मंगलवार, 26 अगस्त 2025

धन और धर्म

*मनुष्य की चाल धन से भी बदलती*
*है और धर्म से भी बदलती है..*

*जब धन संपन्न होता है तब अकड़*
*कर चलता है, और जब धर्म संपन्न होता है,*
*तो विनम्र होकर चलता है..!!*

*जिंदगी भले छोटी देना मेरे भगवन्..*
*मगर देना ऐसी -*,
*कि सदियों तक लोगो के दिलों मे -*
*जिंदा रहूँ और हमेशा अच्छे कर्म कर सकूं..!!*

 *परिस्थितियां* 
*स्वभाव बदल देतीं हैं*
*इंसान तो कल भी वही था*
*आज भी वही है*

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