रविवार, 15 अक्टूबर 2023

जातीय जनगणना

जातीय जनगणना की सियासत विकास के रास्ते पर चल रहे देश को सत्ता की खातिर जातियों में बांटकर सत्ता कब्जाने के प्रयास हो रहे हैं। आज़ादी मिली लेकिन हिन्दू- मुस्लिम के चक्कर मे देश का बंटवारा हो गया। पूर्व पीएम वी पी सिंह ने मंडल - कमंडल कर देश मे फिर से जातिवाद को हवा देकर देश मे अराजकता का माहौल बना दिया। आरक्षण की हवा से एक बार फिर से देश को बांटने का प्रयास किया गया। कांग्रेस ने अल्पसंख्यक के नाम पर राज तो किया लेकिन अल्पसंख्यको का भला नहीं किया। वर्तमान में चुनाव नजदीक आते ही देश की कई पार्टियों को एक बार फिर से जात- पात का बीज बोकर अपना वोटबैंक बनाने की सूझ रही है। जातिवाद के नाम पर बांट देना चाहते हैं देश को। जातीय जनगणना की सियासत कर रहे कुछ दलों को चुनावो के नज़दीक आने पर अपनी स्थिति कमजोर देख जातीय समीकरण पर जीत हासिल करने की सोच के कारण उन्हें जातीय जनगणना कराने की सूझ रही है। बिहार सरकार ने बिहार में जातीय जनगणना कराकर राज्य में द्वेष भाव का बीज बो दिया है। इससे किसे अधिक फायदा होगा यह तो चुनावों के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इसकी देखा देखी अन्य कुछ राज्यो में जातिगत जलूस निकलने लगे हैं। अब हर कोई अपनी जाति संख्या को मजबूत बताकर सरकारों से सरकार में अपनी हिस्सेदारी की बात करने लग रहा है। ऐसा होना दुर्भाग्यपूर्ण ही है। लोगो के आपस मे भाईचारे में ही कमी आयेगी जो समाज के लिये घातक सिद्ध हो सकती है। अल्पसंख्यक समाज जिसमें आती तो कई कौम हैं लेकिन उनमें मुस्लिम समाज की ही प्रमुखता है। बहुसंख्यक समाज जो हिन्दू समाज भी कहा जाता है जातीय जनगणना के नाम पर उसको बाटने की साज़िश हो रही लगती हैं। इतिहास गवाह है की हिंदू समाज में भले ही अनेकों धर्म के लोग हों लेकिन सभी मिलजुल कर रहते आये हैं। चुनावों के समय जातिगत जनगणना का बीज बोकर अपनी फ़सल काटने वाले लोग सबका भला नहीं कर सकते। सिर्फ सत्ता की खातिर विकास की उपेक्षा कर सत्ता प्राप्त करने वाले देशहित की बात सोच ही नहीं सकते। जनता को अपने भविष्य को ध्यान में रखकर वोट देते समय सही पार्टी का चुनाव कर वोट करना चाहिये। सुनील जैन राना

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