मंगलवार, 5 मार्च 2024
मोदी जैसा कोउ नहीं
एक तमिल मैगजीन में मोदी के बारे में छपी 20 बातें...
1. साफ सुथरा कपड़ा और करीने से बनाया बाल।
2. कमांडिंग बॉडी लैंग्वेज और मर्दों वाली चाल।
3. भगवा कपडे में संत, यूनिफॉर्म में सैनिक और आम कपड़ो में डिवाइन राजकुमार।
4. हर सांस में देशभक्ति और अनुशासन।
5. किसी भी विदेशी राष्ट्र के
प्रमुख के सामने ज्यादा प्रभावशाली।
6. चुनाव में इतना वादा निभाने वाला कोई नेता नहीं है।
7. राष्ट्र प्रथम। परिवार का कोई भी व्यक्ति निकट नहीं रहता।
8. कभी छुट्टी नहीं लिया।
9. कभी बीमार नहीं पड़ता।
10. जरूरत जितना ही बोलना जरुरत जितना चुप रहना।
11. चेहरे पर थकान नहीं। हास्य से भरपूर।
12. भाषण और भाषा पर पूरा कमांड।
13. विरोधियों की आलोचना और बयानबाजी से विचलित नहीं होते।
14. विपक्ष बेवकूफी वाले बयानों पर समय नष्ट नहीं करते। अपने काम पर ध्यान।
15. स्वास्थ्य, परम्परा और इमानदारी का मिश्रण
16. पूर्ण समर्पण और दृढ़ निश्चय के साथ निर्णय।
17. हिन्दू संस्कृति और शान के प्रतीक
18. आंखे किसी को भी वशीभूत कर सकती है।
19. कोई कन्फ्यूजन नहीं, कोई डर नहीं, कोई स्वार्थ नहीं।
20. 70+ की उम्र में भी एक नौजवान से ज्यादा ऊर्जा। 20 घंटे तक लगातार यात्रा और काम करने की क्षमता।
विश्व के किसी भी राजनेता में इतने गुण नहीं मिल सकते।
सोमवार, 4 मार्च 2024
रविवार, 25 फ़रवरी 2024
असली- नकली पहचानिए
🍃 *Arogya*🍃
*दूध असली है या नकली ऐसे पहचानिए मिलावट के तरीके*
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लेकिन अब मिलावट के तरीके बदल गए हैं, काफी तकनीकी हो गए हैं। अब तो दूध को सीधा गलत तरीके से बनाने की कोशिश की जाती है। केवल दूध ही नही 6, दूध से बनने वाले अन्य खाद्य पदार्थ जैसे कि पनीर, घी, मावा, इत्यादि गलत तरीकों से बनाए जा रहे हैं।
*सर्फ*
जी हां… शायद आज तक आप इस सच्चाई से परे ही रहे हों, लेकिन दूध से बनने वाला ‘मावा’ अकेले दूध की मदद से ना बनकर कपड़े धोने वाले सर्फ के प्रयोग से बनाया जा रहा है। त्योहारों पर मिठाई की डिमांड बढ़ने पर मांग की पूर्ति करने के लिए दुकानदार खतरनाक तरीका अपना रहे हैं। वो ऐसे सिंथेटिक मावे की मिठाई बेच रहे हैं, जिनमें वाशिंग पाउडर तक मिलाया जाता है।
*मिठाई में भी*
देशभर में सप्लाई होने वाली इस मिठाई को मुरैना और भिंड में बड़े स्तर पर बनाया जाता है। एक बार माल तैयार होते ही उसे ग्वालियर भेजा जाता है और फिर देशभर में सप्लाई किया जाता है।
*वाशिंग पाउडर*
लेकिन मावे को बनाने के लिए वाशिंग पाउडर का इस्तेमाल क्यूं हो रहा है, इसके पीछे भी लोगों ने एक जुगत लगाई है। दरअसल इस सिंथेटिक मावे को बनाने के दौरान उसमें वाशिंग पाउडर भी डाला जाता है। पहले दूध से क्रीम निकाली जाती है, जिसके बाद उसमें यूरिया के अलावा डिटर्जेंट पाउडर और घटिया क्वालिटी का रिफाइंड या वनस्पति घी मिलाया जाता है।
*मावे को बनाने के लिए*
मावे को बनाने के लिए जिस यूरिया की जरूरत पड़ती है वह महंगा होता है, जब मिलावट करने वाले लोगों को समझ में आया कि यूरिया का काम वाशिंग पाउडर भी कर सकता है तो उन्होंने मिलावट का यह गंदा खेल आरंभ कर दिया। इन सभी मिलावटी चीजों को मिलाने के बाद जो पदार्थ तैयार होता है, उससे फिर मावा बना लिया जाता है।
*ऐसे पहचानें नकली दूध*
चलिए यहां आपको कुछ तरीके बताते हैं जो आपको असली या नकली दूध में फर्क बताने में सहायक सिद्ध होंगे।
*पहला तरीका*
सिंथेटिक दूध की पहचान करने के लिए उसे सूंघे। अगर उसमें साबुन जैसी गंध आती है तो इसका मतलब है कि दूध सिंथेटिक है जबकि असली दूध में कुछ खास गंध नहीं आती है।
*दूसरा तरीका*
असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है।
*तीसरा तरीका*
असली दूध स्टोर करने पर अपना रंग नहीं बदलता,जबकि नकली दूध कुछ वक्त के बाद पीला पड़ने लगता है। दूध में पानी के मिलावट की पहचान के लिए दूध को एक काली सतह पर छोड़ें। अगर दूध के पीछे एक सफेद लकीर छूटे तो दूध असली है।
*चौथा तरीका*
अगर हम असली दूध को उबालें तो इसका रंग नहीं बदलता, वहीं नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है।
*पांचवा तरीका*
दूध में पानी की मिलावट की जांच करने के लिए किसी चिकनी लकड़ी या पत्थर की सतह पर दूध की एक या दो बूंद टपकाकर देखिए। अगर दूध बहता हुआ नीचे की तरफ गिरे और सफेद धार सा निशान बन जाए तो दूध शुद्ध है।
*छठा तरीका*
असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती। वहीं, नकली दूध को अगर आप अपने हाथों के बीच रगड़ेंगे तो आपको डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी।
*Dr.(Vaid) Deepak Kumar*
*Adarsh Ayurvedic Pharmacy*
*Kankhal Hardwar* *aapdeepak.hdr@gmail.com*
*9897902760*
बुधवार, 21 फ़रवरी 2024
रविवार, 18 फ़रवरी 2024
किसान आंदोलन
किसान आंदोलन देशहित में नहीं
किसान आंदोलन पंजाब से शुरू हो रहा है। पंजाब के किसान पंजाब सरकार से अपनी मांगे न मनवाकर सीधे दिल्ली कूच कर केंद्र सरकार पर दबाब डालने की राजनीति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पंजाब के किसान देश के अमीर किसानों की श्रेणी में आते हैं। अभी तक सरकार द्वारा किसानों को जो छूट दी गई है उसका सबसे ज्यादा फायदा पंजाब के किसान ही उठाते हैं। फिर क्यों ये किसान ऐसी मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे हैं जो किसी भी सरकार के लिए मानी नहीं जा सकती।
ऐसा लगता है जैसे यह आंदोलन राजनीति से प्रेरित है। विपक्ष को मोदीजी की सफलता रास नहीं आ रही है। जब विपक्ष में बैठी होती थी तब इन्होंने MSP जैसे कानूनों को लागू करने से मना कर दिया था क्योंकि ये कानून देशहित में नहीं थे। आज विपक्ष खासकर राहुल गांधी सत्ता की चाहत में कह रहे हैं की हमारी सरकार आई तो हम किसानों की सभी बातों को मान लेंगे। राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाकर किसानों की मांगों के समर्थन की बात कर रहे हैं। जबकि उन्हें भी पता है कि MSP की सभी मांगो को पूरा करना सम्भव नहीं है।
देश का बजट 46 लाख करोड़ रुपये है और MSP की सभी मांगो को मान लेने में ही 40 लाख करोड़ रुपये खर्च हो जाएगा। लेकिन सत्ता की छटपटाहट में विपक्षी नेतागण सबकी सब मांगे मान लेने को तैयार बैठे हैं। वे यह नहीं सोच रहे की इन मांगों को मान लेने पर इनकी पूर्ति कैसे करेंगे? वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा किसानों के हित मे अनेक योजनाएं बनाई गई है जिसका लाभ किसान उठा रहे हैं। किसानों के बैंक खाते में धन, खाद में सब्सिडी, बिजली बिल में छूट, बैंक लोन में माफी एवं छूट आदि अनेको योजनाओं का लाभ देश के किसान उठा रहे हैं। एक आम आदमी को भी इतनी छूट नहीं मिलती जितनी किसानों को मिल रही है। वास्तव में तो किसानों को मिलने वाली छूट छोटे किसानों को मिलनी चाहियें। बड़े किसान जो करोडपति हैं उन्हें खुद से किसानों को मिलने वाले लाभों को छोड़ कर छोटे किसानों ला सहयोग करना चाहिए। लेकिन इस आंदोलन में बड़े- बड़े किसान मर्सडीज आदि गाड़ियां लेकर चल रहे हैं। ऐसे किसानों का आंदोलन अराजकता फैलाने के लिये ही किया जा रहा लगता है। किसानों की इन मांगों से देश मे महंगाई बेहताशा बढ़ जायेगी। आम आदमी का जीवन दुश्वार हो जायेगा। किसानों को सबके हित की बात भी सोचनी चाहिये।
सुनील जैन राना
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