बोया पेड़ बबुल का तो आम कहा से होय।
पंद्रह साल कि सत्ता के खनक में जो बीज आप ने बोया हैं अभिषेक बनर्जी साहब वहीं आप काट रहे हैं,
जनता का खुन इतना चुसा कि जनता अपनी पंद्रह साल कि दबाई हुई आक्रोश को अब आप के हि ऊपर उतार रही हैं,
कि हुई गुनाहो का हिसाब देने तो एक न एक दिन जनता कि अदालत में आना हि था
सत्ता कि खनक हमेशा नहीं रहती ये आप ने सोच हि नहीं पाया, अगर सोच लेते तो इतनी क्रूरता से सत्ता नहीं चला पाते,
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