कुछ अच्छा लगे तो सराहना तो बनती है!
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(जैसा मिला वैसा भेजा)
आज टीवी पर देखा कि बिहार चुनाव परिणाम के बाद मोदी जी भाजपा कार्यालय आए तो उन्होंने गमछा घुमा कर कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया ।
उसके बाद मोदी जी को मखाने की माला पहनायी गई ।
उस व्यक्ति को आप कैसे हराओगे जो स्थानीय प्रतीकों का इतना सूक्ष्म अवलोकन भी करता है और उसे प्रयोग में भी लाता है ।
पिछले लोकसभा चुनाव के बाद कुछ लोगों को लगने लगा था कि मोदी मैजिक कम हो रहा है ।
लेकिन मोदी और अमित शाह की खास बात ये है कि ये प्रतिकूल परिणाम आने पर दूसरों को दोष नहीं देते , बहाने नहीं बनाते बल्कि चिंतन मनन करते हैं कि गलती कहाँ रह गई ।
महाराष्ट्र और हरियाणा में लोकसभा चुनाव अनुकूल नहीं रहे पर उसके विधानसभा में आशातीत सफलता प्राप्त की ।
दिल्ली में केजरीवाल ने कहा था कि इस जन्म में तो हमे दिल्ली से कोई नहीं हरा सकता ।
वो दिल्ली के साथ साथ अपनी ख़ुद की सीट हार गए ।
भाजपा की एक टीम निरंतर चुनाव की तैयारी में लगी रहती है और ये शोर्ट टर्म और लांग टर्म दोनों गोल ले कर चलती है ।
शोर्ट टर्म वहाँ जहाँ ये मजबूत हैं और लांग टर्म वहाँ जहाँ इनका संगठन कमजोर हैं ।
और आप देखियेगा आने वाले सालों में भाजपा बंगाल , केरल , तेलंगाना यहाँ तक कि तमिलनाडु में भी सत्ता में आएगी ।
हो सकता है शुरू में गठबंधन में आए पर बाद में अपने दम पर भी आएगी ।
भाजपा की चुनावी सफलताएं उत्कृष्ट चुनावी प्रबंधन का परिणाम है , इनके अंदर जनता की नब्ज पकड़ने की खूबी है ।
वो ये भी जानते हैं कि जो ग़लतियाँ अतीत में वाजपेयी जी ने की वो वापस नहीं करनी हैं जैसे कि अति आदर्शवाद ।
अमित शाह का सीधा फ़ंडा है " if you are bad then I am your dad "
सत्ता में रहोगे तो परिवर्तन ला पाओगे , बाहर हो गए तो बस बैठ के खीझते रहोगे ।
भाजपा ने भी थोड़ा बहुत रेवड़ियों की राजनीति सीख ही ली ।
लाडली बहन योजना , महिलाओं के खाते में पैसे भेजना , फ्री राशन देना आदि ऐसी योजनाएं रहीं जिन्होने विभिन्न राज्यों में भाजपा के पक्ष में विशेष रूप से महिलाओं को मोड़ा ।
कुल मिला कर जनता परिपक्व हुई हैं, जंगल राज की पुनरावृत्ति नहीं चाहती , अपराध मुक्त समाज चाहती है , विकास के पथ पर दौड़ना चाहती है , तुष्टिकरण की राजनीति को नकारना चाहती है ।
रही बात तेजस्वी की तो ये तो कहना पड़ेगा कि कुछ लोग विरासत में अपने माँ बाप की ख्याति और सत्कर्म ले कर आते हैं जो उनके जीवन को काफ़ी हद तक आसान कर देता है ।
तेजस्वी को ज़िन्दगी भर लालू और राबड़ी के समय के जंगल राज का खामियाजा भुगतना पड़ेगा और जब सामने भाजपा जैसा प्रतिद्वंदी हो तो ये टोकरा और भी भारी हो जाएगा ।
ऐसा भी नहीं है कि नीतीश कुमार के 20 साल अन्य मुख्य मंत्रियों की तुलना में चमत्कारिक रहे हों पर लालू के जंगल राज से जब भी तुलना होगी वो चमत्कारिक ही माने जाएँगे ।
अब कम से कम अपराधियों को उस प्रकार से सत्ता का सीधा संरक्षण प्राप्त नहीं है ।
पता नहीं क्यों इस बार बिहार के चुनाव परिणामों को ले कर पिछली दो बार की तरह पेट में पानी नहीं हुआ ।
ये तो पता ही था कि NDA वापस आ रहा है पर ऐसी बम्पर जीत होगी ये तो शायद NDA को ख़ुद भी अनुमान नहीं होगा ।
बिहार की जनता को बधाई कि आपने थोड़ा अच्छा और बहुत ख़राब में थोड़ा अच्छा को चुना ।
उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश की जनता भी अगले चुनाव में बहुत अच्छे और बहुत ख़राब में बहुत अच्छे को चुनेगी
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