केरल में होमोसेक्सुयेलिटी से पीड़ित व्यक्ति द्वारा आत्महत्या और उसके सूसाइड नोट में संघ का नाम विचारणीय प्रश्न है। किसी एक व्यक्ति की कमी संगठन की कमी नहीं हो सकती। सूसाइड नोट में वह आदमी बार बार इस कुकृत्य का शिकार होने की बात कह रहा है लेकिन किसी का नाम क्यों नहीं लिख रहा? ये केरल वही है जिसमें सैकड़ों संघ स्वयंसेवकों की हत्या हुई है और इन्हीं ब्रह्मचारी कम्युनिस्ट और कांग्रेसियों ने की है वहाँ एक स्वयंसेवक की हत्या और सूसाइड नोट में आरोप एक सोची समझी साज़िश मालूम देती है। यदि ऐसा न होता तो सूसाइड नोट में किसी का नाम नहीं होता?
संघ में आजन्म अविवाहित जीवन व्रती स्वयंसेवक होने की परंपरा जन्म से है। कम्युनिस्टों के संघ विरोधी आरोपों में से ये भी एक है। आज से तकरीबन पचास साल पहले मेरे एक रिश्ते में बड़े भाई जो उच्च शिक्षित आईएएस अधिकारी थे कार्डहोल्डर कम्युनिस्ट थे और बहुत प्रभावी थे। संघ और कम्युनिज्म को लेकर चर्चा में जब वे पिछड़ने लगे तो उन्होंने संघ में समलैंगिकता का आरोप लगाया। मैंने उनसे कहा कि ये व्यक्ति विशेष का दुर्गुण हो सकता है संस्था का नहीं। उन्होंने पलट कर कही नहीं ये संघ में आम है। मैंने फिर भी उनसे इस आरोप को वापस लेने का आग्रह किया लेकिन वे और तल्ख हो गये। उनके एक श्रद्धेय समलैंगिकता में रुचि रखते थे और कांग्रेसी थे मैंने उनसे पूंछा कि क्या वे संघ स्वयंसेवक हैं? वे बहुत गुस्से में आ गए और बोले छोटे होकर ये बदतमीजी दे रहे हो। मैंने कहा भाई जब आप समलैंगिकता को पूरे संघ का दुर्गुण बता रहे हैं इसका मतलब मेरे पिता जो संघ स्वयंसेवक हैं आप उनको भी समलैंगिक बता रहे हैं। बस बात वहीं खत्म हो गयी। उसके बाद आज ये आरोप सुनने को मिला है जो एक साधारण स्वयंसेवक की हत्या कर लगाया गया है।
ये टुकड़े टुकड़े गैंग कुछ भी कर सकता है। संघ के बढ़ते प्रभाव और ईसाइयों से मिल रहा समर्थन टुकड़े टुकड़े गैंग की साजिश है। ये टूलकिट है।
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