सुनील जैन राना ब्लॉग स्पॉट
जियो और जीने दो एवं देशहित सर्व प्रथम।
गुरुवार, 29 सितंबर 2016
हाइकु
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खिलाते रहो
मरुस्थलों में फूल
निराशा छोड़
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पंछी है बन्द
पिंजरा है सोने का
जेल ही तो है
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सदवचन
सिर्फ पढ़ने नहीँ
गढ़ने भी हैं
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