शुक्रवार, 31 मई 2024
टी एन शेषन
*मैं IAS बनकर भी कुछ न बन सका -T.N.शेषन*
श्री टी.एन. शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे। अपनी पत्नी के साथ यूपी की यात्रा पर जाते समय उनकी पत्नी ने सड़क किनारे एक पेड़ पर बया (एक प्रकार की चिड़िया)का घोंसला देखा और कहा, ”यह घोंसला मुझे ला दो; मैं घर को सजाकर रखना चाहतीं हूँ।” श्री टी एन शेषन ने साथ चल रहे सुरक्षा गार्ड से इस घोंसले को नीचे उतारने को कहा। सुरक्षा गार्ड ने पास ही भेड़-बकरियां चरा रहे एक अनपढ़ लड़के से कहा कि अगर तुम यह घोंसला निकाल दोगे तो मैं तुम्हें बदले में दस रुपये दूंगा। लेकिन लड़के ने मना कर दिया। श्री शेषन स्वयं गये और लड़के को पचास रुपये देने की पेशकश की, लेकिन लड़के ने घोंसला लाने से इनकार कर दिया और कहा कि, "सर,इस घोंसले में चिडिया के बच्चे हैं। शाम को जब उस बच्चे की "माँ" खाना लेकर आएगी तो वह बहुत उदास होगी, इसलिए तुम कितना भी पैसा दे दो, मैं घोंसला नहीं उतारूंगा" इस घटना के बारे में श्री टी.एन. शेषन लिखते हैं कि... मुझे जीवन भर इस बात का अफ़सोस रहा कि एक पढ़े-लिखे आईएएस में वो विचार और भावनाएँ क्यों नहीं आईं जो एक अनपढ़ लड़का सोचता था? उन्होंने आगे लिखा कि- मेरी तमाम डिग्री,आईएएस का पद, प्रतिष्ठा, पैसा सब उस अनपढ़ बच्चे के सामने मिट्टी में मिल गया। जीवन तभी आनंददायक बनता है जब बुद्धि, धन और पद के साथ संवेदनशीलता भी हो।
गुरुवार, 30 मई 2024
धन से सुख नहीं
*मुकेश अंबानी* आज सुबह अपने बंगले में Gold Coated मार्बल की डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। सामने चांदी की प्लेट व बाउल में अनसाल्टेड स्प्राउटस् और बिना शक्कर की चाय पी रहे थे।
फिर कुछ देर बाद अनसाल्टेड ओकरा (भिंडी) की एक सब्जी और बिन घी तेल की दो चपाती और गर्म खनिज पानी ले रहे थे।
7,000 करोड़ रुपये का घर, दस नौकरों द्वारा नाश्ता मिल रहा था, पचासों एसी चल रहे थे, पंखे हवा दे रहे थे। इमारतों के नीचे से प्रदूषण का धुआं निकल रहा था। ऐसे माहौल में नाश्ता कर रहे थे अंबानी...😊
वहीं दूर खलिहान में दूर कुएं की मेढ़ पर एक खेतिहर मजदूर बैठा था।
वो छोले की तरी वाली सब्जी के साथ ४ परांठे, हल्दी-मसाले में पकी भिंडी व साथ में अचार भी खा रहा था। मीठे में गुड़ और पीने के लिए बर्तन में ठंडा पानी था।
सामने हरे-भरे खेत, शुद्ध हवा में लहराती फसलें, ठंडी हवाएं, चिड़ियों की चहचहाहट, और वह आराम से खा कर रहा था।
*500 रुपए* कमाने वाला एक खेतिहर मजदूर वह खा रहा था जो 7 अरब रुपए का मालिक नही खा पा रहा था।
अब बताओ इन दोनों में क्या अंतर था? 🤔
अंबानी 60 साल के हैं और मजदूर भी 60 साल का है।
नाश्ते के बाद अंबानी मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल और बीपी की गोलीयाँ ले रहे थे और वह खेतिहर मजदूर चूने के साथ पान खा रहा था।
*कोई हीन नहीं, कोई महान नहीं।*
इसलिए, *खुशी* की तलाश मत करो, *सुख* महसूस करो।
"अतुलनीय आनंद" के उत्पादन पर जीएसटी *0%* है।
*खुद को ढूँढें,* बाकी सब कुछ गूगल पर है।
मंगलवार, 28 मई 2024
शनिवार, 25 मई 2024
एक प्रत्याशी, एक सीट
एक प्रत्याशी दो जगह से क्यों लड़े?
भारत में लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व चुनाव चल रहे हैं। अंतिम दौर बाकी रह गया है जो 30 मई 2024 को पूर्ण हो जाएगा। 4 जून के सभी को बेसब्री से इंतजार रहेगा जब चुनावों के रिजल्ट आयेंगे।
पक्ष- विपक्ष का आरोप- प्रत्यारोपों का दौर चल रहा है। सभी अपने को महान बताने में जुटे हैं। लेकिन इन सब बातों में एक अहम बात यह है की जब एक प्रत्याशी दो जगह से चुनाव लड़ता है और यदि दोनों जगह से जीत जाता है तब उसको एक जगह से अपनी जीत छोड़नी पड़ती है। ऐसे में उस सीट पर नये सिरे से चुनाव होता है। क्या इस पर पाबंदी नहीं लगनी चाहिए? प्रत्याशी जिस जगह की सीट छोड़ता है उस जगह की जनता तो बेचारी मूर्ख सी बनी रह जाती है और उसी जनता की भलाई का धन दोबारा चुनाव कराने में खर्च होता है। शासन- प्रशासन को इंतजाम नये सिरे से करने पड़ते हैं। इस सम्बंध में कानून में बदलाव होना चाहिये। जो अपनी जीती हुई सीट को छोड़े उसकी जगह दूसरे नंबर पर आये प्रत्याशी को जीत का सेहरा बांध देना चाहिए। ऐसा करने से व्यर्थ का खर्च, भागदौड़, बाजारों के अवकाश आदि सभी से मुक्ति मिल सकती है। सीट छोड़ने का खामियाजा पार्टी को होगा। यदि ऐसा सम्भव नहीं है तो जनहित में एक प्रत्याशी को एक ही सीट से चुनाव लड़ने का प्रावधान होना चाहिए।
सुनील जैन राना
हीट वेब
आजकल तीव्र गर्मी पड रही है इसमें लू लगने की संभावना बहुत बढ़ जाती है और वह जानलेवा हो सकती है ....
आइए जानते हैं कि हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगो की धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है?
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर बनाए रखता है, इसलिए लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत आवश्यक है, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो और शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है जैसे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस रखना, पानी के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स भी शरीर से बाहर निकल जाते हैं,जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है या बंद कर देता है ।
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।जिसे हाइपरथर्मिया कहते हैं।
हाइपरथर्मिया शरीर का तापमान बढना और हाइपोथर्मिया शरीर का तापमान कम होना दोनों शरीर के लिए हानिकारक हैं।
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त मे उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है ( जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है )
👉 स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर सकते हैं।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है और इलेक्ट्रोलाइट्स में imbalance और इनकी कमी से शारीरिक गतिविधियां ठप हो सकती है। इलेक्ट्रोलाइट्स में सोडियम साइट्रेट, सोडियम क्लोराइड, पोटेशियम क्लोराइड और डेक्सट्रोज जैसे नमक और चीनी का कॉम्बिनेशन होता है। इसमें मौजूद नमक आपके शरीर में पानी को संतुलित करने, एसिड-बेस लेवल को बनाए रखने, कोशिकाओं में पोषक तत्वों की आवाजाही करने और शरीर से अपशिष्ट पदार्थों (वेस्ट) को हटाने में मदद करता है। इनकी कमी से
ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन ) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोडा थोडा पानी पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव अगले 5 -7 दिनों मे एशिया के अधिकतर भूभाग को प्रभावित करेगा।
कृपया 12 से 3 के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें।
तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा।
यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा।
(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है।)
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।
किसी भी अवस्था मे कम से कम 3 ली. पानी जरूर पियें।किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली. पानी जरूर लें।
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।
ठंडे पानी से नहाएं। मांस का प्रयोग छोड़ें या कम से कम करें।
फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें।
हीट वेव कोई मजाक नही है।
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है।
शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।
अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।
जनहित मे इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें।
जरूरी होने पर शीघ्र चिकित्सक से संपर्क करें। स्वस्थ रहें दिर्घायु हों 🙏
बुधवार, 22 मई 2024
स्वाद की खातिर
थोड़ा समय निकाल कर अंत तक पूरा पढ़ना
मौत के स्वाद का चटखारे लेता मनुष्य ...
थोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है ...
अपनी मृत्यु और अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है। बाकी तो मौत को enjoy ही करता है आदमी ...
मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है.....
बकरे का,
गाय का,
भेंस का,
ऊँट का,
सुअर,
हिरण का,
तीतर का,
मुर्गे का,
हलाल का,
बिना हलाल का,
ताजा बकरे का,
भुना हुआ,
छोटी मछली,
बड़ी मछली,
हल्की आंच पर सिका हुआ। न जाने कितने बल्कि अनगिनत स्वाद हैं मौत के।
क्योंकि मौत किसी और की, और स्वाद हमारा....
स्वाद से कारोबार बन गई मौत।
मुर्गी पालन, मछली पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म्स।
नाम *पालन* और मक़सद *हत्या*❗
स्लाटर हाउस तक खोल दिये। वो भी ऑफिशियल। गली गली में खुले नान वेज रेस्टॉरेंट, मौत का कारोबार नहीं तो और क्या हैं ? मौत से प्यार और उसका कारोबार इसलिए क्योंकि मौत हमारी नही है।
जो हमारी तरह बोल नही सकते, अभिव्यक्त नही कर सकते, अपनी सुरक्षा स्वयं करने में समर्थ नहीं हैं...
उनकी असहायता को हमने अपना बल कैसे मान लिया ?
कैसे मान लिया कि उनमें भावनाएं नहीं होतीं ?
या उनकी आहें नहीं निकलतीं ?
डाइनिंग टेबल पर हड्डियां नोचते बाप बच्चों को सीख देते है, बेटा कभी किसी का दिल नही दुखाना ! किसी की आहें मत लेना ! किसी की आंख में तुम्हारी वजह से आंसू नहीं आना चाहिए !
बच्चों में झुठे संस्कार डालते बाप को, अपने हाथ मे वो हडडी दिखाई नही देती, जो इससे पहले एक शरीर थी, जिसके अंदर इससे पहले एक आत्मा थी,
उसकी भी एक मां थी ...??
जिसे काटा गया होगा ?
जो कराहा होगा ?
जो तड़पा होगा ?
जिसकी आहें निकली होंगी ?
जिसने बद्दुआ भी दी होगी ?
कैसे मान लिया कि जब जब धरती पर अत्याचार बढ़ेंगे तो भगवान सिर्फ तुम इंसानों की रक्षा के लिए अवतार लेंगे ..❓
क्या मूक जानवर उस परमपिता परमेश्वर की संतान नहीं हैं .❓
क्या उस ईश्वर को उनकी रक्षा की चिंता नहीं है ..❓
धर्म की आड़ में उस परमपिता के नाम पर अपने स्वाद के लिए कभी ईद पर बकरे काटते हो, कभी दुर्गा मां या भैरव बाबा के सामने बकरे की बली चढ़ाते हो। कहीं तुम अपने स्वाद के लिए मछली का भोग लगाते हो ।
कभी सोचा ...!!!
क्या ईश्वर का स्वाद होता है ? ....क्या है उनका भोजन ?
किसे ठग रहे हो ?
भगवान को ?
अल्लाह को ?
जीसस को?
या खुद को ?
मंगलवार को नानवेज नही खाता ...!!!
आज शनिवार है इसलिए नहीं ...!!!
अभी रोज़े चल रहे हैं ....!!!
नवरात्रि में तो सवाल ही नही उठता ....!!!
झूठ पर झूठ....
...झूठ पर झूठ।।
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