रविवार, 31 मई 2026

जैसी करनी वैसी भरनी

बोया पेड़ बबुल का तो आम कहा से होय।
पंद्रह साल कि सत्ता के खनक में जो बीज आप ने बोया हैं अभिषेक बनर्जी साहब वहीं आप काट रहे हैं,
जनता का खुन इतना चुसा कि जनता अपनी पंद्रह साल कि दबाई हुई आक्रोश को अब आप के हि ऊपर उतार रही हैं, 
कि हुई गुनाहो का हिसाब देने तो एक न एक दिन जनता कि अदालत में आना हि था 
सत्ता कि खनक हमेशा नहीं रहती ये आप ने सोच हि नहीं पाया, अगर सोच लेते तो इतनी क्रूरता से सत्ता नहीं चला पाते,
कट मनी, गुंडा टैक्स, आर्जिकल में गुंडों को भेज कर साबुत मिटाना, हिंदु कि बेटी को संदेशखाली में मुसलमानों के सामने परोष कर आप ने जो गुनाह किया हैं उस एक एक गुनाह का हिसाब जनता लेगी, आप गलफत में न रहे, हिन्दू जगता हैं पर थोड़ा देर लगती हैं, अब समय आ गया है आप के एक, एक गुनाह का हिसाब होगा।

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जैसी करनी वैसी भरनी

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