कोई माने तो न!
(जैसा मिला वैसा भेजा)
घोर परिवारवाद की लालटैन बुझ गई , पंजा टूट गया ....
तेजस्वी द्वारा शर्ट और जीन्स पहनकर राहुल की नकल करने की राजनीति नहीं चली , दोनों को ले डूबी .....
चुनाव होते ही भाई बहन के विदेश निकल जाने की राजनीति समझ नहीं आई....
देश के संवैधानिक संस्थानों पर लगातार अटैक करने की राजनीति अब नहीं चलती .....
80 साल से लगातार एक ही विचारधारा का वोटबैंक बने मुस्लिम समाज को कम से कम अब तो समझ लेना चाहिए कि राष्ट्र की मुख्यधारा में आए बगैर वे सामाजिक समरसता का हिस्सा नहीं बन पाएंगे । राष्ट्रीय स्वाभिमान की समरसता में बहने के लिए उन्हें लगातार पिछलग्गू बनने बचना चाहिए । यह देश मुसलमानों का भी उतना ही है जितना हिंदुओं का । राष्ट्रीय राजनीति में उन्हें भी प्रवेश करना चाहिए ।
लेकिन अफसोस ! जब कभी भी राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलता है , वे विपक्षी दलों के उन दलों का 100% पिट्ठू बन जाते हैं , जिनका नेतृत्व हिन्दू नेताओं के पास दादलाई चला आ रहा है । मुस्लिम दोस्तों को मुस्लिम समाज के एकमात्र राष्ट्रवादी नेता असाउद्दीन ओवैसी से सबक सीखना चाहिए । ओवैसी मुस्लिम राजनीति अवश्य करते हैं , लेकिन कभी भी राष्ट्रप्रेम प्रदर्शित करने में पीछे नहीं रहते । बिहार ने एक तगड़ा संदेश दमघोटू राजनीति को दिया है जिसे सभी को पढ़ना चाहिए ।
बिहार ने बताया है कि सत्ता कड़ी मेहनत , कठोर साधना , गहन रणनीति बनाने और लम्बी तैयारियों के बाद मिलती है । सत्ता गाड़ी में बैठकर सावन में मछली खाने , नवरात्र में लालू के घर जाकर मीट पकाना सीखने , नाव से तालाब में कूद जाने या होटल में घुसकर समोसे तलने से नहीं मिलती । खेत में उतरकर धान रोपने अथवा मोटर मैकेनिक बनने का नाटक करने से सत्ता नहीं मिलती । चुनाव शुरू होने और मतगणना से पहले विदेश भाग जाने से बिल्कुल नहीं मिलती ।
जेन जी को भड़काने अथवा चोर चोर चिल्लाने से तो बिल्कुल मिलती ही नहीं । और हां तेजस्वी यादव ! बिहारी जनता सरकारी नौकरी पसंद करती है , यह ठीक है । लेकिन बिहारी तुम्हारे पिता लालू और तुम्हारी तरह रामद्रोही नहीं हैं ? तुम्हारा खानदान चारा चोर और जमीन चोर हो सकता है , बिहारी जनमानस राष्ट्रभक्त है , स्वाभिमानी है । तो देखो , बड़ी बड़ी हॉक रहे थे । आ गिरे न चारों खाने चित्त जमीन पर ? जीभ भी पूरी की पूरी बाहर निकल आई न ?
हम बिहार की राष्ट्रभक्त , रामभक्त , परिश्रमी और स्वाभिमानी जनता को हजारों सैल्यूट देते हैं । बिहारियों ने दिखा दिया कि जबरिया आतंकवाद की आग में झोंके जा रहे देश की रक्षा में जो तत्पर हैं , बिहारी उनके साथ हैं । बिहार ने दिखा दिया कि उन्हें काम करने वालों और देश को लूटने वालों के बीच फर्क ढूंढना खूब आता है । जो लोग बिहार की छठ पूजा को विश्वव्यापी बनाते हैं , यूनेस्को तक ले जाते हैं , राम मंदिर बनाते हैं , सीतामढ़ी सजाते हैं , सुशासन लाते हैं , बिहारी उनके साथ हैं । बिहार अपनी सेनाओं के साथ है , विकास के साथ है । राष्ट्रीय मुख्यधारा में बहते हुए बिहार की जनता ने जैसा स्पष्ट संदेश दिया , एक बार हम फिर उस जज्बे को सैल्यूट देते हैं ।
,,,,,,,कौशल सिखौला
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