गुरुवार, 9 जनवरी 2025
अखबार में भगवान
समाचार पत्र पर भगवान
अक्सर समाचार पत्रों में लगभग सभी धर्मों के भगवान की फ़ोटो छपती रहती हैं। सिर्फ एक मुस्लिम समुदाय है जिसकी कोई धार्मिक फ़ोटो नहीं छपती।
अब ये अखबार अगले दिन पुराने होकर निम्न स्तर के कार्यो में इस्तेमाल होने लगते हैं। कबाड़ी इन्हें 15 रुपये किलों के हिसाब से ले जाता है। जहां से ये पुनः 20 रुपये किलों में बिक जाते हैं। चाट पकौड़ी वाले, जलेबी वाले इन्हें ले जाते हैं। जो इन्हें ले जाकर अपने हिसाब से कट करके रख लेते हैं। इन्ही अखबारों में धार्मिक फ़ोटो वाले पेज़ भी होते हैं। अब अगर किसी चाट वाले या जलेबी वाले को अपने ग्राहक को चाट या जलेबी देते समय किसी भगवान की फ़ोटो ऊपर आ गई हो तो जल्दी में वह यह नहीं देखता। बस अखबार के पत्ते लगाकर देता चला जाता है। खाने वाले ग्राहक भी चाट चाट कर चाट या जलेबी के मज़े लेते हैं। उन्हें भी अपनी झूठन के नीचे कोई भगवान दिखाई नहीं देते। उन्हें तो सिर्फ टेस्ट दिखाई देता है।
ऐसा होना हमारे भगवन्तों का बहुत अनादर है। इसी वजह से कुछ हिंदुओ में अपने धर्म के प्रति न सम्मान होता है और न ही आस्था होती है। उन्हें तो सिर्फ अपनी मौज मस्ती से मतलब है। ऐसे हिंदुओ को नॉनवेज जगह पर वेज़ खाने में भी कोई समस्या दिखाई नहीं देती। भले ही वहां वेज़ और नॉनवेज एक ही तेल में पकाया जा रहा हो।
समाचार पत्र पर धार्मिक फ़ोटो के बारे में लिखने का मुख्य आशय यह है की ऐसे में किसी चाट के ठेले पर कोई पुराने अखबार के दोने में चाट खा रहा हो और कोई धर्म प्रेमी संगठन के लोग यह देखकर हंगामा कर दे तो बबाल मच सकता है। जबकि ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा है। हो सकता है की उज़ संगठन के लोगों ने भी ऐसे ही चाट या जलेबी खाई हो। लेकिन आज योगी राज में ऐसे संगठन जरा जरूरत से ज्यादा जागरूक दिखाई देते हैं।
बहराल कुछ भी हो, ऐसा होना ठीक नहीं है। पहली तो बात समाचार पत्रों में भगवंतों की फ़ोटो छपे ही नहीं। यदि छप रही हैं तो हम सभी का कर्तव्य है की समाचार पत्र पढ़कर फ़ोटो को कैंची से काटकर अलग रख ले। फिर उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें।
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