मंगलवार, 30 अगस्त 2022

स्वार्थी भारतीय

*ताइवान के लोग भारतीयों से नफरत करते हैं क्यों...?* *जानना जरूरी है!* *यदि आप में हिन्दुत्व का अंश बचा है तो पढ़िए* 👇🤦‍♂️👇 *ताइवान में करीब एक वर्ष बिताने पर एक भारतीय महानुभाव की कई लोगों से दोस्ती हो चुकी थी, परंतु फिर भी उन्हें लगा कि वहाँ के लोग उनसे कुछ दूरी बनाकर रखते हैं, वहाँ के किसी दोस्त ने कभी उन्हें अपने घर चाय के लिए तक नहीं बुलाया था...?* उन्हें यह बात बहुत अखर रही थी अतः आखिरकार उन्होंने एक करीबी दोस्त से पूछ ही लिया...? *थोड़ी टालमटोल करने के बाद उसने जो बताया, उसे सुनकर उस भारतीय महानुभाव के तो होश ही उड़ गए।* *ताइवान वाले दोस्त ने पूछा-* *“200 वर्ष राज करने के लिए कितने ब्रिटिश भारत में रहे...?”* भारतीय महानुभाव ने कहा कि लगभग *“10, 000 रहे होंगे!”* *“तो फिर 32 करोड़ लोगों को यातनाएँ किसने दीं?* *वह आपके अपने ही तो लोग थे न...?* जनरल डायर ने जब *"फायर"* कहा था... तब 1300 निहत्थे लोगों पर गोलियाँ किसने दागी थीं? उस समय ब्रिटिश सेना तो वहाँ थी ही नहीं! *क्यों एक भी बंदूकधारी (सब के सब भारतीय) पीछे मुड़कर जनरल डायर को नहीं मार पाया...?* *फिर उसने उन भारतीय महानुभाव से कहा-* *आप यह बताओ कि कितने मुगल भारत आए थे? उन्होंने कितने वर्ष तक भारत पर राज किया? और भारत को गुलाम बनाकर रखा! और आपके अपने ही लोगों को धर्म परिवर्तन करवाकर आप के ही खिलाफ खड़ा कर दिया!* जोकि 'कुछ' पैसे के लालच में, अपनों पर ही अत्याचार करने लगे! अपनों के साथ ही दुराचार करने लगे…!! *तो मित्र, आपके अपने ही लोग, कुछ पैसे के लिए, अपने ही लोगों को सदियों से मार रहे हैं...?* आपके इस *स्वार्थी धोखेबाज, दगाबाज, मतलबपरस्त, 'दुश्मनों से यारी और अपने भाईयों से गद्दारी'😢* *अपनी मां,मातृभाषा वा मतभूमि के संग ही गद्दारी करें वा उनको अपने झूठे घमंड वा छोटे से स्वार्थ के लिए विदेशियों की रखैल बनवाएं ऐसे अपनी मां की दलाली खाने वाले चरित्रहीन व्यक्ति से क्यों संबंध रखना चाहेगा।* *इस प्रकार के व्यवहार एवं इस प्रकार की मानसिकता के लिए, हम भारतीय लोगों से सख्त नफ़रत करते हैं!* इसीलिए हमारी यही कोशिश रहती है कि यथासंभव, हम भारतीयों से सरोकार नहीं रखते...? उसने बताया कि- *जब ब्रिटिश हांगकांग में आए तब एक भी व्यक्ति उनकी सेना में भरती नहीं हुआ क्योंकि उन्हें अपने ही लोगों के विरुद्ध लड़ना गवारा नहीं था...?* *यह भारतीयों का दोगला चरित्र है, कि अधिकाँश भारतीय हर वक्त, बिना सोचे समझे, पूरी तरह बिकने के लिए तैयार रहते हैं...? और आज भी भारत में यही चल रहा है🤷‍♂* *विरोध हो या कोई और मुद्दा, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में और खुद के फायदों वाली गतिविधियों में भारत के लोग आज भी, राष्ट्र हित को हमेशा दोयम स्थान देते हैं😩 आप लोगों के लिए "मैं और मेरा परिवार" पहले रहता है😢* *"समाज और देश" जाए भाड़ में...?* भ्रष्ट नौकरशाही ,भ्रष्ट बिकता हुआ नेतृत्व की स्वीकारता चरित्रहीन जनता को भी हो गई हे।आज भ्रष्टाचार का खिलफत का स्वांग करने वाले भी महाधूर्त ( *KAJRI*) निकल रहें हैं जो देश के लिए वा स्वयं के लिए दीमक है।देश इससे बुरे दिन क्या देखेगा। थोड़े बहुत चरित्रवान बचे भी हैं वाह भी अपने को बेचने की लाइन में लगे हैं।उनके अंदर दुष्चरित्र लोगो को आंख दिखाने की हिम्मत नहीं है। आज काले जनरल डायरो को खत्म करने वाले महा प्रक्रमी देश के लाल *उधम सिंह* जेसे सुपुत्र पैदा होने भी बंद हो गए हैं। आज जापान ,ताइवान जेसे कई छोटे देश अपने चरित्रवान नागरिकों के कारण विश्व में सबसे समृद्ध देश बन गए हैं। *बात कड़वी है पर सही है!* इस पोस्ट को फॉरवर्ड करने वाले चरित्रवान बहुत कम लोग होंगे ।अगर कोई फॉरवर्ड करता है तो उसको नमस्कार कर लेना कोई हिम्मती वा चरित्रवान अभी भी देश में हैं। साभार

शनिवार, 27 अगस्त 2022

जनता जनार्दन

विचारणीय एक बार मेरे कमरे में 5-6 सांप घुस गए। मैं परेशान हो गया, उसकी वजह से मैं कश्मीरी हिंदुओं की तरह अपने ही घर से बेघर होकर बाहर निकल गया। इसी बीच बाकी लोग जमा हो गए। मैंने पुलिस और सेना को बुला लिया। अब मैं खुश था कि थोड़ी देर में सेना इनको मार देगी तभी कुछ पशु प्रेमी और मानवतावादी आ गये, बोले की नहीं आप गोली नहीं चला सकते, हम पेटा के तहत केस कर देंगे। सेना वाले उसको ढेला मारने लगे, सांप भी उधर से मुंह ऊँचा करके जहर फेंकने लगे। एक दो सांप ने तो एक दो सैनिक को काट भी लिया पर भागे नहीं। फिर इतने में कुछ पडोसी मुझे ही बोलने लगे, क्या भाई तुम भी बेचारे सांप पर पड़े हो, रहने दो , क्यों भगा रहे हो ? उधर प्रशासन ने खबर भिजवा दिया, सांप के मुंह में जहर नहीं होना चाहिए, उसके मुंह में दूध दे दो तो वो मुंह से जहर की जगह दूध फेंकेगा। ..... मैं हैरान परेशान... फालतू में बात का बतंगड़ हो चुका था। न्यूज़ भी चलने लगे थे। एनडीटीवी के रविश ने कह दिया कि सबको जहर नजर आता है सांप नजर नहीं आता, उसकी भी जिंदगी है। बरखा दत्त चीख़ कर कहने लगी की ये तो भटके हुए संपोले हुए हैं, मकान मालिक इनको बेवजह परेशान कर रहा है, मकान मालिक को चाहिए की वो इनको अपने घर में सुरक्षित स्थान पर इनको बिल बनाकर रहने दे और इनके खाने पिने का भरपूर ध्यान रखे। इसी बीच एक सैनिक ने पेलेट गन चला दिया और एक सांप ढेर हो गया, मुझे आशा जगी, सेना ही कुछ कर सकती है, तभी भाँड मीडिया ने कहा, पेलेट गन क्यों चलाया, सांप को कष्ट हो रहा है, अभी कोई कुछ सोचता उससे पहले ही हाइकोर्ट का भी फैसला जाने कहाँ से आ गया कि सांप पर पेलेट गन नहीं चला सकते इस गन से उसकी आँखे और चेहरा ख़राब हो सकता है। उधर आम आदमी पार्टी ने कह दिया कि वहाँ जनमत संग्रह हो कि उस घर में सांप रहेगा या आदमी। कुल मिलकर सांप को जीने का हक़ है इस पर सब एकमत हो गए थे। इतने में जो मेरा पडोसी मेरा घर कब्ज़ा करना चाहता था वो सांप के लिए दूध, छिपकली और मेढक लेकर आ गया, उसको खिलाने लगा, उसकी मदद बुद्धिजीवियों, मानवातावादियो और पत्रकारों ने कर दी और पडोसी को शाबाशी दी। मैं निराश होकर अब दूर से सिर्फ देखता था। काश मैंने खुद लाठी लेकर शुरू में ही इन सांपो को ठिकाने लगा दिया होता तो आज ये दिन ना देखना पड़ता।...

शुक्रवार, 26 अगस्त 2022

कान्वेंट शब्द से तातपर्य

*कान्वेंट शब्द पर गर्व न करें... सच समझें 🤔कॉन्वेंट का मतलब क्या है? ‘काँन्वेंट’ ! सब से पहले तो यह जानना आवश्यक है कि, ये शब्द आखिर आया कहाँ से है, तो आइये प्रकाश डालते हैं। 👇👇👇 ब्रिटेन में एक कानून था, *" लिव इन रिलेशनशिप "* बिना किसी वैवाहिक संबंध के एक लड़का और एक लड़की का साथ में रहना, तो इस प्रक्रिया के अनुसार संतान भी पैदा हो जाती थी तो उन संतानों को किसी चर्च में छोड़ दिया जाता था। अब ब्रिटेन की सरकार के सामने यह गम्भीर समस्या हुई कि इन बच्चों का क्या किया जाए तब वहाँ की सरकार ने काँन्वेंट खोले *अर्थात् जो बच्चे अनाथ होने के साथ-साथ नाजायज भी हैं , उनके लिए ये काँन्वेंट बने।* उन अनाथ और नाजायज बच्चों को, रिश्तों का एहसास कराने के लिए ,उन्होंने अनाथालयो में एक फादर, एक मदर, एक सिस्टर ,की नियुक्ति कर दी । क्योंकि ना तो उन बच्चों का कोई जायज बाप है ना ही माँ है। तो काँन्वेन्ट बना नाजायज बच्चों के लिए जायज। इंग्लैंड में पहला काँन्वेंट स्कूल सन् 1609 के आसपास एक चर्च में खोला गया था, जिसके ऐतिहासिक तथ्य भी मौजूद हैं, और *भारत में पहला काँन्वेंट स्कूल ,कलकत्ता में, सन् 1842 में खोला गया था। परंतु तब हम गुलाम थे ,और आज तो लाखों की संख्या में काँन्वेंट स्कूल चल रहे हैं,क्यों कि ,अब हम मानसिक गुलाम हो चुके हैं।🤔 जब कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था, *इसी कानून के तहत भारत में* कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने की यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं। *मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है। उसमें वो लिखता है कि 🤔 “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे,लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे। इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपनी परम्पराओं के बारे में भी कुछ पता नहीं होगा। *इनको अपने मुहावरे ही नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे,इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से,अंग्रेजियत कभी नहीं जाएगी।”* उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई, इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है। और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रुवाब पड़ेगा। *अरे ! हम तो खुद में हीन हो गए हैं। जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म हो, दूसरों पर क्या असर पड़ेगा ?* *लोगों का तर्क है कि “अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है”।* *दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में ही बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है?* शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईसा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। *ईसा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी।* अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी। समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। भारत देश में अब भारतीयों की मूर्खता देखिए… जिनके जायज माँ बाप भाई बहन सब हैं, वो काँन्वेन्ट में जाते है तो क्या हुआ एक बाप घर पर है और दूसरा काँन्वेन्ट में जिसे फादर कहते हैं। आज जिसे देखो काँन्वेंट खोल रहा है जैसे- *"बजरंग बली काँन्वेन्ट स्कूल", माँ भगवती काँन्वेन्ट स्कूल"।* अब इन मूर्खो को कौन समझाए कि, भईया माँ भगवती या बजरंग बली का काँन्वेन्ट से क्या लेना देना? दुर्भाग्य की बात यह है कि, जिन चीजों का हमने त्याग किया अंग्रेजो ने वो सभी चीज़ों को पोषित और संचित किया फिर भी हम सबने उनकी त्यागी हुई गुलाम सोच को आत्मसात कर गर्वित होने का दुस्साहस किया। *आइए आगे से जब भी हमसे कोई आश्रय कॉन्वैंट स्कूल की बात कहेगा या करेगा तो उसे उपरोक्त तथ्यों से परिचित अवश्य कराएंगे।* साभार वॉट्सएप ग्रुप से , सधन्यवाद!

षडयंत्र ?

कितना भयानक षड्यंत्र ! • पाकिस्तान बना .., कोंग्रेस शासन में ..! • बांग्लादेश बना .., कोंग्रेस शासन में ..! • ३७० लागू हुआ .., कोंग्रेस शासन में ..! • अल्पसंख्यक बिल आया , कोंग्रेस शासन में ..!• मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बना .., कोंग्रेस शासन में ..! 😳👇🤭🤓 • अल्पसंख्यक मंत्रालय बना .., कोंग्रेस शासन में ..! • अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय बना .., कोंग्रेस शासन में ..! •• ये सभी काम “ कांग्रेस ” ने किए .., सिर्फ - “ मुसलमानो “ के लिए❗ • वो भी - जब देश का “ बंटवारा ” , ‘ धार्मिक ' आधार पर हुआ ,.. तो क्या ये तैयारी कांग्रेस की - *“ गजवा-ए-हिन्द “* के लिए नही थी ❓❓❓ • देश को - “ चुपचाप “ इस्लामिक देश बनाने की तैयारी थी , कांग्रेस की ... ओर “ हिन्दुओं “ के लिए सिर्फ “ आरक्षण ” दिया .., ताकि - “ हिन्दू समाज “ सदा आपस मे “ लड़ता “ रहे ... और कभी *“ गजवा-ए-हिन्द ”* को समझ न पाए❗ 😠 🤓👍 पूर्व प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई ने , अपनी किताब *" मेरा जीवन वृतांत "* में पृष्ठ संख्या 456 पर लिखा है , कि :- पता नही क्यों❓ नेहरु को - *“ हिन्दू धर्म “* के प्रति - एक *“ पूर्वाग्रह “* था❓❓❓ नेहरु ने - *“ हिन्दुओं को दोयम नागरिक “* बनाने के लिए - *“ हिन्दू कोड बिल ”* लाने की बड़ी कोशिश की थी .., लेकिन - *“ सरदार पटेल “* ने नेहरु को चेतावनी देते हुए कहा था , की :- यदि मेरे जीते जी .., आपने - *“ हिन्दू कोड बिल “* के बारे में सोचा ., तो मैं - *“ कांग्रेस “* से *“ इस्तीफ़ा “* दे दूंगा ... और - इस बिल के *“ खिलाफ “* सड़कों पर - *” हिन्दुओं “* को लेकर उतर जाऊँगा .., फिर पटेल की धमकी से - नेहरु जी *“ डर “* गये थे ... और उन्होंने सरदार पटेल जी के *“ देहांत “* के बाद - *“ हिन्दू कोड बिल “* संसद में पास किया था ! इस बिल पर चर्चा के दौरान *“ आचार्य जेबी कृपलानी ”* ने - *“ नेहरु “* को *“ कौमवादी “* और *“ मुस्लिम परस्त “* कहा था ! उन्होंने कहा था , की :- आप - *“ हिन्दुओं को धोखा “* देने के लिए ही - *“ जनेऊ “* पहनते हो .., वरना - आपमें *” हिन्दुओ ”* वाली - *” कोई बात “* नहीं है ... यदि आप - सच में - *“ धर्म निरपेक्ष ”* होते❓.., तो - *“ हिन्दू कोड बिल “* के बजाय - सभी धर्मो के लिए *“ कामन कोड “* बिल लाते❓ कभी - कभी मन करता है , कि पोस्ट ही ना करूं ! फिर ख्याल आता है , कि :- *“ पढेगा इंडिया ”* *देशहित में जारी* *बीबीसी के विख्यात पत्रकार मार्क टुली नें ब्यान दिया है, कि "मोदी इस देश के उस बडे बरगद को उखाड़ कर गिरा रहे हैं, जिसमें वर्षों से विषैले कीड़े लगे हुए हैं ! इसके लिए उन्हे लगातार महासंघर्ष करना होगा !"* *मोदी नें देश में छुपे सारे जहरीले नागों के बिल में एक साथ हाथ डाल दिया है, इसलिये ये नाग फुफकार रहे हैं, कांग्रेस, वामपंथ, जेहादी, नक्सली, मिशनरी सहित हर तरह के नागों को कांग्रेस नें अपनें पास छुपाए रखा था, भारत भूमि को बर्बाद करने के लिए, वो तो अच्छा हुआ कि मोदी सत्ता में आ गये और इन जहरीले नागों से देश को परिचित और सतर्क कर इन्हें बेनकाब कर दिया, वरना ये जहरीले नाग आनें वाले समय में इस भारत भूमि और हिन्दूओं को निगल जाते और हमारी आनें वाली पीढ़ियों के पास सिवाय रोने, बिलखने के इलावा कुछ नही बचता।* *मोदी को बहुत संघर्ष करना होगा और मोदी संघर्ष कर भी लेगा, परन्तु इस देश वासियों को खासकर हिन्दुओं को मोदी के साथ डट कर खड़ा रहना होगा*, *क्योंकि मोदी नें ये जंग अपनें लिये नहीं, बल्कि यह हमारे देशवासी बच्चों, आनें वाली पीढियों और भारत के उज्जवल भविष्य के लिए जंग छेड़ी हुई है।* साभार

शनिवार, 20 अगस्त 2022

मुँह ढकाई कपड़ा

कौन देता है- मुँह ढकाई कपड़ा ? देश मे पुलिस न हो तो सभी बेख़ौफ़ हो जाये। गुंडों- मवालियों का तो मज़ा आ जाये। आंम आदमी की सुरक्षा में पुलिस का बहुत महत्व है। भले ही पुलिस हर गली, हर मोहल्ले में न दिखे फिर भी पुलिस के कारण अपराधी को डर लगता ही है। पुलिस हमारे जीवन का एक अंग ही है। पुलिस के अनेक अच्छे पहलू हैं तो कुछ पहलू व्यवस्था पर चोट भी करते हैं। अनेक अपराधियों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त होता है। अनेक बाहुबलियों के आगे पुलिस नतमस्तक सी रहती है। जेलों में कैदियों को कुछ देकर सबकुछ मिल जाता है। नेताओं और बाहुबलियों के लिये जेलों में अच्छी व्यवस्था हो जाती है। शीर्षक से आशय यह है की प्रथम दृष्टया अपराधी, बलात्कारी, लुटेरा, जघन्य अपराध करने वाला जब पकड़ा जाता है तो अक्सर उसके मुँह पर काला कपड़ा ढका होता है। ऐसा लगता है की जैसे अपराधी के मुँह के नाप का कपड़ा सिलवाकर उसमे आँखों के दो झरोखे बनाकर अपराधी को दिये गए हों। अन्यथा किसी के पकड़े जाने पर उसे अपना चेहरा छिपाने को नाप का सिला कपड़ा कहाँ से आयेगा। ज्यादा से ज्यादा किसी के पास रुमाल या चद्दर सी हो सकती है। इस विषय की जांच होनी चाहियें। साधारणतया किसी आम आदमी को पुलिस घर से ले जाती है तो उसे इतना भी समय नही देती की वह किसी को बुला ले। जबकि पेशेवर अपराधी, माफ़िया आदि के साथ पुलिस सहयोग करती दिखाई देती है। ऐसा नहीं होना चाहिए। पुलिस पर आम आदमी को बहुत भरोसा होता है। ऐसे में पुलिस को आम आदमी के साथ सख्ती से पेश नहीं आना चाहिये एवं अपराधी आदि के पकड़े जाने पर उसे मुँह छिपाने नहीं देना चाहिए। उसका चेहरा सबको दिखाई दे और उसे भी अहसास हो की मैंने अपराध किया है और सब मुझे देख रहे हैं। सुनील जैन राना