सोमवार, 29 दिसंबर 2025

कांग्रेस के काले सच

#खटमलपरिवार 👉खोंग्रेस् का इतिहास भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े थे राजीव गांधी।
आप हमें  आर्थिक रूप से चाहे तो छोटी सी मदद कर सकते हैं upi के माध्यम से 9540051769 darpan kumar jha 
आज कुछ किस्से मै आपको बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे कि राजीव गांधी जैसे लोग इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री भी थे..?

उनके पास सिर्फ एक ही योग्यता थी कि वो फिरोज गांधी के बेटे थे... उफ्फ माफ करना... वो पंडित नेहरू के नाती (नवासे) थे।

पूरा लेख कमेंट में है अंत तक पढ़िए....

5-7 मिनट लगेगा... पर आज राजीव गांधी के बारे में ऐसी बातें जानेंगे कि जो आपको पहले से पता नहीं होगीं..

राजीव गांधी कोई पढ़ाई लिखाई में अच्छे नहीं थे 5 सितारा दून स्कूल से स्कूलिंग के बाद 1961 में उन्हें इंजियनीरिंग पढ़ने लन्दन के ट्रिनिटी कॉलेज कैब्रिज भेजा गया,

यहीं पर राजीव से एडवीज अंतोनियो अल्बिना माइनो जिन्हें आज हम सोनिया गांधी के नाम से जानते हैं के सम्पर्क में आये,

1965 तक वो प्यार में डूबे रहे निरंतर फेल होते रहे और पास नहीं हो सके जिसके बाद कॉलेज ने राजीव को निकाल दिया,

फिर राजीव ने 1966 में लन्दन स्थित इम्पीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, किन्तु वहां भी फेल हुए,

उसी वर्ष राजीव की मां इंदिरा प्रधानमंत्री बनी और राजीव भारत आ गए, 1966 में दिल्ली फ्लाइंग क्लब ज्वाइन किया और प्लेन उड़ाना सीखा...

अब 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा ने जुगाड़ लगवा कर राजीव को सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया में कमर्शियल पायलट के तौर पर नौकरी में लगवा दिया,

1971 में भारत पाक युद्ध हुआ भारतीय सेना व् वायु सेना को लाजिस्टिक स्पोर्ट के लिए पायलट्स की आवश्यकता थी और एयर इंडिया के कमर्शियल पायलट्स को रसद व् हथियार एयर ड्राप करने हेतु बुलाया गया,

सारे के सारे पायलट्स तुरन्त युद्ध क्षेत्र में सेवाएं देने को आ गये सिवाय एक के और वो राजीव गांधी थे

जो डर के मारे सोनिया गांधी संग व् इटली के दूतावास में जा छिपे थे,

1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव राजनीती में आये...

1984 में इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने दोपहर में गोली मार दी, राजीव गांधी ने भावनाओं से ऊपर उठकर शोक संताप में समय लगाने के बजाय उसी दिन शाम को भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर अपनी तशरीफ़ रख दी,

और कांग्रेसियों को सिखों का नरसंहार करने का आदेश दे डाला, कांग्रेसियों ने स्कूलों के रजिस्टरों और वोटर लिस्ट निकाल निकाल कर सिखों के घर खोजे और घरों में घुसकर हजारों सिखों को काटा.. 😭

महिलाओं से दुष्कर्म किया.. 😭

कई गर्भवती महिलाओं को जीवित ही जला दिया,

कांग्रेस नेताओं के पेट्रोल पंपों से तेल सप्पलाई किया गया सिखों को उनके बच्चो को उनकी सम्पत्तियों को फूंकने हेतु, सड़क चलते सिखों के गले में टायर डालकर जला दिया गया,

यहाँ तक की राष्ट्रपति जैल सिंह को भी नहीं बख्शा गया और जब वो गाड़ी में थे तो उनपर भी कांग्रेसियों ने हमला किया,

गाड़ी के कांच तोड़ दिए गए,

दिल्ली में कांग्रेसियों का हिंसा का तांडव शुरू हुआ और शीघ्र ही ये देश के कोने कोने में फ़ैल गया

और राजीव गांधी ने देश भर में हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतरवाकर इंदिरा की मृत्यु का बदला लिया,

और बाद में राजीव गांधी ने उसे “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” वाला ब्यान देकर उसे न्यायोचित ठहरा दिया,

खैर अगले चुनाव हुए और जनता ने राजीव द्वारा करवाये सिख नरसंहार को महत्व दिए बिना राजीव को इंदिरा की सहानुभूति के नाम पर 411 सीटें देकर असीम शक्ति दे दी..

और राजीव ने निरंकुश होकर उस बहुमत का दुरूपयोग किया,

1985 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानो को न्याय देकर मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक से बचने और गुजारे भत्ते का जो मार्ग खोला था उसपर आतातायी राजीव ने अपनी अक्ल पर पड़ा बड़ा वाला भीमकाय पत्थर दे मारा..

और अपुर्व बहुमत का प्रयोग कर मुस्लिम तुष्टिकरण का नया अध्याय लिखा और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटकर मुस्लिम महिलाओं को पुनः गुलाम बना दिया

भोपाल गैस कांड हुआ हजारों निर्दोष लोगों के हत्यारे यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को राजीव ने अमेरिकी सरकार से सौदेबाजी कर सुरक्षित अमरीका भेज दिया,

राजीव में न वैश्विक कूटनीति की समझ थी न सैन्य शक्ति के सदुपयोग की अतः अपनी सिमित विवेक क्षमता से ग्रस्त राजीव गांधी ने श्रीलंका में LTTE से लड़ने भारतीय फोर्सेज जबर्दस्ती भेज दीं

और इंडियन पीस कीपिंग फोर्सेस के 1400 सैनिक मरवाये और 3000 सैनिक घायल करवाये

हलांकि बाद में राजीव को थूककर चाटना पड़ा

और सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा,

राजीव को अपनी उस गलती के कारण ही श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई सैनिक द्वारा हमला किया गया था,

और वो पहले व् एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्हें विदेशी धरती पर विदेशी सैनिक द्वारा अपमानित होना पडा!

1989 में बोफोर्स का घोटाला खुला

जिसमे पता चला की राजीव गांधी ने सोनिया के “करीबी मित्र” जिसे सोनिया अपने संग इटली से दहेज़ में लायी थी और जो सोनिया राजीव के घर में ही रहता था

उस ओटावियो कवात्रोची के द्वारा बोफोर्स सौदे में राजीव ने दलाली खायी थी,

राजनितिक नौटँकियां करने में भी राजीव किसी से पीछे न थे,

टीवी पर आने वाले रामायण सीरियल में राम का पात्र निभाने वाले अरुण गोविल को लेकर राजनितिक यात्राएं शुरू की

हिंदुओं को मुर्ख बनाकर उन्हें उनकी आस्था द्वारा विवश कर उनका वोट हथियाने हेतु,

1991 में Schweizer Illustrierte नामक स्विस मैगज़ीन ने काले धन वाले उन लोगों के नाम का खुलासा किया जिनका अवैध धन स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा था

और उसमें राजीव गांधी का भी नाम था...

मैगज़ीन ने खुलासा किया कि राजीव गांधी के 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक स्विट्ज़रलैंड के बैंक के एक अकाउंट में जमा हैं

1992 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया और द हिन्दू ने खबरें छापीं की राजीव गांधी को सोवियत ख़ुफ़िया एजेंसी KGB से निरंतर धन मिलता था,

और रूस ने इस खबर की पुष्टि भी की थी और सफाई में कहा था कि सोवियत विचारधारा के हितों की रक्षा हेतु ये पैसे दिए जाते रहे हैं,

1994 में येवगिनिया अल्बट्स और कैथरीन फिट्ज़पेट्रिक ने KGB प्रमुख विक्टोर चेब्रिकोव के हस्ताक्षर युक्त पत्र प्रस्तुत कर ये खुलासा किया कि राजीव के बाद राजीव के परिवार सोनिया और राहुल को KGB की ओर से धन उपलब्ध करवाया जाता रहा है

और KGB गांधी परिवार से निरन्तर कॉन्टैक्ट में रहती है,

अब यदि आप पूरा आकलन करें तो पाएंगे कि राजीव एक औसत से कम समझदार वो व्यक्ति थे जिसने निर्दोष सिख मरवाये,

भोपाल गैस कांड में हजारों निर्दोषों के हत्यारे को भगाया,

मुस्लिमों महिलाओं का जीवन नर्क बनाया,

रक्षा सौदों में दलाली खायी,

KGB जैसी एजेंसी के वो खुद एजेंट थे और उससे पैसे लेते थे, कूटनीति की समझ नहीं थी

और मूर्खतावश श्रीलंका में 1400 भारतीय सैनिकों की बलि चढ़वाई और देश का नाम कलंकित किया,,

"साथ चलें, दोस्ती बढ़ाएं! 😊 जुड़े रहने के लिए फॉलो जरूर करें 👍 " 💯,,,,, इसी तरह की इतिहास से जुड़ी पोस्ट पढ़ने के लिए  धन्यवाद
#patriotism #dhurandhar #bharat #देशभक्ति #फ़र्ज़ #AjitDoval

उत्तम स्वास्थ्य

उत्तम स्वास्थ्य

सिंथेटिक दूध

रविवार, 28 दिसंबर 2025

उत्तम विचार

दो कान की व्यथा

*👂 कान की आत्मकथा👂* 

 *एक बार आवश्य पढ़े... मन में गुदगुदी होने लगेगी...😊* 

*मैं कान हूँ........👂*
*हम दो हैं...*👂👂 
*दोनों जुड़वां भाई...*

*लेकिन...........*
*हमारी किस्मत ही ऐसी है....*

*कि आज तक हमने एक दूसरे को देखा तक नहीं 😪*


*पता नहीं..* 
*कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है 😠...*



*दु:ख सिर्फ इतना ही नहीं है...*
 
*हमें जिम्मेदारी सिर्फ सुनने की मिली है......*

*गालियाँ हों या तालियाँ..,*
*अच्छा हो या बुरा..*,
*सब* 
*हम ही सुनते हैं...*


*धीरे धीरे हमें खूंटी समझा जाने लगा...*

*चश्मे का बोझ डाला गया,*

*फ्रेम की डण्डी को हम पर फँसाया गया...*

*ये दर्द सहा हमने...*

*क्यों भाई..???*

*चश्मे का मामला आंखो का है*
*तो हमें बीच में घसीटने का* 
*मतलब क्या है...???*

*हम बोलते नहीं* 

*तो क्या हुआ,* 

*सुनते तो हैं ना...*

*हर जगह बोलने वाले ही क्यों आगे रहते है....???*

*बचपन में पढ़ाई में* 
*किसी का दिमाग*
*काम न करे तो*
*मास्टर जी हमें ही मरोड़ते हैं 😡...* 



*जवान हुए तो*
*आदमी,औरतें सबने सुन्दर सुन्दर लौंग,बालियाँ, झुमके आदि बनवाकर हम पर ही लटकाये...!!!*


 *छेदन हमारा हुआ,*
*और तारीफ चेहरे की ...!*

*और तो और...*
*श्रृंगार देखो...* 
*आँखों के लिए काजल...*
*मुँह के लिए क्रीमें...*
*होठों के लिए लिपस्टिक...*
*हमने आज तक कुछ माँगा हो तो बताओ...*

*कभी किसी कवि ने,* 
*शायर ने* 
*कान की कोई तारीफ की हो तो बताओ...*

*इनकी नजर में आँखे, होंठ, गाल,ये ही सब कुछ है...*


*हम तो जैसे किसी मृत्युभोज की*
*बची खुची दो पूड़ियाँ हैं..,* 

*जिसे उठाकर चेहरे के साइड में  चिपका दिया बस...*

*और तो और,*

*कई बार बालों के चक्कर में हम पर भी कट लगते हैं* ... 

*हमें डिटाॅल लगाकर पुचकार दिया जाता है...*


*बातें बहुत सी हैं,* 
*किससे कहें...???*

*कहते है दर्द बाँटने से मन हल्का* 
*हो जाता है...*

*आँख से कहूँ तो वे आँसू टपकाती हैं..*
*नाक से कहूँ तो वो बहती है...*

*मुँह से कहूँ तो वो हाय हाय करके रोता है...*

*और बताऊँ...*

*पण्डित जी का जनेऊ,* 
*टेलर मास्टर की पेंसिल,* 
*मिस्त्री की बची हुई बीड़ी*
*मोबाइल का ईयरफोन सब हम ही सम्भालते हैं...*


*और* 

*कोरोना के टाईम मास्क का झंझट भी हम दोनों ने मिलकर ही झेला है...*

*कान नहीं जैसे पक्की खूँटियाँ हैं हम...और भी कुछ टाँगना, लटकाना हो तो ले आओ भाई...*

*तैयार हैं हम दोनों भाई...!¡!*

 *थोड़ा थोड़ा हँसते रहिये* 
 *हमेशा स्वस्थ रहिए।*
😊🌹🌹😊💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
   😂😜😍😛😍😜😂😜

बुधवार, 24 दिसंबर 2025

उत्तम विचार

हे प्रभु

बेटियों के बलात्कारियों से जब माँ ने कहा "अब्दुल अली एक-एक करके करो, नहीं तो वो मर जाएंगी "।

ये सच्ची घटना घटित हुई थी 8 अक्टूबर 2001 को बांग्लादेश में।

अनिल चंद्र और उनका परिवार 2 बेटीयों पूर्णिमा व 6 वर्षीय छोटी बेटी के साथ बांग्लादेश के सिराजगंज में रहता था। उनके पास जीने खाने और रहने के लिए पर्याप्त जमीन थी. बस एक गलती उनसे हो गयी, और ये गलती थी एक हिंदु होकर 14 साल व 6 साल की बेटी के साथ बांग्लादेश में रहना। एक क़ाफिर के पास इतनी जमीन कैसे रह सकती है..? यही सवाल था बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिद ज़िया के पार्टी से सम्बंधित कुछ उन्मादी लोगों का।

8 अक्टूबर के दिन

अब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली, अब्दुर रउफ, यासीन अली, लिटन शेख और 5 अन्य लोगों ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया, अनिल चंद्र को मारकर डंडो से बाँध दिया, और उनको काफ़िर कहकर गालियां देने लगे।
 
इसके बाद ये शैतान माँ के सामने ही उस १४ साल की निर्दोष बच्ची पर टूट पड़े और उस वक्त जो शब्द उस बेबस लाचार मां के मुँह से निकले वो पूरी इंसानियत को झंकझोर देने वाले हैं।

अपनी बेटी के साथ होते इस अत्याचार को देखकर उसने कहा "अब्दुल अली, एक एक करके करो, नहीं तो मर जाएगी, वो सिर्फ १४ साल की है।"

वो यहीं नहीं रुके उन माँ बाप के सामने उनकी छोटी 6 वर्षीय बेटी का भी सभी ने मिलकर ब#लात्कार किया ....उनलोगों को वही मरने के लिए छोडकर  जाते जाते आस पड़ोस के लोगों को धमकी देकर गए की कोई इनकी मदद नहीं करेगा।

ये पूरी घटना बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी अपनी किताब “लज्जा” में लिखी जिसके बाद से उनको देश छोड़ना पड़ा, ये पूरी घटना इतनी हैवानियत से भरी है पर आजतक भारत में किसी बुद्धिजीवी ने इसके खिलाफ बोलने की हैसियत तक नहीं दिखाई है, ना ही किसी मीडिया हाउस ने इसपर कोई कार्यक्रम करने की हिम्मत जुटाई।

ये होता है किसी इस्लामिक देश में हिन्दू या कोई अन्य अल्पसंख्यक होने का, चाहे वो बांग्लादेश हो या पाकिस्तान।

पता नहीं कितनी पूर्णिमाओं की ऐसी आहुति दी गयी होगी बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसँख्या को 22 प्रतिशत से 8 प्रतिशत और पाकिस्तान में 15 प्रतिशत से 1 प्रतिशत पहुँचाने में।

और हिंदुस्तान में हामिद अंसारी जैसे घिनौने लोग कहते है कि हमें डर लगता है, जहाँ उनकी आबादी आज़ादी के बाद से 24 प्रतिशत अधिक बढ़ी है। अगर आप भी सेक्युलर हिंदु (स्वघोषित बुद्धिजीवी) हैं और आपको भी लगता है कि भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है तो कभी बांग्लादेश या पाकिस्तान की किसी पूर्णिमा को इन्टरनेट पर ढूंढ कर देखिये। मेरा दावा है की आपका नजरिया बदल जाएगा

शनिवार, 13 दिसंबर 2025

S I R से फायदा

📍 *SIR की दिलचस्प बातें:* 

*SIR फॉर्म आया तो पूरा समाज एक लाइन में खड़ा हो गया। तीन अक्षरों का फॉर्म, लेकिन उद्देश्य इतना गहरा कि अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखे लोगों का “हम तो सब जानते हैं” वाला भ्रम टूट गया।*

1️⃣ रिश्तों की रियलिटी चेक

*SIR ने साफ बता दिया- मां-बाप, दादा-दादी ही असली रिश्ते हैं, बाकी सब “जान-पहचान की सूची” में आते हैं।*
और मज़ेदार बात ये कि— *बेटियाँ शादी के बाद कितनी भी दूर चली जाएँ, रिश्ता मायके से ही साबित होता है— कागजों में, समाज में, और दिल में।*

2️⃣ टूटे हुए रिश्तों में नेटवर्क सिग्नल वापस

*वर्षों से बात न करने वाले लोग अब SIR फॉर्म भरवाने के नाम पर पत्नी के मायके जा रहे हैं, बेटियाँ गाँव लौट रही हैं, लोग दस्तावेज़ ढूँढते-ढूँढते वंशावली खोज रहे हैं। SIR ने वो रिश्ते जोड़ दिए जो व्हाट्सऐप भी नहीं जोड़ पाया।* 

3️⃣ धर्म का भ्रम… SIR के आगे फ़ेल

*हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई— सब एक ही काउंटर पर लाइन में खड़े, एक ही पेन से फॉर्म भरते हुए। SIR ने वो कर दिया जो नेताओं की रैलियाँ नहीं कर पाई सबको एक ही नाव में सवार कर दिया।*

4️⃣ पुरानी यादें Rewind Mode में

*लोग आज फिर वही जगह ढूँढ रहे जहाँ— माँ-बाप रहा करते थे, दादा-दादी की छाया थी, और बचपन की धूल थी।* *किराएदार अपने मां-बाप का नाम उसी मकान मालिक से पूछ रहे हैं।*
*जिसे कभी किराया देना पड़ता था। इतिहास अब फेसबुक पोस्ट नहीं— घर-घर की खोज बन गया है।* 

5️⃣ शिक्षा की असली औकात सामने

*SIR ने बता दिया— यह दुनिया पैसा नहीं, दस्तावेज़ माँगती है।*
*शिक्षा सिर्फ नौकरी नहीं, अपना वंश और पहचान जानने की योग्यता भी है।*

6️⃣ पुरखे सिर्फ फोटो नहीं—साक्ष्य हैं

*SIR ने साबित कर दिया— मां-बाप मरकर भी काम आते हैं, वे कागज़ों में, यादों में, और वंश में ज़िंदा रहते हैं।*
इसलिए:
*उन्हें याद करो, सम्मान दो, और अपनी वंशावली बच्चों को भी बताओ।*

7️⃣ सबसे चुभता सच

जब किसी से पूछा— *“तुम्हारे दादा-दादी, नाना-नानी का नाम?” तो आधे लोग नेटवर्क खोजते हैं, बाकी आधे गूगल नहीं, मम्मी को कॉल करते हैं। ये सिर्फ जानकारी नहीं— कटी हुई जड़ों की निशानी है।*

*SIR अभी शुरू हुआ है…*
*आगे कितने किस्से, कितनी कहानियाँ और कितने राज खुलेंगे— बस इंतज़ार करिए, देश भर में वंशावली का महाकाव्य लिखने वाला है*।
🌹💐🌹✍️✍️💐🌹💐

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

विपक्ष का वोट बैंक?

सेना के जूते

.
 *भारतीय सेना के जूते की दास्तान*

    जयपुर की कंपनी सेना के लिए 
              जूते बनाती है,
  फिर वह जूते इजराइल को बेचते थे,

       फिर इजराइल वही जूते 
        भारत को बेचता था.
 और फिर वे जूते भारतीय सैनिकों को 
            नसीब होते थे.

         भारत एक नग जूते के 
       Rs. 25,000/- देता था, 
  और यही सिलसिला काँग्रेस द्वारा 
     कई सालों से चल रहा था.

जैसे ही पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को 
      यह पता चला, वो चौंके और
           आग बबूला हो गए.
      और तुरंत जयपुर कंपनी के 
     CEO को मिले, कारण पूछा, तो ...

जवाब मिला : 
*भारत को डायरेक्ट जूते बेचने पर*
*भारत का सरकारी तंत्र सालों तक*
         *पेमेंट नहीं देता था.*
 इसलिए 
हम दूसरे देशों में एक्सपोर्ट करने लगे.

        मनोहर पर्रिकर ने कहा : 
    *एक दिन, सिर्फ एक दिन भी*
  *पेमेंट लेट होता है, तो आप मुझे*
        *तुरंत कॉल कीजिए.*
         बस .... आपको हमें 
       डायरेक्ट जूते बेचना है, 
          आप प्राइस बताएं.

   और इस तरह आखिर पर्रिकर ने 
    वही जूते सिर्फ *2200/-* में 
           फाइनल किया !!

सोचिए ... जूते के *25,000/-* देकर 
                 काँग्रेस ने सालों तक  
            कितनी लूट मचा रखी थी !! 

        विश्वास नहीं हुआ ना ?? 
              कोई बात नहीं.
           RTI लगाइए या 
        Google खँगालिये.

😎     Google सर्च पर बस 
               इतना लिखिए  👇🏽
 *भारतीय सेना के जूते की दास्तान* 
               सच सामने होगा.

मंगलवार, 9 दिसंबर 2025

सदैव प्रसन्न रहें

मेरा यह निरीक्षण है कि यदि आप दुखी हैं तो आप किसी दुखी व्यक्ति को ही पाएँगे। दुखी लोग दुखी लोगों की तरफ आकर्षित होते हैं—और यह अच्छा है, स्वाभाविक है। अच्छा है कि दुखी लोग खुश लोगों की तरफ आकर्षित नहीं होते, नहीं तो वे उनकी खुशी नष्ट कर देंगे। यह बिल्कुल ठीक है।

💛 केवल खुश लोग खुश लोगों की तरफ आकर्षित होते हैं।

जैसा, वैसा आकर्षित करता है। बुद्धिमान लोग बुद्धिमानों की तरफ; मूर्ख लोग मूर्खों की तरफ।
आप हमेशा अपने ही स्तर के लोगों से मिलते हैं।
इसलिए पहली बात याद रखने की है: यदि संबंध दुख से उपजा है तो वह कड़वा ही होगा।
पहले खुश हों, आनन्दित हों, उत्सवमय हों—तब आपको कोई दूसरा उत्सव मनाता हुआ आत्मा मिलेगी और दो नाचती हुई आत्माओं का मिलन होगा, जिससे एक महान नृत्य जन्म लेगा।

अकेलेपन से संबंध मत माँगिए—नहीं!
वरना आप गलत दिशा में जा रहे हैं। तब आप दूसरे को एक साधन की तरह इस्तेमाल करेंगे और दूसरा आपको। और कोई भी साधन की तरह इस्तेमाल होना नहीं चाहता।
हर व्यक्ति अपने आप में एक लक्ष्य है—स्वयं में पूर्ण।

💛 पहले अकेले रहना सीखिए। ध्यान, अकेले होने की कला है।

यदि आप अकेले खुश रह सकते हैं, तो आपने खुश रहने का रहस्य सीख लिया।
अब आप साथ में भी खुश रह सकते हैं।
यदि आप खुश हैं, तो आपके पास कुछ देने के लिए है। और जब आप देते हैं तभी आपको मिलता है—यह उल्टा नहीं है।
तभी किसी से प्रेम करने की आवश्यकता महसूस होती है।

सामान्यतः लोगों की आवश्यकता होती है कि कोई उन्हें प्रेम करे। यह गलत आवश्यकता है, बचकानी है, अपरिपक्व है।
यह बच्चे का दृष्टिकोण है।

बच्चा जन्म लेता है—स्वाभाविक है कि वह माँ को प्रेम नहीं कर सकता, क्योंकि वह जानता ही नहीं कि प्रेम क्या है, और माँ कौन है। वह असहाय है, उसकी सत्ता अभी गठित नहीं हुई। वह केवल एक संभावना है।
माँ को प्रेम लुटाना होता है, पिता को प्रेम देना होता है, परिवार को प्रेम वर्षा करनी होती है।
यही देख–देखकर बच्चा सीखता है कि सबको उसे प्रेम करना चाहिए। वह यह कभी नहीं सीखता कि उसे भी प्रेम देना है।
वह बड़ा हो जाता है, लेकिन यदि यह दृष्टिकोण पकड़े रहता है कि सबको मुझे प्रेम करना चाहिए, तो वह पूरी जिंदगी दुख झेलता है।
उसका शरीर बड़ा हो गया, पर मन बचकाना ही रह गया।

💛 एक परिपक्व व्यक्ति वह है जिसे यह दूसरी आवश्यकता पता चलती है: अब मुझे किसी से प्रेम करना है।

प्रेम पाने की आवश्यकता बचकानी है।
प्रेम देने की आवश्यकता परिपक्व है।
और जब आप प्रेम देने के लिए तैयार हो जाते हैं, तभी एक सुंदर संबंध जन्म लेता है—अन्यथा नहीं।

“क्या यह संभव है कि संबंध में दो लोग एक–दूसरे के लिए बुरे हों?”
हाँ—यही दुनिया भर में हो रहा है। अच्छा होना बहुत कठिन है।
आप अपने प्रति ही अच्छे नहीं हैं—तो दूसरे के प्रति कैसे होंगे?

💛 आप स्वयं से प्रेम नहीं करते—तो किसी और से कैसे प्रेम करेंगे?
पहले स्वयं से प्रेम करें। अपने प्रति अच्छे बनें।

और आपके धार्मिक संतों ने आपको हमेशा सिखाया है कि अपने प्रति कठोर बनो, अपने प्रति प्रेम मत करो! दूसरों के प्रति कोमल रहो और अपने प्रति कठोर—यह बेतुका है।

मैं आपको सिखाता हूँ: सबसे पहला और सबसे ज़रूरी काम है—अपने प्रति प्रेममय होना।
अपने ऊपर कठोर मत बनो, कोमल रहो।
अपने प्रति care करो।
बार–बार, सात बार, सत्तर–सात बार, सात सौ सत्तर–सात बार—अपने आपको क्षमा करना सीखो।
अपने प्रति विरोधी मत बनो।
फिर आप खिल उठेंगे।

और जब आप खिलते हैं, तब आप किसी दूसरे फूल को आकर्षित करते हैं—यह स्वाभाविक है।
पत्थर पत्थरों को आकर्षित करते हैं; फूल फूलों को।

तब एक ऐसा संबंध जन्म लेता है जिसमें गरिमा है, सुंदरता है, वरदान है।
यदि आप ऐसा संबंध पा सकें, तो आपका संबंध प्रार्थना में बदल जाएगा, आपका प्रेम परमानंद बन जाएगा—और प्रेम के माध्यम से आप जानेंगे कि परमात्मा क्या है।

— ओशो,
Ecstasy: The Forgotten Language,
Chapter 2

सोमवार, 8 दिसंबर 2025

उत्तम विचार

अग्नि तांडव

गोवा में एक नाईट वलब में कार्यक्रम के दौरान आग लगने से दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मृत्यु. कई घायलों को अस्पताल भेजा.
दरअसल इज प्रकार की लापरवाही पहले भी कई बार हो चुकी है. नियम कायदो को ताक पर रख सुविधा शुल्क देकर सबके काम चल जाते हैं. जब कोई हादसा हो जाता है तो लीपापोती कर मामले को शांत कर दिया जाता है. 
दिल्ली में अनेकों भीड़ भरे बाज़ार,, पतली गलियां सबको दिखाई देती हैं, प्रशासन को छोड़कर.
खारी बावली, सदर बाज़ार जैसे बाजारों में हादसा होने पर एम्बुलेंस तो दूर की बात पैदल भी चलना मुश्किल होता है. अब यदि वहाँ हादसा हो जाये तो बहुत अनर्थ हो सकता है.
फायदा ब्रिगेड की NoC तो शायद ही किसी के पास होती होगी.

बुधवार, 3 दिसंबर 2025

सोनी जी की नसिया, अजमेर

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ यानि भगवान ऋषभदेव (Tirthankara Of Jainism) के युग में भारतवर्ष में स्थापित अयोध्यानगरी (Golden Temple Ayodhya Nagari) के अद्भुत व स्वर्णिम दृश्य देखने हैं तो धार्मिक शहर अजमेर ही ऐसी जगह है, जहां हम उस काल के स्वर्णयुग की सैर कर सकते हैं। 

जी हां, अजमेर स्थित सोनी जी नसियां स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में देश की एकमात्र स्वर्णिम अयोध्या नगरी का निर्माण कर रखा है। जैन धर्म के किसी भी मंदिर में इस तरह की अद्भुत अयोध्यानगरी (Golden Temple Ayodhya Nagari ) की रचना नहीं है। इसलिए देश-दुनिया के लाखों लोग हर वर्ष अजमेर के सोनीजी की नसियां के जैन मंदिर (Ajmer Jain Temple ) में दर्शन करने के लिए आते हैं और यहां स्वर्णिम अयोध्या नगरी का दर्शन कर गौरवांवित महसूस करते हैं।

स्वर्णिम अयोध्या नगरी की रचना इतनी सुन्दर व कलात्मक तरीके से की गई हैं कि घंटों तक इसको देखने की इच्छा रहती है। लकड़ी व कांच पर सोने की अनूठी कारीगिरी हर किसी को आकर्षित करती है। नसिया में एक बड़े हिस्से में बनी इस अयोध्यानगरी को संत-महात्मा ही अंदर जाकर देख सकते हैं। शेष दर्शक व पर्यटक इस अयोध्या नगरी का दर्शन पारदर्शी कांच की दीवारों व खिड़कियों से ही कर सकते हैं।

सेठ मूलचंद नेमीचंद सोनी ने इसका निर्माण 1864 में शुरू कराया था, जिसे पूरा होने में २५ वर्ष लगे। सेठ भागचंद सोनी ने इसका निर्माण पूर्ण किया था। इसे श्री सिद्धकूट चैत्यालय एवं करौली के लाल पत्थरों से निर्मित होने के कारण लाल मंदिर भी कहा जाता है। नसियां में स्वर्णिम अयोध्या नगरी सर्वाधिक दर्शनीय है। 

भगवान ऋषभदेव के पंच कल्याणक का दृश्यांकन किया गया है। अयोध्या नगरी में सुमेरू पर्वत का निर्माण जयपुर में कराया गया था। आचार्य जिनसेन द्वारा रचित आदिपुराण पर आधारित है। मूर्तियों में स्वर्ण की परत का प्रयोग किया गया है।
 
#यह_हैं_स्वर्णिम_अयोध्या_के_पंच_कल्याणक :

#गर्भ_कल्याणक :

माता मरुदेवी के रात्रि में 16 स्वप्न देखे थे, जिसके फलानुसार भावी तीर्थंकर का अवतरण अयोध्या में हुआ। इसमें देवविमान और माता के स्वप्न दर्शाए गए हैं।

#जन्म_कल्याणक :

ऋषभदेव (Bhagwan Adinath ) के जन्म पर इंद्र के आसन कंपायमान होने, ऐरावत हाथी पर बालक ऋषभवदेव को सुमेरू पर्वत ले जाने, पांडुकशिला पर अभिषेक और देवों की शोभायात्रा को दर्शाया गया है।

#तप_कल्याणक :

महाराज ऋषभदेव के दरबार में अप्सरा नीलांजना का नृत्य, ऋषभदेव के संसार त्याग कर दिगंबर मुनि बनने और केशलौंचन को दर्शाया गया है।

#केवलज्ञान_कल्याणक :

हजार वर्ष की तपस्या में लीन ऋषभदेव, कैलाश पर्वत पर केवल ज्ञान प्राप्ति, राजा श्रेयांस द्वारा मुनि ऋषभवदेव को प्रथम आहार को दर्शाया गया है।

#मोक्ष_कल्याणक :

भगवान ऋषभदेव (Tirthankara Of Jainism ) का कैलाश पर्वत से निर्वाण का स्वर्ण कमल दृश्य, पुत्र भरत द्वारा 72 स्वर्णिम मंदिर को दर्शाया गया है।

जय ऋषभदेव 🙏
Source-Alok jain
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सोने का मंदिर, अजमेर

उत्तम विचार

मंगलवार, 2 दिसंबर 2025

बीत रही पुरानी बातें.

*बच्चों में बचपन*
जवानी में यौवन
शीशों में दर्पण
जीवन में सावन
गाँव में अखाड़ा
शहर में सिंघाड़ा
टेबल की जगह पहाड़ा
और पायजामे में नाड़ा
*ढूँढते रह जाओगे*

चूड़ी भरी कलाई
शादी में शहनाई
आँखों में पानी
दादी की कहानी
प्यार के दो पल
नल नल में जल
तराजू में बट्टा
और लड़कियों का दुपट्टा
*ढूँढते रह जाओगे*

गाता हुआ गाँव
बरगद की छाँव
किसान का हल
मेहनत का फल
चहकता हुआ पनघट
लम्बा लम्बा घूँघट
लज्जा से थरथराते होंठ
और पहलवान का लंगोट
*ढूँढते रह जाओगे*

आपस में प्यार
भरा पूरा परिवार
नेता ईमानदार
दो रुपये उधार
सड़क किनारे प्याऊ
संबोधन  में चाचा ताऊ
परोपकारी बंदे
और अरथी को कंधे
*ढूँढते रह जाओगे।*

🙏🙏🙏

राजीव गाँधी?

राजीव गांधी को भूल कर भी मत भूलिएगा भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े थे राजीव गांधी। आज कु...