और हजारों, लाखों करोड़ की संपत्तियां जब्त हुई !
लोग मोदी से तमाम मुद्दों पर क्षुब्ध रहते हैं, उन्हें अंदाजा ही नहीं है कि देश कितना खोखला कर दिया गया था ।
डिफेंस आतंरिक सुरक्षा विदेशनीति ,आर्थिक अव्यवस्था , सामाजिक विग्रह, आस्तीन के सांप इन सबसे एक साथ निपटना बहुत दुष्कर, विवेकपूर्ण और राजनैतिक इच्छाशक्ति का काम है !
हम मोदी शासन के कारण देशद्रोहियों की गहरी जड़ों को कुछ कुछ देख पा रहे हैं, मिडिया शिक्षा संस्थान, न्यायपालिका सब जगह आज भी विषधर बैठे हुए हैं ....
इन सबके बीच अपने को सुरक्षित रखते हुए देश को सुरक्षित करने का काम मोदी जी कर रहे हैं ...
हमें पूरा विश्वास है कि मोदी हमारी आशाओं आकांक्षाओं को निश्चित ही पूरा करेंगे ...
ये दौर इन विषधरों के दांत तोड़ने का है !
मोदी को हमारे सार्थक समर्थन की आवश्यकता है,
धैर्य के साथ मोदी के साथ खड़े होने की आवश्यकता है,
अधैर्य से हम मोदी को ही नहीं खोएंगे, अपितु उन्ही दरिंदों के हाथों में देश और अपनी संतानों के भविष्य को सौंप देंगे
सत्ता की ताक में बैठे बहेलिये यही चाहते हैं और हमें गुमराह कर रहे हैं ! दुश्मन जो चाहता है अगर वैसा ही करेंगे, तो पराजय और दुर्भाग्य तो निश्चित है .....
काले कारनामें
लगभग 1500 भारतीय~हिन्दू, वैज्ञानिकों की हत्या, अपहरण:
जिन बैज्ञानिकों की हत्याएं और अपहरण बाबर बंशी मियां नेहरू, नकली गांधीयों के शासनकाल में हुई, ऊनमें भी सबसे ज्यादा हत्या,अपहरण अब्दुल कलाम (ISRO), हामिद अंसारी ( उपराष्ट्रपति), और Antonia (के गुलाम मनमोहन) के समय हुई। ये बाबर बंशी नेहरू,नकली गांधी खानदान भारत,हिन्दुओं का सबसे बड़ा गद्दार है,हर भारतीय को इसे समझना चाहिए, इन्होंने CIA से लेकर ISI,तक को जानकारियां दी है सहयोग किया है। भारत में सैंकड़ों आतंकी घटनाओं में इस खानदान का हाथ रहा है,चाहे 26/11 हो या 1990 का कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार, या 1948 चित्त पावन ब्राह्मणों की हत्या, 1984 सिक्खों का या पुलवामा... या दूसरे सैंकड़ों आतंकी हमले
भारतीय वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतें और RAW के नेटवर्क को ध्वस्त करना ये साजिश हर भारतीय जानना चाहता है। यह बाबर बंशी मियां नेहरू, नकली गांधीयों का परिवार वैज्ञानिकों को मरवा देते या गायब थे यह एक बड़ा रहस्य है जो उजागर होना चाहिए क्यों वैज्ञानिक मारें गये , लापता हुवे, और आत्महत्या तक करने को मजबुर हुए इस रहस्य को उजागर करना चाहिए।
कांग्रेस के राज में 1500 जीतने वैज्ञानिकों की संदिग्ध हालात में मौतें , अपहरण, आत्म हत्याएं हुई, कुछ पाकिस्तान में brain 🧠 dead अवस्था में मिले, किसी की कोई जांच नहीं हुई सब ठंडे बस्ते में चली गई, ऐसा हि हुआ था हमारे दुसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी के साथ उनका रहस्यमय परिस्थितियों में मरना ( हत्या ) ऐक पहेली बनकर रह गया हे, आज भी कई रहस्यों पर पर्दा पडा हुआ हे जो शायद अब सबुतो के अभाव के कारण सुलझ नहीं पाएंगे।🥲
5वी फेल Antonia 13 जनवरी 1968 को भारत आई , जिसकी शादी 25 फरवरी 1968 को राजीव खान गांधी से हुई,जो एक एस्कॉर्ट सर्विस चलाती थी और खुद भी धंधेवाली थी #एंटोनियामाइनो जिसको भारत आते ही सैटेलाइट और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि हो गई। है न घोर आश्चर्य की बात ?
जिस धंधेवाली को Resister, Capacitor, IC and Diode का मुंह किधर है और G किधर होता है पता ही नहीं है वो अंतरिक्ष विज्ञान समझ रही है 😜उसकी आंखों में कुटिलता देखिए,(फोटो)सब समझ आ जाएगा....
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अप्रैल, 1968: विक्रम साराभाई Antonia ~सोनिया खान गांधी को अहमदाबाद में प्रायोगिक उपग्रह संचार का अर्थ स्टेशन का कामकाज समझाते हुए।( चित्र संलग्न) अप्रैल 1968 में लिया गया यह चित्र ISRO के अहमदाबाद सेंटर का है। वैज्ञानिक विक्रम साराभाई सोनिया को भारत की उपग्रह परियोजना की जानकारी दे रहे हैं। जनवरी में भारत आई, दो महीने पहले ही फरवरी 1968 में सोनिया राजीव का विवाह उसने भारत की नागरिकता भी नहीं ली थी। और पहुंच गई अति महत्वपूर्ण संस्थान की जानकारी लेने के लिये ??? क्यूं???
संयोग है कि कुछ समय बाद ही विक्रम साराभाई केरल मे एक रिजॉर्ट के कमरे में रहस्यमय ढंग से मृत पाए गए। बिना पोस्टमार्टम के ही घोषणा कर दी गई थी कि मृत्यु हार्ट अटैक से हुई है।
कोई भी विदेशी भारत वर्ष का हितैषी नहीं हो सकता दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल काली है.. आज ये, उस इटालियन धंधेवाली Antonia का नाजायज पिल्ला पप्पू, पिंकी खान वाड्रा,रॉबर्ट वाड्रा सब देश को भांडने, फूट डालने, बिगाड़ने में लगे हैं।देश का सबसे बड़ा गद्दार बाबर बंशी मियां नेहरू,नकली गांधीयों का खानदान है।
जिस हामिद अंसारी को इस कांग्रेस ने उपराष्ट्रपति बनाया उसके ईरान, ISI पाकिस्तान से सम्बन्ध सभी जानते हैं, पर जो हिंदू ये बोलते नहीं थकते कि मुस्लिम हो तो अब्दुल कलाम जैसा वे हिन्दू अलतकिया अब्दुल कलाम का अ और क भी नहीं जानते।
अब्दुल कलाम के समय ISRO से करीब 67 बैज्ञानिक गायब हुवे, जिसमें ना जाने कितने पाकिस्तान पहुंचाए गए पर 3 जो brain 🧠 dead अवस्था में पाकिस्तान में मिले वह मृत्यु तुल्य अवस्था थी, शायद 32 की लाशे मिली थी बाकी का आज तक कोई सुराग नहीं, शायद पाकिस्तान ही पहुंचाए गए थे।RTI से ये जानकारी आप ले सकते है। इसी अब्दुल कलाम ने नियम, कानून विपरीत मुल्लों के लिए राष्ट्रपति भवन के अंदर किया किया बनाए आप RTI से जानकारी ले सकते हैं।
इसी अब्दुल कलाम के समय ISRO में एक जॉब vacancy थी 66 लोगों के लिए, जिसमें 8800 एप्लीकेशन पड़ी थी, और उस अब्दुल कलाम ने सारी 66 जॉब छांट छांट कर मुल्लों को दी थी। बहुत बड़ा बवाल हुआ था पर कांग्रेस ने सब शांत कर छुपा दिया। साउथ इंडिया के लोग ये कांड अच्छी तरह जानते है और मुझे इसकी जानकारी साउथ इंडिया के ही लोगों ने दी थी ( 2012 में ) किसी भी मुल्ले पर बिस्वास करना एक महा पाप है, चाहे वो वैज्ञानिकों का हत्यारा अब्दुल कलाम हो या मूर्खो का चहेता फैज खान, या यूसुफ खान ( दिलीप कुमार) या मूर्खो का सड़क छाप सड़ खान सड़ ..
होमी जहांगीर भावा की हत्या में इसी बाबर बंशी मियां नेहरू खानदान की मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान का हाथ था तो बिक्रम साराभाई की हत्या में पूरी तरह Antonia का हाथ था
कितने षड्यंत्र किए इस बाबर बंशी मियां नेहरू खानदान ने कितनी हत्याएं,कितनी लूट, 2014 में अगर मोदी जी न आते तो किसी को कुछ पता भी ना चलता।
विक्रम साराभाई ,डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा आज होते तो भारत दुनिया का बाप होता।
She came to India only because as spy, by profession she was running an Escort service from a bar, was a prostitute , her partner n supplier of Girls/teens was a Islamabadi rich muslim, qualifications 5th standard fail but what an interesting she went to observe I S R O ! Soon after she came to Bharat ( married to Rajiv Khan Gandhi)
LATER ON Dr sarabhai was found dead
She stayed in india as spy ~of CIA,KgB , is also an agent for Pop ( convert apx 6,65,000 Hindus to Christianity)
After long years she took Indian citizen ship , sources of incomes Nil was NiL, but now a days she is 4th richest woman in the world
Whenever a politician visits such an esteemed organization, the scientists should not come forward to explain the project or workings, they are useless fellows and come to shine their report card only.
Antonio has damaged India like any thing and now his son is also doing the same
बहुत कुछ तो रहस्य है लेकिन किसी की हिम्मत क्यों नहीं है इस इटालियन को छूने की???इस spy इटालियन के रहस्य ~ जिस जिस ने जाने वे सब रहस्यमयी मौत को प्राप्त हुए है चाहे राजीव खान गांधी हो, या माधव राव सिंधिया,राजेश पायलट या रॉबर्ट वाड्रा का खानदान.....
गलती विक्रम साराभाई की नहीं थी उस समय भारत के लोगों की मानसिकता ही कुछ ऐसी थी कि बाबर बंशी मियां नेहरू, नकली गांधी परिवार को भारत का मालिक समझते थे और ये परिवार भारत को अपनी बापौती समझ कर लुटता,रहा हजारों नहीं लाखों हत्याएं, करोड़ो पाकिस्तानी, बांग्लादेशी मुल्लों को लाकर बसाया।
देश को खत्म करना ही कांग्रेस और इस मुल्ले नकली गांधी परिवार का शुरू से मकसद रहा है और आज भी एंटोनिया, पिंकिखान वाड्रा, राहुल खान गांधी देश भर मे झूठ बोल कर इसी प्लानिंग पर काम कर रहा है
मतलब ये पनौती जब से भारत आई,तब से महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान महानुभावों की जीवनलीला पर ग्रहण लगने लगा। संजय खान गांधी, इंदिरा खानगांधी , राजीव खान गांधी जैसे परिवारों के लोग मारे गए।
परन्तु जब से बागडोर संभाली तब से परिवार सुरक्षित और पुराने कांग्रेसी साइड। नटवर सिंह जी को कैसे धक्के मारकर बाहर किया। फिर भी पुराने कांग्रेसी इनके और परिवार का गुणगान करते नहीं थकते। परिवार को शहीद कहते हैं लेकिन कोई ये नहीं कहता कि हत्या हुई है। राजेश पायलट ,माधवराज सिंधिया , जगदीश पायलट रॉबर्ट वाड्रा का प्रायः पूरा खानदान , जैसे खास लोगों को क्या हुआ कोई नहीं बताता।
जब वैज्ञानिक तक नहीं छोड़ा तो औरों को क्या बखसेंगे।
अभी ग़ुलामी निकली नहीं न हिन्दू जागा है, बस पैसे दे दो कुछ भी करो , कॉग्रेस का मतलब ही "एक आतंकवादी गद्दारों का संगठन" है और इसके जो इंडी ठग बंधन है वो भी मेम्बर है इन्हें सबको जेल भेज दे या सालो को ऊपर हूरो से मिलवा दो । ये ही इन गद्दारों की बीमारी का सही इलाज है ।
भला हो वर्तमान सरकार का और सोशल मीडिया का जिसने भारत के सही इतिहास को सामने लाया, और इस परिवार की असलियत धीरे धीरे खुल कर सामने आ गई।
मोदी जी के शासन में वैज्ञानिक सुरक्षित हैं और नई नई खोजों में लगे हैं । भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है ♥️🚩🇮🇳
उसके बाद क्या हुआ हमारे साराभाई और कितने वैज्ञानिकों कि हत्या हुई ??
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह विक्रम साराभाई जिन्होंने रखी थी ISRO की नींव । भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अतंरिक्ष के क्षेत्र में ऊंचे शिखर पर है जिसका पूरा श्रेय ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह’ विक्रम साराभाई को जाता है।
साल 1975 में भारत ने एक रूसी कॉस्मोड्रोम से ‘आर्यभट्ट’ उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दुनिया को चकित कर डाला. यह विक्रम भाई की परियोजना की सफलता थी।
मई, 1966 में उन्होंने परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला। साल 1919 में 12 अगस्त को अहमदाबाद के स्वतंत्रता आन्दोलन को समर्पित एक प्रगतिशील विचारों वाले उद्योगपति परिवार में जन्मे थे तो वहीं पर देश की प्रसिद्ध शख्सियत सरोजिनी नायडू, अन्य से नाता रहा।
साल 1962 में उन्होंने शांतिस्वरूप भटनागर पदक प्राप्त किया, तो 1966 में पद्मभूषण. मरणोपरांत उन्हें 1972 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।साल 2019 में उनकी जन्म शताब्दी पर इसरो ने विक्रम साराभाई पत्रकारिता पुरस्कार भी शुरू करने की घोषणा की।
भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर (जिसको 20 सितंबर, 2019 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरना था) का नाम भी विक्रम रखा गया।
साराभाई की मौत एक रहस्य
आम दिनों की ही तरह 30 दिसंबर, 1971 का भी दिन था। लेकिन उस दिन को खास बना दिया एक घटना ने। और वह घटना थी देश के महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई का इस दुनिया से चले जाना। किसी को यकीन नहीं था कि भारत के स्पेस प्रोग्राम के पिता कहे जाने वाले विक्रम साराभाई हमें यूं छोड़कर चले जाएंगे। एक दिन पहले तो सबकुछ ठीक-ठाक था। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ बैठकें की थीं और अहम विषयों पर चर्चाएं भी हुई थीं। ऐसे कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे जिससे लगे कि उनकी तबीयत खराब है। लेकिन अगली सुबह केरल के तटीय शहर कोवलाम के एक होटल रूम में उनका शव मिला। उनकी इस अचानक मौत ने सबको झिंझोड़ कर रख दिया था।
नांबी नारायण की आत्मकथा और साजिश का शक
जासूसी के गलत मामले में फंसाए गए पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक नांबी नारायणन की मानें तो साराभाई अंतरराष्ट्रीय साजिश का शिकार हुए। इसरो के जासूसी मामले में फंसे और फिर बाद में बेदाग साबित हुए एस.नांबी नारायणन की 2017 में मलयाली भाषा में आत्मकथा आई थी जिसका नाम Ormakalude Bhramanapatham है। उस किताब से विक्रम साराभाई की मौत के रहस्य पर फिर से चर्चा गर्माया।
मौत पर यकीन नहीं
नांबी नारायणन ने साराभाई के साथ मिलकर उनके जूनियर के तौर पर इसरो में काम किया है और उनके काफी करीब रहे हैं। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है, 'उनकी मौत से कई सवाल उठे हैं। अगर उनकी मौत साजिश थी तो पूरी संभावना है कि उसके पीछे अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का हाथ हो। नहीं तो उनके जैसे वैज्ञानिक का इस तरह अचानक निधन कैसे हो सकता है?'
सेहत पर देते थे बहुत ध्यान
नांबी नारायणन ने अपनी आत्मकथा में एक पूरा चैप्टर साराभाई के निधन को समर्पित किया है। उन्होंने इसमें उनके निधन पर कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि साराभाई अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखते थे। नांबी लिखते हैं, 'एक आदमी जिसने जिंदगी में कभी सिगरेट को छुआ तक नहीं। फिर उनकी ऐसे मौत कैसे हो गई? यह जानते हुए भी कि मृतक एक महान वैज्ञानिक थे, उनका अंतिम संस्कार उनकी ऑटोप्सी कराए बगैर क्यों किया गया?'
उन्होंने कहा कि साराभाई के निधन को प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री होमी जहांगीर भाभा की मौत से जोड़कर देखा जाना चाहिए जिनका 1966 में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। CIA ~ सीआईए का हाथ?
उन्होंने पत्रकार ग्रेगरी डगलस की किताब Conversations with the Crow का हवाला दिया है जिसमें सीआईए अफसर रॉबर्ट क्रॉली ने भाभा की मौत के पीछे सीआईए के हाथ होने के संकेत दिए थे। किताब में क्रॉली के हवाले से लिखा है, '1965 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध में भारत की जीत से अमेरिका बेचैन हो गया। भारत को एक न्यूक्लियर ताकत के तौर पर उभरते हुए देखने से भी अमेरिका की चिंता बढ़ गई।'👇👇
इन कांग्रेसी कुत्तों ने सबसे अंत में नम्बी नारायण जी को शिकार बनाया था, परंतु उनका सौभाग्य था कि उनके जेल में रहते हुए सत्ता परिवर्तन हो गया, नयी सरकार ने दुबारा जांच बिठा दिया तो इसरो के महान वैज्ञानिक नम्बी नारायण जी निर्दोष पाए गए और सुप्रीम कोर्ट ने नारायणन जी से माफी मांगते हुए सम्मान बरी कर दिया तथा उनका जो बकाया धनराशि ब्याज सहित उनको प्रदान किया गया।
एक अभिनंदन समारोह में उन्होंने रूंधे गले से साक्षात्कार दिया था कि यदि सत्ता में मोदीजी नहीं आते तो मेरा जीवित जेल से निकलना असंभव था, जो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने मेरे उपर देशके प्रति गद्दारी का काला धब्बा थोप दिया था वो धब्बा भी मिटना मुश्किल था, मैं बहुत प्रसन्न हूं कि मुझे दूसरा जन्म मिल गया।......
डॉ होमी जेन्हागीर भाभा (1909-1966) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी थे जिन्हें अक्सर भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है ।
भाभा का जन्म मुंबई के एक धनी परिवार में हुआ था। 1927 में वे इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने गए। हालाँकि उन्होंने परिवार की इच्छा के अनुसार इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन भाभा जल्द ही भौतिकी की ओर आकर्षित हो गए। 1932 में भाभा ने लिखा , “मैं आपसे स्पष्ट रूप से कहता हूँ कि व्यवसाय या इंजीनियर के रूप में नौकरी मेरे लिए नहीं है। यह मेरे स्वभाव से बिल्कुल अलग है और मेरे मिजाज और विचारों के बिल्कुल विपरीत है। भौतिकी ही मेरा क्षेत्र है। मुझे पता है कि मैं इसमें महान कार्य करूँगा।” भाभा ने 1934 में परमाणु भौतिकी में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
द्वितीय विश्व युद्ध से पहले भाभा भारत लौट आए और भारतीय विज्ञान संस्थान में शामिल हो गए, जहाँ उन्होंने कॉस्मिक रे रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की। 1945 में, उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की, जहाँ भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए प्रारंभिक शोध कार्य शुरू हुआ। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद, भाभा ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखकर तर्क दिया कि "अगले कुछ दशकों में, परमाणु ऊर्जा देशों की अर्थव्यवस्था और उद्योग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और यदि भारत दुनिया के औद्योगिक रूप से उन्नत देशों से और भी पीछे नहीं रहना चाहता है, तो विज्ञान की इस शाखा को विकसित करना आवश्यक होगा।"
1954 में, भाभा ने ट्रॉम्बे में एक परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना की, जिसका नाम बाद में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) रखा गया। परमाणु ऊर्जा के प्रबल समर्थक भाभा ने 1955 में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का आयोजन किया। वे अपनी मृत्यु तक भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख रहे।
होमी भाभा की मृत्यु 24 जनवरी, 1966 को जिनेवा जाते समय एक विमान दुर्घटना में हो गई थी। इनकी मृत्यु का शक CIA और मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान गांधी पर किया जाता है। 11 जनवरी 1966 को ही मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान ने रूस में श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को मुस्लिम रसोइए से उनके खाने में जहर देकर उनकी हत्या करवाई थी, और 24 जनवरी को डॉ होमी जहांगीर भावा की भी हत्या में CIA और मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान का हाथ था।
Dr. Homi Jehangir Bhabha (1909–1966) was a pioneering Indian nuclear physicist and the "father of the Indian nuclear programme". He founded key research institutions, including the Tata Institute of Fundamental Research (TIFR) and the Atomic Energy Establishment, Trombay (AEET), now named the Bhabha Atomic Research Centre (BARC) in his honor. A Cambridge-educated visionary, he championed India's self-reliance in nuclear energy, initiating its three-stage nuclear power program.
बहुत बड़ी कीमत चुकायी है देश ने इस बाबर बंशी मियां नेहरू,नकली गाँधी परिवार की वजह से.🤔😷😡
इसके बाद भी हिंदुस्तान की जनता की आंखें नहीं खुल रही हैं विशेष कर सनातनी हिंदू असावधान भाइयों की।
राजीव खान गांधी,Antonia, राउल विंची कोढ़ उर्फ पप्पू, अमिताभ श्रीवास्तव बच्चन परिवार ने कैसे भारतीय सेना के संसाधनों INS Vikrant जैसे युद्ध पोत, , सेना की जहाजों का छुट्टियां , पिकनिक, व्यक्तिगत अय्याशी,एशो आराम, चुनाव तक में दुरुपयोग किया हर हिन्दू को हर भारतीय को सत्य समझना चाहिए
एक चुड़ैल Antonio Maino आज भी भारत के टुकड़े करने में षड्यंत्र कर रही है वह है एंटोनिया माइनो उसका नाजायज कपूत पप्पू खान गांडी,पिंकी खान वाड्रा, रॉबर्ट वाड्रा सब के सब लुटेरे, हत्यारे, ड्रामा बाज ,अय्याश नित नए प्रोपगेंडा भड़काना बवाल मचाना । हर हिन्दू को इस गद्दार नकली परिवार से सावधान रहना चाहिए, #कांग्रेस_मुक्तहो_अपनाभारत✊✊
मोदीजी का दृढ़ निश्चय है की
भारतीय सेना, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान को मजबूत बनाना,साथ ही देश में इंफ्रास्ट्रक्चर ~निर्माण, संसाधनों का उपयोग कर भारत को भारतीयों को आत्म निर्भर बनाए। जिसमें देश के हर सदस्य का सहयोग अपेक्षित है।
अपने देश अपने सनातन से प्यार करें।
Keep open your eyes 👀 Love you nation Bharat ⛳
#NationFirst ♥️🚩🇮🇳
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Raveena Zen Raunak Jain
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026
फ़िरोज़ गाँधी की दास्तान
एक दो दिन से *कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर* बहुत चर्चा में है, उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ताओं को विशेषकर *पवन बखेड़ा* को *चमचा* कहा जैसा बाक़ी सभी भक्त लोग सम्माननीय कांग्रेसियों को कहते हैं।
*भारतीय राजनीति और संस्कृति में चमचो का अलग ही स्थान है, हमारे समाज में भी कुछ लोग चुनाव हराकर भी पद प्राप्त करने में कामयाब हो जाते हैं सिर्फ़ चमचागिरी करके, किंतु कांग्रेस में हमेशा ऐसा नहीं रहा।*
राहुल गाँधी के दादा जी *स्वर्गीय फिरोज गांधी* भारतीय राजनीति के इतिहास के वे *दामाद* थे, जिन्होंने *ससुराल में सोफ़े पर बैठकर चाय पीने के बजाय, ससुराल की ही ईंट से ईंट बजाना बेहतर समझा।*
उन्होंने नेहरू को 'ससुर' और गांधी को 'नाम' के रूप में चुना—एक ने उन्हें सत्ता के गलियारे दिए, दूसरे ने उन गलियारों में आग लगाने की हिम्मत!
*कल्पना कीजिए, आज के दौर में कोई दामाद अपने ससुर की कंपनी के घोटालों की फाइलें लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दे?* फिरोज गांधी ने 1957 में यही किया था। नेहरू जी तब देश के निर्विवाद नायक थे, लेकिन फिरोज ने संसद में खड़े होकर *मुंद्रा कांड* की ऐसी परतें खोलीं कि नेहरू जी को समझ नहीं आ रहा था कि वे सदन के नेता के रूप में जवाब दें या ससुर के रूप में गुस्सा करें।
*मुंद्रा कांड (1957): LIC का वो 'पहला पाप'*
यह वह समय था जब नेहरू का नाम ही कानून था, लेकिन फिरोज ने दिखाया कि लोकतंत्र में 'जनता का पैसा' किसी भी रिश्ते से ऊपर है।
*हरिदास मुंद्रा नाम के एक शातिर सट्टेबाज ने नेहरू सरकार के कुछ अधिकारियों और वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी के साथ मिलकर एक योजना बनाई। LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम), जो उस समय जनता के भरोसे का प्रतीक था, उसे मजबूर किया गया कि वह मुंद्रा की छह डूबती हुई कंपनियों के रद्दी शेयर खरीदे।*
16 दिसंबर 1957 को संसद में फिरोज गांधी ने जब फाइलें खोलीं, तो सन्नाटा पसर गया। उन्होंने तीखा व्यंग्य करते हुए पूछा— *”क्या यह सरकार का काम है कि वह सट्टेबाजों के कचरे को जनता की गाढ़ी कमाई से साफ करे?"*
यह शायद इतिहास का पहला उदाहरण था जहाँ डाइनिंग टेबल पर बैठा व्यक्ति (दामाद) सुबह संसद में जाकर अपने ही मेजबान (ससुर) की सरकार का 'कबाड़ा' कर रहा था। मुंद्रा कांड ने नेहरू को इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें अपने सबसे प्रिय वित्त मंत्री की बलि देनी पड़ी और सट्टेबाज मुद्रा को जेल भेजना पड़ा
उन्होंने LIC के पैसे के दुरुपयोग को ऐसे पकड़ा जैसे कोई अनुभवी जासूस। नतीजा? वित्त मंत्री का इस्तीफा हो गया और ससुर-दामाद के बीच डिनर टेबल पर सन्नाटा छा गया। फिरोज गांधी ने साबित किया कि "ससुराल गेंदा फूल" हो सकता है, लेकिन भ्रष्टाचार "कांटों की सेज" ही होगा।
*यह फिरोज गांधी ही थे जिन्होंने भारतीय राजनीति को सिखाया कि "देशभक्ति का मतलब सरकार की जी-हुजूरी करना नहीं, बल्कि जनता के पैसे की चौकीदारी करना है।"*
फिरोज गांधी का व्यक्तित्व बहुत गहरा और गंभीर था। वे केवल एक 'विद्रोही' नहीं थे, वे एक बेहद पढ़ा-लिखा और मेहनती सांसद थे। वे आंकड़ों के जादूगर थे। *लेकिन दुख की बात है की राहुल गांधी में उनके DNA का कुछ भी नहीं है।*
फिरोज गांधी सत्ता के सबसे करीब रहकर भी सत्ता की चापलूसी नहीं की।
फिरोज और इंदिरा का रिश्ता किसी ग्रीक ट्रेजेडी (Greek Tragedy) जैसा था। वे एक-दूसरे से प्यार तो करते थे, लेकिन फिरोज की 'आजाद खयाली' और इंदिरा की 'सत्ता की मजबूरी' के बीच एक गहरी खाई थी।
आज के दौर में जहाँ लोग 'टिकट' के लिए अपनी विचारधारा बदल लेते हैं, फिरोज गांधी ने अपनी विचारधारा के लिए अपना 'घर' (तीन मूर्ति भवन) तक छोड़ दिया और एक छोटे से सरकारी बंगले में रहने चले गए।
फिरोज गांधी को इतिहास ने थोड़ा भुला दिया। शायद इसलिए क्योंकि वे "फिट" नहीं बैठते थे। न वे पूरी तरह कांग्रेस के 'दरबारी' बन पाए, और न ही विपक्ष के 'मोहरे'।
*उनकी मौत 48 साल की उम्र में हुई। शायद उनका दिल इतना बड़ा था कि उसमें नेहरू की नाराजगी, इंदिरा का प्रेम और देश के घोटालों का बोझ—तीनों एक साथ नहीं समा सके।*
आज अगर फिरोज गांधी जीवित होते तो शायद वो अपना सरनेम बदलकर *मोदी* अवश्य कर लेते और राहुल गाँधी को देखते ही दादाजी थप्पड़ रसीद करने से भी बाज नहीं आते।
✍️विकास जैन
रविवार, 15 फ़रवरी 2026
क्या -क्या बताएं?
लीजिए पेश है एक और सच्चाई।
जवाहरलाल नेहरू अभिनेत्री नरगिस के मामा थे। नरगिस की नानी दिलीपा, मंगल पाण्डेय के ननिहाल के राजेन्द्र पाण्डेय की बेटी थीं।
उनकी शादी 1880 में बलिया में हुई थी लेकिन शादी के एक हफ़्ते के अंदर ही उनके पति गुज़र गए थे।
दिलीपा की उम्र उस वक़्त सिर्फ़ 13 साल थी। उस ज़माने में विधवाओं की ज़िंदगी बेहद तक़लीफ़ों भरी होती थी।
ज़िंदगी से निराश होकर दिलीपा एक रोज़ आत्महत्या के इरादे से गंगा की तरफ़ चल पड़ीं, लेकिन रात में रास्ता भटककर मियांजान नाम के एक सारंगीवादक के झोंपड़े में पहुँच गयीं जो तवायफ़ों के कोठों पर सारंगी बजाता था...
मियांजान के परिवार में उसकी बीवी और एक बेटी मलिका थे... वो मलिका को भी तवायफ़ बनाना चाहता था...
दिलीपा को मियांजान ने अपने घर में शरण दी...
और फिर मलिका के साथ साथ दिलीपा भी धीरे धीरे तवायफ़ों वाले तमाम तौर तरीक़े सीख गयीं...
और एक रोज़ चिलबिला की मशहूर तवायफ़ रोशनजान के कोठे पर बैठ गयीं...
रोशनजान के कोठे पर उस ज़माने के नामी वक़ील मोतीलाल नेहरू का आना जाना रहता था...
जिनकी पत्नी पहले बच्चे के जन्म के समय गुज़र गयी थी...
दिलीपा के सम्बन्ध मोतीलाल नेहरू से बन गए...
इस बात का पता चलते ही मोतीलाल के घरवालों ने उनकी दूसरी शादी लाहौर की स्वरूप रानी से करा दी जिनकी उम्र उस वक़्त 15 साल थी...
इसके बावजूद मोतीलाल ने दिलीपा के साथ सम्बन्ध बनाए रखे...
इधर दिलीपा का एक बेटा हुआ जिसका नाम मंज़ूर अली रखा गया...
उधर कुछ ही दिनों बाद 14 नवम्बर 1889 को स्वरूपरानी ने जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...
साल 1900 में स्वरूप रानी ने विजयलक्ष्मी पंडित को जन्म दिया...
और 1901 में दिलीपा से "जद्दनबाई" पैदा हुईं...
"अभिनेत्री नरगिस" इन्हीं जद्दनबाई की बेटी थीं...
मंज़ूर अली आगे चलकर मंज़ूर अली सोख़्त के नाम से बहुत बड़े मज़दूर नेता बने...
और साल 1924 में उन्होंने यह कहकर देशभर में सनसनी फैला दी कि...
मैं मोतीलाल नेहरू का बेटा और जवाहरलाल नेहरू का बड़ा भाई हूँ...
उधर एक रोज़ लखनऊ नवाब के बुलावे पर जद्दनबाई मुजरा करने लखनऊ गयीं... तो दिलीपा भी उनके साथ थी...
जवाहरलाल नेहरू काँग्रेस के किसी काम से उन दिनों लखनऊ में थे...
उन्हें पता चला तो वो उन दोनों से मिलने चले आए...
दिलीपा जवाहरलाल नेहरू से लिपट गयीं.और रो रोकर मोतीलाल नेहरू का हालचाल पूछने लगीं...
मुजरा ख़त्म हुआ तो जद्दनबाई ने जवाहरलाल नेहरू को राखी बाँधी...
साल 1931 में मोतीलाल नेहरू ग़ुज़रे तो दिलीपा ने अपनी चूड़ियाँ तोड़ डालीं...
और उसके बाद से वो विधवा की तरह रहने लगीं...
गुजरात के वरिष्ठ लेखक रजनीकुमार पंड्या जी की क़िताब ‘आप की परछाईयां’ से साभार 💯 #mahabharat #lovesong #romance #stories #love #NitishKumar #science #viralphoto #reelschallenge #viralvideoシ #Neharuchacha
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026
गाँधी परिवार, शर्मनाक
कोई पत्रकार राहुल गांधी से यह नहीं पूछ रहा कि राहुल जी जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बने थे, तब तक आप की नानी आपकी दोनों मौसी दोनों मौसी के पति बच्चे यानी आप का इटली का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था, उनको 3 सरकारी बंगले किस हैसियत से इलाट किए गए थे और वह किस हैसियत से तमाम सरकारी कार्यक्रम में शामिल होते थे??
और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के 15 दिन के बाद यह पूरा माइनों खानदान किसी चोर की तरह इटली क्यों चला गया??
आज राहुल गांधी नानी से मिलने के बहाने बार-बार इटली जाते हैं लेकिन कभी 10 साल कांग्रेस के सत्ता के दौरान और उसके पहले जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब यह धूर्त इटली नहीं जाते थे, क्योंकि सोनिया गांधी के मायके का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था और लुटियंस जोन में पांच बंगले उन्हें रहने को दिए गए थे।
यहां तक कि सोनिया गांधी के बचपन का दोस्त क्वात्रोची भी सोनिया गांधी के साथ रहता था।
सोनिया गांधी की मां पाउलो माइनो सरकारी कार्यक्रम में भाग लेती थी। राष्ट्रपति भवन में कई सरकारी कार्यक्रम में शामिल होती थी। पूरी सरकारी मशीनरी उनके आगे पीछे घूमती थी।
सोनिया गांधी की तीन बहने हैं जिसमें से दो बहने तो भारत में ही रहती थी और एक बहन का रोम और मिलान में बहुत बड़ा एंटीक स्टोर है।
और कई पुरातत्वविद ने इस बात का खुलासा किया था कि भारत से कई म्यूजियम में दुर्लभ चीजों को प्रदर्शनी के बहाने विदेश ले जाया जाता था और फिर वहां बड़े नाटकीय ढंग से उन्हें चोरी हुआ दिखा दिया जाता था और बाद में पता चलता था कि वह सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में बिकने के लिए गया है।
इस तरह से भारत की तमाम बेशकीमती दुर्लभ मूर्तियां तमाम आर्टीफैक्ट्स विदेशों में प्रदर्शनी के बहाने ले जाए गए और वहां चोरी की नौटंकी बता कर सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में पहुंचा दिया गया था 💯 #science #stories #viralphoto #reelschallenge #viralvideoシ #reelsfypシ #lovesong #love #romance
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026
गिरावट की हद
थर्ड क्लास राजनीति करने वाले सनकी राहुल गांधी की अब अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती होगी :-
पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब से जुड़ा मामला अब आगे बढ़ गया है । दिल्ली पुलिस ने इस किताब को ले एफआईआर दर्ज कर ली है ।
यह किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, और इसे अप्रकाशित किताब मानते हुए पुलिस ने स्पेशल सेल को जांच सौंपी है ।
यह मामला 2024 से शुरू होता है, जब जनरल नरवणे की संस्मरण किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ प्रकाशन के लिए तैयार थी ।
इस किताब में उनकी 40 साल की आर्मी सर्विस सेवा का ब्योरा है, जिसमें 1962 के बाद भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में हुए सैन्य टकराव के साथ-साथ अग्निपथ योजना जैसे विवादास्पद मुद्दों पर जानकारी शामिल है ।
पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब के प्री-ऑर्डर शुरू कर दिए थे, लेकिन रक्षा मंत्रालय (MoD) से जरूरी क्लियरेंस न मिलने के कारण प्रकाशन रुक गया । अब 2026 में भी किताब अप्रकाशित है ।
लेकिन सच बताएं तो बड़ा रहस्य उजागर करने और लम्बे समय से चली आ रही अपनी सनक को सच साबित करने के चक्कर में राहुल गांधी इस मामले में बुरी तरह फंस गए हैं ।
वैसे तो उन्हें बढ़ चढ़कर बोलने और लगातार जुगाली करने के बाद माफ़ी मांगने की पुरानी आदत है । लेकिन जनरल नरवणे की किताब को लेकर उनकी अब अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती होने वाली है ।
मोदी को जनरल नरवणे की किताब के जरिए घेरने की उनकी मंशा खुद उन्हीं के गले का फंदा बन सकती है । एक तरफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है और दूसरी तरफ उनके एलओपी पद के सामने भी संकट आ खड़ा हुआ है ।
जनरल साहब खुद कह चुके हैं कि उनकी किताब प्रकाशन हाउस में है , प्रकाशक ने क्लियरेंस के लिया रक्षा मंत्रालय भेजी है ।
अनुमति आने पर छपेगी किताब । तो राहुल गांधी के पास कवर फोटो सहित जो किताब है वह या तो किसी ने नरवणे के घर से चुराई या फिर पब्लिशिंग हाउस से ?
या फिर किसी के लम्बे हाथ यदि बहुत लम्बे हुए तो पता लगाना होगा कि कहीं डिफेंस मिनिस्ट्री तक तो नहीं जा पहुँचे ? खैर , एफआईआर हो चुकी और पुलिस ने जाँच शुरू कर दी ।
तो एब्रॉड आई या एमेजॉन से आई , खुलासा तो होगा ही । एमेजॉन कोई प्रकाशन संस्थान नहीं केवल विक्रेता है । बताना उसे भी पड़ेगा कि उसके पास किस पब्लिशर से आई किताब ?
जनरल नरवणे में जिस पेंगुइन हाउस को थी उसने एक बार साफ कह दिया कि किताब अभी छपी ही नहीं , डिफेंस मिनिस्ट्री के पास विचारार्थ है ।
हालांकि बाद में पब्लिशर हाथ मलता भी दिखाई दिया । तो राहुल गांधी ! आपने तो संसद में और संसद के बाहर पढ़ दी किताब । बताइए कहाँ से आई आपके पास । क्या हवाला से ? समय आ गया है कि अब पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे ही मीडिया के बीच आएं अथवा अपना वीडियो बयान जारी करें ।
डिफेंस से जुड़े विषयों पर पहले भी किताबें लिखी गई हैं । लेकिन उनमें से कोई किताब संसद में लाकर इस तरह विवादास्पद बनाई गई हो तो हमें याद नहीं । हां राजीव गांधी जब 414 सीटें लेकर प्रधानमंत्री बने तब बोफोर्स कांड ने उन्हें डुबो दिया था ।
हम सेना को संसद अथवा संसद के बाहर लाकर जबरन घसीटने के सख्त ख़िलाफ़ हैं । राहुल गांधी को पता तो होगा पर इतनी तमीज नहीं कि संसद में सैन्य सवाल उठाना कितना गंभीर विषय है ।
लेकिन किसी भी तरह मोदी को नीचा दिखाऊं और उन्हें उतारकर पीएम की कुर्सी पर मैं खुद बैठ जाऊँ , इस सनक ने राहुल को यहां तक पहुँचा दिया है ।
जहां तक किताब में जनरल नरवणे को दिए गए प्रधानमंत्री के आदेश का सवाल है वह गोपनीय विषय है । थर्ड क्लास राजनीति करने वाले महाराजा के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे गंभीर विषय को भारत में कोई भी अन्य व्यक्ति कभी न उठाता ।
और हां , आपके जमाने तो सेना के हाथ बांध दिए जाते थे ।
सबसे बड़ी बात नरवणे के पूछने पर पीएम नरेंद्र मोदी का इससे बढ़िया जवाब क्या हो सकता है कि उस हालात में सेना जो उचित समझे वह करे ?
सादर/सा
राहुल अब क्या जबाब देंगे?
थर्ड क्लास राजनीति करने वाले सनकी राहुल गांधी की अब अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती होगी :-
पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब से जुड़ा मामला अब आगे बढ़ गया है । दिल्ली पुलिस ने इस किताब को ले एफआईआर दर्ज कर ली है ।
यह किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, और इसे अप्रकाशित किताब मानते हुए पुलिस ने स्पेशल सेल को जांच सौंपी है ।
यह मामला 2024 से शुरू होता है, जब जनरल नरवणे की संस्मरण किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ प्रकाशन के लिए तैयार थी ।
इस किताब में उनकी 40 साल की आर्मी सर्विस सेवा का ब्योरा है, जिसमें 1962 के बाद भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में हुए सैन्य टकराव के साथ-साथ अग्निपथ योजना जैसे विवादास्पद मुद्दों पर जानकारी शामिल है ।
पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब के प्री-ऑर्डर शुरू कर दिए थे, लेकिन रक्षा मंत्रालय (MoD) से जरूरी क्लियरेंस न मिलने के कारण प्रकाशन रुक गया । अब 2026 में भी किताब अप्रकाशित है ।
लेकिन सच बताएं तो बड़ा रहस्य उजागर करने और लम्बे समय से चली आ रही अपनी सनक को सच साबित करने के चक्कर में राहुल गांधी इस मामले में बुरी तरह फंस गए हैं ।
वैसे तो उन्हें बढ़ चढ़कर बोलने और लगातार जुगाली करने के बाद माफ़ी मांगने की पुरानी आदत है । लेकिन जनरल नरवणे की किताब को लेकर उनकी अब अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती होने वाली है ।
मोदी को जनरल नरवणे की किताब के जरिए घेरने की उनकी मंशा खुद उन्हीं के गले का फंदा बन सकती है । एक तरफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है और दूसरी तरफ उनके एलओपी पद के सामने भी संकट आ खड़ा हुआ है ।
जनरल साहब खुद कह चुके हैं कि उनकी किताब प्रकाशन हाउस में है , प्रकाशक ने क्लियरेंस के लिया रक्षा मंत्रालय भेजी है ।
अनुमति आने पर छपेगी किताब । तो राहुल गांधी के पास कवर फोटो सहित जो किताब है वह या तो किसी ने नरवणे के घर से चुराई या फिर पब्लिशिंग हाउस से ?
या फिर किसी के लम्बे हाथ यदि बहुत लम्बे हुए तो पता लगाना होगा कि कहीं डिफेंस मिनिस्ट्री तक तो नहीं जा पहुँचे ? खैर , एफआईआर हो चुकी और पुलिस ने जाँच शुरू कर दी ।
तो एब्रॉड आई या एमेजॉन से आई , खुलासा तो होगा ही । एमेजॉन कोई प्रकाशन संस्थान नहीं केवल विक्रेता है । बताना उसे भी पड़ेगा कि उसके पास किस पब्लिशर से आई किताब ?
जनरल नरवणे में जिस पेंगुइन हाउस को थी उसने एक बार साफ कह दिया कि किताब अभी छपी ही नहीं , डिफेंस मिनिस्ट्री के पास विचारार्थ है ।
हालांकि बाद में पब्लिशर हाथ मलता भी दिखाई दिया । तो राहुल गांधी ! आपने तो संसद में और संसद के बाहर पढ़ दी किताब । बताइए कहाँ से आई आपके पास । क्या हवाला से ? समय आ गया है कि अब पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे ही मीडिया के बीच आएं अथवा अपना वीडियो बयान जारी करें ।
डिफेंस से जुड़े विषयों पर पहले भी किताबें लिखी गई हैं । लेकिन उनमें से कोई किताब संसद में लाकर इस तरह विवादास्पद बनाई गई हो तो हमें याद नहीं । हां राजीव गांधी जब 414 सीटें लेकर प्रधानमंत्री बने तब बोफोर्स कांड ने उन्हें डुबो दिया था ।
हम सेना को संसद अथवा संसद के बाहर लाकर जबरन घसीटने के सख्त ख़िलाफ़ हैं । राहुल गांधी को पता तो होगा पर इतनी तमीज नहीं कि संसद में सैन्य सवाल उठाना कितना गंभीर विषय है ।
लेकिन किसी भी तरह मोदी को नीचा दिखाऊं और उन्हें उतारकर पीएम की कुर्सी पर मैं खुद बैठ जाऊँ , इस सनक ने राहुल को यहां तक पहुँचा दिया है ।
जहां तक किताब में जनरल नरवणे को दिए गए प्रधानमंत्री के आदेश का सवाल है वह गोपनीय विषय है । थर्ड क्लास राजनीति करने वाले महाराजा के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे गंभीर विषय को भारत में कोई भी अन्य व्यक्ति कभी न उठाता ।
और हां , आपके जमाने तो सेना के हाथ बांध दिए जाते थे ।
सबसे बड़ी बात नरवणे के पूछने पर पीएम नरेंद्र मोदी का इससे बढ़िया जवाब क्या हो सकता है कि उस हालात में सेना जो उचित समझे वह करे ?
सादर/सा
मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026
विचारणीय योग्य
Riyajeet Rathod के 'अध्यात्मिक सत्संग' ग्रुप से अग्रसारित
इस पृथ्वी पर अनंत कालचक्र हुए हैं, प्रत्येक काल में 6+6 युग (era) होते हैं।
पहले 6 युगो का कालचक्र उत्सर्पिणी( ascending) और दुसरे 6 युगो का कालचक्र अवसर्पिणी (descending) कालचक्र कहलाता है।
अभी वर्तमान में अवसर्पिणी काल का 5वा युग(era) चल रहा है।
अवसर्पिणी काल के पहले 3 युग (era) और उत्सर्पिणी के अंतिम 3 युग (era) "युगलिककाल" कहलाते हैं और उस समय की धरती को "भोगभुमि" कहा जाता है जिसे पश्चिमी धर्मों में garden of Eden(आदम बाग) माना गया है।
उस युगलिककाल में पति-पत्नी जोड़े के रूप में(युगल) पैदा होते हैं,
और 10 प्रकार के पेड़ होते हैं जिन्हें इच्छा वृक्ष (कल्पवृक्ष) कहा जाता है,शास्त्रों में यह भी लिखा है कि एक कल्प समय तक आयु होने से इन्हें कल्पवृक्ष कहा जाता है।
ये युगल लोग उन पेड़ों के फलों को खाकर जीते हैं,और इन कल्पवृक्षों से इनकी सभी जरूरते भी पुरी हो जाती है।
उन्हें किसी भी प्रकार के काम करने की ज़रूरत नहीं होती है, जैसे व्यवसाय आदि करके जीविकोपार्जन करना,खाना बनाना आदि,
उनकेे शरीर की शक्ति,ऊंचाई,आयु लाखों वर्षों की होती है,सम्पुर्ण जीवन उनका सुखमय ही होता है।(वास्तव में अवसर्पिणीकाल के कुल 6 युगों में शरीर की शक्ति,ऊंचाई,आयु घटते क्रम में होती है जिस कारण इस कालचक्र को अवसर्पिणी(descending)काल कहा जाता है।)
युगलिक काल में पुरुष और स्त्री जोड़े के रूप में ही पैदा होते हैं,आजीवन ब्रह्मचारी की तरह ही रहते हैं, मात्र उनकी आयु के कुछ ही वर्ष शेष रहने पर स्त्री ऋतुवती होती है फिर तीव्र मोहकर्म के उदय होने के कारण संभोग कर अनुवांशिक गुणों के कारण अपनी ही तरह नये युगल को जन्म देते हैं। मात्र 6 महिने ही उनका लालन-पालन कर वे मरकर स्वर्ग में जन्म प्राप्त करते हैं।
इस युगलिक काल के वक्त "ना धर्म था, ना अधर्म" इसलिए कोई भी दीक्षा लेकर साधना कर मोक्ष भी प्राप्त नहीं कर सकता था।(युगलिक काल में धर्म ना होने के कारण सनातन धर्म की शुरुआत ऋषभदेव द्वारा धर्म की स्थापना के बाद ही मानी जानी चाहिए)
लेकिन युगलिक काल के लोगों का आचरण अच्छा होने से जब भी वे मरते हैं तो वे निश्चित रूप से स्वर्ग को ही प्राप्त करते हैं ,
इसलिए पश्चिमी धर्मों में इस भोगभूमि को स्वर्ग मान लिया गया।
यह युगलिककाल की अवधि पूरे 9 कोड़ाकोडी सागरोपम अथार्त हमारे लिए असंख्य वर्षो के समय की होती है।
युगलिककाल में राज्य व्यवस्था नही होती, मात्र मनु (कुलकर) व्यवस्था ही होती है।
उनके मुखिया को कुलकर(मनु) बुलाया जाता था, मुखिया मनु कहलाने के कारण ही मानव, मनुष्य,human आदि शब्दों का उद्भव हुआ।
वैदिक और जैन दोनों ही धर्मों अनुसार कुल 14 कुलकर (मनु) थे और जिनमें अंतिम मनु (कुलकर) "नाभि" ही थे। जिनके नाम पर से प्राचीन भारत का एक नाम "अजनाभवर्ष" भी है जो भागवतपुराण जैसे कई शास्त्रों में मिलता है।
जब यह युगलिक काल समाप्त होने जा रहा था, तब कल्पवृक्षों का प्रभाव धीमा हो गया था, जिससे सभी युगलिक लोग परेशान हो गए थे, तब वे अपने कुलकर नाभि के पास गये।
तब नाभि मनु ने युगलिको की समस्या का निवारण करने के लिए अपने बेटे ऋषभ को विश्व में प्रथम राजा घोषित किया,
तब स्वर्गलोक के अधिपति इंद्रदेव ने आकर उन्हें वस्त्रालंकारो और मुकुट से सुसज्जित कर उनका राज्याभिषेक किया। प्रजा का पालन करने और विशेष अणु होने के कारण उनका यह मुकुट सहित सुसज्जित रुप "विष्णु" कहलाया।
ऋषभदेव को जन्म से ही मति,श्रुत और अवधि ये तीन ज्ञान थे ,वास्तव में सभी तीर्थंकरो को जन्म से ही ये तीन ज्ञान होते ही हैं।
ऋषभदेव ने राज्य व्यवस्था संचालन करने के लिए शूद्र,वैश्य और क्षत्रिय वर्ण परंपरा शुरु करी।(ब्राह्मण वर्ण बाद में उनके पुत्र भरत चक्रवर्ती ने शुरू किया था )
ऋषभदेव ने स्त्रियो को 64 और पुरुषों को 72 कलाए सिखाई ,
जिनमें खेती करना, घुड़सवारी ,बर्तन बनाना,अस्त्र बनाना, पाककला, नृत्यकला , लिखना-पढना आदि सभी कलाए सम्मिलित है।
वर्णव्यवस्था की स्थापना का उद्देश्य था कि रोजगार का प्रशिक्षण कुल में ही निशुल्क प्राप्त हो जाए और सभी एक-दूसरे के सहयोगी बने रहे।
ऋषभदेव की जुड़वां पत्नी सुनंदा थी,
लेकिन सुमंगला नाम की एक लड़की जिसे इसाई धर्म में eve और इस्लाम धर्म में हुव्वा कहा जाता है, उसका जुड़वां पति युगलिक काल का पतन होने से समय से पहले ही मर गया था।वह विरह वेदना मे अत्यंत व्याकुल हो गई थी ,उस लड़की के दुःख को दूर करने के लिए नाभि ने अपने पुत्र ऋषभदेव के साथ उसका विवाह करवाया था।
(पुराणों में इस विवाह का जिक्र ब्रह्मा और गायत्री के विवाह के रुप में मिलता है, युगल पत्नी सुनंदा को पहले से ही विवाहित पत्नी सावित्री माना है)
और इसी विवाह को इस्लाम मजहब में आदिम और हुव्वा और ईसाई धर्म में Adam and Eve का विवाह कहा जाता है।
यह दुनिया में पहला विवाह था, स्वर्ग के सभी देवी-देवता (फ़रिश्ते /angels) उस विवाह में शामिल हुए थे।
ये ऋषभदेव जैन धर्म के पहले तीर्थंकर आदिनाथ है।
जिन्हें वेदो में प्रजापति(प्रजा का पालन करने वाला सर्वप्रथम राजा) माना जाता है। प्रजापति की दुहिता का अर्थ वे सभी नगरिया थी जिन पर ऋषभदेव का शासन था जैसे विनीता आदि।
ऋग्वेद में १२९ ऋचाए में ऋषभ और 12 ऋचाओं में वृषभरूप में इनका संदर्भ देखने को मिलता है। वेदों में रूद्र(शिव) को ऋषभदेव का प्राय: ही मानकर कृतिवसनधारी(वस्त्र का टुकड़ा पहनने वाला,दिगंबर,केशीन्(जटाधारी)आदि कहा है,क्योकि सभी तीर्थंकर पांच मुट्ठी से केशलोच करते हैं मात्र ऋषभदेव ने ही 4 मुट्ठी से केशलोच कर पीछे जटा छोड़ दी थी। ऋषभदेव को वेदों में नग्न होने से शिश्नदेवा भी कहा है जिसकारण से लिंगपुजा का प्रचलन शुरू हुआ।
ब्रह्मज्ञान अथार्त आत्मा का सम्पुर्ण केवलज्ञान प्राप्त होने पर तीर्थंकर समोवसरण में बैठकर चारों दिशाओं में चार प्रतिबिंब से ब्रह्मज्ञान का उपदेश देते हैं, जिसकारण ऋषभदेव चार मुखो वालें ब्रह्मा कहलाये।
ऋषभदेव को ही पुराणों में ब्रह्मा, विष्णु, महेश माना जाता हैं।
और बौद्ध धर्म मे प्रथम बुद्ध आदिबुद्ध माना जाता हैं।
आदि का अर्थ सर्वप्राचीन होने से ऋषभदेव जैन धर्म में पहले तीर्थंकर आदिनाथ कहलाये।
इन्हें ही ईसाई धर्म में एडम माना जाता है।
यहूदी धर्म और इस्लाम धर्म में उन्हें पहला पैगंबर आदिम बाबा माना जाता है।
अरब में वे मानते हैं कि अल्लाह ने पहले आदिम को बनाया और फिर स्वर्ग से हिंद प्रदेश (हिंदुस्तान) में भेज दिया।
Forbidden एप्पल का पेड़ वास्तव में कल्पवृक्ष है। आदिनाथ का ही उच्चारण आदिम हो गया, "आदमी" शब्द का उद्भव आदिम से ही हुआ है।
ऋषभदेव जब ग्रहवस्था में थे तब ऋषभदेव के 100 जुड़वां बेटे और दो बेटियां थी।
जुड़वां युग में पति और पत्नी जुड़वां पैदा होते थे
इस प्रथा को बदलने के लिए, आदिनाथ ने अपने बेटे भरत(काबिल/Cein) का विवाह बेटी ब्राह्मी(Layudha)के साथ निश्चित किया, जो बाहुबलि(हाबिल/Abel) की जुड़वां थी।
और
बाहुबली (हाबील/Abel) का विवाह सुंदरी के साथ तय किया ,जो भरत के साथ पैदा हुई थी,अतिसुंदरी होने से उसका नाम सुंदरी(Iqlimiya) था।ये सभी नाम यहुदी,इसाई और इस्लाम मजहब में मिलते है।
आदिम/एडम/आदिनाथ को ही विश्व में पहला दार्शनिक माना जाता है, राजदरबार में नर्तकी नीलांजना की अचानक मृत्यु होने पर उन्हें अपने क्षणभंगुर मानव देह पर विचार कर वैराग्य उत्पन्न हुआ।और उन्होंने सन्यासी बनने का निश्चय किया ।
उन्होंने अपने बेटों के बीच अपने राज्य को विभाजित करके संन्यास ग्रहण किया, और वे दुनिया के पहले तपस्वी बन गए।
उन्होंने किसी भी धर्म की स्थापना नहीं की बल्कि उन्होंने "धर्म" की स्थापना की।
विश्व के आदि(प्रथम) तीर्थंकर होने के कारण वे आदिनाथ कहलाए।
भारतीय ऋषि शब्द भी ऋषभदेव से ही पड़ा है, कई सभ्यताओं में इनका नाम वृषभ या बुल गॉड के रूप में भी मिलता है, क्योंकि ऋषभ का शब्द का अर्थ बैल होता है, और उनका चिन्ह भी बैल ही था। जिस कारण आदिनाथ को वृषभनाथ भी कहा जाता है, वृषभ चिह्न को पुराणों में नंदी बैल कहा गया है। सिंधु सभ्यता में जो बैल के मुंह वाले देव की मूर्ति मिलती है यह वास्तव में ऋषभदेव ही है।
दीक्षा के पश्चात 400 दिन तक ऋषभदेव को भूखा रहना पड़ा,क्योकि विश्व के पहले सन्यासी वे ही थे इसलिए प्रजा को भिक्षा में क्या देना यह पता नहीं था इसीलिए वे हीरे,मोती,माणिक,हाथी,घोड़े आदि उनके राजा को भेंट करते थे।
लेकिन 400 दिन के बाद श्रेयांश कुमार ने आदिनाथ को इक्षु (गन्ना) के रस से उपवास का पारणा करवाया जिसके कारण वह दिन इतिहास में "अक्षयतृतीया" पर्व नाम से प्रसिद्ध हुआ। जो पर्व सम्पुर्ण भारत में प्राचीनकाल से हिंदू और जैन दोनों ही धर्मों द्वारा मनाया जा रहा है।ईक्षुरस से पारणा करवाने के कारण ऋषभदेव का वंश "इश्वांकु वंश" कहलाया। हिंदू और जैन दोनों ही धर्मों में इश्वांकु वंश को प्राचीनतम वंश माना है।
ऋषभदेव के साथ प्रेमवश अन्य राजाओं ने भी उनके साथ सन्यास ग्रहण किया था, लेकिन वे ऋषभदेव की तरह 400 दिन तक भूख-प्यास सहन नहीं कर पाये,जिस कारण वे स्वयं ही फल आदि तोडकर सन्यासी ऋषि बनकर रहने लगे।
तभी से सनातन धर्म की दो परंपरा शुरू हुई,
1-निर्ग्रंथ,आर्हत,श्रमण,जैन मुनि परंपरा
2-वैदिक,ब्राहत ऋषि परंपरा
उधर राज्य में ऋषभदेव का पुत्र भरत चक्रवर्ती(Cain/काबिल) महत्वाकांक्षी था, उसने अपने भाइयों के राज्यों को भी अपने राज्य में शामिल होने के लिए कहा।
जब अन्य सभी 98 पुत्रों ने अपने पिता ऋषभदेव से पूछा तब ऋषभदेव ने कहा कि बाहर के शत्रुओं पर विजय नहीं लेकिन स्वयं के ही अंदर अपनी आत्मा के शत्रु लोभ,क्रोध,अहंकार,मोह आदि पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।
और यह सुनकर सभी पुत्र भी संन्यासी बन गए।
जब बाहुबली(हाबिल) ने भरत(काबिल) को राज्य देने से इंकार कर दिया, तो दोनों बेटों के बीच मल्लयुद्ध हुआ जिसमें जब भरत(काबिल) को मारने के लिए बाहुबलि (हाबिल) ने अपनी मुट्ठी उठाई तो युद्ध भूमि में ही उसे पछतावा हुआ कि वह मात्र राज्य के लिए अपने भाई को मारने चला है और उसी उठाई मुट्ठी से उसने अपने बालों को खींच कर मुंडन कर संन्यासी बन गया,और युद्ध भूमि में वही खड़े खड़े ध्यान में लीन हो गया,
बाहुबली की प्रतिमा गोमतेश्वर बाहुबली के नाम से दक्षिण में पूजी जाती है,जो एक ही पहाड़ में से निकली हुई विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा है।
ब्राह्मी(Layudha) जो कि बाहुबलि के साथ पैदा हुई थी, वह भी दीक्षा लेकर साध्वी बन गई थी, यह वही ब्राह्मी है जिसे ऋषभदेव ने 18 लिपियों में लिखना सिखाया था, विश्व की प्राचीनतम लिपि ब्राह्मी उन्हीं के नाम से है।
दुसरा बेटा भरत अपनी जुड़वां बहन "सुंदरी" से शादी करना चाहता था, जो बहुत खूबसूरत थी,
लेकिन सुंदरी भी ब्राह्मी की तरह साध्वी बनना चाहती थी इस कारण उसने कई सालों तक लगातार उपवास(आयंबिल तप) किये, ताकि उसका रूप फीका हो जाए और भरत चक्रवर्ती(काबिल) पर उसका आकर्षण कम हो जाए। बाद में भरत चक्रवर्ती ने सुंदरी को साध्वी बनने की अनुमति दे दी थी।
आदिनाथ के पुत्र भरत चक्रवर्ती के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारतवर्ष पड़ा है इसका प्रमाण भागवतपुराण,लिंगपुराण आदि कई शास्त्रों में मिलता है।
इन्हीं भरतचक्रवर्ती को पुराणों में शिवपुत्र कार्तिकेय और दक्षिण में मुरूगन देव के नाम से भी पूजा जाता है।
लेकिन यहुदियों की किताब इंजिल और इस्लाम की किताब कुरान में कहा गया है कि काबिल(भरत चक्रवर्ती) और हाबिल(बाहुबलि) के बीच जो युद्ध हुआ था वह सुंदरी(Iqlimiya) के लिए था।जिसमें काबिल ने हाबिल को मार डाला और उसे जमीन में दफन कर दिया,
उनकी किताबें ये नही बताती कि जब हाबिल को मारा जा रहा था तब कोई भी फरिश्ता उस बेगुनाह हाबिल को बचाने क्यो नही आया,और काबिल का निकाह जब दोनों बहनों से ही नहीं हुआ तो फिर किससे हुआ? वास्तव में धरती पर उस समय सिर्फ आदिम,हुव्वा,हाबिल,काबिल और दोनों बहने ही नहीं थी बल्कि पूरी प्रजा मौजूद थी।पुरा देश मौजुद था।
वास्तव में हाबिल (बाहुबलि) ने सन्यास ग्रहण किया था और बाद में उन्हें आत्मज्ञान(कैवलज्ञान) और मुक्ति(मोक्ष) भी मिला था।
कुरान और बाइबल और यहुदियों की इंजिल में पहले नबी(पैगंबर) के बारे में जो लिखा गया है, वह जैन धर्म से लिया गया है।
कुरान 1400 साल पहले लिखी गई थी, बाइबिल 2000 साल पहले लिखी गई थी,
लेकिन इन दोनों में यहूदी धर्म जो 4000 वर्ष पुराना है उनकी किताबें इंजिल,तनख,तोरह मे से सुनी बाते लिखी गई है।
जब इब्राहिम( यहूदी धर्म के संस्थापक) आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में थे,
तब एक जैन साधु जो पहाड़ पर ध्यान कर रहे थे, इब्राहीम उन जैन साधु से मिले, उस जैन साधु के द्वारा दिए गए उपदेशों को ही यहूदी धर्म में कमांडमेंट्स कहा जाता है।ये सभी कमांडमेंट्स मूलभूत रुप से जैनधर्म के मूल सिद्धांत ही है।
स्वर्ग(जन्नत/heavan)और नरक(जहन्नुम/hell) का ज्ञान भी जैन धर्म से ही पश्चिमी धर्मो में आया है।
शैतान का कांसेप्ट भी जैन धर्म से ही निकला है वास्तव में स्वर्ग में जन्म लेने वाले देवों(फरिश्ते/angels)में से कुछ देव जिज्ञासा होने के कारण नरक में जाते हैं। नरक की जीवो को यातना और पीड़ा देते हैं ,जिसकारण उन्हें "परमाधामी देव" कहा जाता है इनके क्रुर स्वभाव के कारण ही इन्हें शैतान कहां गया है।
पश्चिमी धर्मों में भी यही माना है कि शैतान भी जन्नत में जन्मा एक देव(फरिश्ता)ही था जिसे अल्लाह ने अपनी तारिफ ना करने के कारण जन्नत से बाहर निकाल दिया था।
जैन धर्म का पुर्वजन्म का सिद्धांत भी वैदिक और बौद्ध धर्म के साथ यहुदी धर्म द्वारा भी स्वीकारा गया है।
जो एक सृष्टी रचयिता का कांसेप्ट है वह काल्पनिक है।
वास्तव में जैन धर्म में बहुत ही बारिकी से समझाया गया है कि किसप्रकार यह सम्पुर्ण सृष्टी अंनंत जीवो के,और प्रकति के संयोग से एक joint ventureके रुप में बनती हैं और टूटती है।
परमात्मा एक नही अनंत है।
वेदों और जैन धर्म अनुसार आत्मा ही परमात्मा है(अहम् ब्रह्मास्मि) जो कि सभी कर्मों और दोषों से शुद्ध होकर सभी स्वर्गों से ऊपर मोक्ष में स्थान प्राप्त करती है,जिसे वेदों में वैंकुठ और पश्चिमी सभ्यता में (god)अल्लाह का निवास स्थान(above all heavens) कहा है।
हमारी आने वाली पीढ़ी को यदि संपूर्ण विश्व में शांति और एकता के साथ जीना है तो दो ही मूल मंत्र याद रखने होंगे।
1-आत्मा ही ब्रह्म है।
रविवार, 8 फ़रवरी 2026
गाँधी परिवार की फ़जियत
राहुल गांधी जिस बिना छपी किताब को लेकर संसद में घूमते दिखे, वह असल में कोई शोधग्रंथ नहीं बल्कि आरोपों, चयनित उद्धरणों और अधूरी सूचनाओं का पुलिंदा था निशिकांत दुबे ने संसद के भीतर कांग्रेस को जिस तरह घेरा, वह सिर्फ एक पलटवार नहीं था, बल्कि गांधी परिवार के लंबे राजनीतिक इतिहास पर खड़े होते सवालों की एक पूरी श्रृंखला थी दुबे ने यह स्पष्ट किया कि अगर आरोपों के आधार पर राजनीति करनी है, तो फिर गांधी से लेकर राहुल तक की पूरी विरासत को भी उसी कसौटी पर रखा जाएगा...!!
महात्मा गांधी के नाम से शुरू होकर कांग्रेस अक्सर नैतिकता का दावा करती है, लेकिन आज़ादी के बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकारों के फैसलों पर दर्जनों किताबें सवाल उठाती रही हैं आरसी मजूमदार जैसे इतिहासकारों ने आज़ादी के विभाजन और उसके बाद की नीतियों पर गंभीर आलोचनाएँ लिखीं कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र ले जाने का निर्णय, पीओके का स्थायी हो जाना, और युद्धविराम ये सब ऐसे फैसले हैं जिन पर The Story of Kashmir और India Wins Freedom जैसी पुस्तकों में तीखी बहस मिलती है यह कोई भाजपा का नैरेटिव नहीं, बल्कि कांग्रेस-कालीन दस्तावेज़ों और स्वयं कांग्रेस नेताओं के लिखे संस्मरण हैं...!!
नेहरू युग पर एल्फ़्रेड डेविड, शौर्य दोवल और जदुनाथ सरकार जैसे लेखकों ने विदेश नीति, चीन नीति और रक्षा तैयारियों की भारी चूक का उल्लेख किया है 1962 की पराजय पर Himalayan Blunder जैसी किताबें बताती हैं कि आदर्शवाद के नाम पर देश की सुरक्षा के साथ कैसा समझौता हुआ। इंदिरा गांधी के दौर पर आएं तो The Emergency और Indira Gandhi: A Life in Nature जैसी पुस्तकों में आपातकाल के दौरान प्रेस की आज़ादी कुचलने, विपक्ष को जेल में डालने और संविधान की आत्मा से खिलवाड़ का विस्तृत वर्णन है यह सब आरोप नहीं, बल्कि उस दौर के सरकारी आदेश, अदालती टिप्पणियाँ और पत्रकारों की प्रत्यक्ष गवाही हैं...!!
राजीव गांधी के समय बोफोर्स घोटाला सिर्फ एक राजनीतिक नारा नहीं रहा Boforsgate और The Politician जैसी किताबों में स्वीडन से आए दस्तावेज़, बैंक ट्रेल्स और जांच रिपोर्टों का उल्लेख मिलता है कोर्ट के फैसले भले तकनीकी आधार पर आए हों, लेकिन नैतिक सवाल आज भी जिंदा हैं इसके बाद पी.वी. नरसिम्हा राव के काल में कांग्रेस ने सुधारों का श्रेय लिया, पर उसी दौर में जैन हवाला जैसे मामलों ने पार्टी की आंतरिक सड़ांध भी उजागर की, जिस पर The Scam जैसी पुस्तकों में विस्तार है...!!
सोनिया गांधी के उदय के साथ कांग्रेस एक परिवार-केंद्रित संगठन बनती चली गई यह आरोप भी सिर्फ विरोधियों का नहीं The Accidental Prime Minister और The Insider जैसी किताबें बताती हैं कि मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्री की सीमाएँ कहाँ तक तय की जाती थीं और कैसे नीतिगत फैसलों पर पार्टी अध्यक्ष का प्रभाव निर्णायक था 2G, कोयला घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स इन सब पर CAG रिपोर्टें, चार्जशीट्स और न्यायिक टिप्पणियाँ मौजूद हैं, जिनका उल्लेख 2G Spectrum Scam और Coalgate Files जैसी पुस्तकों में मिलता है...!!
और फिर आते हैं राहुल गांधी पर The Prince और The Rahul Gandhi Story जैसी किताबें उनके राजनीतिक प्रशिक्षण, विदेश यात्राओं, पार्टी के भीतर निर्णयहीनता और बार-बार की चुनावी विफलताओं का विश्लेषण करती हैं संसद में देशद्रोह, सेना, न्यायपालिका और चुनाव आयोग पर दिए गए बयानों को लेकर अदालतों की फटकार, माफी और नोटिस ये सब सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं भारत को डेड डेमोक्रेसी कहने जैसे बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए गए, जिन पर विदेश नीति विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने भी सवाल उठाए हैं....!!
निशिकांत दुबे का हमला इसी पृष्ठभूमि में था उनका कहना साफ था अगर कांग्रेस आरोपों की किताबें लेकर बैठेगी, तो गांधी परिवार की पूरी कुंडली भी किताबों, दस्तावेज़ों और इतिहास से ही खोली जाएगी फर्क बस इतना है कि एक तरफ़ बिना छपी, बिना स्रोत वाली फाइलें हैं और दूसरी तरफ़ दशकों से प्रकाशित किताबें, सरकारी रिपोर्टें और अदालती रिकॉर्ड संसद में कांग्रेस का असहज होना इसीलिए स्वाभाविक था, क्योंकि सवाल किसी एक नेता पर नहीं, बल्कि उस राजनीतिक विरासत पर था जिसने नैतिकता का ठेका लेकर सत्ता का सबसे लंबा दौर देखा और हर मोड़ पर विवादों की छाया भी...!!
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026
शनिवार, 31 जनवरी 2026
कठोर नियम बनें
BHU हों jNU या AMU
सभी में सब्सिडी से पढ़ाई रहे छात्र यदि एक बार से ज्यादा बार फेल होते हैं तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए. ऐसे छात्र ही बार बार फेल होकर राजनीती करने लगते हैं. मुफ्त पढ़ाई, मुफ्त कमरा लेकर वर्षो तक अड्डा जमाये रखते हैं. ऐसे छात्र ही कैम्पस में हंगामा मचाये रखते हैं. गुंडों को आमंत्रण देते हैं.
सरकार को नियमों में परिवर्तन कर कड़े नियम बनाने चाहिए.
बुधवार, 28 जनवरी 2026
कांग्रेस की चलबाज़ी
तब कांग्रेस का जगद्गुरु प्रेम और सम्मान कहां विलुप्त हो गया था...!!
कांग्रेसियों अपना कलंकित इतिहास देखो....!!
नवम्बर 2004 दिल्ली में मनमोहन सिंह की कठपुतली सरकार डोर सोनिया गांधी के साथ में तमिलनाडु में जयललिता की सरकार डोर सोनिया के हाथ में और सोनिया की डोर वेटिकन सिटी के साथ में और वेटिकन का लक्ष्य भारत का ईसाई करण करना और तमिलनाडु में ईसाई धर्म में धर्मांतरण के विरोधी कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी जितेन्द्र सरस्वती....!!
11 नवम्बर 2004 दीपावली का दिन हिन्दुओं का महत्वपूर्ण पर्व था त्रिकाल पूजा का अनुष्ठान चल रहा था रात्रि 11:35 पर तमिलनाडु की पुलिस शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती को अश्लील वीडियो देखने और हत्या का षड़यंत्र रचने के झूठे आरोप में अपमान जनक तरीके से गिरफ्तार करती है...!!
तब कांग्रेस का जगद्गुरु प्रेम एवम् सम्मान कहां विलुप्त हो गया था और वहीं जामा मस्जिद के इमाम के खिलाफ देश की कई अदालतों द्वारा गैर-जमानती वारंट के बावजूद उसे कभी हाथ नहीं लगाया गया....!!
यह है कांग्रेस की दोहरी चरित्र और ओछी मानसिकता ये सिर्फ संत के सम्मान का दिखावा कर रहे है और हिंदुओ को भड़का रहे हैं....!!
शनिवार, 24 जनवरी 2026
देश में जयचंद
ऐ हिन्दु सेकुलुरो तुमसे बेशर्म कोई जाति नही....!!
गजनवी के बारे मेँ पढकर ऐसा लगने लग गया कि ये कैसा धर्म है जो अपनी रक्षा स्वंय नही कर सकता, दोस्तो बुरा मत मानना हिन्दु धर्म कभी भी गलत का विरोध नही करता और न कभी किया भगवान और भाग्य के भरोसे बैठे रहते है, चंद वीर हिन्दु योद्धाओ को छोङकर किसी ने वीरता का कोई कार्य नही किया क्योकि दुसरो पर भरोसा करने वाला सदा रोया है...!!
आज जो हिन्दु सेकुलर है वो एक बार अफगानीस्तान जाये और अफगानिस्तान मेँ गजनी नामक स्थान पर जरुर जाये जहां हिन्दु औरतो की नीलाम हुंई थी, उस स्थान पर मुस्मानो ने एक स्तम्भ बना रखा है, जिस पर लिखा है दुख्तरे हिन्दोस्तान, नीलामे दो दीनार अर्थात इस जगह हिन्दुस्तानी औरते दो दो दीनार मेँ नीलामी हुंई अगर तब भी सेकुलरपन का कीङा नही नीकलता तो गजनवी का इतिहास पढ लेना जिसने हिन्दुओ को अपमानित करने के लिये सत्रह हमलो मेँ लगभग चार लाख हिन्दु औरते चंद सैनिको के बल पर पकङ कर गजनी ले गया, जो औरते अपने पतियो, भांईयो, पिता से बिलख बिलख कर अपनी रक्षा के लिए निवेदन कर रही थी लेकिन करोङो हिन्दुओ के बीच से मुठ्रठी भर मुस्लिम सैनिक भेङ बकरियो की तरह उठा कर ले गये, उनको बचाने न पति न भाई और न ही इस विशाल भारत के करोङो हिन्दु उनकी रक्षा के लिए आये नहीं....!!
महमुद गजनवी ने इन लङकियो औरतो को ले जाकर गजनवी के बाजार मे सामान की तरह बेँच डाला, विश्व के किसी वर्ग के साथ ऐसा अपमान नही हुआ जो हिन्दु वर्ग के साथ हुआ, अब इतिहास से सबक लेते हुए ये सोचना बंद कर दो कि जब अत्याचार बढेगा तब भगवान स्वंय उन्हे बचाने आयेँगे, क्योकि भगवान भी अव्यवहारिक अहिँसा का समर्थन करने वालो को नपुसंकता करार देते है क्योकि भगवान ने सभी अवतारो मेँ यही संदेश दिया है अपनी रक्षा स्वयं करो मैँ तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हे नेत्र दिए है गलत का विरोध करो मै सदैव तुम्हारे साथ खङा हूँ...!!
आज पुनः इतिहास हमारी परीक्षा ले रहा है और ये भी स्मरण रखो कि एक गाल पर कोई मारे तो दुसरा आगे करो ये कोई गीता या माहाभारत का उपदेश नही ये उन डरपोक कायरो का संदेश है जो खुद के हत्यारे भी है...!!
अब तो उठो जागो और अपने सनातन धर्म की रक्षा के लिये मैदान मे उतर कर सेवा रुपी आंदोलन शुरु करो, और अपने को या अपने अंदर कृष्ण और माहाराणा को जिँदा रखो न की अंहिषा के पुजांरियो को...!!
आमोद सिंह वत्स
सोमवार, 19 जनवरी 2026
नेहरू का जिन्ना प्रेम
मुंबई के बेहद पास मालाबार हिल जहां तमाम देशों के राजदूत आवास हैं, जहां मुख्यमंत्री निवास है, वहीं पर यह एक विशाल बंगला है जिसे कभी जिन्ना हाऊस कहा जाता था | यह बंगला मोहम्मद अली जिन्ना का मुंबई का निवास था!!
मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान चला गया, लेकिन जवाहरलाल नेहरू का जिन्ना प्रेम देखिए और आप इसे चाहे तो गूगल पर सर्च कर सकते हैं | जिन्ना के साथ अपने व्यक्तिगत प्रेम के कारण जवाहरलाल नेहरू ने इस बंगले को शत्रु संपत्ति घोषित नहीं किया ।
१९५५ में, एक कैबिनेट भाषण में जवाहरलाल नेहरूने सुझाव दिया कि इसे पाकिस्तान सरकार को दिया जाए, ताकि पाकिस्तान सरकार यहां मेरे प्रिय दोस्त जिन्ना की एक मेमोरियल बना सके।
लेकिन उनके ही कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल सकी। क्योंकि, उस समय सिर्फ दो मंत्रियों को छोड़कर पूरा मंत्रीमंडल इसके खिलाफ था | फिर नेहरू को लगा की कही बगावत न हो जाए इसलिए वह खामोश हो गए ।
मोहम्मद अली जिन्ना ने उस वक्त पाकिस्तान में भारत के राजदूत श्री. प्रकाश के जरिए मुंबई के अपने आलीशान बंगले को पाने के लिए कई चिट्ठियां जवाहरलाल नेहरू को लिखी |
हालांकि भारत के विदेश मंत्री और भारतीय उच्चायोग ने सुझाव दिया कि हवेली को १९५६ में पाकिस्तान को सौंप दिया जाए, लेकिन इस सुझाव पर विचार नहीं किया गया।
फिर इस बंगले का असली मालिक कौन है इस पर एक लंबा मुकदमा चला | इस मुकदमे में जिन्ना की बेटी देना वाडिया, पाकिस्तान सरकार और भारत सरकार तीनों शामिल थे | दीना वाडिया ने यह तर्क दिया की चूंकि, मोहम्मद अली जिन्ना खोजा मुस्लिम था इसलिए इस संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता और इस संपत्ति पर मेरा मालिकाना हक है क्योंकि मैं उसकी बेटी हूं | पाकिस्तान सरकार का यह तर्क था कि यह संपत्ति पाकिस्तान सरकार की है क्योंकि मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के नागरिक हैं |
उसके बाद मोदी सरकार आयी और मोदी सरकार ने एक शत्रु संपत्ति का विशेष एक्ट बनाकर इस बंगले का अधिग्रहण कर लिया और इसे विदेश मंत्रालय को सौंप दिया।
अब यह प्रॉपर्टी विदेश मंत्रालय की संपत्ति है ।
सोचिए भारत की सीमा के अंदर स्थित मोहम्मद अली जिन्ना के बंगले का अधिग्रहण भी मोदी सरकार ने किया किसी कांग्रेसी सरकार में यह हिम्मत नहीं थी कि जिन्ना के बंगले का अधिग्रहण कर सके ।
पोस्ट के लिए साभार
फोटो सोर्स: इंटरनेट
शुक्रवार, 16 जनवरी 2026
इतिहास का विनाश
भारत का पहला शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इतिहास को किस तरह भ्रष्ट किया और कैसे एक मुस्लिम परस्त इतिहास हमे परोसा गया, उसकी धज्जियां उड़ाने में सहयोग करे,,,,।।।
1) भारत का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू नही होता बल्कि सरयू तट से शुरू होता है जहाँ महर्षि मनु को अपने मनुष्य होने का ज्ञान हुआ और मानव सभ्यता विकसित हुई,,,,।
2) रामायण और महाभारत हिन्दुओ के धर्मग्रंथ हो सकते है मगर शैक्षिक रूप से ये भारत का इतिहास है, जिन्हें पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया,,,।
3) सिंध को अरबो ने जीता अवश्य था मगर बप्पा रावल ने उन्हें मार मार कर भगाया भी था, मगर सिर्फ अरबो की विजय पढ़ाई जाती है और बप्पा रावल को कहानी किस्सों के भरोसे छोड़ दिया जाता है,,।
4) व्यवस्था के अनुसार सम्राट पोरस ने सिकन्दर को रोका यह पढ़ाना आवश्यक नही था लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों को रोका ये बात याद से लिखी गयी,,,,।
5) बाबर से औरंगजेब तक हर बादशाह के लिये अलग अध्याय है जबकि मुगलो के इतिहास से हिंदुस्तान के वर्तमान को ज्यादा प्रभाव नही पड़ता।
6) मुगलो का 1707 तक का तो इतिहास बता दिया मगर बड़ी ही चतुराई से उसके बाद सीधे 1757 का प्लासी युद्ध लिखकर अंग्रेजो को ले आये। इतनी जल्दी क्या थी जनाब, जरा 1737 में पेशवा बाजीराव द्वारा मुगलो की धुलाई भी पढ़ा देते।
7) 1757 में मुगल सल्तनत का मराठा साम्राज्य में विलय हो गया था मगर जबरदस्ती उसका अंत 1857 मे पढ़ाया जाता है। 1757 से 1803 मुगल मराठा साम्राज्य के अधीन रहे और 1803 से 1857 अंग्रेजो के। 1757 के बाद कोई मुगल सल्तनत नही थी।
8) पानीपत में मराठो की हार हुई ठीक है मगर ये उनका अंतिम युद्ध नही था वे दोबारा खड़े हुए और अंग्रेजो को भी धो दिया, ये कब पढ़ाओगे? सिर्फ पानीपत पढ़ा दिया ताकि संदेश यह जाए कि हिन्दुओ ने हर युद्ध हारा है जबकि युद्ध के बाद महादजी सिंधिया ने अफगानों को जमकर कूटा था।
9) जितने कागज बलबन, फिरोजशाह तुगलक और बहलोल लोदी पर लिखने में बर्बाद किये उन कागजो पर महादजी सिंधिया, नाना फडणवीस और तुकोजी होल्कर का वर्णन होना चाहिए था।
10) भारत ब्रिटेन का गुलाम नही उपनिवेश था।
11) भारत 200 नही 129 वर्ष ब्रिटेन की कॉलोनी रहा, (1818 में मराठा साम्राज्य के पतन से 1947 में कांग्रेस शासन तक)।
12) आंग्ल मराठा युद्ध 1857 की क्रांति से भी बड़े थे इसलिए उनका विवरण पहले होना चाहिए मगर गायब है क्योकि बखान टीपू सुल्तान का करना था।
13) 1947 में 2 राष्ट्रों का उदय नही हुआ बल्कि एक ही का हुआ, हिंदुस्तान सदियों से उदित है और हमेशा रहेगा। ज्यादा सेक्युलर हो तो दूसरे आतंकी राष्ट्र की चिंता करो, नक्शे पर कुछ ही दिन का मेहमान है।
14) 1962 में भारत चीन से पराजित हुआ मगर 1967 में चीन को हराया भी, वो कौन पढ़ायेगा?
15) सामाजिक विज्ञान में एक पाठ आता है भारत और आतंकवाद, उसमे बड़े बड़े उदाहरण बताए जाते है मगर उनके पीछे का इस्लामिक कारण नही पढ़ाया जाता।
हमारी शिक्षा व्यवस्था बहुत ही रूढ़ हो चुकी है अतः आवश्यकता है ऐसे लोगो को जोड़ने की जो शिक्षा मंत्रालयों में कार्यरत हो, कार्यरत होने से ज्यादा वे भारतीय शिक्षा को लेकर सजग और तत्पर हो।
कृपया ऐसे व्यक्तियों तथा सभी मित्रों तक इस लेख को पहुचाने में हमारा सहयोग करे।
#wendyguevara #tvserial #hinduism #history #weatherforecast #wellness #viratkohli #hilights #health #styleideasdaily
भारत का पहला शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इतिहास को किस तरह भ्रष्ट किया और कैसे एक मुस्लिम परस्त इतिहास हमे परोसा गया, उसकी धज्जियां उड़ाने में सहयोग करे,,,,।।।1) भारत का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू नही होता बल्कि सरयू तट से शुरू होता है जहाँ महर्षि मनु को अपने मनुष्य होने का ज्ञान हुआ और मानव सभ्यता विकसित हुई,,,,।2) रामायण और महाभारत हिन्दुओ के धर्मग्रंथ हो सकते है मगर शैक्षिक रूप से ये भारत का इतिहास है, जिन्हें पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया,,,।3) सिंध को अरबो ने जीता अवश्य था मगर बप्पा रावल ने उन्हें मार मार कर भगाया भी था, मगर सिर्फ अरबो की विजय पढ़ाई जाती है और बप्पा रावल को कहानी किस्सों के भरोसे छोड़ दिया जाता है,,।4) व्यवस्था के अनुसार सम्राट पोरस ने सिकन्दर को रोका यह पढ़ाना आवश्यक नही था लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों को रोका ये बात याद से लिखी गयी,,,,।5) बाबर से औरंगजेब तक हर बादशाह के लिये अलग अध्याय है जबकि मुगलो के इतिहास से हिंदुस्तान के वर्तमान को ज्यादा प्रभाव नही पड़ता।6) मुगलो का 1707 तक का तो इतिहास बता दिया मगर बड़ी ही चतुराई से उसके बाद सीधे 1757 का प्लासी युद्ध लिखकर अंग्रेजो को ले आये। इतनी जल्दी क्या थी जनाब, जरा 1737 में पेशवा बाजीराव द्वारा मुगलो की धुलाई भी पढ़ा देते।7) 1757 में मुगल सल्तनत का मराठा साम्राज्य में विलय हो गया था मगर जबरदस्ती उसका अंत 1857 मे पढ़ाया जाता है। 1757 से 1803 मुगल मराठा साम्राज्य के अधीन रहे और 1803 से 1857 अंग्रेजो के। 1757 के बाद कोई मुगल सल्तनत नही थी।8) पानीपत में मराठो की हार हुई ठीक है मगर ये उनका अंतिम युद्ध नही था वे दोबारा खड़े हुए और अंग्रेजो को भी धो दिया, ये कब पढ़ाओगे? सिर्फ पानीपत पढ़ा दिया ताकि संदेश यह जाए कि हिन्दुओ ने हर युद्ध हारा है जबकि युद्ध के बाद महादजी सिंधिया ने अफगानों को जमकर कूटा था।9) जितने कागज बलबन, फिरोजशाह तुगलक और बहलोल लोदी पर लिखने में बर्बाद किये उन कागजो पर महादजी सिंधिया, नाना फडणवीस और तुकोजी होल्कर का वर्णन होना चाहिए था।10) भारत ब्रिटेन का गुलाम नही उपनिवेश था।11) भारत 200 नही 129 वर्ष ब्रिटेन की कॉलोनी रहा, (1818 में मराठा साम्राज्य के पतन से 1947 में कांग्रेस शासन तक)।12) आंग्ल मराठा युद्ध 1857 की क्रांति से भी बड़े थे इसलिए उनका विवरण पहले होना चाहिए मगर गायब है क्योकि बखान टीपू सुल्तान का करना था।13) 1947 में 2 राष्ट्रों का उदय नही हुआ बल्कि एक ही का हुआ, हिंदुस्तान सदियों से उदित है और हमेशा रहेगा। ज्यादा सेक्युलर हो तो दूसरे आतंकी राष्ट्र की चिंता करो, नक्शे पर कुछ ही दिन का मेहमान है।14) 1962 में भारत चीन से पराजित हुआ मगर 1967 में चीन को हराया भी, वो कौन पढ़ायेगा?15) सामाजिक विज्ञान में एक पाठ आता है भारत और आतंकवाद, उसमे बड़े बड़े उदाहरण बताए जाते है मगर उनके पीछे का इस्लामिक कारण नही पढ़ाया जाता।हमारी शिक्षा व्यवस्था बहुत ही रूढ़ हो चुकी है अतः आवश्यकता है ऐसे लोगो को जोड़ने की जो शिक्षा मंत्रालयों में कार्यरत हो, कार्यरत होने से ज्यादा वे भारतीय शिक्षा को लेकर सजग और तत्पर हो।कृपया ऐसे व्यक्तियों तथा सभी मित्रों तक इस लेख को पहुचाने में हमारा सहयोग करे।#wendyguevara #tvserial #hinduism #history #weatherforecast #wellness #viratkohli #hilights #health #styleideasdaily
मंगलवार, 13 जनवरी 2026
धर्म परिवर्तन
एक थे राघव राम कौल काश्मीरी ब्राह्मण, जिनको गौ मांस खिला कर मुसलमान बनाया गया था! इनके पुत्र का नाम शेख इब्राहीम था। शेख इब्राहीम के पुत्र का नाम शेख अब्दुल्ला! शेख अब्दूल्ला के पुत्र का नाम फारुक अब्दूल्ला... फारुक अब्दूल्ला के पुत्र है उमर अब्दूल्ला।
है राघव राम कौल का अब्दूल्ला परिवार। जब तक इनकी ताकत थी कश्मीर में इन्होंने भी लोगों के साथ वही व्यवहार किया है, वही नैरेटिव चल रहा था, डोगरा सिंधी कश्मीरी पंडित बाल्मीकि समाज, सब के मांस को नोच नोच कर खाया, पलायन हत्या से भरा काश्मीर के इतिहास का 70 साल।
एक थे चितपावन ब्राह्मण जिनका नाम तुलसीराम था! उन्होंने टीपू सुल्तान से बचने के लिए इस्लाम कुबूल कर लिया था और अपने गांव ओवैस को उन्होंने अपना सरनेम ओवैसी बना लिया! उन्ही तुलसीराम के पुत्र का नाम अब्दुल वाहिद ओवैसी था! अब्दूल वाहिद के पुत्र का नाम सुल्तान ओवैसी था! सुल्तान ओवैसी के पुत्र का नाम सलाहुद्दीन ओवैसी था! सलाहुद्दीन ओवैसी के पुत्र का नाम असद्दुदीन ओवैसी और अकबरूद्दीन ओवैसी। और विडंबना देखिये कि ओवैशी ब्रदर जिस गोडसे से घृणा करते हैं ये उसी समाज से हैं, यानि दोनो चितपावन ब्राहम्ण। इनका भी यही नैरेटिव दूसरे लोगों को डराना और हर साल 15 मिनट का समय मांगना।
एक थे मुहम्मद अली जिन्ना जो पाकिस्तान के बाप कहे जाते थे! इनके भी बाप का नाम पुंजालाल ठक्कर था! जो एक गुजराति हिंदू थे। ये पैसे के लिए धर्म छोड़ दिए! इनका भी वही नैरेटिव था और आज भी है! खुद तो पैसे के लिए कटोरा पकड़ लिये दूसरों को भी पकड़ाए।
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के लगभग सभी मुसलमानों के पूर्वज वास्तव में हिन्दू ही थे जो मुग़ल शासकों के भय व उनके द्वारा लोभ वश मुस्लिम बन गए। आज उन्हीं की औलादें अनजाने में इस्लाम के नाम पर आतंक अथवा मारकाट कर रहे हैं। काश कि वे अपने पूर्वजों की गलती को सुधार, घर वापसी कर उनकी आत्मा को शांति पहुंचाने का कार्य करते।
ईश्वर एक है तो धर्म भी एक ही होगा। सत्य शास्वत और सनातन होता है, धर्म भी शास्वत और सनातन होता है । धर्म के नाम पर कल या आज पैदा होने वाले मजहब, मत सम्प्रदाय, शास्वत नहीं, सनातन नहीं, धर्म न हैं न ही हो सकते हैं। जो इन्हें ही धर्म मानते हैं, वे ऐसा अज्ञानवश मानते हैं।
साभार
सोमवार, 12 जनवरी 2026
शनिवार, 10 जनवरी 2026
मनरेगा, मिड डे मील
भारत में भ्र्ष्टाचार के कारण बहुत से सेवा कार्यों में भी व्यवधान हों जाता है. 2014 के बाद ऊपरी स्तर पर यानि मन्त्रीमंडल स्तर पर कोंग्रेस के समय जैसी लूट - छोटाले - दलाली तो मोदी सरकार में नहीँ है लेकिन निचले स्तर पर सरकारी विभागों में सुविधा शुल्क बहुत ज्यादा बढ़ गया है.
आम आदमी, व्यापारी सभी को किसी न किसी सरकारी विभाग में काम पड़ता ही है. नियम - क़ानून इतने ज्यादा हैं जिनकी पूर्ति कुछ देकर ही होती है. मनरेगा की तरह स्कूलों में मिड डे मिल में भी बहुत गड़बड़ है. बच्चों को नियमानुसार कुछ नहीँ मिलता. हल्की सस्ती बस्तुए इस्तेमाल की जा रही हैं. न क्वालिटी है न ही कवंटिटी है. कोई देखने वाला नहीँ है. कभी कभाक किसी स्कूल का मौका मुआयना हों जाता है. बच्चों के स्वास्थ्य के लिए इसकी नियमित जाँच होनी चाहिए.
गुरुवार, 8 जनवरी 2026
दान की महिमा
Close for charity ~
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में होने वाले कुल दान का 62% जैन समुदाय से प्राप्त होता है । अर्थात भारत में होने वाले परमार्थ कार्यों को संचालित रखने में जैन समुदाय 62% योगदान देता है । जैन समुदाय , +140 करोड़ भारत की सुख शांति और समृद्धि बनाये रखने लिए सदैव तत्पर सबसे आगे खड़ा रहता है । विज्ञापनों में खर्च नहीं करते । श्रम करते हैं ।
दान ही जिन-मार्गी की सबसे बड़ी ताकत है । भारत को सबसे बड़ी ताकत दान से ही मिलती है । तब भारत चल पाता है । यदि यह 62% दान बंद कर दिया जाए जैन समुदाय की तरफ से तो भारत की रीढ़ हिल जाएगी । भारत में चल रहे अनेक पुण्यार्थ कार्य बंद हो जायेंगे । देश में दो दिन के अंदर ही असर दिखाई देने लग जाएगा । इतना वृहत् रूप से देश के अंदरुनी हिस्से को मजबूत बनाकर रखा हुआ है जैन समुदाय ने। जैनियों के दान भोजन पानी , चिकित्सा, शिक्षा, आश्रय, वस्त्र, रोज़गार जैसी बुनियादी जरूरतें प्रदान करने पर केंद्रित होते हैं। जैन समुदाय जैसे जैसे कमजोर होता जाएगा । देश अंदर से बिखरते जाएगा । देश की आम जनता कमजोर होती जाएगी । आज वही हो रहा है । जैन संस्थानों के अंदर हाथ डालने की कोशिश की जा रही है । विभिन्न प्रकार के षड्यंत्रों से । जैनों को नहीं लूटा जा रहा । यह भारत को कमजोर करने का षड्यंत्र है । जब तक जैन डगमगायेगा नहीं, तब तक भारत अंदर से मजबूत रहेगा । कृषि क्षेत्र और जैन समुदाय, जिसने भारत को कभी भी हाथ फैलाने का मौका नहीं दिया । अनेकों आक्रमण हुए, अनेकों प्राकृतिक प्रकोपों को झेले । फिर खड़े हो गए । यह चमत्कार रहा है भारत की मजबूत रीढ़ का । जैसे जैसे भारत के जैन कमजोर होते जाएंगे, भारत कमजोर होता जाएगा । निस्वार्थ पुण्यार्थ कार्य कम होते चले जाएंगे । भारत के अंदर चल रहे बुनियादी ढांचे बिखर जाएंगे।
टीप: जैन समुदाय चाहे , इसी दान बल से भारत की राजनीति में एक बड़ी भूमिका रख सकता है । दान ताकत है जैन समुदाय की । इसे जानों।
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मंगलवार, 6 जनवरी 2026
उपयोगी जानकारियां
*100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए*
1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है ।
3. *हाई वी पी में* - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।
4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।
5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।
6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं
7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी ।
8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी ।
9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।
10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।
11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी ।
12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
14. *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है ।
16. *अस्थमा , मधुमेह , कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।
17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।
18. *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
20. *RO* का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है ।
21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
23. *भोजन* के लिए पूर्व दिशा , *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
24. *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
26. *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है ।
27. *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।
29. *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।
31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।
33. *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।
34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
35. *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।
36. *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
41. *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,
43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।*
46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।
51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है
52. *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
53. *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
59. *अस्थमा में नारियल दें ।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
61. *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
62. *गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।*
63. *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए
64. *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*
65. *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
66. *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।
67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।
68. *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।
69. *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है
71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें
72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।
73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।
74. *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।*
75. *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।
76. *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।
77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए ।
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।
80. *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।
81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।
82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।*
83. *जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।*
84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
86 . *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग ।
87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए
88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।
89. *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
90. *चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।*
91. *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*
92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है ।
93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा
94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।
95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*।
98 . *तेज धूप* में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है
99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त , कफ* तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना ।
100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा। लार* है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके ।
_*जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के बाद साझाअवश्य करे*
||हर हर महादेव||
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