गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

राहुल अब क्या जबाब देंगे?

थर्ड क्लास राजनीति करने वाले सनकी राहुल गांधी की अब अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती होगी :-

पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब से जुड़ा मामला अब आगे बढ़ गया है । दिल्ली पुलिस ने इस किताब को ले एफआईआर दर्ज कर ली है । 
यह किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, और इसे अप्रकाशित किताब मानते हुए पुलिस ने स्पेशल सेल को जांच सौंपी है ।

यह मामला 2024 से शुरू होता है, जब जनरल नरवणे की संस्मरण किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ प्रकाशन के लिए तैयार थी । 
इस किताब में उनकी 40 साल की आर्मी सर्विस सेवा का ब्योरा है, जिसमें 1962 के बाद भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में हुए सैन्य टकराव के साथ-साथ अग्निपथ योजना जैसे विवादास्पद मुद्दों पर जानकारी शामिल है । 

पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब के प्री-ऑर्डर शुरू कर दिए थे, लेकिन रक्षा मंत्रालय (MoD) से जरूरी क्लियरेंस न मिलने के कारण प्रकाशन रुक गया । अब 2026 में भी किताब अप्रकाशित है ।

लेकिन सच बताएं तो बड़ा रहस्य उजागर करने और लम्बे समय से चली आ रही अपनी सनक को सच साबित करने के चक्कर में  राहुल गांधी इस मामले में बुरी तरह फंस गए हैं ।
वैसे तो उन्हें बढ़ चढ़कर बोलने और लगातार जुगाली करने के बाद माफ़ी मांगने की पुरानी आदत है । लेकिन जनरल नरवणे की किताब को लेकर उनकी अब अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती होने वाली है । 
मोदी को जनरल नरवणे की किताब के जरिए घेरने की उनकी मंशा खुद उन्हीं के गले का फंदा बन सकती है । एक तरफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है और दूसरी तरफ उनके एलओपी पद के सामने भी संकट आ खड़ा हुआ है ।

जनरल साहब खुद कह चुके हैं कि उनकी किताब प्रकाशन हाउस में है , प्रकाशक ने क्लियरेंस के लिया रक्षा मंत्रालय भेजी है । 
अनुमति आने पर छपेगी किताब । तो राहुल गांधी के पास कवर फोटो सहित जो किताब है वह या तो किसी ने नरवणे के घर से चुराई या फिर पब्लिशिंग हाउस से ? 
या फिर किसी के लम्बे हाथ यदि बहुत लम्बे हुए तो पता लगाना होगा कि कहीं डिफेंस मिनिस्ट्री तक तो नहीं जा पहुँचे ? खैर , एफआईआर हो चुकी और पुलिस ने जाँच शुरू कर दी । 

तो एब्रॉड आई या एमेजॉन से आई , खुलासा तो होगा ही । एमेजॉन कोई प्रकाशन संस्थान नहीं केवल विक्रेता है । बताना उसे भी पड़ेगा कि उसके पास किस पब्लिशर से आई किताब ? 

जनरल नरवणे में जिस पेंगुइन हाउस को थी उसने एक बार साफ कह दिया कि किताब अभी छपी ही नहीं , डिफेंस मिनिस्ट्री के पास विचारार्थ है । 
हालांकि बाद में पब्लिशर हाथ मलता भी दिखाई दिया । तो राहुल गांधी ! आपने तो संसद में और संसद के बाहर पढ़ दी किताब । बताइए कहाँ से आई आपके पास । क्या हवाला से ? समय आ गया है कि अब पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे ही मीडिया के बीच आएं अथवा अपना वीडियो बयान जारी करें । 

डिफेंस से जुड़े विषयों पर पहले भी किताबें लिखी गई हैं । लेकिन उनमें से कोई किताब संसद में लाकर इस तरह विवादास्पद बनाई गई हो तो हमें याद नहीं । हां राजीव गांधी जब 414 सीटें लेकर प्रधानमंत्री बने तब बोफोर्स कांड ने उन्हें डुबो दिया था । 

हम सेना को संसद अथवा संसद के बाहर लाकर जबरन घसीटने के सख्त ख़िलाफ़ हैं । राहुल गांधी को पता तो होगा पर इतनी तमीज नहीं कि संसद में सैन्य सवाल उठाना कितना गंभीर विषय है । 
लेकिन किसी भी तरह मोदी को नीचा दिखाऊं और उन्हें उतारकर पीएम की कुर्सी पर मैं खुद बैठ जाऊँ , इस सनक ने राहुल को यहां तक पहुँचा दिया है । 
जहां तक किताब में जनरल नरवणे को दिए गए प्रधानमंत्री के आदेश का सवाल है वह गोपनीय विषय है । थर्ड क्लास राजनीति करने वाले महाराजा के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे गंभीर विषय को भारत में कोई भी अन्य व्यक्ति कभी न उठाता । 
और हां , आपके जमाने तो सेना के हाथ बांध दिए जाते थे ।  

सबसे बड़ी बात नरवणे के पूछने पर पीएम नरेंद्र मोदी का इससे बढ़िया जवाब क्या हो सकता है कि उस हालात में सेना जो उचित समझे वह करे ?

सादर/सा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

गिरावट की हद

थर्ड क्लास राजनीति करने वाले सनकी राहुल गांधी की अब अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती होगी :- पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब से जुड़ा मामला अब आगे...