गुरुवार, 22 दिसंबर 2016





           हाइकु
    -------------------

      शब्दों के तीर
   जब निकल जाते
       पीछा करते
  ---------------------

       दया का काम
       देख के परिणाम
       भूला थकान
   ----------------------

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मोदीजी हैं तो मुमकिन है

......आज से 25-30 साल बाद...जब दुनिया का इतिहास लिखा जाएगा...उस समय के नेता जब  दुनिया मे कूटनीति का उदाहरण देंगे...तब ये बताया और पढाया जाए...